''ईटीवी वाले पागलपन के शिकार हैं''

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अगर आप मीडिया मे नए हैं और ईटीवी में जाना चाहते हैं तो उसके पहले इसे जरूर पढ़ें। ईटीवी पहले तो लोगो को बंधुआ मजदूर बनाना चाहता है, और इतना मानसिक रूप से प्रताडि़त करता है कि आप अगर इस मीडिया हाउस के चक्कर में फ़ंस गए तो समझिए कि आप को बर्बाद करके ही छोड़ेगा। 2009 में मैं भी पास आउट हुई थी, जिसके बाद मुझे रिटेन टेस्ट के लिए ईटीवी से कॉल आया।

मैंने टेस्ट क्लीयर किया उसके बाद इंटरव्यू में भी मेरा सलेक्‍शन हुआ। चूंकि ये मेरे लिए पहला मौका था इसलिए मैं इनके झांसे में आ गई। मैंने सारी फ़ारमेल्टीज पूरी की। मेरा भोपाल आने जाने में श्योरिटी को बुलाने में हज़ारों रुपए खर्च हुए। कभी कुछ मांगने के लिए, कभी कोई पेपर मांगने के लिए भोपाल बुलाते रहे। सब कुछ लेने के बाद एक साल बाद भी मुझे ज्‍वाइनिंग नहीं मिली।

एक साल बाद भोपाल से मुझे बोल दिया गया कि आप का सलेक्‍शन कैंसिल हो गया है। मैंने मान लिया क्योंकि मैं कहीं और जाब कर रही थी। लेकिन उसके बाद हैदराबाद से फ़ोन आया कि क्या आप ज्वाइन करना चाहती हैं। मैंने हां कहा, तो मेरा ऑफ़र लेटर मंगवाया। इन सब के बाद फ़िर भोपाल से फोन आया कि आप को फ़िर से टेस्ट देना होगा। मैंने फ़िर टेस्ट दिया। और फ़िर सलेक्ट हो गई। इस बार जब मुझे इंटरव्यू के लिए बुलाया तो मैंने मना कर दिया।

मैं सभी से यह कहना चाहती हूं कि ईटीवी वालों में न तो आपस में ताल मेल है और न ही अक्ल। आप सबको मैं यही कहना चाहूंगी कि ईटीवी वाले पागल हैं, इसलिए ईटीवी में जाने से पहले सौ बार सोचें,  क्योंकि यहां समय और पैसों की बरबादी के अलावा कुछ भी नहीं मिलेगा। मैं एक बात और कहना चाहूंगी कि कभी भी कोई भी पेपर्स इन्हें न दें। मैंने अपने कई पेपर्स दे दिए हैं,  जिन्हें ईटीवी प्रबंधन ने आज तक नहीं लौटाया है। मैंने कई बार फोन करके अपने डाक्‍यूमेंटस मांगें भी, लेकिन ये प्रबंधन सिर्फ़ लेना जानता है।

मैं भड़ास के जरिए एक और बात कहना चाहूंगी कि अगर वो अपना ये दो कौड़ी का टेस्ट लेकर बेस्ट बनने का दिखावा कर रहे हैं तो पहले अपना स्टैंडर्ड सुधारें। मेरे मन से बहुत सारी गालियां निकल रही हैं ईटीवी के लिए, लेकिन मैं ऐसा करके ईटीवी प्रबंधन जितना गिरना नहीं चाहती। ईटीवी के वजह से मैंने बहुत कुछ खोया है। मेरा पैसा, मेरा समय, मानसिक प्रताड़ना। मैं नही चाहती कि और भी इस फील्‍ड में आने वाले इनके चंगुल में फ़सें।

कुमारी संतोष तिवारी

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