बिहार के जमीन घोटाले के खलनायकों में जी न्यूज के पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष भी

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खलनायक इसलिए नहीं कि उन्होंने पाटलिपुत्रा इडस्ट्रियल एरिया में बीस हजार स्क्वायर फीट जमीन का एलाटमेंट अपनी मीडिया कंपनी के नाम कराया. खलनायक इसलिए क्योंकि वह जी न्यूज जैसे एक बड़े न्यूज चैनल के बिहार के ब्यूरो चीफ हैं और पत्रकारिता करते हुए, न्यूज का काम देखते हुए उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान से इतना भारी भरकम लाभ उठाया.

श्रीकांत प्रत्यूष सन्मार्ग अखबार, बिहार की फ्रेंचाइजी भी लिए हुए हैं और इसका प्रकाशन पटना से करते हैं. वे जी न्यूज के लिए भी काम करते हैं. जाहिर है, जब एक पत्रकार एक बड़े टीवी न्यूज चैनल के एक राज्य का ब्यूरो चीफ हो और खुद एक अखबार का मालिक हो तो उसका रोल डबल हो जाता है. एक तरफ वह अपने न्यूज चैनल, जहां काम करता है, के लिए खरी-खरी खबरें खोजता है और दूसरी तरफ अपने अखबार के लिए रेवेन्यू तलाशता है. यह डबल गेम आधुनिक पत्रकारिता की ट्रेजडी है. श्रीकांत प्रत्यूष भले कहें कि वह दोनों भूमिकाओं में न्याय करते हैं लेकिन सही बात तो ये है कि वे कतई न्याय नहीं कर सकते.

उनके झूठ का सबसे बड़ा उदाहरण नीतीश सरकार से इंडस्ट्रियल एरिया में लिया हुआ बीस हजार स्क्वायर फुट का प्लाट है. इस जमीन का आवंटन श्रीकांत प्रत्यूष और उनकी कंपनी श्रीकांत प्रत्यूष : सत्ता से उपकृत पत्रकारनव बिहार मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की कैटगरी में हुआ है. तो, यह बात साफ है कि श्रीकांत प्रत्यूष ने इतनी बड़ी जमीन अपनी कंपनी के प्रिंट और टीवी प्रोजेक्ट के लिए लिया हुआ है. ऐसे में जब वह नीतीश सरकार से भरपूर ओबलाइज किए जा चुके हैं, कैसे उनसे उम्मीद की जा सकती है कि वे नीतीश सरकार के घपले-घोटालों का पर्दाफाश करेंगे, उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे जनपक्षधर पत्रकारिता करेंगे.

दरअसल, सही कहा जाए तो श्रीकांत प्रत्यूष उसी राडिया जर्नलिज्म के प्रतीक हैं जिसकी अनुगूंज पिछले दिनों दिल्ली समेत पूरे देश में सुनाई पड़ी थी. राडिया अपने क्लाइंट पत्रकारों को अपनी कंपनियों की तरफ से भांति भांति तरीके से ओबलाइज करती थी और बदले में उन पत्रकारों से अपने हित साधती थी, अपने कारपोरेट क्लाइंट्स के हित साधती थी. जाहिर है, यह सब काम पत्रकारिता की नैतिकता को तिलांजलि देकर बड़े बड़े पत्रकार किया करते थे और अब भी कर रहे हैं. श्रीकांत प्रत्यूष इसी कैटगरी के पत्रकार हैं. उन्हें खुद ब खुद अब किसी न्यूज चैनल में पत्रकार की नौकरी करने की जगह मालिक की एकल भूमिका को स्वीकार कर लेना चाहिए और अपनी कंपनी के लिए ही पत्रकारिता या डील करनी चाहिए.

श्रीकांत प्रत्यूष : सरकार से भारी भरकम लाभ लेकर कैसे हो सकेगी जनपक्षधर पत्रकारिता?

और, क्या कहा जाए मिस्टर क्लीन नीतीश कुमार को. जिस गंदे तरीके से उन्होंने बिहार में मीडिया को नियंत्रित किया हुआ है, उसी का उदाहरण है श्रीकांत प्रत्यूष की कंपनी के नाम बीस हजार स्क्वायर फीट जमीन का आवंटन. वे बड़े बड़े अखबारों, छोटे-मोटे अखबारों और न्यूज चैनलों को ओबलाइज करके, डरा धमका के अपने चंगुल में किए रहते हैं. यही कारण है कि फारबिसगंज गोलीकांड जैसी घटनाएं अखबारों में लीड नहीं बना करतीं. नीचे बियाडा (बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की वेबसाइट से उस लिस्ट के एक हिस्से को प्रकाशित किया गया है जिसमें श्रीकांत प्रत्यूष का नाम है. इस लिस्ट को आप भी देख सकते हैं, आनलाइन होकर...

