सरकार ने चैनलों को 'समझाया', अन्‍ना का लाइव टेलीकास्ट बंद

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: अपडेटेड : केंद्र सरकार अन्‍ना हजारे और बाबा रामदेव से डर गई है. इसी कारण इनकी आवाज दबाने और इन्‍हें निपटाने के लिए गैर लोकतांत्रिक तरीके अपनाए जा रहे हैं. पहले लाठी डंडों के जरिए रामदेव के भक्तों को दिल्ली से भगाया, अब रामदेव व अन्ना की आवाज जनता तक न पहुंचने देने की तैयारी की गई है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज चैनलों को एक एडवायजरी भेज कर अन्‍ना हजारे और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों की कवरेज में संयम बरतने की सलाह दी है.

इस सलाह को एक तरह की धमकी माना जा रहा है. और, सलाह आते ही चैनल भी आज्ञाकारी होते दिखने लगे हैं. एडवाजयरी में तर्क दिया गया है कि बाबा और अन्ना के कार्यक्रमों की लाइव कवरेज से देश में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है. दंगे व उपद्रव भड़क सकते हैं. कानून-व्‍यवस्‍था की समस्‍या पैदा हो सकती है. एडवायजरी मिलने के बाद ज्‍यादातर न्यूज चैनलों ने अन्‍ना के अनशन का लाइव खत्म कर दूसरे प्रोग्राम दिखाने लगे.

लगता है कि सचमुच में सरकार अन्‍ना हजार और बाबा रामदेव से इतनी डर गई है कि अब यह कोई भी अलोकतांत्रिक कदम उठाने को तैयार हो गई है. इसके मंत्री बौखलाए हुए हैं. आपातकाल जैसे हालात बनते चले जा रहे हैं. शांतिपूर्ण तरीके से सत्‍याग्रह कर रहे लोगों पर रात के अंधेरे में लाठियां और आंसू गैस के गोले बरसाए जाते हैं तो दिन के उजाले में मीडिया पर अघोषित प्रतिबंध लगाया जा रहा है. धंधेबाज मीडिया हाउस भी सरकारी इशारा होने के बाद डरे हुए लगते हैं. टाइम्स नाऊ तो लगातार दिखा रहा है अन्ना को लेकिन बाकी चैनलों ने लाइव कवरेज खत्म कर दिया. अब ये चैनल अन्ना और बाबा पर सिर्फ कुछ प्रोग्राम या पैकेज दिखाएंगे, दिन भर लाइव की परंपरा खत्म हो जाएगी. सूत्रों का कहना है कि सरकार इसलिए भी डरी है क्योंकि लाइव दिखाए जाने से बाबा व अन्ना को देशभर से जनसमर्थन मिल रहा है और यह जनसमर्थन कांग्रेस के खिलाफ है जिसका असर आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ पड़ सकता है.


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