''ईटीवी को रिपोर्टर नहीं तीन साल के लिए बंधुआ मजदूर चाहिए''

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श्रीमान यशवंत जी,  सादर प्रणाम, मैं आप को यह पत्र इस लिए लिख रहा हूं क्योंकि आप को पता चल सके कि आज देश का सबसे बड़ा सच दिखाने वाले ईटीवी में कितना शोषण होता है?  ईटीवी के मीडिया रिपोर्टरों की क्या हलात होती है?  श्रीमान जी मैंने ईटीवी राजस्थान में आवेदन किया था. आवेदन के बाद उन्होंने मेरा एक लिखित पेपर लिया और उस पेपर में पास होने पर उन्होंने मेरा इंटरव्‍यू लिया.

इसके बाद ईटीवी के एचआर ने मुझे ऑफर लेटर भेजा. मैंने ऑफर लेटर पढ़ कर उन से कुछ बातें, जो ये थी - मैंने मेरा गुजारा भत्ता बढ़ाने, एक साल के बाद क्या वेतन मिलेगा, मेरी पोस्टिंग कहां होगी और मेरे द्वारा भरा जाने वाले बाण्‍ड की क्या वैल्‍यू होगी इस बात का जबाब मागा था.?

अंग्रेजी में लिखी मेल भी भेज रहा हूं-  ''... Dear MR. A Gopal Rao, Thank you for the offer letter dated 26-05.2011 being sent to me via email. it will be an honour for me to join your esteemed organization.I wish to clarify certain matters before I may send the necessary documents as asked by you. Kindly explain :1 The company has offered a monthly stipend of Rs. 8000/- per month which is less than my presently withdrawn salary. If the stipend can be increased at par with my existing salary. 2  Will the boarding and lodging would be provided to me at your cost. 3 After the completion of my training period, will I be posted in Rajasthan. 4 What is the bond value which I have to accept and what are the terms and conditions of the company in case of my not fulfilling/completing the bond period.Also, I may request you to extend the period of my joining to 15-07-2011 as I have to notify my present organization to relieve me.I hope to hear from you at the earliest by mail.Thanking you in anticipation.With best regards ,VIKESH SONI.''

इस मेल को पढ़ कर ईटीवी के एचआर ने मुझे फ़ोन किया और मेल पर जानकारी देने से इनकार कर दिया? ...और कहा कि आप मेरी सुन लीजिये ...और फ़ोन पर ही उन्होंने मुझे मेरे प्रश्‍नों का जबाब दे दिया. देख लो श्रीमान जी, ईटीवी वाले रिपोर्टर नहीं बंधुआ मजदूर रख रहे हैं और वो भी तीन साल के लिए जो उन के गुलाम बन कर रह सकें. वो इस बंधुआ मजदूर को काबू में करने के लिए तीन साल का एक सरकारी कर्मचारी का बाण्‍ड भरवाते हैं, जिस में लिखा होता है कि यदि ऑफर लेटर प्राप्त व्‍यक्ति नौकरी तीन साल से पहले बीच में छोड़ कर चला जाता है तो उस पर हमने जो खर्चा लगाया है वो हमें मिल जाए.  बाण्‍ड में लिखा है कि आप पहले साल नौकरी छोड़ कर चले गए तो आप को 1.25 लाख, दूसरे साल नौकरी छोड़ कर चले गए तो आप को 1  लाख, तीसरे साल नौकरी छोड़ कर चले गए तो आप को 75 हजार रुपये ईटीवी को दे कर अपनी जान छुडानी पड़ेगी।

यही नहीं यशवंत जी नौकरी भी हमेशा हैदराबाद में करनी पड़ेगी और ट्रांसफर भी नहीं होगा?  अब आप ही बताओ कि इंसान वहां पर 8000 रुपयों में नौकरी करे या अपने बच्चों को पाले?  एक साल बाद जब प्रशिक्षण पूरा होगा तब वेतन 11300 रुपये होगा यानी कि नंगा नहायेगा क्या और निचोडे़गा क्या?  ईटीवी एक तरफ तो कहता है कि हम लोगों की आवाज़ को जुबान देते हैं. मगर ईटीवी ही अपने रिपोर्टरों की आवाज़ को दबा रहा है और उन्हें बंधुवा मजदूर बना कर रख रह है. अब ईटीवी को जैसे चैनल का ये हाल है तो बाकी का क्या हाल होगा.

आज देश के लोगो की आवाज़ बनने वाले मीडिया रिपोटरों की आवाज़ को कौन गति देगा. हो सकता है कि इस मेल को पढ़ कर ईटीवी मुझे हमेशा के लिये काली सूची में डाल दे मगर मैं अपनी किस्मत पर विश्‍वास करता हूं. ऊपर वाले ने जब मुझे चोंच दी है तो वो मेरे चुगे का भी इंतजाम कर देगा, ये उस की जिमेदारी है मेरा काम कर्म करना है! जय हिंद!!

विकेश कुमार सोनी

श्रीगंगानगर,  राजस्‍थान

ईटीवी


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