नेटवर्क10 को लांच करेगी नई टीम, बसंत निगम और उनके लोग साइडलाइन

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उत्तराखंड, हिमाचल और वेस्ट यूपी केंद्रित नए लांच होने वाले न्यूज चैनल ''नेटवर्क10'' को नई टीम लांच करेगी. अभी तक जिन लोगों को लांचिंग का दायित्व दिया गया है, उनसे प्रबंधन ने किनारा कर लिया है. बसंत निगम, जो कि इस चैनल के अभी तक सर्वेसर्वा हैं, और उनके लाए दिनेश चंद्रा व अतुल बरतरिया को साइडलाइन कर दिया गया है. ऐसा फैसला चैनल लांचिंग से पहले शुरू हुए आंतरिक विवाद के कारण लिया गया है.

उच्च प्रदस्थ सूत्रों के मुताबिक बसंत निगम पर करप्शन के चार्जेज की बात गलत है. हां, बसंत निगम अपनी टीम को नियंत्रित नहीं कर पा रहे और आपसी मनभेद-मतभेद चरम पर है. इस कारण प्रबंधन ने एक प्रोफेशनल लीडर और टीम की तलाश शुरू कर दी है जो चैनल को स्मूथ तरीके से लांच करा सके. सूत्रों के मुताबिक बसंत निगम को चैनल से हटाया नहीं जाएगा. उनकी जिम्मेदारियां बदल दी जाएगी. सूत्रों के मुताबिक बसंत निगम ने शुरुआत में ही कुछ गड़बड़ियां कर दीं. उन्होंने चार लोगों को वरिष्ठ पदों पर भर्ती कर लिया और इन चारों में आपसी विवाद शुरू हो गया. इन चार में ज्यादातर को टीवी का अनुभव नहीं है.

दिनेश चंद्रा दैनिक जागरण, नोएडा में रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे थे कि अचानक उन्हें बसंत निगम का आफर मिला और पहली बार टीवी में कूद पड़े. अतुल बरतरिया को जागरण प्रबंधन ने देहरादून से मेरठ भेज दिया था और वह देहरादून वापसी का इंतजार कर रहे थे कि इसी बीच उन्हें भी बसंत निगम का आफर मिल गया. रुबी अरुण कई अखबारों में काम कर चुकी हैं. वे दिल्ली पदस्थ जर्नलिस्ट हैं. उन्हें भी बसंत निगम ने देहरादून बुला लिया. इन तीनों को बड़े बड़े पदों पर रखा गया और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन किसके अधीन काम करेगा. मतलब, प्रशासनिक नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं की गई.

दिनेश चंद्रा को पद एक्जीक्यूटिव एडिटर का दिया गया. अतुल बरतरिया को पोलिटिकल एडिटर बना दिया गया. रुबी अरुण को न्यूजहेड का पद दिया गया. बसंत निगम चैनल के सर्वेसर्वा बने. अब बताया जा रहा है कि इन चारों में आपस में खूब विवाद हुआ और एक-एक कर सभी एक दूसरे से मुंह फुलाने लगे. कहा तो यहां तक जा रहा है कि रुबी अरुण ने टीम की वर्किंग स्टाइल से खफा होकर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव गर्ग को अपना इस्तीफा दे दिया. यह भी चर्चा है कि अतुल बरतरिया ने भी इस्तीफा दे दिया है और अमर उजाला ज्वाइन करने जा रहे हैं.

हालांकि इन दोनों सूचनाओं की पुष्टि नहीं हो सकी है पर सूत्रों का कहना है कि आंतरिक घमासान इतना तेज है कि इसे रोक पाने में बसंत निगम लाचार हो गए. ऐसा इसलिए भी क्योंकि उनके रखे सभी लोग उनसे ज्यादा सीनियर हैं या फिर उनके समान धरातल के हैं. वर्किंग डिफाइन न होने और कामकाज प्रोफेशनल तरीके से न होने के कारण गैर-जरूरी कामों में लोग ज्यादा उलझ गए. फिलहाल नेटवर्क10 में चल रही आंतरिक राजनीति व उठापटक देहरादून में चर्चा का विषय बना हुआ है.


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