ईटीवी के दीपक मिश्र ने आरोपों का दिया जवाब, दूसरे स्ट्रिंगरों की खोली पोल

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यशवंत जी, महोदय, सबसे पहले आपको इस बात के लिए साधुवाद कि आपने इस बात पर काफी जोर दिया कि जिले की इन्टरनल मीडिया पोलिटिक्स पत्रकारिता और समाज का कितना नुकसान कर रही है और किस तरह बेशर्मी के साथ सच को झूठ और झूठ को सच बनाने का खेल चल रहा है. भड़ास पर जो कुछ देखा, उससे दुखी या विचिलित होने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि झूठ की उम्र बहुत कम होती है और सत्य अंततः स्थापित रहता है.

आपको और भड़ास के सुधी पाठकों और दर्शकों को ससम्मान अवगत कराना है कि मैं विगत लगभग 12 वर्षों से पत्रकारिता की सेवा कर रहा हूं. इस दौरान मैंने जहां काम किया वहां चैनल की प्रतिष्ठा और लोकप्रियता में वृद्धि हुई. बाराबंकी में भी 99% खबरों में  ईटीवी सबसे आगे रहता है. इसी वजह से यहाँ के कुछ अन्य टीवी पत्रकार मुझसे द्वेष रखने लगे. भूपेंद्र मिश्र नामक राष्ट्रीय सहारा अखबार के पत्रकार जो खुद को पीड़ित, गरीब, कम पहुंच वाला निरीह प्राणी दर्शाता है, उसका आलीशान बंगला बाराबंकी में केंद्रीय विद्यालय के पास बना है. ईश्वर ने इसकी शक्ल ही ऐसे बनाई है कि दूखियारा लगता है लेकिन है बहुत महीन. यह साहब अपनी घटिया हरकतों के बल पर जबरियन मनोहरलाल नामक बुजुर्ग की ज़मीन हथियाना चाहते हैं.

यहाँ ये भी गौरतलब है कि जिस ज़मीन एग्रीमेंट में अन्य लोगों ने बीस-बीस हजार खर्च किये उसी एग्रीमेंट में भूपेंद्र जी ने 2 लाख रुपये खर्च कर दिए जबकि वो और उनके साथी उन्हें गरीब, पीड़ित, निरीह बताते हैं. इनके सफेद झूठ को कोई भी इन्हीं की कही बातों से पकड़ सकता है. जो लोग खुद को पत्रकार समझते हैं, उन्हें इस मामले की हकीकत समझने में देर नहीं लगेगी. जिस 3200 sq/ft ज़मीन को लेकर फर्जी बातें की जा रही हैं उसे मेरी माता जी ने छोटे भाई राघवेन्द्र मिश्र जो कि बालिग है, उसी के नाम 31.12.2010  को ओबरी गाँव में मनोहर लाल नामक व्यक्ति से नियमानुसार खरीदी थी. इसका दाखिल ख़ारिज विधि पूर्वक राघवेन्द्र के नाम हो चुका है. पूरे  मामले को गलत ढंग से झूठ के सहारे मेरे खिलाफ बनाया जा रहा है.

भूपेंद्र मिश्र नामक राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार के नाम से मनोहरलाल के साथ जिस एग्रीमेंट और ज़मीन का हवाला दिया जा रहा है उससे इस ज़मीन का और मेरा कोई लेना देना नहीं है. वह एग्रीमेंट उसी गाँव की गाटा संख्या 629 से जुड़े दूसरे भूखंड का है जिसकी चौहद्दी और रकबा भी राघवेन्द्र द्वारा खरीदी गयी ज़मीन से अलग है. यह तथ्य ज़मीन के मालिक, विक्रेता  मनोहरलाल एफिडडेविट के माध्यम से स्पष्ट कर चुके हैं.

भूपेंद्र के द्वारा कराये गए एग्रीमेंट में, मैं नहीं बल्कि मेरे भाई राघवेन्द्र समेत पांच लोग थे. सभी ने बीस-बीस हजार रुपये (कुल एक लाख रुपये) दिए थे. लेकिन एग्रीमेंट की ज़मीन में विवाद होने के कारण सभी लोगों ने उसका परित्याग कर दिया और मेरे भाई राघवेन्द्र ने खुद को उस एग्रीमेंट से अलग कर लिया. 12.2.2011 को उस एग्रीमेंट की अवधि भी कानूनी रूप से समाप्त हो चुकी है. गौरतलब है कि जो जमीन राघवेन्द्र ने खरीदी है वह पूरी तरह भूपेन्द्र द्वारा कथित एग्रीमेंट से अलग है.

