भंगू भाई, पी7न्यूज में किसने भांग मिलाई!

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पी7न्यूज राजनीति का अखाड़ा बन गया है. पर्ल के मालिक भंगू ने अपने इस चैनल को लेकर ऐसी भाव-भंगिमा अपनाई है कि दर्जन भर लोग आपस में लड़े मरे जा रहे हैं और भंगू ताली बजा बजा कर मजे ले रहे हैं. अगर ऐसा न होता तो पी7न्यूज अंदरुनी खबरों की वजह से नहीं बल्कि बड़ी खबरें ब्रेक करने के लिए चर्चा में होता. करीब दर्जन भर से ज्यादा बार कंपनियों के नाम बदल बदल कर जनता को लूट लूटकर अरबों खरबों का साम्राज्य खड़ा करने वाले भंगू ने असल में न्यूज चैनल इस मकसद से नहीं शुरू किया कि उन्हें जनता या पत्रकारिता का भला करना है.

रिजर्व बैंक आफ इंडिया की तरफ से दर्जन से ज्यादा बार प्रतिबंधित की गई चिट-फंड कंपनियों के मालिक और जनता की गाढ़ी खून पसीने की कमाई का लुटेरा सरदार भंगू दरअसल न्यूज चैनल को ले ही आया है इस मकसद से कि वह सत्ता प्रतिष्ठानों को प्रभावित कर, दबाव में लेकर, सम्मोहित कर अपने काम निकलवा सके, करा सके. पी7न्यूज में अगर आप वरिष्ठ पद पर ज्वाइन करने के लिए इंटरव्यू देने जाएंगे तो वहां मैनेजमेंट के लोग आपसे आपके पत्रकारीय ज्ञान के बारे में नहीं पूछेंगे, वे पूछेंगे कि आप किन किन नेताओं को निजी तौर पर जानते हैं और उनसे कंपनी का काम करा सकते हैं.

जी हां, ये जानकारी सोलह आने सच है. पी7न्यूज में शीर्ष पदों पर नौकरी करने के लिए आपको भंगू के काले कारोबार को बचाने-बढ़ाने का ज्ञान-गुर आना चाहिए अन्यथा एक दिन आप किनारे करके फेंक दिए जाएंगे या फिर आंतरिक गृह युद्ध में ऐसे उलझा दिए जाएंगे कि आप के दिन-रात का चैन खत्म हो जाएगा. और, पी7न्यूज में आंतरिक गृह युद्ध चरम पर है. लोग एक दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगा रहे हैं. लोग एक दूसरे के खेमों की जासूसी करा रहे हैं. तीन चार गुट आपस में भिड़े हैं और हर गुट का नेता अपनी कुर्सी बचाने के साथ-साथ अधिकार बढ़ाने की लड़ाई लड़ते हुए दूसरे गुट के नेता को निपटाने पर तुला है. केसर सिंह. सतीश जैकब. रमन पांडेय. ज्योति नारायण.

फिलहाल इन चार गुटों के बीच खींचतान मची हुई है. ज्योति नारायण का पी7न्यूज से सीधे तौर पर कोई लेना देना नहीं है लेकिन चैनल को उनके ही नेतृत्व में लांच किया गया था इसलिए उनके रखे कई लोग ज्योति नारायण के संरक्षण-इशारे पर दूसरे खेमों के खिलाफ सक्रिय हैं. केसर सिंह, जो कभी दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम बनाया करते था और आज भी उनका यही प्राइम कारोबार है, भंगू की विचित्र भाव भंगिमा के कारण अचानक पी7न्यूज के सर्वेसर्वा बन गए. ज्योति नारायण के जाने के बाद केसर सिंह को सत्ता में लाया गया. रमन पांडेय पुराने लोगों में से हैं. कम चर्चित यह शख्स पी7न्यूज में लांचिंग के वक्त से है और मालिक भंगू का करीबी होने का दावा करता है. इसी कारण एक बार वह पी7न्यूज से बाहर होने के बाद फिर अंदर प्रवेश पा गया और पहले से ज्यादा मजबूत हो गया. राजनीति का माहिर खिलाड़ी रमन पांडे एक तीर से कई लोगों को निपटाने पर तुला हुआ है, खासकर सतीश जैकब से इसकी पटरी नहीं बैठती है.

