नोटिस की बात आप आज प्‍लीज मत बोलना, मैं हाथ जोड़ रहा हूं आपके आगे : प्रभु चावला

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कल प्रभु चावला आईबीएन7 पर दिखे. उसी आईबीएन7 पर जिसके प्रबंध संपादक आशुतोष हैं. ये वही प्रभु चावला हैं जो नीरा राडिया से ढेर सारी बातें करते पाए गए और इन्हें इंडिया टुडे-आजतक से जाना पड़ा. और ये वही आशुतोष हैं जिन्होंने नीरा राडिया टेप में पाए गए पत्रकारों को दल्ला कहा था और उनकी हरकतों को दल्लागिरी का नाम दिया था (आशुतोष का लिखा पढ़ने के लिए क्लिक करें- दल्ला और दल्लागिरी).

पर आशुतोष रोज इतना कुछ टीवी पर बोलते हैं और फिर अखबारों के लिए लिखते हैं कि वे भूल जाते हैं कि उन्होंने किसके लिए क्या कहा और किसके लिए क्या स्टैंड लिया. इसी कारण आशुतोष ने प्रभु चावला को ससम्मान अपने स्टूडियो में चुनाव विश्लेषण के लिए बुलाया और बिठाया. प्रभु चावला को आईबीएन7 पर सुनते हुए एक झटके में लगा कि यह आईबीएन7 नहीं, आजतक चैनल है. शायद, आशुतोष को खुद पर भरोसा नहीं, इसी कारण आजतक से विदा हुए प्रभु चावला के जरिए आईबीएन7 को आजतक बनाना चाह रहे हों. जो भी हो, लेकिन आशुतोष के प्रति दया आई. जोर-जोर बोल-बोल कर और सबको तार्किक रूप से ध्वस्त-परास्त करने के बाद आशुतोष के पास जो कुछ बचता है, वह एक बड़ा शून्य है.

क्योंकि इस प्रबंध संपादक के पास प्रबंधन में बने रहने और प्रबंधन के अनुकूल तर्कों को गढ़ने की जोरदार क्षमता है. इसी कारण यह आदमी हर मंच पर किसी भी विचारधारा, वो चाहे वाम हो या दक्षिण, वो चाहे समाजवादी हो या समतावादी, सबको खारिज करता नजर आता है और आम जनता, आम दर्शक की बात करता हुए प्रबंधन या मैनेजमेंट यानि कारपोरेट के गोद में जा बैठता है. जिस प्रभु चावला का मीडिया के इमानदार लोगों को बहिष्कार करना चाहिए, उन्हीं प्रभु चावला को आशुतोष ने अपने यहां बुलाया-बिठाया-दिखाया-सुनाया. आपने अच्छा किया आशुतोष. कम से कम आपके बारे में बनीं कुछ धारणाएं तो टूटीं.

आशुतोष चालाक आदमी हैं. छुप कर घी पीते हैं. सामने भुखमरों के नेता बनने का ढोंग रचते हैं. जब राडिया प्रकरण उठा तो इसमें फंसे पत्रकारों को दल्ला बोल कर खुद वाहवाही लूटी और हल्लागुल्ला थमते ही दल्लों का महिमामंडन शुरू कर दिया. वाह आशुतोष वाह. अब समझ में आ रहा है कि आशुतोष की पीड़ा दल्लों को लेकर नहीं थी, पीड़ा ये थी नीरा राडिया ने उनसे कभी संपर्क क्यों नहीं किया. अरे आशुतोष भाई, राडिया को संपर्क करना होगा तो वह आपके आका राजदीप सरदेसाई से संपर्क करेगी, उसके लिए आप किस खेत की मूली हो.