लिक है.. http://www.biadabihar.in/DataFiles/CMS/file/Patna%281%29.pdf

श्रीकांत प्रत्यूष अकेले पत्रकार नहीं होंगे जिन्होंने चुपचाप बीस हजार स्क्वायर फीट जमीन अपनी कंपनी के नाम एलाट कर लिया. पूरे बिहार में देखा जाए तो ऐसे दर्जन भर पत्रकार होंगे जिन्होंने नीतीश कुमार से जमीन आवंटित कराया होगा. बिहार के पत्रकारों से अपील है कि वे अपनी तरफ से बियाडा की लिस्ट को चेक करें और देखें कि इसमें कौन कौन से पत्रकारों को जमीन आवंटन का लाभ दिया गया है. आप पूरी लिस्ट को यहां से भी डाउनलोड कर सकते हैं....

लिंक है- भड़ास पर बियाडा आवंटन की लिस्ट

इसके पहले प्रकाश झा का नाम आ ही चुका है जो मौर्य टीवी के मालिक हैं. प्रकाश झा ने कई जगहों पर जमीन हथियाया है और माल आदि बना रहे हैं. तो उनसे भी हम क्या उम्मीद कर सकते हैं कि वे मौर्य टीवी के माध्यम से जनहित की पत्रकारिता करेंगे या गुपचुप तरीके से सत्ता-प्रतिष्ठान के हित में खड़े रहेंगे. बिहार में सुशासन और भयमुक्त माहौल की स्थापना के लिए वाहवाही बटोरने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह विवादों के घेरे में है. जेडी (यू)-बीजेपी गठबंधन सरकार में बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) पर नियमों की अनदेखी कर मंत्रियों व नौकरशाहों के रिश्तेदारों, फिल्मकारों, पत्रकारों को कीमती जमीनें आवंटित करने के आरोप हैं. इस मसले को लेकर बिहार में विपक्ष ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया.

क्या है बियाडा : बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डिवेलपमेंट अथॉरिटी बियाडा कहलाती है. यह बिहार की औद्योगिक नीति के मुताबिक, 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर 90 साल के लिए जमीन लीज पर देती है. जमीन इंडस्ट्रियल रेट्स के आधार पर दी जाती हैं. पिछले 6 सालों में बियाडा 450 प्लॉट आवंटित कर चुका है, जिसमें 133 पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया में हैं. यह इलाका राजधानी पटना के तहत आता है. इसी इलाके में श्रीकांत प्रत्यूष के नाम जमीन का आवंटन किया गया है.

बियाडा की सफाई : मंत्रियों और नौकरशाहों के रिश्तेदारों को किस आधार पर कीमती जमीनें दी गईं, इस बाबत बियाडा के मैनेजिंग डायरेक्टर अंशुल आर्या का कहना है कि जमीनों के आवंटन के मामले में किसी का पक्ष लेने या पुनर्विचार का सवाल ही नहीं है, क्योंकि नियम बेहद पारदर्शी हैं. नीलामी, पब्लिक टेंडर या लॉटरी ड्रॉ के जरिये जमीनें क्यों नहीं दी गईं, इस सवाल पर आर्या ने कहा कि ज्यादातर मामलों में एक से ज्यादा आवेदक नहीं थे. निवेश के लिहाज से बिहार नया क्षेत्र है, इसलिए यहां ज्यादातर निवेशकों को जमीनें मिल जाती हैं.

किसे क्या मिला :

  • 87,120 स्कवायर फीट जमीन दी गई एचआरडी मिनिस्टर प्रशांत शाही (जेडी-यू) की बेटी उर्वशी साही को..

  • 13,06,800 और 2, 46, 114 स्कवायर फीट के दो प्लॉट - फारबिसगंज और अररिया में दिए गए बीजेपी एमएलए अशोक अग्रवाल के बेटे को..

  • 10.53 हेक्टेयर जमीन बिहटा में दी गई बीजेपी एमएलसी अवधेश नारायण सिंह के संबंधी डॉ. बी. डी. सिंह को..

  • 2 एकड़ जमीन मिली आईजी (जेल) आनंद किशोर के रिश्तेदार को..

  • 6, 53,400 स्कवायर फीट जमीन मिली सीएम के सेक्रेटरी एस. सिद्धार्थ के संबंधी को

  • 5,000 स्कवायर फीट जमीन मिली कांग्रेस नेता ददन सिंह के बेटे मनोज कुमार को....