सतीश जैकब. इन दिनों पी7न्यूज में हैं और बेहद लाचार हैं. रहे होंगे ये कभी महान पत्रकार लेकिन आजकल ये तनख्वाह पाने के लिए इन-उन संस्थानों के चक्कर लगाते रहते हैं और पी7न्यूज में इनकी गोटी बैठी तो यहीं जम गए हैं. पत्रकारिता के जानकार आदमी हैं. भंगू की विचित्र भाव भंगिमा के कारण ये आ तो गए पी7न्यूज में लेकिन ठनठन गोपाल बने हुए हैं. केसर सिंह, रमन पांडेय आदि इत्यादि गुटों ने इनके हाथ-पांव बांध रखे हैं. केसर गुट को डर है कि कहीं ये आदमी भंगू की विचित्र भाव भंगिमाओं को प्रभावित कर उनका बोरिया बिस्तर न बंधवा दे. रमन पांडेय गुट को डर है कि कहीं ये आदमी काम लेने लगा तो उन लोगों की पोल ही खुल जाएगी, सो इसे काम करने लायक रहने ही न दो.

ज्योति नारायण गुट रक्षात्मक मुद्रा में है. इस गुट के ज्यादातर लोगों को पहले ही निकाला जा चुका है. जो बचे खुचे लोग हैं, वे हर गुट को प्रणाम कर अपनी नौकरी बचाने में जुटे हैं और जो गुट मजबूत इन्हें दिखता है, उसकी खासकर चरण वंदना करते हैं. अभी तक तो आप कहानी की भूमिका सुनर रहे थे, स्टार कास्ट समझ रहे थे. अब बाते हैं मूल स्टोरी पर. पी7न्यूज में इन दिनों लेटर भेजो अभियान चल रहा है. अनाम मेल आईडीज से ग्रुप के सभी लोगों को मेल किया जा रहा है. कभी कोई मेल सतीश जैकब के चरित्र की ऐसी-तैसी करते हुए इन्हें पी7न्यूज से निकाल भगाने की मांग करते हुए होती है तो कभी कोई मेल रमन पांडेय को खलनायक बताती हुई इस आदमी से मुक्ति के लिए गुहार लगाती हुई इन उन सभी के मेलबाक्सों में प्रकट होती है.

और, हर गुट मेल की एक कापी भड़ास4मीडिया के पास भेज देता है ताकि उनके खेल में भड़ास भी शामिल हो जाए. पर ऐसा न करते हुए हम सभी गुटों के खेल में शामिल होना चाहेंगे और उन सभी मेलों को यहां प्रकाशित कर रहे हैं, जो पी7न्यूज की आंतरिक राजनीति से जुड़ी हुई है. इन पत्रों को पढ़कर आप एक बात तो तय कर ही लेंगे कि पी7न्यूज चैनल काफी खतरनाक हो चुका है, यहां काम करने के बारे में सोचना खतरे से खाली नहीं है. इस ग्रुप का मालिक सरदार भंगू पत्रकारों को आपस में भिड़ाकर खुद मजे ले रहा है ताकि उसके चैनल के पत्रकार और संपादक, लाचार बनकर न्याय के लिए उसके यहां गुहार लगाते रहें और वह न्याय करने की मुद्रा में आकर अपने धंधे के लिए सबसे मुफीद पत्रकारों-संपादकों को संरक्षित कर बाकी को निपटा सके.

