इन चिरकुट न्यूज चैनलों से तो घिन आने लगी है

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कल शाम को टीवी देखने बैठा. जिधर देखो उधर सचिन के रोने की खबर. साईं बाबा के यहां जाकर सचिन का रोना, उनकी पत्नी का सचिन को आंख पोंछने के लिए रुमाल देना... सचिन का रोना... रुमाल पकड़कर आंख नाक पोंछना.. बस, यही विजुअल. और सब इसे अपने अपने तरीके से परोस रहे हैं. किसी ने कहा कि क्रिकेट का भगवान रोया. उपमा व विशेषण देने में सब एक दूसरे को पछाड़ते हुए दिखे. टीवी देखने वाले यह सब देख देखकर उफ्फ कर रहे थे.

रात 11 बजे तक चैनल पर चैनल बदलता रहा. सिर्फ तीन जगह कुछ देखने को ठीकठाक मिला. रात दस बजे जी न्यूज पर पुण्य प्रसून बाजपेयी का शो ठीकठाक लगा जिसमें खबरें थीं, सूचनाएं थीं, कलमाड़ी गिरफ्तार हुए तो शीला दीक्षित क्यों नहीं, इस परिदृश्य का विश्लेषण था. उसके पहले लाइव इंडिया पर सुधीर चौधरी ने इस मुद्दे पर अच्छी जानकारी दर्शकों को दी और कई नए खुलासे किए. एनडीटीवी पर मजमा लगा हुआ था. छह विंडो में नेता-एंकर आपस में भिड़े हुए थे. यहां दर्शक कनफ्यूज हो जाता है. सब अपनी अपनी ढपली बजाते हैं. स्टार न्यूज ने तो सचिन को इतना रुलाया इतना रुलाया कि सचिन इसे देख लें तो हंसने लगें.

जाने क्या हो गया है स्टार न्यूज वालों को. शाजी जमां आजकल आफिस में नहीं रहते हैं क्या. जब किसी का वो फोन उठाते नहीं, बाहर किसी कार्यक्रम गोष्ठी सेमिनार में जाते नहीं तो फिर करते क्या हैं. उनकी उर्जा स्टार न्यूज में नहीं लग रही है तो जा कहां रही है. यह एक सवाल है. क्योंकि शाजी जमां संवेदनशील और अच्छे संपादकों में माने जाते हैं. सच सच बताएं वे, सचिन को इतना रुला रुला कर उन्हें कोफ्त हुई या नहीं. या हो सकता है कि उस वक्त वो अपना नहीं, दूसरों का चैनल देख रहे हों. साईं और सचिन को पकड़कर बैठे न्यूज चैनलों से पूछा जाना जाहिए कि वे राजनीतिक घटनाओं से भरे कल के दिन जिसमें 2जी से लेकर कामनवेल्थ गेम्स तक के घोटालों के बड़े आरोपियों को पकड़ा गया या आरोप पत्र दाखिल किया गया, क्यों नहीं भ्रष्टाचार की पोल खोलू रिपोर्टिंग में लगे. बजाय इसके, वे इन मुद्दों को डायवर्ट करने की कोशिश में ज्यादा दिखे, जैसे कुछ हुआ ही न हो और सचिन ने रो दिया है इसलिए देश में अब और कुछ नहीं हो सकता.