इस ज़मीन का गाटा संख्या 629 एक है, जो कि एक बड़ा भूखंड है जबकि रकबा और चौहद्दी भूपेंद्र के कथित एग्रीमेंट से अलग है. एग्रीमेंट के पक्षकार भूपेन्द्र और मनोहरलाल हैं क्योंकि भूमि के मालिक मनोहरलाल हैं. अब भूपेन्द्र और उनके कई साथी जबरन दबंगई के बल पर मनोहर से उसकी जमीन हथियाना चाहते हैं. इस बात की शिकायत मनोहरलाल शासन प्रशासन और राष्ट्रीय सहारा के संपादक से कर चुका है. इस मामले में भड़ास पोर्टल पर मेरे विरूद्ध अपमानजनक लेख लिखने वाले सभी लोग भूपेन्द्र व उनके सहयोगी हैं. मेरे छोटे भाई की विधिक संपत्ति को गलत तथ्यों से जोड़ कर मुझे घेरने का असफल प्रयास किया जा रहा है.

डीके सिंह मेरे पुराने मित्र हैं. वे पूर्व में  ईटीवी से बाराबंकी संवादाता रहे. यहां से हटा कर आगरा भेजे गए और उसके बाद निष्कासित किये गए. लम्बे समय तक उनसे सम्बन्ध बहुत प्रगाढ़ रहे लेकिन धीरे-धीरे डीके सिंह घटिया राजनीति करने वालों का शिकार हो गया. जब मैं इलहाबाद से आया तो डीके ने शुरू में मेरा काफी सहयोग किया. मैंने भी उनके लिए क्या-क्या किया, उनकी आत्मा जानती है. तीन साल वो किसी संस्थान में नहीं रहे लेकिन बतौर पत्रकार की हैसियत से मैं उन्हें पूरा सम्मान देता और हमेशा अपने साथ रखता था.

आई.बी.एन.7 के श्री मनोज राजन त्रिपाठी का मैं आजीवन आभारी रहूँगा कि उन्होंने मेरे कहने पर डी.के. की योग्यता को समझा और अपना स्ट्रिंगर बनाया. डीके धीरे-धीरे जैसे-जैसे मजबूत होते गए, मुझसे दूर होते गए. विशन इसलिए मुझसे नाराज है क्योंकि उसे लगता है कि मेरी वजह से वो सहारा का स्ट्रिंगर नहीं बन पाया. जबकि वो लाइव इंडिया और times now दोनों में काम कर रहा है. यहां कुछ लोग चाहते हैं कि मैं इनके अनुसार काम करूं और कोई भी खबर चलने से पहले इन सभी से शेयर करूं. ऐसा न करने के कारण ये मुझसे कुपित हैं. इसी कारण मेरे खिलाफ प्रोपेगंडा कर रहे हैं.

ये सभी चाहते है कि मैं इन हरकतों से विचलित हो कर इनके अधीन हो जाऊं. इस पूरे मामले से मेरा यानि दीपक मिश्र का कोई लेना देना नहीं है और मेरे छोटे भाई का जमीन से सम्बंधित कोई भी विवाद नहीं है. जिस जमीन का भूपेन्द्र मिश्र एग्रीमेंट के हवाले से जिक्र कर रहे है, वो मनोहरलाल की एक अलग भूमि है और एग्रीमेंट भी एक्सपायर हो चुका है. इसके बाद भी यदि कोई विवाद बनाना चाहता है तो वो मनोहरलाल से होगा क्योंकि एग्रीमेंट के लिए कानूनी रूप से मनोहरलाल और भूपेन्द्र आपस में उत्तरदाई हैं.

मेरे मेल के साथ वो पत्र भी है जिसे मनोहरलाल जो कि पूरी भूमि के स्वामी हैं और जिससे भूपेन्द्र ने एग्रीमेंट कराया था, जो उसने सहारा के संपादक और शासन प्रशासन के अफसरों को भेजा है. साथ ही उसका प्रमाणित शपथ पत्र भी है, उसे भी पाठको को दिखायें. इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि भूपेन्द्र  अपने साथियों के संग मिलकर मनोहरलाल पर दबाव बना कर गलत ढंग से उसकी जमीन हथियाना चाहता है. जो जमीन मेरे छोटे भाई ने खरीदी है उसका भूपेन्द्र के एग्रीमेंट से कोई वास्ता नहीं है.

