ब्रेक के बाद : रिश्‍तों में टीआरपी ढूंढ़ते न्‍यूज चैनल

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टीवी का रिमोट कंट्रोल हाथ में लेकर चैनल बदल रहा था कि कोई अच्छा प्रोग्राम देखने को मिल जाए। तभी एक न्यूज चैनल पर जाकर आंख और कान दोनों केन्द्रित हो गये। न्यूज चैनल पर अनोखी और सच्ची खबर प्रसारित हो रही थी। खबर मेरठ से थी। कहानी सच्ची और पूरी फिल्मी हो तो कौन उसे देखना और सुनना नहीं चाहेगा? मेरी तरह लाखों लोगों की नजर उस खबर पर जम कर रह गयी होगी।

खबर को मसाला लगाकर इस तरह परोसा गया था कि कोई भी टीवी देखते समय रिमोट को भूल जाए और सच पूछो न्यूज चैनल वाले भी यही चाहते है। ज्यादा से ज्यादा दर्शक जुटाना उनकी प्राथमिकता होती है। लेकिन इस जगह पर अगर कोई बात खटकती है तो वो यह कि ये न्यूज चैनल वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि जिस खबर को वो प्रसारित कर रहे हैं,  उससे उन लोगों पर क्या गुजरेगी जिन पर यह खबर बनायी गयी है। ऐसा ही मुद्दा मेरठ की खबर का था। इस सच्ची कहानी के तीन मुख्य किरदार आरती, नितिश त्यागी और विनीत हैं। नितीश त्यागी की शादी नेहा नाम की एक लड़की से तय हुई। लेकिन शादी के कुछ दिन पहले ही नेहा अपने आशिक के साथ भाग गयी। लड़की वालों ने अपने घर की इज्जत रखने के लिए नेहा की छोटी बहन आरती की शादी नितीश त्यागी से कर दी।

अभी तक की कहानी में देखा जाए तो सब कुछ ठीक चल रहा था। कहानी में मोड़ उस समय आता है जब सुहागरात को आरती अपने पति नितीश के सामने एक खुलासा करती है। उसने यह कहकर नितीश के पैरों तले से जमीन खिसका दी कि वो विनीत नाम के लड़के से प्यार करती है और उससे शादी भी कर चुकी है। मां-बाप ने जबरदस्ती से उससे शादी कर दी है। नितीश भी पूरी कहानी अपने परिवार वालों के सामने सुना देता है और जिस लड़की के साथ शादी करके उसे अपनी दुल्हन बनाया था उसे अपनी बहन के रूप में स्वीकार करके, उससे राखी बंधवा लेता है।

यह खबर उड़ते-उड़ते मीडिया वालों को मिलती है। फिर क्या था मीडिया का खुरापाती दिमाग दौड़ा और साथ में टीआरपी की दौड़ में सबसे आगे होने का एक मौका मिला। देश की प्रतिष्ठित रिश्‍तान्यूज चैनल ने एक्सक्यूजिव खबर के नाम पर एक सच्ची कहानी को रोचक तरीके से पेश कर दिया। जिसे दर्शकों ने न केवल देखा गया बल्कि कहानी के सच्चे किरदारों को अपनी सहानुभूति भी दी। पर यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कहानी में एक के बाद एक मोड़ आता गया। पहले पति ने अपनी पत्‍नी को बहन बनाया फिर सास-ससुर ने भी उसे अपनी बेटी की तरह स्वीकार कर लिया और आरती की शादी उसके पूर्व आशिक विनीत के साथ करने के लिए तैयार हो गये। जबकि विनीत और आरती के मां-बाप को यह मंजूर न था। जिसका जिम्मा आरती के ससुराल वालों ने लिया और मीडिया के सामने आरती की शादी विनीत से कराने की घोषणा की।

यहां तक की कहानी को देखकर लगने लगा था कि इस कहानी का सुखद अंत होगा। पर अभी अंत नहीं कहानी की शुरुआत हुई थी। जिसे आरती नायक समझ रही थी वो खलनायक था। आरती का पुराना आशिक उससे शादी करने की बात से पलट गया और आरती को उसके मां-बाप अपने घर ले गये। आरती जैसे ही अपने मां-बाप के घर पहुंची कहानी ने एक बार फिर से नया मोड़ ले लिया। इस बार वो कहावत बिल्कुल सही लगती है ' नेकी कर जूते खा मैंने खाये तू भी खा'। यहां नितीश त्यागी अपनी शराफत से किसी लड़की का घर बसाना चाहा था। पर उसे क्या पता था कि वो लड़की उसका ही घर उजाड़ देगी?

मां-बाप के घर पहुंचते ही आरती के बयान बदल गये। उसने अपने ससुरालियों पर दहेज का मुकदमा दर्ज करा रिश्‍तादिया। पर यह बात हलक से नहीं उतरती की जो लड़की अपने पति से राखी बंधवाकर उसे भाई बना चुकी हो वो ऐसा करेगी। सही तो यह है कि आरती के मां-बाप ने उसे दवाब में लेकर उससे ऐसा कराया होगा। इस कहानी में आये मोड़ों को देखते हुए मैं साफ तरीके से कह सकता हूं कि यह मामला इतना नहीं उलझता था, जितना इसे उलझाया गया है। जब इस तरह की घटनाएं होती है तो मीडिया उन्हें केन्द्रित करती है और वो लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरह खबरों में आने से उनकी पारिवारिक जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा?

वहीं मीडिया का एक घिनौना चेहरा यहां सामने आता है। जो किसी की निजी जिंदगी को केवल टीआरपी का खेल समझकर उझालते रहते हैं। अब इसी कहानी को देखिए किस प्रकार तीन परिवारों की निजी जिंदगी को टेलीविजन पर प्रसारित किया जा रहा है। मामले के उलझ जाने के बाद जब परिवारजन आपस में मुंह जोरी कर रहे थे और एक दूसरे पर गालियां देकर लांछन लगा रहे थे। तब मीडिया उस खबर को चटखारेदार बनाने के लिए बेताव था। न्यूज चैनलों की डेस्क पर बैठे लोग भी उस अभद्र फुटेज को काटने की जगह हूबहू उसी तरह प्रसारित कर देते हैं।

इस खबर से किसी को कोई फर्क पड़े या न पड़े पर आरती को तो पड़ेगा? उसकी जिंदगी अब निजी न रहकर सार्वजनिक हो गयी है। ऐसी स्थिति में अब कौन उस लड़की से शादी करेगा? कौन उसका हाथ थामेगा? यहां तक की जब उसका आशिक उसे ठुकरा चुका है और वो खुद अपने पति को राखी बांधकर भाई बना चुकी है। अभी भी यह कहानी सवालों के घेरे में है। पर हमें क्या हम तो टीआरपी के लिए इस कहानी का फोलोअप देते रहेंगे? कही मत जाइयेगा हम हाजिर होते हैं एक छोटे से ब्रेक के बाद।

जितेन्द्र कुमार नामदेव

मोदीगनर (गाजियाबाद)

मो. 9935280497

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