यशवंत


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Comments (18)Add Comment
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written by abhishek shrivastava, April 28, 2011
i dont think so ..coz kutta agar aadmi ko kat de to ye news nahi hai but aadmi agar kutta ko kat de to ye news hai..means is desh me gareeb lachaar paresan roy to news nahi per ameer ya v.i.p.roy to its called news..ub isme bura hi kya hai..faltu bakwas kerte ho aap sub...
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written by zakir hussain, April 28, 2011
इस का सबसे बड़ा कारण है की पतवार ऐसे लोगों के हाथ में है जो पत्रकार नहीं व्यवसायी हैं ! उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं की जो बात वो कह रहे हैं उसका समाचार जैसी चीज से कोई लेना देना है भी की नहीं ! गलती केवल उनकी है ऐसा भी नहीं कहा जा सकता ,क्यों की उनके व्यवसाय को चलाये रखने में हम भी उतने ही भागिदार हैं! मेने तो इस का लिआज़ ढूंढ़ लिया है ,जब इस तरह के समाचारों की बाढ़ आती है तो में बुद्धू बक्से को बंद कर या तो बच्चों के साथ घूमने बहार चला जाता हूँ या फिर कोई किताब पढ़ कर काम चला लेता हूँ ,ऐसे बकवास समाचार तो कतई नहीं देखता !आप चाहें तो कर के देख लें काफी रहत मिलेगी!मनोरंजन के साथ साथ ज्ञान भी बढेगा !और इन चिरकुट पत्रकारों को उनकी औकात का पता चल ही जायेगा !
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written by Rajendra Kumar, April 28, 2011
यसवंत जी देखिये हर इन्सान की अपनी एक आस्था पर बिस्वास होती हे ,सचिन की ओ अपनी जीबन की कहानी हे , मगर जहाँ तक चैनल की बात कहा जाये ओ सब अपनी फंडा की होअड में हे , आज कल एईसी एईसी न्यूज़ दिखाने लगे हे की , अगर कोई दिल की बीमारी वाला इन्सान बार बार देखले तो ओ गया काम से smilies/smiley.gif
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written by SAROJ SAMRAAT, April 27, 2011
सही बात है...
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written by SAROJ SAMRAAT, April 27, 2011
वाकई यशवंत जी, आपने बड़ी ही कड़वी सच्चाई बयां की है... आज़ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जिस कदर ख़बरों की भेड़चाल जारी है, ज़्यादातर चैनलों में ख़बर कम बक़वास ज़्यादा दिखाई जा रही हैं... चिंता और बहस का विषय है.
सत्य साईं के निधन की ख़बर पर इन चैनलों के कवरज़ ने तो हद ही कर दी... सचिन के आंसू पर कुछ तेज़ बताने वाले चैनलों ने सभी सीमाएं लांघ दी... एक 'भगवान' के निधन पर दूसरे 'भगवान' का रोना, वाकई रोचक और मजेदार खबर थी, ऐसा मैं नहीं कह रहा, ये चैनल्स कह रहे हैं... उस रोज़ कई गंभीर और भ्रष्टाचार से जुड़े खबरों को छोड़ इन चैनलों ने पूरा दिन साईं और सचिन पर चक्कर काटता रहा... स्टार न्यूज़ की तो बात ही ना करें तो ठीक रहेगा, आजकल इंडिया टीवी को यही चैनल तो टक्कर दे रही है... सचिन के प्रचार-प्रसार का तो जैसे स्टार वालों ने ठेका ही ले लिया... इन खबरिया चैनलों को बस टीआरपी की अंधी दौर में शामिल होने से मतलब है, समाज और राष्ट्र के सरोकार से इनका क्या वास्ता... ज़ी न्यूज में पुण्य प्रसुन्न वाजपयी की खबरों की प्रस्तुति और विषयों का चयन काबिलेगौर था... स्टार,इंडिया टीवी और न्यूज़ 24 समेत उन चैनलों को इनसे सबक लेकर सेंसेशनल खबरों के बजाय अर्थपरक खबरों पर ध्यान फोकस करना चाहिए....
[ये मेरी व्यक्तिगत राय है, आप भी मेरे कमेंट्स पर अपनी टिपन्नी दे सकते हैं...]
धन्यवाद
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written by manish kumar mishra, April 27, 2011
KYA BAT HAI SER,SACH KARWA HOTA HAI SAB JANTEE HAI,PAR

