जनलोकपाल बिल से भी भ्रष्‍टाचार खतम नहीं होगा : हेगड़े

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: सरकार पर मुझे भरोसा नहीं : अन्‍ना ने आंदोलन में की थी जल्‍दबाजी : सरकार जनलोकपाल बिल पास करवाएगी इसका मुझे भरोसा नहीं है। यह कहना है कर्नाटक के लोकायुक्त और जनलोकपाल पर बनी ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य संतोष हेगड़े का। सीएनईबी के साप्ताहिक कार्यक्रम 'क्लोज एनकाउंटर' में चैनल के सलाहकार संपादक किशोर मालवीय के साथ खास बातचीत में उन्‍होंने खुलासा किया कि 60 साल में जिस भ्रष्टाचार को हम बढ़ाते आए हैं वह 60 दिन में खत्म नहीं हो जाएगा,  लेकिन जनलोकपाल को ताकतवर बनाएंगे तो भ्रष्टाचार कम हो जाएगा लेकिन भ्रष्टाचार को संपूर्ण खत्म नहीं कर सकते।

आप पीएम को भी लोकपाल के दायरे में लाना चाहते हैं लेकिन कर्नाटक में लोकायुक्त हैं फिर भी सीएम का कुछ नहीं हुआ, इस पर हेगड़े ने कहा कि कोर्ट ने स्टे दिया है तो क्या यही हाल जनलोकपाल का नहीं होगा? हेगड़ का जवाब है 'हां हो सकता है।' जनलोकपाल के दायरे में न्यायपालिका नहीं होगी लेकिन क्या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार नहीं? इसपर हेगड़े ने कहा कि हां है लेकिन जजों के लिए अलग कोड ऑफ कंडक्ट है। हेगड़े ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कहा था कि अन्ना ने आंदोलन करने में जल्दबाजी कर दी।

ड्राफ्ट कमेटी पर विवाद के मुद्दे पर भी हेगड़े ने बेबाकी से अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि मांग तो यह भी हो रही है कि कमेटी में महिला, पिछड़ा वर्ग और अन्य क्षेत्र के लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए लेकिन व्यावहारिक तौर पर यह संभव नहीं है। उन्होंने कमेटी में एक ही परिवार के दो लोगों को शामिल करने के मुद्दे पर बचाव किया। हेगड़े ने इस बात पर एनकाउंटर सहमति जताई कि सरकार नहीं मानती है तो अन्ना दोबारा अनशन करेंगे और शायद वही एक रास्ता है।

हेगड़े ने एक सुझाव भी दिया और कहा कि सांसद अपने क्षेत्र में जनता से जनलोकपाल के मुद्दे पर चर्चा करें और तब सदन में इसपर बहस हो। उन्होंने एक बेहद अहम बात की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि 23 दिसंबर 2008 को लोकसभा में 12 मिनट में 17 बिल बगैर किसी चर्चा के पास कर दिया गया, जो कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। लेकिन यह भी दुर्भाग्य की बात है कि 42 साल से लोकपाल बिल पास नहीं हो सका। हेगड़े ने जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान लगाते हुए उनपर यह आरोप भी लगया कि वे हमारे पूराने कानून को भी कमजोर करते हैं।

कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के इस आरोप पर कि आप बात ज्यादा करते हैं काम करते हैं, हेगड़े ने कहा कि मुझे केन्द्रीय मंत्री का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए बल्कि कर्नाटक की जनता का सर्टिफिकेट चाहिए। 'क्लोज एनकाउंटर' के इस एपिसोड का प्रसारण रविवार 17 अप्रैल को शाम 7 बजे होगा और इसका दोबारा प्रसारण मंगलवार रात 9:30 बजे होगा। प्रेस रिलीज


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Comments (3)Add Comment
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written by SATISH K.SINGH, December 13, 2013
भष्टाचार क्या हैं ?

भष्टाचार क्या हैं ? : अपने अधिकारों या शक्तियों का दुरूपयोग करना ही भष्टाचार हैं / इसे मात्र किसी एक व्यक्ति के योजना बनाने से या सरकार द्वारा कोई नियम से ही न हो पाएगा क्योकि भष्टाचार व्यक्ति के मन में इसलिए भष्टाचार मिटाना हो तो पहले अपने मन से इसे मिटाना होगा / यदि आप अपने मन से इसे मिटा सके तो भष्टाचार को समाप्त करने की पहली सीढ़ी पार कर सकेगें /
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written by jay hind, April 18, 2011
पांच में से अगर दो खराब है तो चलाउ है जिस तरह पांच दिन में पचास लाख खतम हो गया उसी तरह और भी खतम होे जायेगे
गाँधी अगर होते विसलरी हमको न पीने देते और कहते कि स्वदेशी अपनाओ मगर अण्णा ने सारे आमरण अनशनकारीयो को विसलरी पीने का मौका दिया और तो और जिस दिन अनशन समाप्त हुआ उस दिन निबूज पिलाया गया और इस तरह से स्वदेशी अनशन विदेशी बोतल पी कर समाप्त हो गया 492 आमरण अनशनकारी आखिर कितना पानी पी गये ये समझ से परे है, टेन्ट लाइट बाजा का खर्चा पाँच दिन का पाँच लाख तेा रहा होगा, पाँच लाख पानी का लगा लो , प्रदर्शन के सामान भी पाँच लाख के मान लो ,अन्य खर्चा भी पाँच लाख मान लो फिर भी पचास लाख पच नही रहा सारे लोग ईमानदार है इन पर शक करू तो कैसे आखिर लोकपाल इनके पास अगर ज्यादा बोला तो मेरी भी जय हो जायेगी अण्णा जीत गये मगर मेरा गाँधी हार गया, गाँधी ने जो वकीलो के बारे में लिखा है उसे आप हिन्द स्वराज में जरूर पढे़ आप सभी का भला होगा देश का भला जो होना था वो हो गया और आगे भी होता रहेगे आप लोगो को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है
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written by मदन कुमार तिवारी , April 17, 2011
जब मैने अपने लेख मे लिखा था कि लोकपाल बिल से भ्रष्टाचार खत्म नही होगा तो मुझे गालियां मिली थी इसी भडास के कुछेक पाठकड द्वारा । एक -दो ने तो पुरे लेख को हीं वाहियात घोषित कर दिया था । न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे में लाने के मैं खिलाफ़ था । अब हेगडे साहब उसी बात को दुहरा रहे हैं क्यों नही इन्हे गालिया देते हो ? पहले पढना और समझना सिखो तब टिपण्णी किया करो । a

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