  • 20000 स्कवायर फीट जमीन मिली पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष को

  • 58066 वर्ग फीट के प्लॉट पाटिलपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में, 8777.4 वर्ग फीट औरंगाबाद में और 1.9 एकड़ जमीन मुजफ्फरपुर में मॉल व मल्टीप्लेक्स और हाजीपुर में सुपर-स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के लिए प्रकाश झा को

  • 87200 वर्ग फीट जमीन शरद यादव के नजदीकी जनता दल-यू के नेता अब्दुल सत्तार को कोल्ड स्टोरेज के लिए

  • 6800 वर्ग फीट जमीन का आवंटन सहरसा से कांग्रेस नेता गुलाम घोष को

  • 1.5 एकड़ जमीन बिहार इंडस्ट्रियल एरिया के पूर्व अध्यक्ष के पी एस केशरी को हाजीपुर में फल और सब्जियों के प्रोसेसिंग प्लांट के लिए आवंटित

अगर आपको पता है कि बिहार के कौन कौन अन्य जर्नलिस्ट नीतीश सरकार से ओबलाइज हुए हैं तो उनका नाम, पता, काम नीचे के कमेंट बाक्स के जरिए दें या भड़ास4मीडिया तक This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए पहुंचा दें.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत की रिपोर्ट. संपर्क- This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it


