कई पत्रकारों की इच्छा- ये खबर भड़ास पर जरूर छापें

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आमतौर पर हम लोग जिलों की इंटरनल मीडिया पालिटिक्स से बचते हैं. वजह यह कि हर जिले में कुछ महा भ्रष्ट पत्रकार होते हैं, कुछ भ्रष्ट पत्रकार होते हैं, कुछ कम भ्रष्ट पत्रकार होते हैं, कुछ अवसरवादी पत्रकार होते हैं, कुछेक संतुलित भ्रष्ट व संतुलित ईमानदार पत्रकार होते हैं, कुछ एक बेहद ईमानदार होते हैं और कई सारे मौका देखकर बेईमान और ईमानदार बनते-बदलते रहते हैं. इसी कारण हर जिले में पत्रकारों में आपस में टांग-खिंचव्वल होती रहती है.

जिसने ज्यादा माल पीट लिया, उसके खिलाफ कम माल पीट पाने वाले इकट्ठे हो जाते हैं और ज्यादा माल पीटने वाले को बदनाम करने या उसे उसके मीडिया संस्थान से निकलवाने के लिए फर्जी मेलों के जरिए यहां वहां शिकायतें खबरें भेजा करते हैं. कई बार ये शिकायतें फर्जी व मनगढ़ंत भी होती हैं तो कई दफे नमक-मिर्च लगाकर छोटे सी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर भेजा जाता है. हां, कई एक बार खबरें बिलकुल सच भी होती हैं. आमतौर पर भड़ास के पास सूचना भेजने वाले इसकी अपेक्षा नहीं करते कि खबर छपी या नहीं छपी. क्योंकि सूचना भेजने वाले मीडिया के ही साथी होते हैं और वे जानते हैं कि छापना या न छापना संपादक का विवेकाधिकार होता है. और मैं तो अक्सर कहता हूं कि भइये, खुद का एक ब्लाग बना लो, फ्री में बनता है, और जमकर भड़ास निकालो, किसी के भी खिलाफ, सिर्फ भड़ास से ही ये उम्मीद क्यों रखते हो कि आपने जो कुछ भेज दिया वह हूबहू छप जाए. तो, जिलों की इनटरनल मीडिया पालिटिक्स से संबंधित आने वाले सूचनाओं को जांच पाना और सही गलत का पता कर पाना बड़ा मुश्किल होता है और सबसे बड़ी बात की इन खबरों का दायरा सिर्फ एक जिले तक सीमित होता है. अब बात मुद्दे की करते हैं.

बाराबंकी के करीब आधा दर्जन जर्नलिस्टों ने एक खबर भड़ास पर प्रकाशित कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है. हद तो ये कि इसमें से दो ने खुद मुझे फोन कर धमकाया कि अगर ये खबर न छापी तो अंजाम बुरा होगा. सोचिए आप. भड़ास पर क्या छपे और क्या न छपे, इसका निर्णय भी मुझे करने का हक नहीं रह गया है.  कुछ लोग चाहते हैं कि वे जो भी आंय बांय सांय लिखकर भेज दें उसे हूबहू उसी तरह छाप दिया जाए और भेजने वाले की पहचान को भी उजागर न किया जाए. जब इन लोगों से मैंने कहा कि वे अपने नाम पहचान व परिचय के साथ सामने आकर दूसरे पर आरोप लगाएं तो वे लोग मुकर गए. दो लोगों की धमकियों के बाद भी भड़ास पर खबर छपवाने के लिए मेल भेजने और फोन करने का सिलसिला कम नहीं हुआ. हां, ये जरूर हुआ कि अब फोन उसने किया जो खबर में पीड़ित पक्ष है. उससे मैंने उसकी तस्वीर और परिचय आदि भेजने को कहा तो उसने भेज भी दिया. फिर मैंने तय किया है कि अब इस खबर को छाप देता हूं, लेकिन उन सभी लोगों के नाम सामने लाकर, जिन जिन लोगों ने खबर मेल कर छापने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है और धमकाने जैसी आपराधिक कृत्य तक पहुंच गए थे.