भंगू की विचित्र भाव भंगिमाओं की कथाएं और एक आदमी द्वारा जनता को लूट-चूस कर और सत्ता-सिस्टम को भ्रष्ट-नष्ट कर खरबपति हो जाने की कथाएं आपको तफसील से पर बाद में बताएंगे. पहले आपको पी7न्यूज में चल रहे लेटर भेजो अभियान के लेटरों को पढ़ाते हैं.

 


ये हैं तीन पत्र जो आजकल पी7न्यूज से जुड़े लोगों के पास मेल के जरिए घूम-फिर रहे हैं...

((पत्र नंबर एक))

सतीश जैकब को रमन-केसर निपटाने पर तुले हैं

पी7 में भूकंप आया हुआ है.... करीब दो-ढाई वर्ष पहले अस्तित्व में आए इस नेशनल न्यूज चैनल में नए एडिटर इन चीफ सतीश जैकब (बीबीसी फेम) के ज्वाइन करने के बाद घबराए हुए कुछ लोगों ने कई उल्टे सीधे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.... सतीश जैकब को पर्ल ग्रुप के चेयरमैन ने चैनल की कमान दी है.... उसके बाद जैकब ने आउटपुट हेड रमन पांडे के कामकाज पर उंगली उठानी शुरू कर दी.... रमन पांडे ने कभी भी आउटपुट के कामकाज सुधारने पर जोर नहीं दिया.... उसकी जगह वो डायरेक्टर केसर सिंह को साधने और चंडीगढ़ में बैठने वाले कुछ डायरेक्टरों को खुश करने में ही लगे रहते हैं.... चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ मुकेश राजपूत उनके लिए चंडीगढ़ में लाबिंग करते हैं और इसके बदले में मुकेश की हर उल्टी सीधी खबर चैनल में प्रमुखता से चलती है... मुकेश को पी7 में रमन पांडे ने एक तरह का डायरेक्टर का दर्जा दिला रखा है.... बताते हैं कि रमन पांडे ने कभी भी चैनल को सुधारने या प्रजेंटेशन पर जोर नहीं दिया,  उनको कभी भी किसी ने कंप्यूटर पर कुछ भी लिखते या पढ़ते नहीं देखा....  अपनी कुर्सी बचाने के लिए चैनल में हर नए आने वाले के खिलाफ वो  डायरेक्टर केसर सिंह को भरना शुरू कर देते हैं..... अपनी कुर्सी जाते देख रमन ने केसर सिंह को डर बैठाकर सतीश जैकब का विरोधी बनाना भी शुरू कर दिया है.....यही कारण है सतीश जैकब को न्यूजरूम के कामकाज में जरा भी छूट नहीं दी जा रही  है.... हाल ही में सतीश जैकब के खिलाफ चैनल के सभी स्टाफ के पास फर्जी नाम से मेल भेजा गया, जिसमें बुजुर्ग सतीश जैकब के चरित्र हनन और उनके कामकाज पर सवाल उठाए गए..... मेल में उनको ठरकी, बूढ़ा, चुका हुआ और नास्टिल्जिया में रहने वाला पत्रकार करार देकर खिल्ली उड़ाई गई.... इस साजिश के पीछे सतीश जैकब को नीचा दिखाने की कोशिश थी.... इसके बाद चंडीगढ़ ब्यूरो की मदद से इस मेल को डायरेक्टरों के पास भेजकर सतीश जैकब की इमेज खराब करवाई गई.... इस सारी कोशिशों से अंततः सतीश जैकब को नुकसान उठाना पड़ा....  उनकी बिना जानकारी में रमन गुट अपने विरोधियों को चैनल से बाहर का रास्ता दिखाने में जुटा है... जिस जिस से रमन की नहीं पट रही, केसर सिंह के जरिए उसको सीधा चैनल छोड़ने का फरमान सुना दिया जा रहा है.... चैनल से जुड़े पुराने लोगों को निकालने का क्रम जारी है और अभी 50 लोगों की लिस्ट एचआर को सौंपी जा चुकी है... चैनल में कामकाज का माहौल खत्म हो चुका है.... रमन के खास लोगों को छोड़कर सभी पर नौकरी जाने की दहशत कायम है.... अब तक करीब एक दर्जन लोगों को रमन पांडे नोटिस  दिला चुके हैं.... इनमें से कई लोग अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं.... इसकी जानकारी पर्ल ग्रुप के चेयमैन आफिस तक पहुंची तो डायरेक्टर केसर सिंह को चंडीगढ़ बुलाकर नाराजगी जताई गई...

