राज्य सभा टीवी में ज़्यादातर पदों पर पिछले दरवाज़े से इंट्री की तैयारी!

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राज्यसभा टीवी चैनल में पिछले दरवाज़े से भर्ती की पुख्ता रणनीति तैयार कर ली गयी है. काफी माथा-पच्ची के बाद एक ऐसी रणनीति को अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है जिसको लेकर कोई भी सवाल खडा ना हो सके. तमाम बड़े पदों पर पिछले दरवाज़े से अपने लोगों की नियुक्ति कराई जा चुकी है. जल्द ही कुछ और लोगों को भी पिछले दरवाज़े से लाने की तैयारी है जिसका खुलासा चैनल की लांचिंग के बाद होने वाला है.

दूसरी तरफ पत्रकारों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि अब तक हुए तमाम इंटरव्यू में से किसी के भी परिणाम को राज्यसभा की वेबसाईट पर नहीं लगाया गया है. जबकि अंदरखाने कई लोगों की नियुक्ति की जा चुकी है. जिन लोगों का चयन किया गया है उनके चयन का आधार भी नहीं बताया गया है. पोर्टफोलियो और अनुभव को दरकिनार करते हुए केवल साक्षत्कार को ही चयन का आधार बनाया जाना पत्रकारों में रोष की दूसरी वजह है. आरोप है कि साक्षात्कार के नाम पर भी औपचारिकता ही निभाई गयी.

वहीं छोटे पदों पर भी राज्यसभा टीवी में पत्रकारों की भर्ती के नाम पर खेल तेज़ हो गया है. पारदर्शिता के नाम पर 7 जून को आयोजित की गयी परीक्षा के आधार पर, असोसिएट प्रोड्यूसर के पद के लिए महज़ 15 आवेदकों को इंटरव्यू के लिए चुना गया है. और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के पद के लिए महज़ 30 आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है. गौरतलब है कि इंटरव्यू के लिए ये नियम है कि एक पद के लिए कम से कम तीन आवेदकों का इंटरव्यू लिया जाना चाहिए. इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि असोसिएट प्रोड्यूसर के लिए महज़ 4 -5 लोगों की नियुक्ति की जानी है. वहीँ असिस्टेंट प्रोड्यूसर के लिए महज़ 8 -10 आवेदकों की नियुक्ति की जानी है. जबकि अंदरूनी खबर ये है कि  चैनल के लिए स्वीकृत पदों की संख्या इससे कहीं अधिक है.

आम छात्र भी इस बात को जानता है कि महज़ ८-10 असिस्टेंट प्रोड्यूसर और 4 -5 असोसिएट प्रोड्यूसर के दम पर कोई भी चैनल लांच नहीं किया जा सकता  है. तो फिर इतने बड़े स्तर पर परीक्षा का आयोजन करने के बाद असोसिएट प्रोड्यूसर के लिए महज़ 4 -5 और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के लिए महज़ 8 -10 लोगों की ही नियुक्ति क्यों की जा रही है? सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक़ परीक्षा आयोजित कराने के बाद मुश्किल में फंसे चैनल के आला अधिकारियों ने काफी दिनों तक विचार विमर्श करने के बाद इस मुश्किल का हल खोज निकाला है. और एक सोची समझी रणनीति के तहत महज़ कुछ पदों पर इस परीक्षा के ज़रिये नियुक्ति करने का फैसला लिया गया है.

इसके बाद जब चैनल लांच हो जाएगा तो खाली पदों पर सिफारिशी और पैरवी वाले लोगों की पिछले दरवाज़े से इंट्री करवाई जायेगी. राज्यसभा टीवी में असिस्टेंट और असोसिएट प्रोड्यूसर को रिपोर्टर की भी ज़िम्मेदारी निभानी होगी. यानी दो पूरी तरह से अलग-अलग पदों के लिए एक पत्रकार की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है. यानी पूरे मामले में खेल फर्रोखाबादी चल रहा है वो भी खुले-आम. और दिखावटी तौर पर कुल स्वीकृत पदों में से केवल कुछ पदों पर परीक्षा के ज़रिये भर्ती की जा रही है और बाकी की सीटें चैनल की लांचिंग के बाद पिछले दरवाज़े से भरने की तैयारी कर ली गयी है.