इन महानुभावों के नाम हैं- डीके सिंह (आईबीएन7 के स्ट्रिंगर, बाराबंकी... इन्हीं महोदय ने सबसे पहले धमकाया कि खबर न छापने का अंजाम बुरा होगा... मजेदार यह कि ये सज्जन एक बार दिल्ली आकर मुझसे मिले भी हैं और तब आशीर्वाद बनाए रखने की अपील भी की थी.. लेकिन आशीर्वाद लेते लेते ये अचानक धमकाने लगे... वाह रे आदमी... इनके चूतियापे के एसएमएस मिलने का क्रम जब दूसरे दिन भी जारी रहा तो इन्हें फोन पर ही दौड़ाया और इनके एकाध बासेज से शिकायत की.. तब जाकर इनकी अकल ठिकाने आई), विशान सिंह (लाइव इंडिया के स्ट्रिंगर, बाराबंकी... इन महोदय ने फोन कर कहा कि अगर ये खबर नहीं छाप सकते तो भड़ास बंद कर दो... लेकिन जब बाद में इन्हें फोन पर ही मैंने दौड़ाया तो इन्होंने एक लंबा एसएमएस भेजकर माफी मांगी...), राजकुमार सिंह एक पत्रकार हैं बाराबंकी के, उन्होंने भी फोन किया और बताया कि उन्होंने खबर को अपनी मेल आईडी से भड़ास के पास भेज दी है, जरूर छाप दें. भूपेंद्र मिश्रा हैं राष्ट्रीय सहारा बाराबंकी के, इन्होंने भी फोन किया और बताया कि वे ही खबर में एक पीड़ित पात्र हैं. कहे जाने पर इन्होंने अपनी तस्वीर और मोबाइल नंबर भी भेज दिया. एक-दो अन्य पत्रकारों ने भी मेल व फोन किए खबर छापने के लिए पर उनका नाम मुझे याद नहीं रहा.

अब बात ये कि इस खबर को क्यों नहीं छाप रहा था और अब क्यों छापने जा रहा. खबर में किसी एक पत्रकार पर जमकर आरोप लगाया गया है. आरोप काफी गंभीर व संगीन हैं. जिसके खिलाफ खबर है उसका मोबाइल नंबर भी नहीं भेजा गया है ताकि उसका वर्जन लिया जा सके. और, खबर भेजने वाले अपनी पहचान गुप्त रखकर खबर छपवाना चाहते हैं... तीसरे जिले जिले में ऐसी राजनीति है और रोजाना दो चार खबरें भिन्न भिन्न जिलों से इसी तरह की आती हैं कि फलां बड़ा चोर है, तो फलां बड़ा भ्रष्ट है. ऐसे जनरलाइज किस्म के आरोपों को छापा नहीं जा सकता और तब तो बिलकुल नहीं जब आरोप लगाने वाले अपने नाम पहचान के साथ सामने न आना चाहते हों. इसी कारण इस खबर को छापने से बचता रहा. दूसरे, ऐसी खबरें छप भी सकती हैं बशर्ते मामला किसी दिग्गज किस्म के पत्रकार का हो. जिलास्तरीय मीडिया राजनीति के खेल में पड़ने से हम लोग बेचने की कोशिश करते हैं.

और अब इसलिए छाप रहा हूं क्योंकि इस खबर को न छापना भी एक खबर बन चुकी है. बाराबंकी के आईबीएन7 के स्ट्रिंगर डीके सिंह ने दो दिन लगातार एसएमएस भेजकर धमकाया, और यह भी आरोप लगाया कि जिनके खिलाफ खबर है, उनसे मैं मिल चुका हूं. लाइव इंडिया वाले स्ट्रिंगर ने कहा कि अगर ये खबर नहीं छाप सकते तो भड़ास बंद कर दो. इन दोनों के फोन व एसएमएस रात दस बजे के आसपास आए थे. संभव है कि उस वक्त ये लोग दारू पिए हों और उसी रौ में फोन व एसएमएस कर रहे हों. मुझे लगता है कि हर किसी से धधा कर मिल लेने और बतिया लेने की जो मेरी आदत है उसके कारण कई नीच मानसिकता के लोगों को लगता है कि यशवंत तो चिरकुट व चूतिया है, उसे जब चाहे व जहां चाहे दौड़ा लो. अब इन्हें मैं क्या बताऊं कि मुझे एलीट बनकर रहना कतई पसंद नहीं और सहज जीवन जीना कोई मजबूरी नहीं बल्कि स्वभाव का हिस्सा है.

