डीटीएच सेवा महंगी होने के आसार

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देश में डीटीएच सेवा का लुत्फ उठाने वालों को अब ज्यादा मासिक चार्ज देने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को ब्रॉडकास्ट ट्रिब्यूनल 'टीडीसैट' के आदेश पर रोक लगाए जाने से ही इस संभावना को बल मिल रहा है। दरअसल, टीडीसैट ने कुछ माह पहले अहम आदेश जारी कर दूरसंचार नियामक ट्राई की एक अधिसूचना को दरकिनार कर दिया था। इस अधिसूचना में कहा गया था कि किसी टीवी चैनल को दिखाने के लिए संबंधित ब्रॉडकास्टर को जितना रेट केबल ऑपरेटर देते हैं उसका अधिकतम 35 फीसदी ही डीटीएच, आईपीटीवी एवं अन्य ऑपरेटरों को देना होगा।

हालांकि, टीडीसैट के आदेश के बाद यह अधिसूचना अटक गई थी। जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है, उसने सोमवार को टीडीसैट के इस आदेश पर रोक लगाने के साथ-साथ डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा ब्रॉडकास्टरों को अदा किए जाने वाले चार्ज को बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया है। ऐसे में डीटीएच ऑपरेटर अपने ग्राहकों पर इसका बोझ डाल सकते हैं। न्यायाधीश आर वी रवींद्रन और न्यायाधीश ए के पटनायक की खंडपीठ ने सोमवार को दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल (टीडीसैट) के उपर्युक्त आदेश पर रोक लगाई। मालूम हो कि ट्राई ने 21 जुलाई 2010 को उपर्युक्त अधिसूचना जारी की थी, जबकि टीडीसैट ने 16 दिसंबर 2010 को इस अधिसूचना पर रोक लगाने का आदेश दिया था। खंडपीठ ने डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा ब्रॉडकास्टरों को अदा किए जाने वाले चार्ज को बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया है।

इसका मतलब यही है कि किसी टीवी चैनल को दिखाने के लिए संबंधित ब्रॉडकास्टर को जितना रेट केबल ऑपरेटर देते हैं उसका 42 फीसदी अब डीटीएच, आईपीटीवी एवं अन्य ऑपरेटरों को देना होगा। खंडपीठ ने ट्राई की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। ट्राई ने अपनी याचिका में टीडीसैट के आदेश को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने अपने निर्णय में यह भी कहा है कि डीटीएच ऑपरेटरों और ब्रॉडकास्टरों के बीच जो समझौते पहले हो चुके हैं, वे भी मान्य होंगे। मालूम हो कि ब्रॉडकास्टर इससे पहले डीटीएच ऑपरेटरों से अपने चैनल को दिखाने के लिए जो चार्ज लेते थे वह केबल ऑपरेटरों द्वारा दिए जाने वाले शुल्क का 50 फीसदी हुआ करता था। इसका मतलब यही हुआ कि डीटीएच ऑपरेटरों को अब पहले के मुकाबले तो कम चार्ज ब्रॉडकास्टरों को देना पड़ेगा, लेकिन ट्राई द्वारा तय 35 फीसदी चार्ज से यह कहीं ज्यादा है। साभार : दैनिक भास्कर


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