पहले से ही फिक्स थी राज्यसभा टीवी में नियुक्तियां!

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जल्द ही लांच होने वाले राज्य सभा टीवी चैनल में भर्तियों के नाम पर ज़बरदस्त खेल जारी है. अभी चैनल शुरू भी नहीं हुआ है कि इसका हश्र भी लोकसभा टीवी चैनल की ही तरह होता दिखाई दे रहा है. यहाँ तमाम बड़े पदों पर नेताओं और अफसरों के रिश्तेदारों की भर्तियाँ की जा चुकी हैं. आलम ये है कि छोटे पद भी सिफारिश के आधार पर ही भरे जा रहे हैं.

जब इस चैनल में सीनियर प्रोड्यूसर और प्रोड्यूसर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू हुए तो तमाम बड़े चैनलों के अनुभवी पत्रकारों को बुलाया गया. लेकिन खबर है कि अन्दर खाने ऐसे लोगों को ऑफर लेटर दे दिया गया जो टीवी मीडिया का अनुभव नहीं रखते थे. इतना ही नहीं तमाम टीवी पत्रकारों को दरकिनार करके प्रिंट और आकाशवाणी के पैरवी वाले लोगों की नियुक्ति कर दी गयी है. हैरानी वाली बात ये है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नाम की कोई चीज़ दिखाई नहीं दे रही है. सारी भर्तियाँ अंदरखाने हो रही हैं और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तर्ज़ पर देश की सबसे बड़ी पंचायत में पत्रकारों की नियुक्ति की जा रही है.

छह महीने बीत जाने के बाद भी भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. जिससे अंदरूनी घालमेल का अंदाजा लगाया जा रहा है. अंदरखाने अपने लोगों की भर्ती की जा चुकी है लेकिन अब तक चयन सूची को राज्यसभा की वेबसाइट पर नहीं लगाया गया है. जिसकी वजह चयनित लोगों में ऐसे लोगों की नियुक्ति है जिन्हें टीवी मीडिया का अनुभव नहीं है. और जो निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं. भर्ती प्रक्रिया में घोटाले के आरोपों के बाद सीनियर रिपोर्टर और रिपोर्टर के पदों पर भर्ती के लिए 7 जून को एक परीक्षा का आयोजन किया गया था. लेकिन परीक्षा में पैरवी वाले लोगों के अंक कम आने की वजह से अब तक कट ऑफ़ मार्क्स घोषित नहीं किये गए हैं. और इन पदों के लिए इंटरव्यू टाल दिया गया है.

क्योंकि जिन लोगों की इन पदों पर भर्ती की जानी है उनके परीक्षा में मार्क्स इतने कम हैं कि अगर उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाना है तो कट ऑफ़ मार्क्स बहुत कम रखने होंगे. ऐसे में महज़ 15-20 पदों के लिए सैंकड़ों पत्रकारों के इंटरव्यू कराने होंगे. जो संभव नहीं है. इसीलिये चैनल के आला अफसर इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे. डर इस बात को लेकर भी है कि अंदरखाने चलने वाला ये खेल अगर आरटीआई के ज़रिये उजागर हो गया तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं. ऐसे में हाशिए पर चल रहे ऐसे लोग जो अब राज्यसभा टीवी के कर्ता धर्ता बन बैठे हैं कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं. उनकी कोशिश यही है कि चैनल में अपने लोगों की भर्ती भी हो जाए और कोई बखेड़ा भी खड़ा ना हो ताकि उनकी कुर्सी पर कोई संकट ना आये!

