शलभ प्रकरण : जो सिस्टम से लड़ेगा, दलाल उसे दलाल कहेगा

E-mail Print PDF

: यूपी सरकार के अफसरों के इशारे पर लखनऊ के चंद दलाल पत्रकारों ने आईबीएन7 के जर्नलिस्ट शलभ व मनोज के खिलाफ शुरू किया दुष्प्रचार अभियान : पत्रकारिता का यह दुर्भाग्य है कि यहां जितने ईमानदार हैं, उनसे सौ गुना ज्यादा दलाल हैं. दिल्ली, लखनऊ समेत जितनी भी राजधानियां हैं, वहां खासतौर पर नेता-अफसरों की तरफ से सरकारी दलाल के रूप में कथित पत्रकार पाले जाते हैं.

इन दलाल पत्रकारों का काम विज्ञापन और दलाली की मलाई खाना होता है और सरोकार या सिस्टम से जंग वाले मुद्दे पर दलाली शुरू करना होता है ताकि लड़ने वाले पत्रकारों को बदनाम कर उन्हें अलग थलग किया जा सके और अपने आकाओं को लाभ पहुंचाया जा सके. लखनऊ के लगभग दर्जन भर मान्यताप्राप्त बसपाई दलाल पत्रकारों ने यह काम शुरू कर दिया है. इन लोगों ने पुलिसिया उत्पीड़न के शिकार आईबीएन7 के पत्रकार शलभ मणि त्रिपाठी और मनोज राजन के खिलाफ गुमनाम मेल भेजो अभियान शुरू कर दिया है. इस मेल के जरिए शलभ और मनोज राजन पर तरह तरह के आरोप लगाए गए हैं. मेल की भाषा और कही गई बात से यह जाहिर है कि इन पत्रकार महोदय को शलभ और मनोज को बदनाम करने के लिए बसपा सरकार की तरफ से ठेका मिल चुका हैं. इस मेल में शलभ और मनोज द्वारा खरीदे गए मकान का जिक्र किया गया है तो किसी बड़ी राशि को लेकर इनके नौकर द्वारा भागने की बात बताई गई है.

पर दुर्भाग्य यह कि मेल भेजने वाले ने अपने नाम और पहचान का खुलासा नहीं किया है. दलालों ने अपने प्रभाव के जरिए इन मेलों को यहां वहां छपवाने का प्रयास शुरू कर दिया है ताकि लखनऊ में राज्य सरकार के बेहूद अफसरों के खिलाफ चल रहे पत्रकारों के आंदोलन में फूट डालकर सरकार को निर्णायक बनने का मौका दिया जा सके. मेल भेजने वाले और शलभ के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने वालों से कुछ सवाल है, अगर वे इन सवालों के जवाब दे दें तो उनकी कही गई बातों पर सोचा-विचारा जा सकता है....

  • 1. आखिर क्या वजह है कि आईबीएन7 को यूपी सरकार ने राज्य में दिखाए जाने पर अघोषित पाबंदी लगा दी है?

  • 2. आखिरी आईबीएन7 ही लगभग हर महीने एक दो बार क्यों यूपी में सरकार द्वारा अघोषित रूप से आफ एयर करा दिया जाता है?

  • 3. क्या कोई दूसरा बड़ा चैनल भी है जो राज्य सरकार के कोप का शिकार हो?

  • 4. अगर नहीं तो ये क्यों नहीं मान लिया जाए कि दूसरे सारे बड़े चैनल के मालिक यूपी के मामले में दलाली कर रहे हैं? जिस तरह टाइम्स आफ इंडिया ने मायावती को क्लीनचिट देकर अपनी खुली दलाली का मुजाहिरा कर दिया है.

  • 5. डा. सचान हत्याकांड में शलभमणि त्रिपाठी ने लगातार आक्रामक व खुलासे वाली रिपोर्टिंग की या नहीं?

  • 6. क्या यूपी सरकार ने शलभ को पहले से ही टारगेट नहीं कर रखा है?

  • 7. क्या शलभ को परेशान करने के लिए राज्य सरकार ने समय समय पर उनका उत्पीड़न नहीं किया है?

  • 8. लखनऊ में किस पत्रकार पर बेहतरीन व धारधार रिपोर्टिंग को लेकर पिछले चार वर्षों में तीन सरकारी एफआईआर दर्ज हुई है?
  • 9. अगर सरकार से शलभ की इतनी ही वारी न्यारी है तो शलभ व उनकी टीम बसपा सरकार के खिलाफ खबर लगातार क्यों करते रहते हैं?