महोदय, आशा है सभी तथ्य आपके समक्ष स्पष्ट हैं और आप भी भलीभांति जानते हैं कि मेरे आत्मबल और स्वाभिमान को तोड़ने के लिए इस प्रकार की घटिया राजनीति और हरकतें पहले भी कई बार हो चुकी हैं. मैं पूरी निष्ठा से ईटीवी में अपनी सेवाएं दे रहा हूँ जिसके परिणामस्वरूप यहां ईटीवी की लोकप्रियता चरम पर है. मैं सभी आलोचक भाइयों को यही कहूँगा कि भारत की कोई भी जांच या पुलिस एजेंसी या अदालत इस पूरे मामले की जाँच कर ले, मैं किसी भी जांच का स्वागत करूँगा.

और जो लोग गंदे और झूठे शब्दों का जाल बुनकर मेरी छवि ख़राब करना चाहते हैं, वो अपने मानव शरीर और जीवन का सदुपयोग करें. अगर भूपेन्द्र और उनके साथी सही हैं तो उनकी जीत तय है लेकिन वो पूरे झूठे हैं. इसलिए उन्हें हिम्मत जुटा कर के सच्चाई को स्वीकार कर लेना चाहिए.

यशवंत जी आपकी सलाह पर मैं ये तथ्य सामने रख रहा हूँ. इस मामले से सम्बंधित शायद यह मेरा पहला और अंतिम मेल है क्योंकि मेरा मानना है कि ज्यादा शोर मचाने से दिन को रात और रात को दिन नहीं बनाया जा सकता. झूठ को सच और सच को झूठ नहीं बनाया जा सकता. इसलिए मैं शोर मचाने में विश्वास नहीं रखता क्योंकि सच्चाई के साथ हूँ. अंत में मुझे दुश्मन या दोस्त मानने वाले सभी भाइयों को और उनको भी जो भटक गए हैं हार्दिक शुभकामनायें. सही मार्ग पर आयें, और अपने जीवन को समाज और राष्ट्र के कल्याण पर लगायें.

पत्रकारों के सामने बहुत से मुश्किल लक्ष्य हैं लेकिन ये दुखद है कि उनका ज्यादातर समय और ताकत अन्य पत्रकारों के विरोध में खर्च हो जाता है. ये भी ध्यान रखें कि किसी भी मामले में वही आपका सच्चा शुभ चिन्तक है जो बातचीत के जरिये मतभेद और समस्याओं को सुलझाने की सलाह देता हो, जबकि जो व्यक्ति आपको लड़ने और नफरत में जलने की सलाह दे रहा है, वह खुद भी कुंठित और मूर्ख है, साथ ही आपको भी मोहरा बनाकर बर्बाद करना चाहता है ताकि आप मस्त हो के ना घूम सकें बल्कि तनाव में रहें और उसे तेल लगाते रहें. साथ ही उसकी घटिया मानसिकता का राज आप के दिमाग पर भी हो जाये.

इस मेल के साथ मेरे भाई राघवेन्द्र के जमीन की प्रमाणित खतौनी, मनोहरलाल का एफीडेविट और भूपेन्द्र के विरूद्ध मनोहरलाल का शिकायती पत्र संलग्न है.

भूपेंद्र के खिलाफ मनोहरलाल का एफिडेविट

भूपेंद्र के खिलाफ मनोहरलाल का शिकायती पत्र

राघवेंद्र के जमीन की प्रामाणिक खतौनी देखने के लिए इन दो लिंक्स पर क्लिक करें-

खतौनी पार्ट एक

खतौनी पार्ट दो

उम्मीद है मेरे बयान, प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से सभी शंकाओं का समाधान हो गया होगा. अगर फिर भी किसी को कोई शंका है तो वो मुझसे मेरी मेल पर पूछ सकता है, जान सकता है या फिर उसका बाराबंकी में स्वागत है ताकि वे समस्त चीजों को अपनी आंखों से जान देख सकता है.

धन्यवाद

आपका
दीपक मिश्र

संवाददाता, ईटीवी
बाराबंकी

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