जी और आईबीएन को पीछे कर लाइव इंडिया ने चौंकाया

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हम टीआरपी पर चाहे जितना हो-हल्ला कर लें लेकिन न्यूज चैनलों की अंदरुनी दुनिया में टीआरपी का बहुत महत्व है. इस ससुरी टीआरपी के लिए ही मालिक से लेकर संपादक और ट्रेनी तक चिंतित रहते हैं. लेकिन सुधीर चौधरी चिंतिंत नहीं हैं. क्योंकि उनके चैनल ने पिछले कुछ महीनों में गजब का परफार्म किया है, टीआरपी के हिसाब से. इसी कारण सुधीर के चेहरे पर मुस्कान है. लाइव इंडिया न्यूज चैनल ने टीआरपी चार्ट में जी न्यूज और आईबीएन7 को भी पछाड़ दिया है (सप्ताह 16वां, टीजी 15+, वर्ष 2011).

और, मुस्कान रजत शर्मा और विनोद कापड़ी के चेहरे पर भी है क्योंकि इंडिया टीवी ने आजतक की धुलाई का क्रम व काम जारी रखे हुआ है. वैसे, इंडिया टीवी बहुत पहले से आजतक के इर्दगिर्द मंडरा रहा था, और कई बार आजतक को गलाघोंटकर नंबर वन की कुर्सी पर आसीन हो जाता था, सो, इस बार भी अगर इंडिया टीवी नंबर वन है तो उतनी बड़ी खबर नहीं है जितनी बड़ी खबर लाइव इंडिया न्यूज चैनल का चुपचाप पिछले कुछ महीनों से लगातार उपर चढ़ते जाना है और चौथे नंबर पर पहुंच जाना है. इस न्यूज चैनल ने टीआरपी ग्राफ पर एनडीटीवी, न्यूज24, आईबीएन7, जी न्यूज आदि को पीछे खदेड़कर चौथे नंबर पर कब्जा कर लिया है.

ऐसा घटिता होना न सिर्फ चौंकाता है बल्कि बताता भी है कि टीवी न्यूज की दुनिया में टीआरपी के मर्म को समझ पाना सबके वश की बात नहीं है. भाषण देना आसान है, चिंता जाहिर करना और भी ज्यादा आसान है, लेकिन कर के दिखा देना बहुत मुश्किल. और, सुधीर चौधरी ने कर के दिखाया है. इसी कारण लाइव इंडिया की इन दिनों बल्ले-बल्ले है. इस चैनल में काम कर रहे लोग भी परम प्रसन्न हैं कि वे अब एक ऐसे चैनल के हिस्से हैं जो बाजार और टीआरपी के हिसाब से लगातार ग्रोथ कर दिग्गज चैनलों में शुमार हो रहा है. हालांकि टीजी 25+ में लाइव इंडिया अब भी आईबीएन और जी न्यूज से पीछे हैं लेकिन 15 साल से उपर व 25 साल से नीचे के सेगमेंट में अगर लाइव इंडिया नंबर चार पर है तो वह दिन भी दूर नहीं जब यह चैनल 25 साल के उपर वाले सेगमेंट में भी बाजी मार ले जाए.

उधर, किस्मत अगर किसी की नहीं सुधर रही है तो वह है सहारा समय न्यूज चैनल. उपेंद्र राय के आने के बाद भी समय न्यूज चैनल का उद्धार नहीं हो सका है. सब कुछ बदल डालने के बड़े बड़े दावे धूल चाट रहे हैं. हालांकि शुरुआती दिनों में समय न्यूज चैनल को टीआरपी में ग्रोथ अच्छी खासी मिली थी लेकिन यह बढ़त सामयिक था और बुलबुला साबित हुआ. दरअसल उपेंद्र राय की टीम ने आते ही समय न्यूज चैनल पर कामेडी शोज और सास-बहू-फिल्मी खबरों की भरमार कर दी. इससे तात्कालिक फायदा तो मिला लेकिन इस चैनल के खुद के दर्शक इससे किनारे होते गए. और, यही कारण है कि समय न्यूज चैनल का कोई चरित्र नहीं बन सका है.

दो ऐसे न्यूज चैनल हैं, जिनकी खबरें तो भड़ास पर लगातार छपती हैं लेकिन इन चैनलों का नाम तक टीआरपी चार्ट में नहीं है. ये हैं सीएनईबी न्यूज चैनल और पी7न्यूज. ये नहीं मालूम कि इन चैनलों ने टैम को सब्सक्राइब किया हुआ है या नहीं क्योंकि टैम वाले टीआरपी चार्ट में शामिल करने के लिए भी मोटा पैसा लेते हैं. पर जहां तक पता है, सीएनईबी व पी7न्यूज, दोनों पिछले साल तक टैम वालों को पेमेंट करते थे और अपना टीआरपी जानने के लिए उत्सुक रहते थे. आखिर में बात इंडिया न्यूज की. यह चैनल पिछले कई वर्षों से आखिरी पायदान का चैनल बना हुआ है. न कम न ज्यादा, इंडिया न्यूज है सबसे पिटा हुआ प्यादा. इस चैनल के मालिकों को सोचना चाहिए कि आखिर इतने लंबे चौड़े तामझाम व खर्च के बावजूद अगर इंडिया न्यूज टीआरपी चार्ट में चटर पटर करने की जगह बिलकुल ठस पड़ा हुआ है तो वजह क्या है. लगता है इंडिया न्यूज फुल सर्विसिंग मांगता है.

टैम वालों ने इस साल के 16वें हफ्ते का जो टीआरपी ग्राफ जारी किया है, वो इस प्रकार है-

टीजी सीएम 15+

इंडिया टीवी 15.1 (बढ़त 0.1)
आजतक 14.5 (घाटा 0.3)
स्टार न्यूज 13.4 (घाटा 0.8)
लाइव इंडिया 10.3 (बढ़त 2.1)
जी न्यूज 9.9 (घाटा 1.4)
आईबीएन7 9.6 (घाटा 0.6)
न्यूज24 7.1 (बढ़त 0.4)
एनडीटीवी 6.9 (घाटा 0.8)
तेज 5.9 (बढ़त 0.5)
समय 5.0 (बढ़त 0.5)
डीडी न्यूज 1.9 (बढ़त 0.1)
इंडिया न्यूज 0.4 (बढ़त 0.1)

टीजी सीएस 25+

इंडिया टीवी 15.4 (बढ़त 0.2)
आजतक 13.3 (घाटा 0.9)
स्टार न्यूज 12.6 (बढ़त 1.0)
जी न्यूज 11.7 (घाटा 0.5)
आईबीएन7 10.3 (बढ़त 0.7)
लाइव इंडिया 9.0 (बढ़त 0.7)
एनडीटीवी 6.9 (घाटा 0.8)
न्यूज24 7.2 (बढ़त 0.7)
तेज 6.2 (बढ़त 0.7)
समय 5.1 (बढ़त 0.7)
डीडी न्यूज 2.0 (बढ़त 0.2)
इंडिया न्यूज 0.4 (बढ़त 0.1)

((टैम के आंकड़ें, सप्ताह 16वां, वर्ष 2011))

सूचना:: भड़ास टीआरपी और टैम को संदिग्ध मानता है, इसी कारण टैम व टीआरपी को प्रमोट करने वाली खबरें नहीं प्रकाशित करता. लेकिन न्यूज चैनलों की अंदरुनी दुनिया के टीआरपी से संचालित होने के कारण टीआरपी की वजह से चमकते-बुझते चैनलों के चेहरों की शिनाख्त कभी-कभार भड़ास4मीडिया पर की जाएगी. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


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