  • 10. क्या यह सच नहीं है कि यूपी में करीब दर्जन भर से ज्यादा बड़े पत्रकार इन दिनों सिर्फ बसपा नेताओं और बसपाई अधिकारियों की जी-हुजूरी कर पैसे कमाते हैं और उनके इशारे पर पत्रकार राजनीति को ट्विस्ट देने की कोशिश करते हैं? और इसके प्रमाण यदा-कदा दिखते-मिलते रहते हैं?

यूपी समेत देश भर के पत्रकारों से अपील है कि जब भी कभी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ पत्रकारों का या किसी भी संगठन का बड़ा आंदोलन खड़ा होता है तो उस आंदोलन के नायकों को तरह तरह से बदनाम किया जाता है. यकीन न हो तो हाल फिलहाल के अन्ना और रामदेव के आंदोलनों को देख लीजिए. अन्ना का आंदोलन ज्यों खड़ा हुआ त्यों उनके सिपहसालारों भूषण पिता पुत्रों को टारगेट कर लिया गया और फिर एक एक कर कई लोग विवादों में घसीटे जाने लगे. रामदेव का आंदोलन खड़ा हुआ तो सरकार अब रामदेव व बालकृष्ण दोनों के पीछे हाथ धोकर पड़ चुकी है. दरअसल हम लोगों की स्मृति इतनी कमजोर है कि हम आंदोलनों के गुणा-गणित को अगले ही आंदोलन में भूल जाते हैं.

शलभ को कटघरे में खड़े करने वाले दलालों को यह चेतावनी मात्र है कि उनकी मेल आईडी की तफ्तीश शुरू हो गई है और उनके नाम का पता चलते ही उनकी पूरी कुंडली का वर्णन यहां वहां जहां तहां भांति भांति तरीके से किया जाएगा. फिलहाल सभी ईमानदार, संवेदनशील और प्रखर पत्रकारों से अपील है कि वे यूपी में आईबीएन7 की टीम पर अत्याचार करने वाले अफसरों को सबक सिखाने के लिए कमर कसे रहें और इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाएं ताकि जनता को समझाया जा सके कि यूपी की सरकार अपने घपले-घोटाले-हत्याओं पर से पर्दा उठाने वालों को किस तरह परेशान करती है.

यहां मैं खुद के बारे में साफ कर दूं कि मैं दुनिया का एक नंबर का कमीना, दलाल और चिरकुट हूं, या रहा हूं, या हो सकता हूं... पर मैं हर उस आंदोलन का साथी हूं जो सिस्टम के खिलाफ है, बड़े सवाल व सरोकार से संबंधित है और नरक समान हो चुके हालात पर सवाल खड़ा करने वाला है. शलभ से मेरा याराना नहीं है. शलभ कभी मेरे साथी हुआ करते थे, अमर उजाला वाराणसी में. और तब, इस रिपोर्टर की बेहतरीन खबरों की कापियों को एडिट करते हुए मैं इसके उज्जवल भविष्य के बारे में सोचा करता था. और, शलभ ने उसे सच साबित कर दिखाया. शलभ के अंदर जो साहस, जो धार, जो जज्बा रहा है, वह कायम है, और अगर उसे वे बचाए रखें तो वह दिन दूर नहीं जब यह शख्स पत्रकारिता में मील का पत्थर साबित होगा.

उस दौर में जब ज्यादातर पत्रकार अपने छोटे छोटे स्वार्थों के कारण सिस्टम से लड़ने से मुंह मोड़ चुके हों, स्पष्ट बोलने से इनकार कर चुके हों, आर-पार वाले मुद्दों पर चुप्पी साधे हों, खुलकर सामने आने में गुणा-भाग लगाते हों, शलभ का लगातार बड़ी खबरें ब्रेक करते जाना, सिस्टम से टकराते जाना बताता है कि वे औरों से अलग हैं. मैं शलभ या शलभ जैसे उन सभी पत्रकारों के साथ हूं जो लड़ते हैं, डरते नहीं हैं, जो खुलकर सामने रहते हैं, छुपकर वार नहीं करते. भड़ास4मीडिया ने समय समय पर लड़ाकू पत्रकारों का पक्ष लेकर यह दिखाया भी है कि यह पोर्टल सिर्फ और सिर्फ धारधार लोगों के साथ खड़ा होता है, वह चाहे जरनैल सिंह हों या शलभ मणि त्रिपाठी.