भर्ती में घोटाले के आरोपों से बचने के लिए परीक्षा का आयोजन तो किया गया लेकिन एडमिट कार्ड पर ये साफ़ लिख दिया गया था कि इस परीक्षा में आये अंकों के आधार पर चयन सूची जारी नहीं की जायेगी. और चयन का आधार सिर्फ इंटरव्यू ही होगा! ऐसे में परीक्षा आयोजित कराने के औचित्य पर सवाल खड़ा हो गया है. और ये साफ़ हो गया है कि इन पदों पर भी सिर्फ और सिर्फ नेताओं और अफसरों के रिश्तेदारों की ही नियुक्तिया होंगी.  ऐसे में पत्रकार ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर सबकुछ पहले से ही तय था तो उन्हें इंटरव्यू के लिए क्यों बुलाया गया? और परीक्षा आयोजित करने का ड्रामा क्यों किया गया? राज्यसभा चैनल में भर्ती घोटाले से गुस्साए पत्रकार अब आरटीआई के ज़रिये पूरे मामले का खुलासा करने का मन बना चुके हैं. पत्रकारों का एक वर्ग मौक़ा पड़ने पर इसे कोर्ट में भी चुनौती देने मूड में है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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Comments (15)Add Comment
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written by joey mathews, September 23, 2011
I don't know what the heck is going on here, such a creepy discussion....
the talk's about Mr. Rajesh Badal.The people here are going crazy and the reason being very simple-
firstly, they do not know the entire story behind the scenes!!!!
secondly, as far as mr. Badal's experience is concerned, he is and he will be one of the most experienced journalist in India ever.
hey you people out there, for your kind of information,that very person has spend around 30 years in e-media n print media and i won't regret saying that he truly deserve's to have got a senior position in RSTV.Yes, there were fluctuations in his job but the reason wasn't same in each case! He trained and gave dozens of journalists to Aajtak or any other news channel,he launched many news channels etc. but unfortunately, some nasty people were against his progress in the field of journalism and were jelous of his wide ranging knowledge.
and what can i say about the gentlemen's who make their way by POLITICAL SOURCES,ahhh!!!!!!! the entire site will be too small to compliment 'em....
DEMOCRACY in INDIA SUCKS!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
I've seen RSTV's test transmission and i really liked that,way to better than lok sabha.Every one is trying hard to make this channel a huge success. Keep It Up Guys!!!!!!And i wish a brighter future for the channel.
and those who doesn't know much should shut their mouth and get a life!!!!!
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written by Alok kumar jha, August 22, 2011
main ye nahin maanta ki RSTV mein selection hetu koi dhandhali ho rahi hai.Aap ko malum hoga ki koi bhi channel bina sampark ke bharti nahin karti.pahle to unmein sudhar ki zarurat so Rajesh badal aur urmilesh jee par comment karna nasamjhi hai.
ALOK KUMAR JHA
SANGHARSHIL JOURNALIST,9873950078
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written by praful kishan, July 16, 2011
Yes, it is a fact that in the beginning the process of recruitment in Rajya Sabha TV was very smooth and relatively transparent. But, it became shady and attracted everyone's ire once Rajesh Badal entered the scene. Mr Badal has had a dubious track record ever since he began his journalism career. One fails to understand how he managed to enter into the RSTV as No. 2. It is an open secret that after knowing about his shady character Aaj Tak had to get rid of Mr Badal from its Bhopal bureau by sending two of its senior journalists, one of whom is still working with Aaj Tak and the other is the Editor of a known Hindi daily. All said and done, it is fortunate enough that RSTV has good professionals like G.S. Sappal and Urmilesh, whose presence raises some hope to ensure that the TV channel would win laurels in the days to come. But, one thing that bothers me is that lately Mr Rajesh Badal has managed to increase his clout in the RSTV Channel and has started interfering into the arenas where he is not supposed to. And, he is doing all this with the 'support' of some politicians whom he has "obliged" in the past. Moreover, after Aaj Tak, Mr Badal was repeatedly sacked from TV channels like CNEB and News-24 which is owned by a known Congressman who was recently accommodated as an MoS in Manmohan Singh Government. Everytime Mr Rajesh Badal was sacked from his services, he was found of being involved in dubious deals.