चलिए, आशुतोष की याददाश्त को ताजा कर देते हैं. उन्हें प्रभु चावला की अमर सिंह से हुई बातचीत को सुना और पढ़ा देते हैं. प्रभु चावला महान हैं. वो नीरा राडिया के साथ बातचीत करते हुए पकड़े जाते हैं और अमर सिंह के साथ भी बातचीत करते हुए सरेआम हो जाते हैं. इस प्रकार प्रभु चावला अपने मार्केट इकानामी के दौर वाली मीडिया के ''सुपर टून हीरो'' है. सो, प्रभु चावला के लिए मंचों, नौकरियों, माध्यमों की कमी नहीं है. लीजिए, महान प्रभु चावला के अमर सिंह से बातचीत के संवाद (ट्रांसक्रिप्ट) को पढ़िए. संवाद लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने काफी मेहनत करके टेप सुन सुन कर इसे तैयार किया है और भड़ास4मीडिया को मुहैया कराया है. उन्होंने वक्त आने पर अपने नाम की घोषणा करने को कहा है, सो फिलहाल उनके नाम को यहां प्रकाशित नहीं किया जा रहा है. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


देखिये हम हरामी आदमी हैं, अब तो हम नकवी की चोदने में लगे हैं... : अमर सिंह

नीरा राडिया, वीर सांघवी और बरखा दत्‍त की करतूतों ने पत्रकारिता जगत को तो शर्मसार किया ही है, रही-सही कसर प्रभु चावला ने पूरी कर दी। सीधी और सही बात में बेहद धाकड पत्रकार की खाल ओढने वाला यह शख्‍स हकीकत में कितना कायर, डरपोक और दब्‍बू है, कि अमर सिंह की भद्दी गालियां सुनने के बाद भी उसके चरण चूमने में लगा रहा। नेताओं पर कीचड उछलवाने की साजिशों का मोहरा बन कर उछालने में जुटे इन लोगों का यह घिनौना चेहरा, पत्रकारिता को अपने जीवन का आदर्श और लक्ष्‍य बनाने का सपना पाले युवाओं को कितना सदमा पहुंचाएगा, इसकी तो कल्‍पना तक कर पाना तक असंभव है। आइये, तनिक सुन लिया जाए दलाल-कुल श्रेष्‍ठ अमर सिंह की गुर्राहट भरी गालियों के सामने मिमियाते प्रभु चावला का असली गीदडनुमा चेहरा। हां, यहां यह बता देना जरूरी है कि देश का हर पत्रकार प्रभु चावला की तरह घिनौना नहीं होता। जाहिर है कि देश की पत्रकारिता प्रभु चावलाओं जैसे घटिया लोगों से नहीं, बल्कि जुझारू लोगों के दम पर चल रही है।

अमर सिंह के घर का फोन उठा:- हलो

प्रभु चावला:- हलो, प्रभु चावला बोल रहा हूं। अमर सिंह जी कहां हैं यार

जवाब:- जी सर एक मिनट।

प्रभु चावला:- हूं

कनेक्टिंग टोन---थैंक यू फॉर होल्डिंग, वी आर सॉरी फॉर इनकंवीनियंस आफ ट्रीटिंग यू आन होल्‍ड:::::

अमर सिंह:- हलो।

प्रभु चावला:- माननीय अमर सिंह जी।

अमर सिंह:- हां, मेरी बारह बजे से प्रेस है।

प्रभु चावला:- हां मेरी बात तो सुन लीजिए। अखबार में भी आपने छाप दिया हिंदुस्‍तान में आज, कि आपने कहा है कि माफी मांगिये नहीं तो हम केस करेंगे।

अमर सिंह:- हें हें हो हो हो हो

प्रभु चावला:- आज इतनी बडी पोलिटिकल डेवलपमेंट्स हो रही है। सीडब्‍ल्‍यूसी से इस्‍तीफा करा दिया। अब आप बारह बजे से क्‍यों चल रहे। पोलिटिक ज्‍यादा इंटरेस्‍टेड हैं। हम करेंगे इसके ऊपर। मैं वादा कर रहा हूं आपको।