अभी कुछ दिनों पहले ही रांची में एक छात्र नेता ने जब कपिल सिब्बल की प्रेस कांफ्रेंस में उनसे थोड़ा तीखा सवाल कर दिया तो कांग्रेसियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया. दिल्ली में कांग्रेसी नेता के प्रेस कांफ्रेंस में जूता दिखाने वाले शिक्षक की पिटाई की घटना सबको पता ही है. तो मतलब यही है कि अगर आप सिस्टम से लड़ेंगे, सवाल पूछेंगे तो या तो आप पीट दिए जाएंगे या अगर आपको पीटने की औकात किसी में नहीं है तो आपको बदनाम करना शुरू कर दिया जाएगा.

यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया


AddThis
Comments (26)Add Comment
...
written by Digvijay Mishra, July 12, 2011
shalabh bhaiya n yashwant ji ,
namaskar.

hum log salabh ji jaise sacche journalist ki sacche dil se izzat tatha samman karte the, karte hain aur sada hi karte rahenge.

SALABH BHAIYA AAGE BADHO HUM TUMHARE SAATH HAIN.

DIGVIJAY MISHRA
A2Z NEWS
9453814300
...
written by SHAHNAWAZ KHAN, July 09, 2011
यशवंत जी अदब

मुझे आप जेसे लोगो को सलाम करने का दिल करता है आप जो भी लिखते हो उसे पड़ने के बाद लगता है आज भी देश में सच्चे और इमानदार लोग मोजूद है !
शालब भाई पर इलज़ाम लगाने वाले लोग सच में दलाल हैं इस पर मुझे इस लिए भी पूरा यकीन है की जुलाई 2010 में इस तरह के दलालों ने मेरे ऊपर भी इलज़ाम लगये थे और कहा था के की मुझे मेरे चेनल ने निकल दिया और में ये करता है और वो करता है लेकिन आज वो पुलिस प्रशसन के दलाल अपना थूका हुआ चाट रहे हैं !
और इसी तरह शालब भाई और आपके ऊपर इलज़ाम लगाने वाले दलाल फिर अपना थूका हुआ चाटेंगे !
]पत्रकारिता को इन आरोप लगाने वाले दलालों ने बदनाम कर दिया है ये लोग उस प्राणी की तरह हैं जो इन्सान का तो वफादार होता है लेकिन अपनी ही क़ोम का गद्दार होता है[
यशवंत जी आप और BHADAS 4 MEDIA पर विज़िट करने वाले सभी लोग मेरी भावनाओ को समझ गए होंगे !
में अल्लाह से येही दुआ करूँगा की वो आपको आपके मकसद में कामयाब करे और आपको दिन दुनी रात चोग्नी तरक्की अता फरमाए ........अमिन ..........


आपका छोटा भाई शाहनवाज़ खान मुरादाबाद
...
written by rupesh sharma, July 06, 2011
yashwant ji me aap ko salo se pad raha hu .mene aap ka wo bhi lekh pada hai jis me aap ke mata ji ke saath hui mayawati ke dwara ataychar ghatnow ko likha tha ye ghtnay un hi patrkaroo ke saath ho sakti hai jo systam ke aage juktay nahi to systam un per aarpo ki jhadi see laga deta hai .magar dukha tab hota jab apnay hi bithch ka patrkar in sari bhumikao me bad jad ker hisa leta hai . jiwan me un hi patrkaro ka naam hua hai ji logo ne alag karney ki sochi hai ya alag koi kaam kiya ho un me se ek udharan sri shalab mani tirpathi ji wa manoj rajan tirpathi ji ne luknow me kayam ker rkha hai.
...
written by Mahendra Singh, July 01, 2011
yashwant ji ham aapse sahmat hain.. shalabh ji aur manoj ji hamesha bhrsht system ke dushman aur sach ke sathi rahe hain..ham 4 sal se unke sath kam kar rahe hain aap imaandari ke sath kam kar ke unse rat ke do baje bhi help le sakte hain aur agar aap galat hain to wo apse doori bana hi lenge..aise me un par keechad uchhalna kuchh bewkoof aur sirfire logon ka kam ho skta hai..
...
written by aalok pandey, July 01, 2011
ek sher hai
Vasoolo per agar baat aaye to takrana jaroori hai
Jo jinda ho to jinda nazar aana jarori hai