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written by praful kishan, July 15, 2011
Yes, it is a fact that in the beginning the process of recruitment in Rajya Sabha TV was very smooth and relatively transparent. But, it became shady and attracted everyone's ire once Rajesh Badal entered the scene. Mr Badal has had a dubious track record ever since he began his journalism career. One fails to understand how he managed to enter into the RSTV as No. 2. It is an open secret that after knowing about his shady character Aaj Tak had to get rid of Mr Badal from its Bhopal bureau by sending two of its senior journalists, one of whom is still working with Aaj Tak and the other is the Editor of a known Hindi daily. All said and done, it is fortunate enough that RSTV has good professionals like G.S. Sappal and Urmilesh, whose presence raises some hope to ensure that the TV channel would win laurels in the days to come. But, one thing that bothers me is that lately Mr Rajesh Badal has managed to increase his clout in the RSTV Channel and has started interfering into the arenas where he is not supposed to. And, he is doing all this with the 'support' of some politicians whom he has "obliged" in the past. Moreover, after Aaj Tak, Mr Badal was repeatedly sacked from TV channels like CNEB and News-24 which is owned by a known Congressman who was recently accommodated as an MoS in Manmohan Singh Government. Everytime Mr Rajesh Badal was sacked from his services, he was found of being involved in dubious deals.
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written by Subhranshu Thomas, July 15, 2011
मुझे अभी कल ही पता चला था कि राज्य सभा टीवी चैनल में अंदर ही अंदर कुछ खिचड़ी पक रही है. असिस्टैंट प्रोड्यूसर कि नियुक्तियों में लगातार हो रही देरी कहीं न कहीं इस बात को इंगित कर रही है कि कुछ खेल फरुक्खाबादी चल रहा है. महामहिम राजेश बादल का अतीत तो तमाम दागो से भरा पड़ा है सिर्फ कुछ सम्मानित लोगो कि वजह से एक ऐसे चैनल कि साख बची हुई है जो अभी शुरु ही नहीं हुआ है. नहीं तो ऐसे चैनल कि साख क्या होगी जिसके डायरेक्टर श्रीमान बादल साहब पर लोबिंग, जातिवाद कि राजनीति आदि कुकृत्यु के आरोप लगते रहे हैं. अब अगर किसी चैनल पर ऐसे काले बादल छा जायेंगे तो उस चैनल के भविष्य का अंधकार में होना तो तय हैं.
जय हो
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written by shamsher, July 15, 2011
It would be wrong to cast aspersions on those who have been selected for Rajya Sabha Tv channel.
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written by media hamsafar, July 15, 2011
राज्यसभा टीवी में शीर्ष और वरिष्ठ पदों पर सही तरह से लोगों को जगह दी गई लेकिन जबसे राजेश बादल आयें हैं तब से निहित स्वार्थो का खेल तेज हो गया है. अब जूनियर पदों पर भारी धंधलेबाजी हो रही है. राजेश बादल एंड कंपनी के शिकार सबसे ज्यादा वो लोग हुए हैं जो दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग के हैं. राज्यसभा टीवी में अभी तक दलित और आदिवासी समाज से जुड़े एक भी आदमी को भी स्थान नही मिल पाया है. पिछड़े उम्मीदवारों की संख्या भी नगण्य है. लेकिन ब्राह्मणों के संख्या सर्वाधिक हो गई है. राजेश बादल जब से राज्यसभा टीवी में नंबर दो बनकर आयें हैं तब राज्यसभा टीवी का चाल चरित्र और चेहरा बदल गया हैं और अब राज्यसभा टीवी में काफी खेल चल रहा है. गौरतलब है कि बादल आजतक से हटाए जा चुके हैं और उसके बाद वो जिस जिस चैनल गए, उसमे उनका कार्यकाल कुछ महीनों तक का रहा है. इतना ही नहीं, उन्हें कांग्रेसी सांसद राजीव शुक्ला के न्यूज़ चैनल न्यूज़-२४ से भी हटाया जा चुका है.
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written by Rahul, July 14, 2011
