क्या प्रधानमंत्री को लूट की खुली छूट होनी चाहिए?

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: स्वामी रामदेव के अनशन पर उठ रहे सवाल का जवाब भी मिलना चाहिए :  स्वामी  रामदेव का अनशन परेशानी खड़ी करने वाला है :  भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम ज्यादा अहम है : प्रधानमंत्री  के पास देश की सुरक्षा से जुड़ी सूचना होती है साथ ही कई मंत्रालय सीधे उसके हाथ में होते हैं तो क्या ऐसे में प्रधानमंत्री को लूट की खुली छूट होनी चाहिए? न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार किस हद तक अपनी जड़ें जमा चुका है?

इसका पता इससे चलता है कि सुप्रीम कोर्ट का एक इमानदार मुख्य न्यायधीश भी हाईकोर्ट के भ्रष्ट जज के खिलाफ जांच की इजाजत नहीं दे पाता जबकि  उस भ्रष्ट जज के रिटायर होने पर अगले ही दिन सीबीआई उसे गिरफ्तार कर लेती है। ऐसे में लोकपाल के दायरे में इन्हें क्यों न लाया जाए? ये बातें कही समाजिक कार्यकर्ता और लोकपाल पर बनी ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य अरविंद केजरीवाल सीएनईबी के शो जनता मांगे जवाब में। इस शो में अरविंद केजरीवाल, समाजिक कार्यकर्ता और फिल्म निर्देशक राजा बुंदेला, वरिष्ठ पत्रकार  सत्येंद्र रंजन और समाजिक कार्यकर्ता मनीष सिसोदिया ने शिरकत की।

बहस के दौरान  माहौल उस समय गर्मागरम हो गया जब वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र रंजन ने स्वामी रामदेव के आंदोलन पर सवाल खड़ा किया और कहा कि उनका आंदोलन परेशानी खड़ी करने वाला है। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव भी प्रधानमंत्री बन जाएं तो भ्रष्टाचार और कालेधन की समस्या एक दिन में खत्म नहीं हो जाएगी। इसपर समाजिक कार्यकर्ता और फिल्म निर्देशक राजा बुंदेला ने कहा कि इस देश का दुर्भाग्य है कि जब भी कोई इस देश में परिर्वतन लाने की कोशिश करता है तो उसको नकारात्म तरीके से देखने की कोशिश की जाती है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या गांधीजी ने आजादी के आंदोलन में बिड़ला से आर्थिक मदद नहीं ली? बुंदेला ने कहा कि इस तरह के आंदोलन के उदेश्य पर सवाल खड़ा नहीं होना चाहिए। यह बहस जब ज्याद उग्र होने लगी तो शो के होस्ट और संपादक अनुरंजन झा ने हस्तक्षेप कर मामला शांत किया।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि  भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मुहिम चली है और यह देश में मुद्दा बना है यह बेहद अहम है। अब तक हम कहते थे कि इस देश में कुछ भी नहीं हो सकता लेकिन अब मानसिकता बदल रही है.. अब हम कहते हैं कि हो सकता है और हम सब एक साथ खड़े हो सकते हैं। स्वामी रामदेव और अन्ना के आंदोलन में  अंतर को लेकर एक बार फिर से बहस गर्म हो गई जब राजा बुंदेला ने अन्ना के आंदोलन को संभ्रांत वर्ग का आंदोलन करार दिया और कहा कि स्वामी रामदेव का आंदोलन आमलोगों का आंदोलन है। इस पर सत्येंद्र रंजन ने कहा कि अन्ना के आंदोलन पर भी सवाल उठा जिसका  जवाब उससे जुड़े लोगों  ने दिया और स्वामी रामदेव के अनशन पर उठ रहे सवाल का जवाब भी मिलना चाहिए।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना और स्वामी रामदेव के आंदोलन को मिले मीडिया कवरेज को सभी वक्ताओं ने तारीफ की लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मीडिया को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि इस तरह के आंदोलन को लेकर किसी तरह भ्रम पैदा न हो। सीएनईबी के इस शो का प्रसारण 4 जून शनिवार रात 8 बजे होगा और इसका दोबारा प्रसारण रविवार सुबह 11 बजे होगा। प्रेस रिलीज


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Comments (1)Add Comment
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written by sunil kumar sharma, June 05, 2011
The present problem of corruption is like a shower which we take for bath in our house .It starts from the top because if you stop giving water supply to the said shower it will not sprinkle water , in the same way at the top the amount of collection is more compaired to the bottom so first try to restrict corruption from the top level that is to say Beaurocrat- leader-Industrialist-religious preacher- contractor- Naxus.

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