Keep it up shalabh and yashwant ji

Regards
Aalok
...
written by aalok pandey, July 01, 2011
ek sher hai
Vasoolo pe agar baat aaye to takrana jaroori hai
Jo jinda ho to jinda nazar aana jaroori hai

Keep it up shalabh mani and yaswant ji
...
written by SUJEET MISHRA, June 30, 2011
Bhai yashwant jeee aapne to kamal kar diya.....saale un kamino ke muh par karara tamacha mara hai jo khud to dalali kartehai aur dusro ko dalal kahte hai..khud to chaplusi karte hai magar dusro ko chaplus kahte hai...jo khud to chirkut hai magar magar dusro ke tez-tarrar aur bebak reporting ko dekh kar jalte hai....saale andho thu...hai tumhare jaise patrakaaro par..jo systam se ladne ki jagah uski gandahi me muh marte fir rahe ho....are sudhar jaao aur salabh tripathi jaisa nahi ban sakte ho to kam se kam imandari aur sachhai ka saath dena sikho....Jaha tak sawal hai pahchan ki to salabh tripathi ko IBN-7 ne nahi balki UP me IBN-7 ko salabh tripathi ne pahchan diya hai....aur raha sawal system ki to ye to jag jahir hai ki jab v koi systam ke khilaf hua hai to use kuchalne ki puri koshish ki jaati hai....jiska udahran yashwant jee aapne bilku sahi diya hai ....Anna Hazare aur Baba Ramdev ki Pahal ka jise khud sarkar hi kuchalne ki koshiso me lag gai hai.....ye sarkar ki niyat par sawal nahi to aur kya hai...jab koi sahi kam karna chahta hai to aakhir kyo ye system uska sath dene ki jagah uske pichhe pad jaata hai......ha yaha ek baat jarur kahna chahunga ki Baba Ramdev maamle me Sarkar ke saath-saath saare channel ki insaaniyat aur unki aatma mar chuki hai ....chand paiso ke lalach me ye saare channel wale apna ijjat,man-samman aur wazood bech chuke hai....aur sachhai (yani Baba Ramdev) ka saath dene ki jagah ab unki hi buraai karne aur unhe jhutha saabit karne par utaru ho gaye hai.....ye bikau channel isi karan ab apna bishwash kho rahe hai....bhale hi baba ramdev ke man me jo ho lekin unka mudda sahi hai ...unki mang sahi hai....aur kala dhan wo apne liye nahi balki puri janta ke liye ....is desh ke liye swadesh laane ki mang kar rahe hai .....are chatukaro ....loviyo....lalchi...channel walo ...tumhri najro me thoda v sharm ka pani bacha hai to tum v ye lalach ka chola utar kar is sadi hui sarkar ke muh par fenk maro aur ab se bhi sachhai ka saath de kar apni chavi sudharo........