AAP TO PARMANU CHOR DIYEE,CHIRKUT KI SRENI MEE AARYAN

PATNA BHI HAI.NA JANEE PATNA ARYAN KAB BAND HOGA.
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written by TRIPTI STAR, April 27, 2011
sir apne abhi Basti shahar ki letiest news nahi update ki monday ki raat basti ke main market me ek ladke ki political issues ke chalte bedardi se hatya kar di gayi ladke ka naam faisal "babu" tha.
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written by कमल , April 27, 2011
अगर पत्रकारिता की अच्छी समझ है तो आपको किसने रोका है पत्रकारिता में आने से ? या फिर पत्रकार की नौकरी नहीं मिलने की भड़ास निकाल रहे हैं ? नौकरी नहीं मिली तो येलो जर्नलिज़्म का ये अच्छा तरीका है ... खुद का काम ... कुछ चिरकुट बिन पैसे के भेदिये और इस धंधे से कमाई हुई सो अलग ... किसी तरह के काम का कोई दबाव नहीं ... बढ़िया है यशवंत जी ...
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written by kranti, April 26, 2011
To the point hit yashwant ji..... agreed
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written by Dr Maharaj singh Parihar, April 26, 2011
भाई यशवंतजी, केवल चैनल्‍स ही नहीं अपितु अखबार भी सत्‍य सांई बाबा के निधन पर विधवा-विलाप करने में जुटे रहे। समझ में नहीं आता कि इस देश में हर कोई भगवान बन जाता है और इस देश की कथित धर्मभीरू जनता उसे स्‍वीकार कर लेती है। दरअसल बात यह है कि देश में भ्रष्‍टाचार पराकाष्‍ठा पर है, मिलावटखोरी व मुनाफाखोरी खुलेआम हो रही है। इन्‍हीं लोगों का पाप बोध ही इन्‍हें कथित भगवानों के पास ले जाता है, ईमानदार आदमी को किसी मंदिर, मसजिद, गुरूद्वारे और गिरजाघर में जाने की जरूरत नहीं है। हर धर्म के ठेकेदारों के पास जो अकूत चल और अचल सम्‍पत्ति है, वह हराम की कराई का ही हिस्‍सा प्रतीत होता है क्‍योंकि आम आदमी तो दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करता है, उसे किसी आसाराम, सांईबाबा या किसी अन्‍य भगवान पर जाने और चढावा चढाने की फुर्सत ही नहीं है।
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written by madan kumar tiwary, April 26, 2011
श्रीमान मैं भी यही देख रहा था । सचिन जन्मदिन नहीं मनायेंगे । बाबा बिमार है । सचिन रो रहे हैं , भग्वान नहीं रहें। जो बिकता है सो दिखता है । नही बिक सकता तो सजा देंगे , तब तो बिकेगा । अभी बहुत कुछ देखना है देखते चलिये ।
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written by Rajeev Verma, April 26, 2011
Sahi keh rahe hai Yashvant ji Channel apne content ke liye jane jate hai, or kal star news wale sachin ke peeche naha dho ke pad gaye the, shayad aap ka kehna sahi hai ki task dene ke baad star pariwar ne khud star channel nahi dekha ki wahan ho kya raha hai...
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written by मनोज, April 26, 2011
दरअसल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने उद्देश्यों से भटक गया है..इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समाचार संपादकों को अपने चॅनेल की हर दिन की कवरेज का फीड बैक अपने घर वालों और अपने दोस्तों से लेना चाहिए . जो खबर एक बार में असर नही पैदा कर पाई वो बार बार दिखाने से कैसे असर पैदा कर देगी .. कंटेंट्स का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है ..इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की समाज के प्रति ज़िम्मेदारी प्रिंट मीडिया से कई गुना ज़्यादा है .. इसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को समझना ही होगा ...
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written by Hanuman Mishrra, April 26, 2011
क्या बात है...दिल की बात कह दी आपने...जिस समय की बात आप कर रहें हैं ठीक उसी समय मैं भी टेलीविजन के सामने था... ऑफिस से थका-मादा घर पंहुचा तो सोचा चलो देश दुनिया से अवगत हुआ जाय लेकिन देश दुनिया से अवगत कराने वाले लोगों ने कल हमें सचिन के रोने तक सीमित कर दिया था। ९०% न्यूज़ चैनल्स में तो यही था। केवल कल की ही बात नहीं मैंने तो अक्सर ऐसा होते देखा है। रजत जी तो आज कल 'इमेज बिल्डिंग' के काम में जोर शोर से लगे हैं। जिन लोगों को अपनी बात कहने के लिए या सफाई देने के लिए प्लेटफार्म नहीं मिलता उन्हें वो 'आपकी अदालत' में बुलाते हैं और वही सवाल पूछते हैं जिस पर सफाई देने से सामने वाला बेदाग़ हो जाये। उदाहरण के लिए अभी अमरसिंह जी को बुलाकर उन्होंने ऐसे-ऐसे सवाल पूछे जिनके जबाब को सुनकर ऐसा लगा कि अमरसिंह जी से बेदाग़ प्राणी इस धरती पर दूसरा नहीं है। खैर कुछ भी हो ये लोग अपने प्रयास में सफल रहते हैं। जो भी हो एक बात कि प्रसंसा तो करनी ही पड़ेगी, चाहे सड़ी सी खबर ही क्यूँ न हो, ये लोग परोसते बहुत बढ़िया हैं। इसलिए न चाहते हुए भी इन्हें बधाई देनी ही पड़ेगी. जियो भारत माँ के *पूतो !

नोट- '*' कि जगह आप अपनी योग्यता और इच्छा अनुसार 'स' या 'क' लगा सकते हैं.
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written by vikas, April 26, 2011
Lagta hai shaji jaman se sawal poochne ke liye hi aapne ye tippani post ki hai.....smilies/cry.gif
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written by Anonymous, April 26, 2011
lagta hai aapko problem shazi ji ke phone na uthane se hui hai.. baaki to bahana hai...
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written by govind kumar, April 26, 2011
हाँ आप सही कह रहे है इन चैनल वालो को कोई और काम रह गया है एक ही बात को घुमा घुमा के दिखाते रहते है
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written by manu, April 26, 2011
sahi likha bahi, mai bhi kal shaam ko tv dehhte hue yahi feel kar raha tha , media ko kya karna hai kya nahi karna ,ab meedia sab bhoolta ja raha hai

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