क्या टाई के बगैर गंभीर पत्रकारिता नहीं हो सकती?

E-mail Print PDF

काश , शरद जोशी आज जिंदा होते! तो शरद जोशी को सचमुच बहुत सुख मिलता यह देख कर कि लापतागंज (सब टीवी पर आने वाला उनकी कहानिओं पर आधारित सीरिअल) उनकी महज़ एक व्यंग्यात्मक कल्पना नहीं थी बल्कि यह हकीकत है. और इसे हकीकत बनाया है "खबर हर कीमत पर"  का दम भरने वाले एक हिंदी खबरिया चैनल, IBN7 ने.  यह बात हमारे जैसे तमाम दर्शकों को पता ही नहीं चलती अगर आपने (यशवंत) हमें उकसाया नहीं होता IBN7 देखने के लिए, यह कह कर कि यह चैनल अन्ना हजारे के अनशन का बेहद व्यापक कवेरेज कर रहा है.

देखा तो `मंत्रमुग्ध' रह गए यह देख कर कि लापतागंज के सभी आम आदमियों की तरह इस हिंदी चैनल के सभी आम और ख़ास रिपोर्टर गले में टाई लटका कर gentlemen बन गए हैं.  इन टाई से लैस रिपोर्टरों को गांधीवादी अन्ना हजारे के अनशन स्थल से रिपोर्टिंग करते देख कर हमारी भी आत्मा तृप्त हो गयी कि चलो अब पत्रकार भी आम आदमी के दर्जे से ऊपर उठ गए.  यह बेहद सराहनीय काम तो बेचारे राजदीप सरदेसाई भी अपने अंग्रेजी चैनल CNN IBN में नहीं कर पाए जो  आशुतोष और संजीव पालीवाल की टीम ने कर दिखाया.  संजीव पालीवाल और उनकी `तमाशा ब्रिगेड' से तो खैर आप किसी समझदारी और संवेदनशीलता की उम्मीद नहीं कर सकते, पर आशुतोष तो खासे जनवादी पत्रकार हैं, उन्हें आखिर लापतागंज के नमूने पैदा करने की क्या ज़रूरत पड़ गयी? क्या टाई के बगैर गंभीर पत्रकारिता नहीं हो सकती? आम दर्शक इस तरह के अनाप शनाप हथकंडों से ऊब कर इन चैनलों से वैसे ही कटने लगे हैं. टाई पहना कर भोंडी और हास्यास्पद नाटकीयता पैदा करने के बजाये कंटेंट पर ध्यान देने की ज़रूरत है. पर दिक्कत यह है कि यह सब बड़े लोग अपने को खुदा समझने लगे हैं और कोई भी आलोचना और सुझाव उन्हें बेहद नागवार लगता है.

शरद जोशी जी, अब आप इन्हें ज्ञान देने के लिए कोई मुकुंदीलाल गुप्ता भेजें.

राज श्रीवास्तव
नई दिल्ली
This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it


AddThis
Comments (7)Add Comment
...
written by singh, April 18, 2011
लगता है राज श्रीवास्तव जी को टाई से कुछ ज्यादा चिढ़ है... चलिए कोई बात नहीं.. खुद शायद पहनने को तरस गए इसीलिए पत्रकारों को गलिया रहे हैं... इनकी हालत उस फ्रस्ट्रेटेड नौजवान से कम नहीं लगती जो किसी लड़के को उसकी गर्लफ्रेंड या नौजवान को उसकी पत्नी के साथ पब्लिक प्लेस पर घूमते देख जी भरकर कोसता है गलियाता है...वजह ये कि वो अकेलेपन की बीमारी का शिकार होता है.... राज जी डिप्रेशन का इलाज करवाइए... और तब तक घबराइए मत....ऐसी ही खबरें लिखते रहिए.. आप लापता नहीं होंगे... कम से कम बिना टाई के भी आपका नाम-पता जरुर होगा... खैर.. जरा ये बता दीजिएगा कि टाई पहनकर पत्रकारों ने कौन सा अपराध कर दिया.. आपको बता दूं कि भारत विविधताओं का देश है... यहां खादी भी पसंद की जाती है और खाकी भी... डर है कि आप कहीं किसी पुलिस कमिश्नर के लिए टाई न लगाने का फतवा न जारी कर दें। अब खरी..खरी... अगर हाथ में नौकरी नहीं है तो नौकरी ढूंढो.. इस तरह की बेतुकी बातें लिखकर अपना बचपना मत दिखाओ... सिर्फ एक सवाल का जवाब दे दो... तुम करो तो रासलीला और बाकी करें तो कैरेक्टर ढीला.. ऐसा क्यों... साथ में एक सलाह सत्या के लिए... संजीव पालीवाल अगर एक होटल के मालिक हैं भी तो वो पत्रकार नहीं हो इस बात की गारंटी तुम कैसे दे सकते हो... नारद जी भी ब्रह्मा जी के बेटे थे.. तब भी उन्होंने त्रेता युग से लेकर सतयुग तक पत्रकारिता की.. उनको क्या जरुरत थी ये करने की... सीधा जवाब उन्होंने राक्षसी शक्तियों को मिटाने के लिए मनुष्यों को उकसाया और इसमें कुछ गलत भी नहीं था... मैं नारद जी की तुलना पालीवाल साहब से नहीं कर रहा... लेकिन तुममें अगर इतना ही दम है तो सबूत के साथ सामने आओ... आसमान पर मत थूको... तुम्हारे लिखने के अंदाज से इतना तो तय है कि जितनी तुम्हारी उम्र नहीं उससे ज्यादा पालीवाल साहब को पत्रकारिता का अनुभव है... दूरदर्शन के जमाने से पत्रकारिता करते हुए उन्हें खुद भी देखा है मैंने.... जानकारी के लिए बता दूं कि मैं भी 6 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं और एक हद तक सफल भी हूं.. क्योंकि मैं ये नहीं देखता कि मेरे आसपास कौन सहयोगी क्या और कितना अच्छा कर रहा है.. मैं सिर्फ अपने काम में धार लाने की सोचता हूं... किसी से जलन या द्वेश नहीं रखता... हां मैं न्यूज चैनलों का समर्थक हूं क्योंकि ये सारे चैनल चाहे IBN7 हो या आज तक या फिर स्टान न्यूज.. ये सब कभी कभी ही सही लेकिन तेवर के साथ और सच के लिए लड़ने का माद्दा दिखाते रहते हैं.... और आप यशवंत जी... आप तो सुलझे हुए इंसान हैं.. ऐसी दकियानूसी बातें लिखनेवालों को तो आपको लताड़ लगानी चाहिए... क्योंकि ये आपकी साइट को अपनी भड़ास निकालने का जरिया बना रहे हैं... होशियार रहिए ऐसे शैतान बच्चों से...
...
written by A Ram, April 09, 2011
chutiayapa kar rahe hai
IBN ki badiya coverage
...
written by satya, April 08, 2011
Paliwal is shimla hotel owner, a power broker not a journalist. stain on name of journalist
...
written by pawan lalchand, April 08, 2011
shayad TV 18 ki taraf se IBN7 ke reportrs ko nayi punch line di gayi ho...

TIE HAR KIMAT PAR...khabar har kimat par...
...
written by rahul sankrityayan, April 08, 2011
it is best
...
written by rahul sankrityayan, April 08, 2011
smilies/smiley.gif it is the best feature of bhadas tie is not important for journalism

jia hind hm hindustani
...
written by nikhil, April 08, 2011
badhiya kataksh.

Write comment

busy