अमर सिंह:- नहीं तो मैं बारह बजे इस पर कर देता हूं। हम क्‍या करें इस पर।

प्रभु चावला:- लेकिन। भाई आप नहीं, यू आर इंपोर्टेंट टू अस। आई एम नॉट टाकिंग एस ए,,,,अं अं इतनी रिज्‍यूमेंस आप देखिये ना, मैं तो सुबह से ही खडा होकर स्‍टूडियो में नटवर सिंह की ले रहा हूं, सोनिया गांधी की ले रहा हूं।

अमर सिंह:- नहीं। आप यह देखिये ना कि आप भले किसी की भी लें। मैं ऐज ए ब्रदर बोल रहा हूं।

प्रभु चावला:- नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ना, प्रेस में स्‍टेटमेंट----

अमर सिंह:- देखिये मेरी पार्टी, हमारी--

प्रभु चावला:- ( बीच में टोकते हुए) अरे सुन तो लो मेरी बात। क्‍योंकि मैं आपकी सेंटीमेंट्स की भावनाओं की रिस्‍पेक्‍ट करता हूं। मैंने तो आपसे वादा किया है आपसे। मेरी बात अभी अरूण पुरी से हो नहीं पायी है अभी तक। अब यह किसी को बोलना मत। पूरी बात। मैं मैं इसलिए कि मैंने आपसे कहा था कि उसके बाद मैं काल बैक करूंगा। तो आपसे यह बात फिगर आउट हो जाएगी उसके बाद----

प्रभु चावला:- नहीं करेंगे फिगर आउट नहीं करूंगा। अभी तो हम उसको काट कर दिखा रहे हैं। अभी तो हम उसको नान स्‍टाप दिखा रहे हैं नटवर, पार्लियामेंट ये वो, दुनिया भर का। उसके बाद, आप समझिये कि मैं तो सोया भी नहीं। पूरी रात सुबह से यहीं खडा रहा हूं। पता नहीं आपने मुझे देखा कि नहीं देखा। मगर मैं लगातार खडा ही रहा यहां पर। मैं तो चला ही रहा हूं। आप तो जो करेंगे, वो तो करेंगे ही। इसमें तो ---अरूण पुरी आपके साथ हैं, मैं आपके साथ हूं। किस तरीके से वो करना चाहेंगे। आप भी चाहेंगे कि हो जाए हम भी चाहेंगे कि हो जाए, मगर इसको लीगल कंफ्रंटेशन में बदलना---

अमर सिंह:- ये ये बताइये कि घोटाले का जो बाप होता है, आपकी सिंपेथी अलग है, वहां मीटिंग होती है। कोई हमारी बात मानते हैं क्‍या लोग---

प्रभु चावला:- नहीं नहीं। उ उसके बाद तो मैंने रूकवा ही दिया था ना झगडा करके। इसके बारे भी झगडा करूंगा मैं। झगडा---

अमर सिंह:- अब क्‍या झगडा करोगे, अब तो ये सब चल गया है। अब उसके बाद तो ---

प्रभु चावला:- चलने को तो, चलने की क्‍या बात करते हो---

अमर सिंह:- यहां तो हमारी इज्‍जत ले ली गयी। यहां तो हमारे तो घुस गये। बडी मुश्किल से मिलता है कोई आदमी।

प्रभु चावला:- नहीं अमर सिंह जी बिलकुल ठीक कह रहे हैं आप। मैं तो सिर्फ मैंने तो इसीलिए मैंने आपसे कहा था कि मैं आपको गेटबैक करूंगा। हालांकि मैं ऐसे चलाता नहीं। मैंने तो जब तक उनसे डिस्‍कशन नहीं हो जाता कि किस तरह चलाना है, पहली बार चलेगा अगर चलेगा तो, क्‍यो तो बॉस जब तक दफ्तर में नहीं---

अमर सिंह:- या तो नहीं चले, या तो अरूण पुरी में इतनी डीसेंसी हो कि नहीं भी चलना हो तो हमसे फेवर मांगे, क्‍योंकि या तो अरूण पुरी---