एक और बात बता दूं. पी7 के नए संपादक सतीश जैकब कुछ समय के लिए इंडिया न्यूज में सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं... जैकब ने इंडिया न्यूज के कुछ लोगों को जूनियर पोस्ट पर पी7 में ज्वाइन करवाया.. वो अपनी पसंद के कुछ सीनियरों को भी इंडिया न्यूज से लाने की कोशिशों में जुटे हैं... लेकिन इसकी भनक लगते ही इंडिया न्यूज से लोगों को पी7 में लाने पर रमन-केसर लाबी ने रोक लगवा दी है. कुल मिलाकर पी7 में इन दिनों कामकाज का माहौल खत्म हो चुका है. इसका सीधा असर चैनल पर दिखने भी लगा है....

((पत्र नंबर 2))

पी7 से लोगों को निकालने वाले असली हाथ

पी7 न्यूज़ चैनल से एकसाथ इतने सारे लोगों को निकालने को लेकर मीडिया जगत में तरह तरह की अटकलें हैं अच्छा काम करने वालो को भी बाहर निकाल दिया गया है...इसके लिए पी7 के मैनेजमेंट ने उस वक्त के इनपुट हैड राकेश शुकला और आऊटपुट हैड रमण पांडे से छटनी के लिए  नाम की लिस्ट मांगी ... लिस्ट मागने के बाद मैनेजमेंट ने बहुत चालाकी के साथ उसे अपने पास रखा और कोई एक्शन नहीं लिया  और सतीश जैकब के आते ही...राकेश शुकला को ही सबसे पहले  हटा दिया.....

लोग ये समझे कि  सतीश  जैकब ने आते ही अपना काम शुरू कर दिया... उसके कुछ दिनो के बाद मैनेजमेंट ने उस लिस्ट पर कारवाई करनी शुरू कर दी ...उसके बाद लोगो को यकिन हो गया कि ये सतीश जेकब का ही काम है .....मगर सच्चाई कुछ और ही है... मैनेजमेंट ने सतीश जेकब को एडिटर इन चीफ की कुर्सी तो ज़रूर दे दी मगर उस कुर्सी की पावर नहीं दी..... वो न किसी को निकाल ही सकते हैं और न रख ही सकते हैं ...इस के पीछे भी बहुत बड़ा खेल है...सोचने वाली बात ये है...जिस शख्स ने 27 साल बीबीसी अंग्रेजी में काम करने के बाद  दो किताबे लिखी “द अमृतसर - द लास्ट बैटल ऑफ इंदिरा गांधी”..और “द वार इन इराक़”.......

यही नहीं ये शख्स तीन साल तक प्रेस क्लब का अध्य़क्ष रहा और एडिटर गिल्ड का  मेम्बर भी ....सरकार ने भी उसकी काबलियत को देखते हुए लांग एंड  डिस्टिन्ग्विश सर्विसेस का कार्ड दिया ...जो भारत में सिर्फ नौ लोगों के पास है ...... जो बीबीसी में पहला भारतीय इंटरनेशनल कॉरेस्पोंडेट था बीबीसी से रिटायरर्मेट के बाद इतने काबिल और तजुर्बेकार व्यक्ति के साथ काम करना सब के लिए सम्मान की  बात है......उन लोगो को सच्चाई जानने की ज़रूरत है...जो अफवाह फैला रहे है ....क्योंकि शायद वो भी पत्रकार है......और एक पत्रकार को अक्सर परदे के पीछे का खेल देखना चाहिए ......न कि वो जो दिखाया जा रहा है.......