जिस खबर को छपवाने के लिए इतने दबाव व धमकियां आई हों, तो उस खबर की पूरी कहानी बयान करके अब मूल खबर छाप ही देना चाहिए. लीजिए पढ़िए वो खबर, मैं चाहूंगा कि ईटीवी के जिस दीपक के खिलाफ ये पूरी खबर है, वे अपना पक्ष विस्तार से जरूर भेजें और उनसे एडवांस में माफी चाहता हूं उनका पक्ष लिए बिना खबर प्रकाशित करने के लिए. यह खबर इतनी बार भड़ास के पास भेजी गई कि बाद में मैं खबर वाली मेल को आर्काइव करने की जगह डिलीट करने लगा था. सो कई मेल आईडीज न मिल पाई हैं. जो दो मेल आईडीज उपलब्ध हैं, जिनके जरिए ये खबर भड़ास के पास भेजी गई, वो This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it और This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it है. खबर के एक पात्र भूपेंद्र मिश्रा की तस्वीर भी आई है जिस पर उनका नाम व मोबाइल नंबर अंकित है, उसे भी प्रकाशित कर रहा हूं. बाकी इस खबर व इस घटनाक्रम के बारे में फैसला सुधी पाठकगण करें. संभव है ये खबर सही हो पर क्या न्याय पाने के लिए धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन, एफआईआर आदि का सहारा लेने की जगह भड़ास का ही सहारा लेने की इतनी जिद क्यों? ये भी संभव है कि लोग भड़ास को प्रभु मान बैठे हों और मैं अब भी इसे चिरकुट पोर्टल मान रहा होऊं. कुछ तो है. कोई तो पेंच है. मैं भी आत्मविश्लेषण करूंगा. फिलहाल सारा कुछ बताकर लिखकर खुद को अब हलका पा रहा हूं.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया


एक असंपादित मेल...

