कई छोटे चैनलों पर पड़ने वाला है इनकम टैक्स का छापा

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: चैनल के जरिए ब्लैक मनी को ह्वाइट करने वालों की लिस्ट पीएमओ के पास : कभी केंद्र सरकार में मंत्री रहे और आजकल हमार और फोकस जैसे न्यूज चैनल चला रहे मतंग सिंह के चैनलों पर इनकम टैक्स छापा पड़ने की खबर में तह तक जाने पर पता चला है कि यह चैनलों पर छापेमारी की शुरुआत भर है. कई और चैनलों पर छापे पड़ेंगे. इसके लिए इनकम टैक्स ने तैयारी पूरी कर ली है.

सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों इंटेलीजेंस ब्यूरो ने एक गोपनीय रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी जिसमें कहा गया कि कई चैनल ब्लैक मनी को ह्वाइट करने के काम में लगे हैं. इन चैनलों की आमदनी बेहद कम है पर ये ब्लैक मनी को ह्वाइट करने के लिए चैनल चला रहे हैं. इसी कारण खर्चों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है और फर्जी आमदनी शो की जाती है. इसके जरिए ब्लैक मनी को ह्वाइट कर लिया जाता है. सूत्रों के मुताबिक आईबी ने करीब दर्जन भर ऐसे चैनलों का नाम अपनी खुफिया रिपोर्ट में गिनाया है जो ब्लैक मनी को ह्वाइट करने के काम में लगे हैं.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट की छानबीन के बाद कार्यवाही करने की इजाजत दे दी है. इसी के बाद हमार और फोकस चैनलों पर छापा मारा गया है. आने वाले दिनों में कई और चैनलों को निशाना बनाया जाएगा. छापेमारी की खबर से दूसरे चैनलों मालिकों के भी होश उड़े हुए हैं और सभी अपने कागजात दुरुस्त करने में जुट गए हैं. सूत्रों के मुताबिक जिस तरह धड़ाधड़ चैनल खुलते जा रहे हैं उससे एक संभावना को बल मिला है कि ये चैनल जन सरोकार या मीडिया के उद्देश्य से नहीं बल्कि लायजनिंग, पावर गेम का पार्ट बनने के लिए खुल रहे हैं. साथ ही दो नंबर की कमाई इन चैनलों के माध्यम से एक नंबर का कर दिया जाता है. कई ऐसे चैनल भी हैं जो अपने स्टाफ को बेहद कम पैसे देते हैं, स्ट्रिंगर्स को कुछ नहीं देते पर अपने खर्चे जब ये दिखाते हैं तो सेलरी पर भारी भरकम खर्च शो करते हैं.

इसी तरह अन्य कई तकनीकी व प्रसारण मदों में ज्यादा खर्च दिखाते हैं. इन चैनलों का डिस्ट्रीव्यूशन शून्य होता है लेकिन ये डिस्ट्रीव्यूशन पर भी अनाप-शनाप खर्च दिखा देते हैं. कई चैनल, जिसमें कुछ भक्ति चैनल भी हैं, सिर्फ इसलिए खोले गए हैं कि वे बाबाओं के दो नंबर की कमाई को एक नंबर में कर सकें. कुछ चैनल नेताओं की ब्लैकमनी को एक नंबर में करने का काम करते हैं. ऐसे चैनलों के खिलाफ कार्यवाही आरंभ हो चुकी है. अगर शीर्ष स्तर से गैर-जरूरी हस्तक्षेप कर कार्यवाही को नहीं रुकवाया गया तो कई चैनलों की असलियत खुल सकती है और इनके मालिक जेल की हवा खा सकते हैं.


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Comments (5)Add Comment
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written by AMEET, July 19, 2011
कल हमने भी तो एक कमेंट लिखा था। जिसमें सभी मीडिया मुगलो की शिद्दत से बात की गयी थी । उसे छाप दो यशवंत गुरु
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written by धीरज, July 18, 2011
यशवंत भाई,
यह कमेंट पब्लिश करने के लिए नहीं लिख रहा हूं बल्कि एक बड़ा भाई होने के नाते एक मामूली त्रुटि सुधारने का अनुरोध कर रहा हूं। कार्रवाई (Action) और कार्यवाही(Proceeding) में बड़ा अंतर है, लेकिन शब्दों में समानता के कारण लोग अक्सर गलती कर बैठते हैं।
कृपया सुधार लें।
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written by kumar manoj, July 18, 2011
der se hi sahi lekin durust kadam sarkar uthane jaa rahi .chote channl me athiktar big leader or bussnesman blackmony ko white mony karne me lage huae hai .sarkar ke aise kadam se koi positve result jarur niklega.
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written by rambabu, July 18, 2011
यह बिलकुल ही सही निर्णय है. हाल के दिनों में जिस तेज़ी से क्षेत्रीय चैनलों कि बाढ़ आ गई है उससे इस आशंका को बल मिलता है कि इस तरीके से चैनल खोलने के पीछे का मकसद कुछ और ही होता है. बिना किसी विजन के करोड़ो क्यों और कहा से खर्च किया जा रहा है. अगर हम सिर्फ रांची और पटना कि बात करे तो यहाँ कई चैनल बिल्डरओ ने खोला है. जाहिर है ये अपना ब्लैक मनी को व्हाईट करना चाहते है . वही इन दोनों शहरो से कई चैनल ऐसे चल रहे है जिनकी आमदनी अपने कर्मचारियो को वेतन देने के लिए भी नहीं हो पाती है. तो ऐसे में इन सब का काम सालो से कैसे चल रहा है. इन पुरे मामले कि ना सिर्फ जाँच ही होनी चाहिय बल्कि कड़ी कार्यवाई भी होनी चाहिए ताकि पत्रकारिता बची रहे.
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written by virendra singh tanwar, July 18, 2011
kya hum ghar ke bahar akele or safe ja sakte hai?

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