आजाद न्‍यूज का स्‍टेट हेड बनना है तो सात लाख लाओ

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पटना में चैनलों में काम दिलाने के नाम पर ठगी का धंधा चरम पर है. आए दिन किसी न किसी चैनल में रिपोर्टर, स्ट्रिंगर बनाने के नाम पर युवक ठगे जा रहे हैं. ताजा मामला आजाद चैनल के नाम पर ठगी का है. ठगी के शिकार युवक कई जगह गुहार लगाने के बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार पहुंच गए. मुख्‍यमंत्री को आपबीती सुनाई. सीएम ने तत्‍काल एसपी सिटी शिवदीप लांडे को छानबीन कर मामले के खुलासा का निर्देश दिया.

सीएम के आदेश के बाद फास्‍ट हुए एसपी सिटी ने ठगे गये युवकों से पूछताछ के आधार पर अपनी छानबीन शुरू कर दी.  जांच के दौरान श्यामनंदन शर्मा नामक युवक द्वारा ठगी करने का मामला सामने आया. उक्‍त युवक पटना के न्यू बाइपास थाना क्षेत्र के अखिलेश नगर में मकान बनाकर रह रहा था. पर इन दिनों वहां से गायब था. गुप्त सूचना के आधार पर एसपी सिटी ने मंगलवार को उसे रनियातालाब थाना क्षेत्र के काब गांव से गिरफ्तार कर लिया. युवक के ऊपर चैनल में जॉब दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगी करने का आरोप है.

इस बाबत एसपी सिटी ने बताया कि श्यामनंदन शर्मा युवकों को निजी चैनल आजाद न्यूज में स्टेट हेड बनाने का लालच दे उनसे सात लाख रुपये की मांग करता था. उसने कुछ लोगों से स्‍टेट हेड बनाने के नाम पर रुपये ले भी चुका था.  तीन दर्जन से अधिक युवकों को रिपोर्टर बनाने के नाम पर उसने सत्तर-सत्तर हजार रुपये वसूले थे. ये सभी लड़के जब पैसे के बारे में पूछते तो वो टालमटोल करने लगता था.

पूछताछ के दौरान श्‍यामनंदन ने स्वीकार किया कि वह युवकों को नौकरी देने के नाम पर कोलकाता के होटल रेजीडेंसी में बुलाता था. वहीं उनका इंटरव्यू होने का नाटक किया जाता था और नियुक्ति पत्र दे दिया जाता था. दो माह बाद काम शुरू करने का आश्वासन दे उन्हें विदा कर दिया जाता था. युवकों को बताया जाता था कि चैनल का मुख्यालय नई दिल्ली में है. राजधानी पटना के श्रीकृष्णा नगर में आजाद चैनल का दफ्तर बताया जाता था.  मामले को न्यू बाइपास थाने में थाने में दर्ज करा दिया गया है. पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुट गई है.


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Comments (8)Add Comment
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written by vimal, July 07, 2011
न्यूज चैनलों में । बेचारे मेहनत और समाजसेवा भी बहुत करते हैं , किसी भी सरकारी दफ़्तर में या थाने में पैरवी करानी हो एक स्ट्रिंगर को पकड लो वैसे खोजने की ज्ररुरत नही है , ये खुद मिल जायेंगे थाने या मालदार सरकारी विभाग में टहलते या गपियाते , हां दस्तुर तो निभाना पडेगा , समझ गये न अरे वही खाने- पिने की रकम का ।
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written by Vishal Tiwari, June 17, 2011
mujhse to azad news walon ne 10 lakh kaha tha.........or story k paise nahi milenge ye bhi kaha tha.........maine chappal utara or kaha bhag ja raipur se.......ab pata nahi kisne CG k liye 10 lakh diye
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written by prabhat , May 14, 2011
chailya rajnesh bhai, kuchh pane ke liye khona padata hai khair ab jabhi kanhi kamm krne to agreement letter ke satth karne nahi to yahi hal sabo ka ho ga. agai bhadhane bala enshan ageai ka sochta ta.
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written by rajiv khanna, May 06, 2011
jail to sharma ji ko nahi in ladkon ko jaana chahiye jinhone paisa diya.main bihar ke mukhyamantri ji ko likhunga ki is pure maamle ki phir se jaanch karein taaki koi phir yeh saahas na kar sake
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written by manoj verma, May 06, 2011
jitne bhi yuvak mukhyamantri ke janta darbar mein pahunche the unhone shyaad cm saheb ko yeh nahi bataya ki woh 7 lakh rupee dekar bureau chief kyu banana chahte the,bhai saaheb log,isse bhi aadhe paise mein to aap electronic media ka kahi course kar lete aur thoda sadak pe struggle karte to naukri mil jaati lekin aap to ghode pe sawaar the aur turant patrakar banana tha,yahi wajah hai ki aap log paisa dene ko aatur the.asal mein karyawaahi to aap logon pe honi chahiye jo is peshe ko badnaam kar rahe hai.
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written by purusottam singh, May 06, 2011
paisa lene wale ko nahi dene walon ko saza milni chahiye.yadi wo denge hi nahi to koi le kaise lega.waise bhi yeh baat prasidh hai ki ghus lene aur dene wale dono doshi hai.
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written by ROHIT SINGH, May 05, 2011
जो लोग पैसा देकर ठगे जाने की बात कह रहे है, वे पहले ये बताये कि आकिर क्या सोच कर पैसा दिया था । पत्रकार बनकर पत्रकारीता को किस नरक मे ले जाते ,
इनके साथ अच्छा ही हुआ ।

ऱोहित सिंह
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written by मदन कुमार तिवारी , May 05, 2011
अब पता चला इतने होनहार लदके कैसे नजर आ रहे हैं न्यूज चैनलों में । बेचारे मेहनत और समाजसेवा भी बहुत करते हैं , किसी भी सरकारी दफ़्तर में या थाने में पैरवी करानी हो एक स्ट्रिंगर को पकड लो वैसे खोजने की ज्ररुरत नही है , ये खुद मिल जायेंगे थाने या मालदार सरकारी विभाग में टहलते या गपियाते , हां दस्तुर तो निभाना पडेगा , समझ गये न अरे वही खाने- पिने की रकम का ।

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