(एक गरीब और कम पहुच वाले पत्रकार का दर्द ) आदरनीय यशवंत जी पूरी बात पढ़ जरूर लीगियेगा... इन दिनों कई पत्रकार पत्रकारिता की आड़ में करोड़ों के वारे - न्यारे  करने में लगे हैं. ताज़ा मामला बाराबंकी जिले के ईटीवी रिपोर्टर का है. बाराबंकी के पुलिस कप्तान की मदद से पत्रकारों की जमीन भी हड़पने की कोशिशें  जारी है. ऐसी रिपोर्ट है की  राष्ट्रीय सहारा के बाराबंकी  के  पत्रकार भूपेंद्र मिश्र और बाराबंकी के ईटीवी के पत्रकार दीपक मिश्र ने राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी बेशकीमती जमीन का रजिस्टर्ड अग्रीमेंट करवाया था. लेकिन समय के साथ दीपक मिश्र की नीयत ख़राब हो गयी यह कहने पर कि आरोप लगाने वाला व्यक्ति खुद सामने आऐ और अपना परिचय व तस्वीर भेजे तो ये तस्वीर संभवतः परसों भड़ास के पास आईऔर उसने पूरी जमीन अपने भाई के नाम से नियम कानून की धज्जिय उड़ाते हुए लिखवा ली. इस जमीन की कीमत कई करोड़ में बताई जाती है. और इस ज़मीन से विवाद भी जुड़े हुए है. ईटीवी के पत्रकार ने जमीन की चारदीवारी कराई तो सम्बंधित पक्ष मौके पर  पहुंचा लेकिन  बाराबंकी के पुलिस कप्तान ने जेल में बंद कर हाथ पैर तोड़ने की धमकी दी और भगा दिया. रही बात भूपेंद्र मिश्र की तो दो लाख से अधिक खर्च कर एग्रीमेंट कर जमीन पाने का सपना टूटने से बेहद आहत हैं. पुलिस कप्तान की दलाली करने वाले ईटीवी के पत्रकार दीपक से वे भयभीत हैं. उन्हें भी खामोश रहने की धमकी दी जा रही है. इस बात का लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी और ईटीवी के अधिकारयो को  प्रार्थना पत्र भेजा है. लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. हद तो ये है की दीपक मिश्र पर इस से पहले भी धोखाधड़ी और हेराफेरी के मुक़दमे लंबित हैं. कुछ समय पूर्व ही जिलाधिकारी के बंगले से सटी ए एम किदवई  के  करोड़ों की जमीन पर कब्ज़ा करने का प्रयास इसी दीपक मिश्र ने किया था .ए एम किदवई पहुँच  वाले व्यक्ति हैं नहीं तो उनकी जमीन भी इस शख्स के  हत्थे चढ़ गयी होती .  इसी मामले में ई टी वी के इस बदनाम पत्रकार ने किसी सत्यप्रेमी नगर के अमरेश शुक्ल के पते से नोटिस जारी  जिस के बाद अमरेश शुक्ल ने जिलाधिकारी से शिकायत भी की थी . ए एम किदवई ने भी चार सौ बीस का मामला दर्ज करने हेतू प्रार्थना पत्र दिया है| जिलाधिकारी ने इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं| आदरणीय यशवंत मैं भूपेंद्र मिश्र सहारा में नगर सम्वाद सूत्र हूँ सुबह चार बजे से अखबार बाँटने के अतिरिक्त रात गयेः बजे तक पत्रकारिता करता हूँ तम कहीं जा कर अपने परिवार का भरण पोषण कर पा रहा हूँ महोदय एक एक पैसा जोड़ कर मैंने दीपक मिश्र ईटीवी रिपोर्टर बाराबंकी के साथ जमीन का अग्रीमेंट कर लिया और सोचा की इस जमीन से बाल बच्चो  के लिए कुछ ईंतजाम कर लूँगा | लेकिन उसे भी  दीपक मिश्र ने धोका देकर हड़प लिया है | भाई आप से अनुरोध है की इस आदमी की बातो में न आये | बाराबंकी में इसे लोग मंदी का चार्ल्स शोभराज भी कहते हैं क्योकी इसकी सम्मोहक बातो में आकर कई लोग अपने पैसे रुपये और जमी जायदाद खो चुके हैं| यशवंत जी मै भी इसी आदमी का शिकार हूँ कृपया मेरी मदद करे... मेरी समस्या को जरूर प्रकाशित करें मै जानता हूँ आप के यहाँ प्रकाशन का असर जरूर होगा आप का भूपेंद्र मिश्रा मोबा नंबर :09415774324

एक अन्य असंपादित मेल

इन दिनों कई पत्रकार पत्रकारिता की आड़ में करोड़ों के वारे - न्यारे करने में लगे हैं .ताज़ा मामला बाराबंकी जिले के ईटीवी रिपोर्टर का है . बाराबंकी के पुलिस कप्तान की मदद से पत्रकारों की जमीन भी हड़पने की कोशिशें  जारी है. ऐसी रिपोर्ट है की  राष्ट्रीय सहारा के बाराबंकी  के पत्रकार भूपेंद्र मिश्र और बाराबंकी के ईटीवी  के पत्रकार दीपक मिश्र ने राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी बेशकीमती जमीन का रजिस्टर्ड अग्रीमेंट  करवाया था . लेकिन समय के साथ दीपक मिश्र की नीयत ख़राब हो गयी और उसने पूरी जमीन अपने भाई के नाम से नियम कानून की धज्जिय उड़ाते हुए लिखवा ली  .इस जमीन की कीमत  कई करोड़ में बताई जाती है . और इस ज़मीन  से विवाद भी जुड़े हुए है. ईटीवी के पत्रकार ने जमीन की   चारदीवारी कराई तो सम्बंधित पक्ष मौके पर  पहुंचा भूपेंद्र मिश्र की तो दो लाख से अधिक खर्च कर एग्रीमेंट कर जमीन पाने का सपना टूटने से बेहद आहत  हैं . पुलिस  कप्तान की दलाली करने वाले ईटीवी के पत्रकार दीपक से वे  भयभीत  हैं . . उन्हें भी खामोश रहने की धमकी दी जा  रही है . इस बात का लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी और ईटीवी के अधिकारयो को  प्रार्थना पत्र भेजा है . लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं  हुई है . हद तो ये है की दीपक मिश्र पर इस से पहले भी धोखाधड़ी  और  हेराफेरी के मुक़दमे  लंबित हैं .कुछ समय पूर्व ही जिलाधिकारी के बंगले से सटी ए एम किदवई  के  करोड़ों की जमीन पर कब्ज़ा करने का प्रयास इसी दीपक मिश्र ने किया था .ए एम किदवई पहुँच  वाले व्यक्ति  हैं  नहीं तो उनकी जमीन भी इस शख्स के  हत्थे चढ़ गयी होती .  इसी मामले में ई टी वी के इस बदनाम पत्रकार ने किसी सत्यप्रेमी नगर के अमरेश शुक्ल के पते से नोटिस   जारी  जिस के बाद अमरेश शुक्ल ने जिलाधिकारी  से शिकायत भी की थी . ए एम किदवई ने भी चार सौ बीस का मामला दर्ज करने हेतू प्रार्थना पत्र दिया है .

