जनलोकपाल बिल पास हुआ तो गिर जाएगी सरकार

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: तिहाड़ जेल चैंबर ऑफ कामर्स हो जाएगा : यूपीए सरकार आजादी के बाद की भ्रष्टतम सरकार है और उसको डर है कि अगर जनलोकपाल बिल पास हो गया तो सरकार छह महीने के भीतर गिर जाएगी। सरकार इस बात को समझती है इसीलिए जनलोकपाल बिल की राह में रोड़े अटकाऐ जा रहे हैं। यह दावा किया बीजेपी नेता डा. हर्षवर्धन ने सीएनईबी के शो 'जनता मांगे जवाब' में।

सीएनईबी पर 'जनता मांगे जवाब' के इस तीसरे एपिसोड में बीजेपी नेता डा. हर्षवर्धन,  पूर्व केन्द्रीय मंत्री और आरजेडी नेता डा. रघुवंश प्रसाद सिंह, समाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार किशोर मालवीय और कवि एवं समाजिक कार्यकर्ता कुमार विश्वास शरीक हुए। हर्षवर्धन ने कहा कि सबसे अहम तो यह है कि जो लोग सिविल सोसाइटी के लोगों पर सवाल उठा रहें खुद उनकी विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है और जनता भी इसको समझती है।

शो के एंकर और सीएनईबी के संपादक अनुरंजन झा ने यह सवाल उठाया कि जनलोकपाल बिल पर बनी कमेटी में शामिल सिविल सोसाइटी के लोगों पर सबसे पहले सिविल सोसाइटी की ओर से प्रश्न खड़े किए गए। स्वामी रामदेव ने पिता-पुत्र को कमेटी में लेकर अपनी नराजगी जाहिर की उसके बाद अन्य लोगों के बयान आए ऐसे में इसे किस तरह से देखा जाए?

इसपर समाजिक कार्यकर्ता और जनलोकपाल बिल की सलाहकार समिति से जुड़े देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि कमेटी में शामिल सिविल सोसाइटी के लोगों की निष्ठा पर कोई शक नहीं लेकिन सरकार की निष्ठा पर शुरू से शक है। शांतिभूषण और प्रशांत भूषण को कमेटी में इसलिए रखा गया कि ये लोग ड्राफ्टिंग में पहले से शामिल थे और मुद्दों की बेहतर समझ रखते थे। शर्मा ने यह भी कहा कि आज पांच कार्पोरेट अधिकारी तिहाड़ जेल में हैं लेकिन जिस दिन जनलोकपाल बिल पास हो गया उस दिन तिहाड़ 'चैंबर ऑफ कॉमर्स'  हो जाएगा।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि जनलोकपाल बिल पास होना चाहिए और अब यह किसी के रोके रुकने वाला नहीं है। लेकिन कमेटी में शामिल सिविल सोसाइटी के लोगों पर जिस तरह सवाल खड़े किए जा रहे हैं और बयानबाजी के जरिये जनलोकपाल बिल के मुद्दे को भटकाने की कोशिश की जा रही है वह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। उन्होंने यह स्वीकार किया जिस तरह के आरोप कमेटी में शामिल लोगों पर उठाए जा रहे हैं उससे आंदोलन की रफ्तार जरूर कम हो जाएगी।

कवि और समाजिक कार्यकर्ता कुमार विश्वास ने कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार हुआ है कि किसी आंदोलन की बागडोर नेता के हाथ में नहीं बल्कि जनता के हाथ में है। और इसीलिए इसको पटरी से उतारने की बौखलाहट में कई नेता लगे हुए हैं। कुछ लोग सीडी के माध्यम से हमला बोल रहें हैं तो कुछ अन्य तरीकों से। लेकिन कमेटी में शामिल सिविल सोसाइटी के लोगों को इस तरह के लोगों से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।

सीडी की विश्वसनीयता को लेकर जब बात उठी तो करीब सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि सीडी की विश्वसनीयता को लेकर भ्रम जरूर पैदा हो गया है लेकिन सीडी जारी करने वाले कितने विश्वसनीय हैं यह सारा देश जानता है। चर्चा में मीडिया की भूमिका को लेकर यह सवाल उठा कि क्या कि क्या मीडिया इस आन्दोलन को लेकर भ्रमित है पहले आंदोलन की जोरदार कवरेज और अब विवादों को तूल देना कहां तक उचित है?  कुमार विश्वास ने कहा कि मीडिया ने इस आंदोलन को जिस तरीके से दिखाया है वह तारीफ के काबिल है और जबकि मीडिया पर कार्पोरेट जगत के हाथो की कठपुतली होने के आरोप लगते रहे हैं।

किशोर मालवीय ने कहा कि मीडिया फैसला नहीं सुनाती फैसला जनता पर छोड़ देती है। मीडिया ने आंदोलन को जिस तरीके से दिखाया वह उसकी जिम्मदारी थी,  लेकिन उसकी यह भी जिम्मदारी है कि वह दूसरे पक्ष के लोगों की बातों को भी सामने लाए। मीडिया वही कर रहा है। सीएनईबी के इस शो का प्रसारण 23 अप्रैल शनिवार रात 8 बजे होगा और इसका दोबारा प्रसारण रविवार सुबह 11 बजे होगा। प्रेस रिलीज


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