पत्रकार शलभ से बदतमीजी करने वाला एएसपी और सीओ सस्पेंड

E-mail Print PDF

लखनऊ के पत्रकारों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई. और इस एकजुटता का असर भी दिखा. आईबीएन7 के यूपी ब्यूरो चीफ शलभमणि त्रिपाठी को एएसपी बीपी अशोक और सीओ अनूप कुमार द्वारा जबरन उठाकर थाने ले जाने और मारपीट व बदतमीजी किए जाने की घटना की सूचना के बाद लखनऊ के सभी पत्रकार एक एक कर इकट्ठा होने लगे. सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित पत्रकार हजरतगंज कोतवाली की तरफ पहुंचे और वहां मौजूद दरोगा-सिपाहियों को जमकर हड़काया और कानून के दायरे में रहने की नसीहत दी.

कुछ एक पत्रकार इतना गुस्सा थे कि वे पुलिस वालों को पीटने पर आमादा हो गए लेकिन उन्हें अन्य पत्रकार साथियों ने रोका और वही हरकत न करने की अपील की जो एएसपी और सीओ ने पत्रकार के साथ किया. पत्रकारों के जत्थे ने वहीं फैसला लिया कि अपने बीच के पत्रकार साथी शलभ के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का वह बदला इसी क्षण लेंगे. सभी ने निर्णय लेकर मुख्यमंत्री आवास की तरफ कूच कर दिया. इसकी भनक बड़े अफसरों को लगते ही सबके हाथ पांव फूल गए. पत्रकार शांतिपूर्ण तरीके से सीएम आवास के बाहर पहुंचे और धरने पर बैठ गए.

पत्रकार मुदित माथुर आनन फानन में मुख्यमंत्री के सचिव नवनीत सहगल के यहां पहुंचे और वहां से बात करके शलभ के पास आए. वे शलभ को अकेले चलकर नवनीत सहगल से बात करने के लिए कहने लगे. तब सड़क पर धरने पर बैठे वीकेंड टाइम्स अखबार के संपादक संजय शर्मा ने चिल्लाकर कहां कि जिस अफसर को बात करना हो यहां सड़क पर आकर बैठे और यहीं पर शलभ से बात करे. कोई किसी अफसर के कमरे में अकेले बात करने नहीं जाएगा. यह ऐसा मामला है जिसमें कमरे में बात नहीं हो सकती. सभी पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के सचिव नवनीत सहगल व अन्य अफसरों को बात करने के लिए सड़क पर आकर बैठने को कहा.

अंततः पत्रकारों के गुस्से को देखते हुए और अपनी पुलिस के खराब व्यवहार को रीयलाइज करके नवनीत सहगल को सड़क पर आना पड़ा और पत्रकारों के बीच बैठकर बात करना पड़ा. पत्रकार आरोपी पुलिस अफसरों के तबादले की बात सुनकर टस से मस नहीं हुए. तब जाकर अफसरों ने आरोपी एएसपी बीपी अशोक और सीओ अनूप कुमार को निलंबित करने और शलभ मणि त्रिपाठी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किए जाने की घोषणा की. इस ऐलान को सुनने के बाद पत्रकारों ने अपना धरना खत्म कर दिया और अपने घरों की तरफ रवाना हो गए.

ज्ञात हो कि यूपी में जिस तरह कानून व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है और इसे मीडिया में संज्ञान लिया जा रहा है, उससे कुछ खास बसपाई किस्म के अफसर बौखला गए हैं और अपना जोर पत्रकारों पर ही दिखाने लगे हैं. आईबीएन7 पर शलभ मणि त्रिपाठी और उनकी टीम के लोगों ने डा. सचान हत्याकांड का परत दर परत खुलासा किया. डा. सचान हत्याकांड के मीडिया में खुलासे से बौखलाए अफसरों ने खबर भेजने वाले और लगातार खोजी रिपोर्टिंग करने वाली आईबीएन7 की लखनऊ टीम को निशाना बनाया.

शलभ मणि त्रिपाठी के प्रति पहले भी बसपा सरकार का उत्पीड़नात्मक रवैया रहा है. बहरहाल, यूपी में खराब ला एंड आर्डर के इस मुश्किल दौर में मीडियाकर्मियों ने अपने अधिकारों के प्रति जो एकजुटता दिखाई है, वह काबिलेतारीफ है. इसके लिए लखनऊ के पत्रकारों को बधाई दी जानी चाहिए. इन पत्रकारों की बदौलत बेलगाम होती जा रही पुलिस व्यवस्था पर थोड़ा बहुत अंकुश लग सकेगा. लखनऊ की घटना से प्रदेश के दूसरे जिलों के मीडियाकर्मी भी सबक ले सकेंगे और भविष्य में ऐसी किसी घटना के दौरान एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए.


AddThis