प्रभु चावला:- नहीं नहीं आपसे बात करेगा वो। फेवर भी मांगेगा।

अमर सिंह:- फेवर भी नहीं मांगे, लेकिन यह मैटर जो है, हलो

प्रभु चावला:- हां

अमर सिंह:- तो फिर कि यह मैटर पॉलिटिक्‍स का नहीं है, ये हलो, घोटाले का बाप बोल दे, घोटाले से रहा, हलो

प्रभु चावला:- जी जी

अमर सिंह:- हम हर दम घोटाला करते हैं और आपका जर्नलिस्‍ट एथिक्‍स हैं कि आप जिसकी चाहें उसकी मां चोद दें। जिसके घर में चाहें बेडरूम में घुस जाएं। हेलो हेलो

प्रभु चावला:- नहीं नहीं, वो बात आप, वो ठीक कह रहे हैं। मैं उसके बारे में, आप तो, मैं, मैं तो, मैं तो कुछ भी नहीं कह रहा हूं। मैं तो आप तो, मैं तो आप से भी---

अमर सिंह:- नहीं, मैं आपको बता रहा हूं कि जेनुइनिली

प्रभु चावला:- जी

अमर सिंह:- ही इस वेरी मच अपसेट, यू वी कम टू नो एंड ही इस हेल्‍दी, हेलो, बाई हिस बिहैवियर। ऐंड, हलो,

प्रभु चावला:- हां

अमर सिंह:- ऐंड, ऐंड बैड रिलेशनशिप विद अमिताभ बच्‍चन। और नो राइम ऑफ रीजन, इस नॉट---

प्रभु चावला:- नो राइम ऑफ रीजन, आई एग्रीड। पर मैं तो यह कह रहा हूं कि आज जो इश्‍यू है ना।

अमर सिंह:- नहीं नहीं, इश्‍यू

प्रभु चावला:- अमिताभ बच्‍चन तो भगवान है ना उनको बडी उमर देगा और बहुत लडाई करने को तैयार रहेंगे वो। लेकिन आज जो इश्‍यू चल रहा है ना, इंडिया सुबह से लेकर आजतक से अभी तक से लेकर के, कोई भी स्‍टोरी हम अमिताभ बच्‍चन पर कैसे हैं वो, कि वो बेहतर हैं, वाक कर रहे हैं ना---

अमर सिंह:- अरे तो बारह बजे बोलकर बोलना हो तो कवर कराइये

प्रभु चावला:- हां, वो तो हम करवा ही दूंगा। पर आप नोटिस की थोडी, नोटिस पर। आप किसी से कुछ बात ही मत करो ना। हर अखबार में छप जाती है जो हमारी-आपकी बात होती है।

अमर सिंह:- हूं

प्रभु चावला:- आपने तो, कल चैनल सेवन में भी चल गयी और आज सुबह हिंदुस्‍तान टाइम्‍स में छप गया है--

अमर सिंह:- हूं।

प्रभु चावला:- कि नोटिस दे दिया है और नोटिस देंगे अगर वो माफी नहीं मांगेंगे। थोड़ा, मैं आपको बोलकर... आप, आपकी वो जो आप बोलकर के ऊपर बोलेंगे, वो तो मैं चलवाऊंगा ही। पर नोटिस की बात आप आज प्‍लीज मत बोलना। मैं हाथ जोड़ रहा हूं आपके आगे।

अमर सिंह:- नहीं, अ अ नहीं, अब आप इतना बोलोगे तो फिर कहां बोलूंगा। हेलो

प्रभु चावला:- हां, मैं हाथ जोड़ रहा हूं आपके आगे।

अमर सिंह:- अरे खतम हो गयी बात।

प्रभु चावला:- बड़े भाई हैं आप। और मैं भाई का अधिकार यूज कर रहा हूं।

अमर सिंह:- नहीं नहीं, ये बात खतम हो गयी, लेकिन क्‍या है कि हमारे आगे हाथ जोड़ने से कोई सुनता नहीं है।

प्रभु चावला:- नहीं नहीं मैं मैं मैं। आप जो कह रहे हैं मैं उसके साथ हूं। मैं आपके साथ खड़ा होकर लडूंगा।