यशवंत जी, लगता है बिना आधार और तथ्यों के खबरों को प्रकाशित करना भड़ास फॉर मीडिया की आदत बनती जा रही है। राज्यसभा के नियुक्तियों के बारे जिस भाई के भी पत्र को आधार बनाया गया है उससे ये साबित होता है कि या तो उस महानुभाव का राज्यसभा टीवी में सलेक्शन नहीं हुआ या फिर टेस्ट में बहुत ही कम नंबर आए हैं। मैंने भी टेस्ट दिया है अच्छे नंबर आए हैं और अभी इंटरव्यू का इंतजार कर रहा हूं। बिना इंटरव्यू हुए देश के सर्वोच्य पंचायत पर बेबुनियाद आरोप लगना अपने संसद का अपमान करने जैसा है। यशंवत जी शायद आपको याद हो लेकिन मुझे तो याद नहीं है कि राज्यसभा को छोड़कर किसी अन्य टीवी संस्था ने इतने बड़े पैमाने पर नियुक्तियों के लिए टेस्ट लिया हो। दूसरी बात, राज्यसभा जो लोग भी बड़े पदों पर नियुक्त किए गए हैं उनमें से कई तो मेरी उम्र से भी ज्याद पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. चाहे हो उर्मिलेश जी हों, राजेश बादल जी हो । मैं नहीं समझता इन्हें लेकर किसी के मन कोई शक होगा। इसके अलावा एक पूराने रिपोर्ट में आपने लिखा है कि प्रभात शिंगलु, अखिलेश और एक बड़े टीवी चैनल को हेड कर रहे पत्रकार सहित चार लोगों ने यहां ज्वाइन किया है, उससे भी यही लगता है कि यहां अनुभवी लोग आ रहे हैं और इनका किसी नेता या अधिकारी से संबंध नहीं है। ऐसे में ये कहना कि यहां भाई-भतीजावाद चल रहा है ये बेबुनियाद आरोप लगता है। अगर आप नाम और उनके अधिकारी पिता या नेता का नाम का उल्लेख करें तो ये बात साबित होगी। वरना झूठ का क्या है जो मर्जी आए लिखते जाइए। आपका पोर्टल है आप स्वतंत्र हैं झूठ का मायाजाल बुनने और चीप पब्लिसिटी के लिए।
आपका अनुज
राहुल
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written by Binny Thomas, July 13, 2011
Thank you for publishing a detailed report about the recruitment process of upcoming Rajya Sabha TV. But I fell to understand from your report that who are the main beneficiary of so called “bhai bhatijawad” as you have mentioned in your report. As far as my knowledge is concerned the public recruited so far having repute in their field and they came from top class Hindi and English news channel. And the rest of the recruitment process is still on and the people concerned for the job is working hard to get more and more efficient and experienced people in the channel through a transparent recruitment process. In these circumstances either you don’t know anything or settling score from somebody for ulterior motive. It may be that they have not obliged you and hence you have started bullying them without having any fact and figure. Please do not discourage the youth brigade who is going to start their carrier through this channel, because it will not only harm the reputation of a reputed organization like Rajya Sabha but your Blog also. It is unethical and against the very principle of journalism that you have published an article without taking the Rajya Sabha view. I think you will have that much sincerity to understand my words. Thanks again.
Binny Thomas, Research scholar.
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written by JWALA PRASAD, July 13, 2011
RAJYA SABHA TV MAY KYA HO RAHA HAI YE BATANE KAY LIYE DHANYAWAD. LEKIN JAHAN TAK MERI JANKARI HAI ABHI TAK PRODUCER, ASSISTANT PRODUCER AUR REPORTER KEE NIYUKTI NAHI HUI HAI. MAINE KHUD PATA KIYA HAI. ABHI WRITTEN EXAM KEY BAAD INTERVIEW HONE HAI. LEKIN AAPKI REPORT SAY TO AISA LAGTA HAI KEE KHEL LHATAM HO CHUKA HAI AUR AB WAHAN KOI AUR NIYUKTI NAHI HONE JA RAHI HAI. AAP SAMPADAK HAI. KRIPYA SAHI JANKARI DAIN TAKI MAI KAHI AUR KEY BARE MAY SOCHNA SHURU KAR DU. ES REPORT KO PADKAR TO HAME BADI NIRASHA HUI HAI KYOKI ISME SIRF AUR SIRF AAROP LAGAYE GAYE HAI. RSTV KEE UR SE KOI SAFAI NA TO DEE GAYI HAI AUR NA HI UNSE MAANGI GAYI HAI. KAHI YE AAPLOGO KEE KOI AAPSI BHADAS TO NAHI HAI. KRIPYA SACHCHAI KAA KHULASA JALD KAR SAMPADAK HONE KA FARZ ADA KARAY. BADI UMMED LAGAYE BAITHA HUN JANAB. NIRASH NAA KARAIN.
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written by Satyendra Bhardwaj, July 13, 2011
First of all i want to make it clear that i had neither applied for job for this channel nor i am part of it.