((पत्र नंबर तीन))

इस सतीश जैकब से बच के रहियो

कामरेड लाल सलाम, लाल सलाम इसलिए की ये नारा क्रांतिकारियों का है... और हम आपके साथ हैं, आपकी तरह, लेकिन अफसोस, की हम क्रांति नहीं कर सकते है... तभी तो लेख के माध्यम से एक ऐसे छद्मवेशी व्यक्ति की जानकारी आपको दे रहे हैं जो पिछले कई सालों से मीडिया इंडस्ट्री को शर्मसार कर रहा है... हम बात कर रहे हैं कथित माननीय सतीश उर्फ सतीश जेकब की जिसको इंडिया न्यूज़ से निकाल दिया गया. जिसे इंडिया टीवी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

फिर ये आख़िर पी7 के भाग्य में क्यों अटक गया. दरअसल साथियों इन जनाब को बहुत कम लोग जानते है. तभी तो ये अपने बाप दादा का नाम गांव और बल्दियत बताते फिरते हैं.. इंडिया न्यूज़ की कहानी जान लिजिए. मालिकों को सब्जबाग दिखाया. बताया कॉंग्रेस का महारथी हूं. मनु शर्मा को जेल से बाहर निकलवा दूंगा. मालिकों ने धोखा खाया और इसकी बुढ़ापे में नौकरी लग गयी. बाद में वहां के लोगों को पता चला कि इस व्यक्ति को टेलिविजन आता ही नहीं है. दरअसल ये जेकब जी उस जमाने का हीरो अपने आप को बताते हैं जब दुनिया  में सूचना क्रांति आयी नहीं थी. और बीबीसी में काम करने वालों को गोरों का दलाल समझा जाता था. वे गोरे जो हमारे देश पर हाथ साफ किये और हमारे भाईयों  पर जुल्म बरसाये.

खैर इंडियां न्यूज़ पर लौटते है वहां ममता (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की से इन्हें प्यार हो गया. चौकिंये मत इस बुढ़े (74 साल) की फितरत ही ऐसी है. दिमाग पर गौर डालिए ....पी7 में ऐसा ही कुछ कर रहा होगा....खैर हरिश गुप्ता समय रहते भाप गये.और इस .........को समय रहते बाहर का रास्ता दिखा दिया.

अब जरा इंडिया टीवी के बारे में जान लिजिए. महामहिम रजत शर्मा को इस माननीय ने अपने जाल में कैसे फांसा. रजत जी को बता आया कि हमारा संबध विदेशियों से ज्यादा है क्योकि मै कनवर्टेड हूं. फाईनेंस दिलवाउंगा ...रजत जी का भी बुरा दौर था.इसके बहकावे में आ गए. लेकिन जैसे ही कम्पनी में इन हुआ दूसरे वफादार साथियों के खिलाफ जाल बुनना शुरू कर दिया. यहां भी लड़कियों पर डोरे डालने लगा. हम ये नहीं कह रहे है कि ये सबकुछ वासना के लिए कर रहा था. बल्कि जो लड़कियां इसके करीब थीं वो बताती हैं कि कॉफी पीने के लिए बार-बार परेशान करता था. और नहीं जाने पर कहता था की हमारी तो कोई गर्ल फ्रेन्ड ही नहीं है. रजत जी समझदार थे. बीमारी ज्यादा फैलने के पहले दुकान पर दो लात लगा दी.