एक और असंपादित मेल

बाराबंकी ई टी वी का रिपोर्टर बना भूमाफिया

बाराबंकी के पुलिस कप्तान की मदद से पत्रकारों की जमीन भी हड़पने की कोशिश जारी है | भले ही अन्य जिलो के ई टी वी रिपोर्टर फत्र्हाल हो बाराबंकी का रिपोटर नैतिकता की सभी सीमाए  पार कर पैसा कमाने और कमवाने की फ़िराक में है | कर  दरअसल मामला ये है की राष्ट्रीय सहारा के बाराबंकी एक पत्रकार भूपेंद्र मिश्र और बाराबंकी के ईटी वे के पत्रकार दीपक मिश्र ने राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी बेशकीमती जमीन का रजिस्टर्ड अग्रीमेंट किया था | लेकिन समय के साथ दीपक मिश्र की नीयत ख़राब हो गयी और उसने पूरी जमीन अपने भाई के नाम से नियम कानून की धज्जिय उड़ाते हुए लिखवा ली  | इस जमीन की मलियत कई करोड़ में बताई जाती है | और इस जमी से विवाद भी जुड़े हुए है |  ई टी वी के पत्रकार ने जमीन की बौन्दरी कराइ तो सम्बंधित पक्ष मौके पर पहुचे जीने बाराबंकी के पुलिस कप्तान ने जेल में बंद कर हाथ पैर तोड़ने की धमकी दी और भगा दिया | रही बात भूपेंद्र मिश्र की तो दो लाख से अधिक खर्च कर एग्रीमेंट कर जमीन पाने का सपना टूटने से बेहद आहात  हैं | पलिस कप्तान की दलाली करने वालेई टी वी के पत्रकार दीपक से वे भैभीत हैं | उन्हें भी खामोश रहने की धमकी दी हा रही है | इस बात का लिए उन्होंने मिख्यमंत्री से लेकर डी जी  पी और ई टी वी के अधिकारयो को  प्रार्थना पत्र भेजा है | लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहि हुई है | हद तो ये है की दीपक मिश्र पर इस से पहले भी  धोकाधडी  और  हेराफेरी के मुक़दमे  लंबित हैं | कुछ समय पूर्व ही जिलाधिकारी के बंगले से सटी ए एम किदवई  के  करोडो की जमीन पर कब्ज़ा करने का प्रयास इसी दीपक मिश्र ने किया था | ए तो ए एम किदवई पहुच वाले व्यक्ति थे नहीं तो उनकी जमीन भी इस सख्श के हत्थे चढ़ गयी होती | इसी मामले में ई टी वी के इस बदनाम पत्रकार ने किसी सत्यप्रेमी नगर के अमरेश शुक्ल के पते से नोटिस   जारी  जिस के बाद अमरेश शुक्ल ने जिलाधिकारी  से शिकायत भी की थी  | ए एम किदवई ने भी चार सौ बीस का मामला दर्ज करने हेतू प्रार्थना पत्र दिया है | RAJ KUMAR SINGH

मेल के साथ अटैच्ड एक अखबार में प्रकाशित खबर की तस्वीर

मेल के साथ निष्पक्ष प्रतिदिन अखबार में प्रकाशित खबर की कटिंग भी प्रेषित किया गया था


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