Dhanyvad Yashwant Jee
Aapka Pathak
SUJEET MISHRA
9313769550
...
written by manish dubey, June 30, 2011
यशवंत जी ठीक बात है ,मनोज राजन से तो पर्सनली मिल चूका हूँ शलभ जी को भी जानता हूँ अछे पत्रकारों में गिनती होती है !खबर ब्रेक करने के मामले में वोभी नेगेटिव ! जो मेल आया मैंने भी पढ़ा ! कानपूर(यूपी) का हूँ ! हालात क्या हैं बेहतर समझ सकता हूँ ! ये जो घटिया लोग होते है मेरा मतलब उन तख़्त नशी दल्लो से है , घटिया सोच का नतीजा होते है ! कानपूर में भी एक से एक बेहतरीन पत्रकार है ,झगडा भी होता है पर मजाल है कोई गैर पत्रकार फिर वो नेता हो या उसकी पुच टेढ़ा होकर निकल जाएँ इनकी एकता के आगे ! शलभ के मामले में अगर माया गिर भी जाये तो भी कम होगा मैं समझता हूँ ! अन्यथा जरा सी भी ढील इन सत्ता नासीनो के हौसले बढ़ाने में कसर नहीं छोड़ेगी ! मनीष दुबे ,दिल्ली
...
written by Kanhaiya Bhelari, June 30, 2011
Dalal journailists will not succeed in inflicting any type of harm to Shalabhmani in particular and to those fighting against the atrocity of Behanjee in general. I know Salabh very well. He is a journalist to the core. Let the dalals do their works, we should consentrate on letting the people know about what are heppening across the globe including UP.
...
written by diwaker, June 30, 2011
Bhai aap jo bhi ho magar apne jis tarah se sacchai ko pesh kiya hai uske liye apko dhanywad
...
written by Durgesh kumar singh, June 30, 2011
शलभ जी मनोज जी पहले सरकार से लड़े फिर गद्दार से ......लाखो करोडो की कमाई के आरोप लगाने वालो शर्म करो .. माया सरकार और आई बी एन का रिश्ता जग जाहिर है विगत करीब चार साल में कई बार आई बी एन को प्रदेश में बंद कार्य गया ... शलभ जी पर हरिजन एक्ट का मुकदमा एक साल पहले दर्ज कराया गया, हर तरीके से मनोबल तोड़ने की कोशिश की गयी , अब पुलिस ने सीधे हमला कर दिया ... क्या निर्भीक पत्रकारिता अपराध है शलभ जी और मनोज जी से जलने वालो अगर उन जैसा नहीं बन सकते तो कीचड मत उछालो क्योकि सूरज पर कीचड फेकने पर खुद मुह काला हो जायेगा | दस बीस रुपये में बिकने वाली और अपनी दरिंगी बेईमानी के लिए कुख्यात यू पी पुलिस के कृत्य को जायज ठहरा रहे हो .. पैसा तो तुम लोगो ने सरकार से खाया है | इसी लिए पत्रकार बन कर ऐसे हालात में पुलिस अधिकारी और सरकार की भाषा बोल रहे हो | और तुम्हे ऐसे मौको के आलावा पूछता भी कौन है |कर लो दलाली बेटा ...कुछ करने की छमता नहीं तो यही कर लो...क्यों की यूं सरकार और पुलिस तो क्या अपने जमीर से भी हारे हुए हो... इन बहादुर और इमानदार लोगो की जय करो नहीं तो तुम्हे पूछता और पहचानता ही कौन है ...........
...
written by Bibhav, June 30, 2011
भाई साहब ये तो कोई तर्क नही हुआ कि देल्ही सरकार के खिलाफ खबर नही दिखा रहे तो किसी और के खिलाफ भी नही दिखा सकते .... हमे इस जज्बे कि तारीफ करनी चाहिए कि शलभ इतनी दिकतों के बाद भी समझौता नही कर रहे हैं ....... सलाम शलभ भाई
...
written by Brajesh , June 30, 2011
Yashwant, Aapne shandar likha hai...Shalabh Akele nahi hain, Lucknow mein hum sab ek team ka hissa hain aur har jor julm se ladne ka hum sabmein madda hai..pahle bhi lade hain aur aage bhi ladenge...Apke lekh se hausla aur bhi badha hai..khulkar samrthan dene ke liye hum sabhi aapke aabhari hain. Jo log badnaam karne ki koshish mein shamil hain unhe log jaante hain aur hairat ki baat ye hai jab kabhi unke upar museebat aati hai toh wo hum sabhi ke paas aakar hi madad maangte hain...jo patrakar hain wo ek hain..jo nahin hai wo email par hain