बुढ़ापे में दारू पीने का पैसा नहीं था. बेटा बेरोजगार है. बहू को प्रमोट करना था. इस उमर में इतने तनाव.... रास्ता ढूढते पहुंच गया पी7. और आते ही राकेश शुक्ला सर का विकेट गिरा दिया. क्या भगवान इसको माफ करेंगे... खैर आने के पहले.. किसी से फोन कराया. सीधे-साधे मालिकों को, पोलिटिकल पैरवी से नौकरी पा लिया. कोई हमारी आपकी तरह साक्षात्कार देकर नहीं आया. टेस्ट नहीं दिया अपना नहीं तो पोल खुल जाती, स्क्रीप्ट लिखने नहीं आती (हिन्दी टाईप करना नहीं आता, टेस्ट लेकर देख लीजिए फेल हो जायेगा... कंसेप्ट कुछ नहीं है ....रेडियो का गाना गाता है....लोग मज़ाक उड़ाते हैं. और तो और कमाल देखिये जिस छत्रछाया में पेट पालने आया है उसके ही डायरेक्टर का जड़ खोद रहा है.. कहता है कि केसर सिंह को जरूर हटाउंगा मैं निर्मल सिंह को रिपोर्ट करता हूं. पहले तीनमूर्ती जिन्होने इस चैनल के लिए अपनी जवानी दे दी यानि रमन सर, अनुराग सर और खंडुरी सर उनके खिलाफ जहर उगलता है. लड़कियों के प्रति नरम है लेकिन ये खबर जब हरिश गुप्ता और रजत शर्मा के पास पहुंचेगी तो उसके नर्मी का राज बता सकते है.

चैनल में अपने बेटे को बुलाने के पहले गेस्ट के आने का कीमत यानि पैसे तय करवा लिये ..और रोज अपने बेटे को बुलाता रहा गेस्ट स्पीकर के रुप में.यानि लाखों रूपये के आस पास अपने बेटे को दिलवा दी भला हो उस मालिक का जो अब भी इसके कर्मों को माफ कर रहा है. इनको करीब से जानने वाले कहते हैं कि सतीश उर्फ जेकब को पत्रकार कौन मानता है .ये तो विमेनाइजर है जो दिल्ली में अपने घर पर अपनी दारु पार्टी, कबाब ..शबाब के लिए जाना जाता है. खाता है पीता है और वही सो जाता है. हम ये कहानी आपको इसलिए बंया कर रहे है कि आप भी हो जाईये इससे सावधान. जो जात का न रहा है वो किसका होगा.कामरेड बहुत दुख के साथ अपको लाल सलाम


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Comments (3)Add Comment
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written by chandan, May 04, 2011
JAIKAB KISI KA JANM TITHI PUCHHNE SE PAHLE APNI MRITIU BATA DO.RAKESH SHUKAL KO HATA KE ACHHA NAHI KIYA./
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written by ashutosh rai, etv, May 04, 2011
P-7 EK ACHHA CHANNEL MANA JA RAHA THA, LEKIN YE REPORT PARKAR LAG RAHA HAI, EK AUR CHANNEL BARBADI KI KAGAR PAR PAHUCH GAYA HAI. RAMAN PANDEY JAISE LOGO KI JAHAN CHALEGI, VAHAH YEHI HOGA. RAMAN SAHARA NCR ME THA, SAB JANTE HAI USE NEWS KE NAM PAR DHELA BHAR BHI NAHI AATA. TANTRA MANTRA, JOR TOR AUR CHATUKARITA KE DAM PAR 7 SAAL KE CARRIER ME HI YAHA TAK PAHUCHA HAI. LARKIYON KE AAGE PEECHE LAGE RAHANA IS ADAMI KI PURANI AADAT HAI. ISAKA ETV KA CHELLA AASHISH JHA BHI JARUR ISAKE SATH HI HOGA. WO ISAKO ULTI SEEDHI PATTI PARATA RAHATA HAI. P7 WALO AB BHI WAKT HAI SAMHAL JAO.
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written by saurabh Mishra , May 02, 2011
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Saurabh Mishra
Jain TV, New Delhi
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