Now, the issue of people who don't have experience of e-media. Well, this gentleman who wrote above crap, would he apply his/her intelligence a bit and tell me whether some of the respected names of media world (like Punya Prasoon Bajpayee, Deepak Chaurasia, Sumit Awasthi and Ashutosh) had prior e-media experience before they turned Aaj Tak from being just a rookie new channel to a house-hold name? Is he/she sure that only a person from e-media background would be able to turn RS TV into a "respected" and "serious" channel? Aren't we witnessing our news channels, run by people of e-media background, turning into dreaded channels who either entertain us or make us irritated by repeating some hilarious lines! Come on, discount your "professional jealousy" or personal animosity, you would realize that the Journalists who have been hired at the top for this channel, are indeed credible names with vast experience of journalism. They are not phoney journalists who scream on mikes but sensible people who can constructively contribute to strengthen our system - Democracy.

Now about charges of mal-practice in selection process. Well, we, the Journalists, have no doubt got the ability to sniff the stink, but haven't our noses got used to that stink so much so that our 'noses' have stopped sniffing 'fragrance'! I hope the the gentleman writer gets the point!

Now last but not the least, it is clear from the language that the writer is a looser and is not gutsy enough to display his/her name! May i sniff the ordour of a concocted story in a gali-chhap four-pager published across the galis of Delhi?
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written by BALCHANWA, July 13, 2011
JIN LOGO KEE NIYUKTI GALAT TAREEKE SE KEE GAYEE HAI AGAR UNKE NAAM AUR NETAO AUR AFSARO KAY SAATH UNKE SAMBANDHO KA KHULASHA KAR SAKAY TO AAPKI REPORT AUR BHI BEHTAR HO SAKTI HAI. KRIPYA YE BHI BATANE KA KASTA KARAIN KEE AAROPO KE BARE MAY RAJYA SABHA TV CHALANEWALO KAA KYA KAHNA HAI. WAISE REPORT MASALEDAR AUR BIKAU HAI. DHANYAWAD. BALCHANWA.
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written by manoj, July 12, 2011
koi hairani ki baat nahi hai,aaj talent aur aapka anubhav koi maayney nahi rakhta,maayney ye rakhta hai ki aap ki jaan-pehchaan kitni solid hai.
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written by Deepak, July 12, 2011
Ye sirf rajysabha kaa haal nahi har channel kaa yahi haal hai har pad ke liye sifarish chahiye,or har pad par andar he andar bharti ho jaati hai
ab mujhe he dekh lo kisi ki politics ke kaaran se mujhe ak channel chhodna pada or aaj 6 month ho gaye hai or main abhi tak ghar par baitha hun.main bhi kya kar sakta hun.meri koi jaan pehchaan nahi hai isiliye 6 saal se media main theek se kaam bhi nahi kar paa rahaa hun.ye andar he andar politics lagbhag har channel main hoti hai or lapete main aate mujh jaise log.
[email protected]
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written by ओमनाथ शुक्ला, July 12, 2011
बिल्कुल सही खबर है। टीवी और प्रिंट दोनों ही पत्रकारिता में अच्छा-खासा अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को तो सिर्फ इसलिए ही इंटरव्यू में नहीं बुलाया गया, क्योंकि उनका पांच साल तक संसदीय रिपोर्टिंग का अनुभव नहीं था। हालांकि इसमें भी घालमेल किया गया। उस पत्रकार महोदय ने आरटीआई दाखिल करने की तैयारी कर ली है। क्योंकि उनके पुराने दस्तावेजों से साफ है कि उन्होंने बाकायदा पांच साल तक संसदीय रिपोर्टिंग की है।

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