Dhanyawad


Brajesh
...
written by अज्ञानी , June 30, 2011
यशवंत जी आपकी बातों से सहमत लेकिन अब ऐसा लगता है की सभी न्यूज़ चेनल बिक चुके हैं आईबीएन7 भी उनमें से एक है और इनकी कई रिपोर्ट्स देख कर शक की सम्भावना बढ़ जाती है! हो सकता है कुछ अछे लोग अभी भी अपने काम में डटे हुए हों लेकिन ऐसे लोगों को उँगलियों में में गिना जा सकता है!
...
written by नीरज श्रीवास्‍तव, June 30, 2011
सुमिरन जी का सवाल तो दमदार है, लेकिन मैं उनको अवगत कराना चाहता हूं.....कि यदि भईया जैसे पत्रकार लखनऊ या दिल्‍ली ही नहीं देश के किसी भी कोने में होंगे तो वहां की पत्रकारिता की तस्‍वीर भी ऐसी ही होगी और वहां की सरकारों का रवैया भी....ये पत्रकारिता का मुजाहिरा सिस्‍टम के खिलाफ है न कि किसी राज्‍य सरकार के खिलाफ....रही बात शलभ भईया जैसे पत्रकारों की तो जितने कम समय में इलेक्‍ट्रानिक मीडिया को उन्‍होंने जितना ज्‍यादा करीब से समझा है शायद ही कोई पत्रकार समझ सकता है...और ये उनके लिये शायद तभी संभव हो सका क्‍योंकि वह इसके पहले वह अखबार में विभिन्‍न शहरों में सीनियर क्राइम रिपोर्टर रहे हैं...रही बात विवादों की तो उनके जैसे पत्रकार किसी सरकार या सिस्‍टम से डरकर पत्रकारिता नहीं करते...जबसे वो पत्रकारिता कर रहे हैं तभी से ऐसे विवाद होते रहे है...लेकिन उनके साथ जो काम किया हो वो ही इस बात को समझ सकता है...आमतौर पर अगर मैं बात करूं तो जिस तरह से क्रीज पर आते ही सचिन तेंदुलकर शालीन हो जाते है ठीक उसी तरह मैंने भी काम के वक्‍त उनमें शालीनता देखी है...8 साल की पत्रकारिता में मुझे भी पूरे 2 साल उनके साथ काम करने का मौका मिला...जिस बात पर मुझे बेहद गर्व महसूस होता है...मुझे याद है कि जब भी किसी कवरेज पर हम लोग उनके साथ निकले तो न उन्‍होंने न हमलोगों में से किसी ने कपडे या ब्रश मंजन की चिंता की....जैसे जिस हालत में जहां भी रहे वैसे ही निकल लिये...बंजारों की तरह दो से तीन दिन और रातें भी जग कर मंजिल तक पहुंचे और कवरेज की...न खाने की सुध न पानी पीने की सुध...बस चले जा रहें हैं चाहे वह बिहार के जंगलों से होते हुए सुस्‍ता की रिर्पोटिंग हो या फिर गाजीपुर का कृष्‍णानंद राय मर्डर केस या फिर बाबा विश्‍वनाथ की धरती काशी का सफर....न दिन की चिंता न रात की फिक्र...ऐसे पत्रकार के साथ काम करने में मुझे लगता है कि काफी कुछ सीखनें को मिला जो मेरे उज्‍जवल भविष्‍य में सार्थक सिद्ध होगा...ये बात मैं इ‍सलिये भी लिख रहा हूं कि जिस पत्रकार के दिल और दिमाग में घर बार की चिंता मैंने कभी नहीं देखी....सिर्फ और सिर्फ दिन और रात खबर...खबर और खबर यानी पत्रकारिता ही देखी उसके ऊपर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने वाले मूर्ख ही हो सकते हैं...ये मेरा सौभाग्‍य है और मुझे गर्व है कि मैंने भईया के साथ काम किया है और आज भी हर छोटी और बडी परेशानियों में वो बडे भाई की तरह सभी के लिये खडे रहते है......धन्‍यवाद.....सादर सहित- नीरज श्रीवास्‍तव
...
written by sahil khan, June 30, 2011
yashwant ji humne ek khabar 5 jun ko bheji thi aap ne abhi tak usko prakashit nahi kiya hum kaise maan len ki aap prakhar pattrakaron ke sath hain sahil khan sant kabir nagar up reporter sudarshan tv
...
written by सत्यप्रकाश "आजाद", June 30, 2011
इसीलिए चौथे खम्बे से लोगों का भरोसा टूट रहा है...इसलिए ईमानदार पत्रकारों को ईमानदार कोशिश करनी होगी...एकजुट होना होगा..दलाल टाइप के लोग हर जगह हैं..पत्रकारिता में भी हैं
...
written by सत्यप्रकाश "आजाद", June 30, 2011
इसीलिए चौथे खम्बे से लोगों का भरोसा टूट रहा है...इसलिए ईमानदार पत्रकारों को ईमानदार कोशिश करनी होगी...एकजुट होना होगा..दलाल टाइप के लोग हर जगह हैं..पत्रकारिता में भी हैं
...
written by meera, June 29, 2011
journalists are like crabs..now it has been prooved...well done shalabh..
...
written by Sanjay Sharma. Weekand Times, June 29, 2011
शलभ की पत्रकारिता पर ऊँगली उठाने बालो को हजार बार अपने दामन में झाकना चहिए. जो लोग सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत रखते है उनको इस तरह की कार्यावाही के लिए तैयार रहना चहिए. दलालों की अपनी ही दुनिया होती है.सरकारी अफसरों के सामने दम हिलाते इन पत्रकारों को देख कर पत्रकारिता करने बालो को खुद शर्म आ जाती है. हर सरकार में इस तरह के पत्रकारों की जमात होती है जिनका लिखने पड़ने से कोई मतलब नहीं होता. शलभ एक तेज तर्रार पत्रकार है इसमें कोई शक नहीं. ऐसे कितने ही मेल और भेज दिए जाये शलभ और मनोज की पत्रकारिता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
...
written by abhishek, June 29, 2011
@Sumiran Mishra, perhaps you are not a frequent Tv viewer....it is the only channel which dare to broadcast the truth....
...
written by Nasir Gauri , June 29, 2011
चाहे पत्रिकारिता हो या कोई अन्य व्यवासय अपने ही लोग पीछे से खंजर मारने का काम करते है....ऐसा ही कुछ हुआ है लखनऊ में मेडम माया के जूते साफ़ करने वाले पत्रकारों ने शलभ मणि और मनोज राजन जी पर जो आरोप लगाया वो निराधार है.....इन चाटूकार पत्रकारों को सोचना चाहिए की खुद कुछ कर नहीं पाते और दूसरे पर आरोप लगाते है.थोड़ी सी शर्म हो अपना माफ़ी नाम भेज दो उनको, शायद वो आपको माफ़ कर दे...........
...
written by Kunwar nikhilesh pratap singh, June 29, 2011
sir........

