केंद्र को चीनी मंसूबों पर पैनी नजर रखनी चाहिए : अमर अब्‍दुल्‍ला

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नई दिल्ली :  जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर के आसापास चीन की बढ़ती हलचल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बेशक, हालात बहुत गम्भीर न हो, पर इस बिन्दु पर गौर तो करना होगा। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और लद्दाख से लगती भारत-चीन सरहद पर चीन की हलचल बढ़ी हैं। चीनी मंसूबों पर पैनी नजर रखनी होगी।

उमर अब्दुल्ला न्यूज 24 की एडिटर इन चीफ सुश्री अनुराधा प्रसाद से उनके साप्तहिक कार्यक्रम आमने-सामने में सवालों की बौछार का सामने करते हुए कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चीन सड़कों और दूसरे निर्माण कार्यों को बड़े स्तर पर अंजाम दे रहा है। इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उमर ने कहा, ''मैं मानता हूं कि केन्द्रीय नेताओं को चीनी इरादों की सारी जानकारी है। उधर, लद्धाख से लगती चीन की सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद इसलिए पैदा हो जाता है क्योंकि अभी तक दोनों देशों की सीमा स्पष्ट नहीं हुई है।''  इस साक्षात्कार का प्रसारण शनिवार रात 8 बजे और रविवार को दस बजे किया जाएगा।

'आपने हाल ही में अन्ना के आंदोलन का समर्थन किया और दूसरी तरफ आपके मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है,क्या कहना है आपका इस बारे में?' कुछ रूककर उमर कहने लगे, ''जिस दिन आरोपियों पर आरोप सिद्ध हो जाएगा, उस दिन मैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दूंगा।" पर उन्होंने प्रति प्रश्न किया, '' क्या किसी पर आरोपों के आधार पर ही कार्रवाई करना मुनासिब माना जा सकता है।''

उमर अब्दुल्ला इस सवाल का उत्तर देने से बचते दिखे जब उनसे पूछा गया कि वे विचारधारा के स्तर पर अपने दादा शेख अब्दुल्ला साहब के करीब हैं या फिर वालिद फारूक अब्दुल्ला के? उनसे जब इस सवाल को अलग तरीके से पूछा गया तो वे बताने लगे कि वे विचारधारा के स्तर पर अपने को शेख अब्दुल्ला के अधिक करीब पाते हैं।

क्या अवाम से जुड़ने के लिए उनके साथ नाचना-गाना जरूरी है, जैसा कि आपके वालिद कहते है? कुछ तल्ख अंदाज में वे कहते हैं, '' मुझे नहीं लगता है कि अवाम से जुड़ने के लिए नाचना-गाना जरूरी है। मैं तो कम से कम ऐसा नहीं कर सकता।"

''क्या आप कश्मीर में बालीवुड को फिर से शूटिंग करने के लिए आने का न्योता नहीं दे रहे?  हम कोशिश कर रहे है। मैंने आमिर खान को हाल ही में एक मुलाकात के दौरान कश्मीर में शूटिंग करने की दावत भी दी। देखिए, वे कब आते हैं।'' इसी क्रम में उन्होंने बालीवुड से इस बात को लेकर नाराजगी भी जताई कि वे अपनी फिल्मों में कश्मीर को सही परिप्रेक्ष्य में पेश नहीं करते। वे शूटिंग गुलमर्ग में करते हैं और बताते है कि उन्होंने शूटिंग हिमाचल प्रदेश में की।

पाकिस्तान से हाल ही में शुरू हुई क्रिकेट डिप्लोमेसी के संबंध में टिप्पणी करते हुए उमर ने कहा, '' हमें क्रिकेट डिप्लोमेसी से प्लोमेसी से आगे सोचना होगा। हाकी डिप्लोमेसी, संगीत डिप्लोमेसी और दोनों देशों के अवाम के बीच के रिश्तों को बेहतर बनाना होगा।''

उमर अब्दुल्ला का इस सवाल पर मूड उखड़ गया जब उन्हें बताया कि पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती उन्हें ' दिल्लीज ब्वाय' कहती है। साफ तौर पर खफा होते हुए वे कहने लगे, '' मैं उनका नाम भी लेना चाहता। उनकी किसी टिप्पणी पर कतई कुछ नहीं कहूंगा।''

उमर अब भी मानते हैं कि उनका भाजपा नेताओं को गणतंत्र दिवस पर लाल चौक पर तिरंगे को फहराने की इजाजत न देना सही था। ''मुझे समझ नहीं आता कि भाजपा 20 साल तक कहां रही। तब उसके नेता तिरंगा फहराना क्यों भूल गए। मैंने उन्हें सरकारी कार्यक्रम में आकर झंडा फहराने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।''

क्या वे श्रीनगर छोड़कर केन्द्र की सियासत में अपने हाथ नहीं आजमाना चाहेंगे? ''कतई नहीं। फारूक साहब दिल्ली में हैं। मैं कश्मीर मे रहकर ही अवाम की सेवा करना चाहूंगा।'' उमर ने साफ किया। प्रेस रिलीज


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