अमर सिंह:- नहीं नहीं। हम, हम भी कई बार हाथ जोडकर कहते हैं कि घोटाला नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दिया।

प्रभु चावला:- हां, तो चलवाया था ना सर। नहीं नहीं। अब छोडिये ना। अब इस चीज को एक बार अरूण पुरी आएंगे तो मैं उनके साथ बैठकर दफ्तर में---

अमर सिंह:- फिर फिर। मने (मतलब), यू, आइदर यू आर ए फ्रेंड---

प्रभु चावला:- आई ए फ्रेंड इन दिस केस, ऐट दिस मूमेंट---

अमर सिंह:- नहीं नहीं। देन बिहैव लाइक ए फ्रेंड। ओके। ऑर यू आर ए फॅकर। देन, देन ट्रीट पीपुल टू फॅक्‍ड।

प्रभु चावला:- न, ना। उसमें एं जैसा कि, उसमें, काश कि मेरे हाथ में आजतक की ए ए एडीटरशिप होती। कम्‍प्‍लीट। तो मैं देखता---

अमर सिंह:- और और बास, आज आप अपना भाईचारा आजतक के लिए मांग रहे हैं ना हमसे।

प्रभु चावला:- हां, इंडिया टुडे में अगर छपेगा तो उसी दिन मैं इस्‍तीफा दे दूंगा।

अमर सिंह:- नहीं नहीं। आई ऐम सॉरी, लेकिन आपने आपने अपना वीटो आजतक के लिए मांग लिया ना।

प्रभु चावला:- मैंने थोडी देर के लिए इसलिए कि मेरी बात हो जाए, उसके बाद मैं अपना वीटो विड्रा कर लूंगा।

अमर सिंह:- नहीं, नहीं, देखिये, यही बात है ना कि आपने अपना वीटो आजतक के लिए मांग रहे हैं ना। यह कोई छोटी चीज नहीं है। यह वीटो जो है ना, बडे भाई का वीटो, यह कोई छोटी चीज नहीं है। सम्‍बन्‍धों का---

प्रभु चावला:- हां, तो बस, यह मैंने इसलिए किया कि इ‍ट इस रॉंग। आपके साथ जो हुआ है, ज्‍यादती हुई है। और मैं आपके साथ ज्‍यादती का---

अमर सिंह:- ले लेकिन देखिये। आप तो जानते हैं कि हम हरामी आदमी हैं। सारे पेशेंट्स ने लिख दिया है। अब तो हम नकवी की चोदने में लगे हैं। जो उसने---

प्रभु चावला:- नहीं, आप प व आज वो उसने, आज आज आप लखनऊ से जाएंगे ना। मैं तब तक अरूण से करके इसको निपटाता हूं करके। समझे। अ अभी तो न न नटवर की नौकरी तो ले लूं मैं। आप भी तो उसकी लेने में लगे हैं मैं भी ल लगा हूं।

अमर सिंह:- नहीं, मैं तो सोनिया की लेने में लगा हूं। नटवर तो---

प्रभु चावला:- हां, नहीं। आपने सुना नहीं। मैंने कहा कि सोनिया पर आने वाला है अभी इसके बाद। तो फिर सिंह साहब आप अभी कहीं नहीं भेजना कैमरे को। वो मैं कर लेता हूं उसको।

अमर सिंह:- कोपरनिकस में।

प्रभु चावला:- हां मैं भिजवाता हूं उसको।

अमर सिंह:- ओके

प्रभु चावला:- लेकिन अभी बोलना मत। प्‍लीज। किसी अखबार को भी कि आजतक और हमारे बीच के चैप्‍टर को। इसको निपटाता हूं मैं।

अमर सिंह:- नहीं, हम नहीं बोलेंगे।

प्रभु चावला:- ठीक है। थैंक्‍यू।

(और फिर फोन क्रेडिल पर रख दिया जाता है।)

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'महान पत्रकारों' के राडिया से वार्ता का हिंदीकरण

इस टेप को सुनने के बाद तो हर कोई कहेगा- प्रभु चावला दलाल है!


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