hum aap ke is bat se puri tarha se sahmat hu.....................
...
written by abhai, June 29, 2011
यशवंत जी, आपकी इस प्रखर लेखनी के लिये बधाई...हमारे सिस्टम की दरअसल यही खामी है....कि अव्वल ज्यादातर लोग तो किसी भ्रष्टाचार या अनाचार पर चुप्पी साधे रहते हैं लेकिन जो मुखर होते हैं उन्हें कोसने में पीछे नही रहते....वक्त आ गया है जब यूपी के पत्रकार खुद से सवाल पूछें कि आखिर चंद चैनलों और अखबारों के अलावा बाकी ने सरकार के खिलाफ कौन सी खबर चला दी है....अब जब कुछ लोग सत्ता की ताकत के आगे आवाज बुलंद कर रहे हैं तो उन्हें घेरने की कायराना चाल चली जा रही है....अपने कर्तव्यों को अंजाम देने वाले पत्रकारों को बदनाम करने वाले पहले खुद के गिरेबां में झांके...तमाम वे लोग जो चरित्रहीनता और भ्रष्टाचार के कीचड़ में आकंठ डूबे हैं वे ही इस वक्त बदनामी की घिनौनी साजिश रच रहे हैं...
...
written by abhishek, June 29, 2011
दरअसल जो पत्रकार खुद दलाल हैं उन्हें सभी दलाल नज़र आते हैं.....सच्चाई दिखाने का साहस ना कभी इनमे हुआ और ना ही कभी सच्चाई बर्दास्त करने का...ये जो कुछ भी उल्टा सीधा शलभ के बारे में लिख रहे हैं ये इनका कुढ़न है...ये अन्दर ही अन्दर जल रहे हैं कि किस तरह ये जिंदगी भर घिस घिस कर रहे हैं और दलाली करके ही जिंदा हैं और शलभ ने अपने दम पर ये मुकाम हासिल किया है जहाँ इज्ज़त है सम्मान है साहस है....अपने तो कुछ कर नहीं पाए और जिसने साहस दिखाया अब उसे बदनाम कर रहे हैं....सच तो ये है कि सच्चाई और इमानदारी के रास्ते में बहुत सी कठिनाई आती है और जो इन सब को पार करता है दुनिया उसी को सलाम करती है....दोस्तों..शलभ कि हिम्मत और साहस के लिए सलाम.....अपने आप से पूछिए कि दलालों कि बात सुनना है या शलभ जैसे दिलेर पत्रकारों कि...
...
written by Sumiran Mishra, June 29, 2011
एक सवाल आपने छोड दिया... IBN7 का ऐसा तेवर उन राज्य सरकारों के खिलाफ क्यों नहीं दिखता जहां कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं। मसलन दिल्ली।

Write comment

busy