खबर तो यहाँ तक है कि पैरवी वाले अधिकाँश लोग टीवी मीडिया का अनुभव नहीं रखते है, परीक्षा में भी उनके काफी कम नंबर हैं. लेकिन उनकी पैरवी इतनी मजबूत है कि चैनल के आला अधिकारी उसे अनदेखा नहीं कर सकते. लेकिन यदि इस वक्त तमाम टीवी पत्रकारों को दरकिनार कर उनकी नियुक्ति कर दी जाए तो बवाल खडा हो सकता है. इसलिए वक्त की नजाकत को समझते हुए परीक्षा के ज़रिये केवल कुछ पदों पर भर्ती के बाद चैनल लांच होने के बाद पिछले दरवाज़े से उनकी इंट्री करवाने का आश्वासन दिया जा चुका है. चैनल के अंदरूनी सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक़ परीक्षा में कम नंबर पाए  ऊंची पैरवी वाले कुछ लोगों को ये तक बता दिया गया है कि वे अभी कुछ समय तक शांत बैठे रहें. जैसे ही चैनल लांच होगा, मैंन पावर की कमी का रोना रोकर पिछले दरवाज़े से उन्हें अन्दर कर लिया जाएगा!

गौरतलब है कि चैनल के आकाओं ने पूरी तरह से लोकसभा टीवी का ही मोडल अपनाया है. वहां भी अपने लोगों की भर्ती के लिए यही रणनीति अपनाई गयी थी. नियुक्ति से पहले पदों की संख्या का खुलासा ना करना, चयनित लोगों की सूची जारी ना करना, चयनित लोगों के चयन का आधार ना बताना, नियमों को दरकिनार कर प्रिंट और आकाशवाणी के लोगों की बड़े पदों पर भर्ती करना, चयन प्रक्रिया का खुलासा ना करना, महज़ इंटरव्यू को ही चयन का आधार बनाना, ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो समूची भर्ती प्रक्रिया को कटघरे में खडा कर रहे हैं. ये तमाम सवाल इस लिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि ये नियुक्तियां किसी प्रायवेट लिमिटेड कंपनी के लिए नहीं हो रही हैं बल्कि देश की सबसे बड़ी पंचायत में पत्रकारों की नियुक्ति की जा रही है.


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Comments (3)Add Comment
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written by siddharath, July 20, 2011
असोसिएट प्रोड्यूसरके पद के लिए लिया गया लिखित परीक्षा के सवाल काफी मुस्किल थे ,यहाँ तक कहा गया की लाइट एडिटिंग कैमरा ग्राफिक्स के विशेषज्ञ लोगो के बस में हे है इन सवालो का १०० प्रतिशत हल करना ,क्योंकि वह काफी नामी गिरामी चंनेल्स से लोग ए थे जो ७-८ साल से इस फ़ील्ड मै है ,मगर उन सब धुरंधेर लोगो के नंबर ५०-६० हे है जबकि प्रिंट मीडिया ,वकील ,रेडियो कासुअल्स है,लेकिन आश्चर्य ये है की वो लोग कैसी इतने नंबर कैसे ला पाए,ये घम्भीर मसला है,कहीं न कहीं धांधली हुई है
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written by siddharath , July 20, 2011
असोसिएट प्रोड्यूसरके पद के लिए लिया गया लिखित परीक्षा के सवाल काफी मुस्किल थे ,यहाँ तक कहा गया की लाइट एडिटिंग कैमरा ग्राफिक्स के विशेषज्ञ लोगो के बस में हे है इन सवालो का १०० प्रतिशत हल करना ,क्योंकि वह काफी नामी गिरामी चंनेल्स से लोग ए थे जो ७-८ साल से इस फ़ील्ड मै है ,मगर उन सब धुरंधेर लोगो के नंबर ५०-६० हे है जबकि प्रिंट मीडिया ,वकील ,रेडियो कासुअल्स है,लेकिन आश्चर्य ये है की वो लोग कैसी इतने नंबर कैसे ला पाए,ये घम्भीर मसला है,कहीं न कहीं धांधली हुई है
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written by Naresh Kumar, July 19, 2011
Its is said that , politics is a bad game played by bad man. But now it should say, journalism is a bad field run by bad man. Shame! Shame!
Whole news industry is going in gutter today...No any sign of change appearing on sky of journalism. Everywhere you can see news broker who runs Indian news industry. They do selects peoples on approach bases, who have strong approach will get good salary and designation. No any news channel is trying to change the trend set which is set by some news broker. These news broker will ruins whole tv news industry one day. In today's scenario wise man who wants to do some intelligent work should not come in this stupid news industry which is falling down day by day by in terms of money and works. Before Independence era journalism was a mission but now if has changed in business...A fucking news business... which is run by some fucking businessman..and operates by some fucking media person..

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