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Comments (28)Add Comment
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written by nag mani, September 26, 2011
srikantwa kafi purana dalal hai.bhai ips hai is liye idhar udhar jakar hanth paon mar leta hai.ise to sirf ladki aur mahila ke sath sona hi sauk hai. aise dalal ko kaise zee news dho raha hai
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written by bobby rana, July 29, 2011
Zee News......wah wah......Zee News pata kare ki Himachal ke Shimla mein baithey unke bureua Zee Punjabi ke naam par kya kar rahe hai......Media ke naam par DALALI....Shame
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written by wollywood star, July 27, 2011
khalnayak patrakaron ke bare me apki story padhi,achchha laga lekin star news ke prakash kumar bhi apke liye hit item ho sakte hain.ye naukari star news me karate hain lekin apna dotcom compy chalate hain,tv agency bhi hai inka .apani agency ka news star ko bechkar khub kamai karate hain aur businessman ke dohan ke liye ek patrika bhi nikalate hain.ad ke liye na jaane kitanon ko blackmail kar chuke hain.inki patni inaki kampani chalati hai.inki kampani ke kartadharta hain jharkhand ke purv mukhymantri ghotalon ke sartaaj madhu koda.madhu koda ke sath inki patni ka photo bhi hai hamare pas.madhu koda ko blackmail karake ye arabon kama chuke hain.ye nitish kumar ke khasamkas hi nahi hain.jo sata me aata hai ye pichhe lag jaate hain.inki story bhi chhapiye to hit hogi.
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written by chandramohan, July 27, 2011
sahi kah rahe bhadas wale bhai log
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written by lalan kumar, July 27, 2011
shrikant ke baare apaki report padhi,shrikant kaise patrakaar hai,ye to sab janate hain.kam se kam wo aaj bhi patrakarita hi karate hain aur su usi ke liye sabkuchh karate honge.lekin patna me to sthapit dalal patrakaar hain,unke baare me bhi chhapiye.prakash kumaar star news ke reporter hain,apani bibi ke name par media house chalate hain,agency chalakar star news se kamai karate hai aur bazar me dohan aur dalali ke liye ek patrika bhi nikal li hai.main unki bibi ka ek photo bahut jald jaari karunga .is photo me unke sath desh ka sabse bhrast mukhymantri koda ji haan madhu koda hai.madhu koda akasar unke yahan patna aata tha.ranchi me bhi unka office hai wahan ka madhu koda ke sath prakash ji ki patni ka photo bhi hai mere pas.unke bare me pata kariye madhu koda se kitana khaya hai,to media ka jyada bhala hoga..patna koi vyapari aesa nahi hai jise blackmail kar unhone apani magazine ke liye ad nahi liya hai.
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written by Srikant Dubey, July 26, 2011
Yashwant Jee
Aise patrakaro ko naaga karna chahiye. Ye apne bhi ka pura faida uthaya hai. Ishe bhi gandagi ye kar chuka hai, ye mamla to sabke samne aa gaya. Mai to CBI se mang karunga ki pata lagaya jay ki ishke pass itna paisa kahan se aaya. Ishke upper bank ka loan bhi hai. Ek patrakar ke pvt. ltd. company kahan se aaya. Ye ek no. ka chota hai. Aise logo ko bich sadak per goli mar dena chahiye.
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written by kumar sinha, July 26, 2011
media ka mafiya to hai hi sriknat partush.yaise patarkar news ko news nahi busnes bana chuke hai.dub maro ya phir maharaja kameshwar complex se kud kar jaan de do besarm
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written by pradeep kr. singh, July 26, 2011
मैंने श्रीकांत जी को काम करते देखा है। जहां तक उनसे जलकर भड़ास निकालने वालों का सवाल है तो उन्हें कृप्या न रोकें। इनका विधवा विलाप अनवरत जारी रहता है। जनपक्षधर-जनपक्षधर चिल्लाते हुए कब आपका गला रेत दें, पता ही नहीं चलता। श्रीकांत जी ने खुद को पत्रकारिता में इस मुकाम पर लाकर खड़ा किया है कि नई पीढ़ी उनसे सबक लेगी। रही बात दलाली की तो कौन शख्स बाजार में नहीं खड़ा है। कलम की नली खुलेगी तो समुद्र भी कम पड़ जाएगा। क्या काम के विस्तार के लिए जमीन लेना गैकानूनी है ? श्रीकांत क्या रोड पर मशीन लगाकर अखबार निकालेंगे। मेरी विनम्र सलाह है कि विधवा विलाप बंद कर अपनी क्षमता सकारात्मक काम में लगाइए। रही बात श्रीकांत जी के बतौर पत्रकार अक्षम होने की तो पानी पी-पीकर कोसने वाले रोड पर पड़े हैं। श्रीकांत जी ने सैकड़ों को पत्रकार बनाया। उन्हें शायद मदन जैसों से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी। श्रीकांत जी लगे रहिए। इन लोगों के विषबमन को अपने काम का प्रमाणपत्र मानिए।
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written by rp singh, July 25, 2011
yashwant bhai apto wakai kamal ke hain. .apaka portal itana popoular hai lekin aap itana ghatiya abhiyaan chala rahe hain ek aese patrakaar ke khilaf jo abtak saikadon patrakaar paida kar chuka hai jinke bharose desh ke sare regional channel chal rahe hain.main shrikant ko janta hun bahut chalu chij hai lekin fraud to katai nahi.wo apane chalupan se badi badi khabare nikal leta hai .jahan tak nitish kumar ke raj me malai khaane ka arop uske upar kewal isliye laga rahe hain kyunki uski kampani ko sarkari jamin mil gayi.us jamin par wo bangala banayega kya .wo bhi prabhat khabar ki tarh press hi lagayega .to lagaane dijiye na.ek ladaka jo struggle karake sabkuchh kar raha hai kewal patrakarita karane ke liye to apko khujali kyu ho rahi hai.kis akhbaar ko jamin nahi mili hai.jahan tak sarkari dalal aap use thahara rahe hain to apko ye pata hona chahiye ki 5 sal se wo fantus akhbar chala raha hai lekin aajtak uske paper sanmarg ko bihar govt ne ad nahi diya.dusare paper sarkaari ad se bhare rahate hain lekin is chamache ko ad kyu nahi mila.sochiye.shrikant hi hai jisane 3 baar sarkaar ko hilaya ek jab usane bhagalpur me ek alapsankhyak ladake ko police dwara motor cycle me bandhkar ghasitate dikhaya aur dusaribar patna me ek ladaki ko sareyam paint utarate dikhaya.jara aap dusare patrakaaron se baat kar lijiye aur puchhiye unhone kya khabar nitish raj me dikhaya..meri samajh me ye bat nahi aa rahi ki shrikant ne abtak apki khabar par react kyun nahi kiya.waise jahantak main janta hun wo nipat dehati hai.tv par bhojpuriya tone me hi bat karta hai leki.usaki jati brahaman ki hai lekin sakal se dom lagata hai lekin patna me aj bhi agar koi patrakaar hai to wahi hai baki sab dalal.aj bhi uske paper me anti govt ki khabar pej 1 par chhapati rahati hai...ho sakta hai ki usane ab nitish kumar se samjhauta kar liya ho lekin abhi bhi khabar bihar me wahi bada banata hai.mujhe ashchary hota hai ki apka dhyan prabhat khabar,hindustan,jagaran ke sampadakon par kyu nahi ja rahi jo khabar chhodkar sabkuchh chhapate hain.aj kisi akhbar me koi bada reporter rah gaya hai kya..maine to suna hai ki sunil dubey bhi usi ke akhbar ke sampadak hain,pawar bhi usi ke yahan kam kar rahe the.kam se kam patrakaron ke liye ek aesi jagah to hai jahan wo patrakarita kar sakte hain bhale paper ko chalane ke liye shrikant dalali karta ho,patrakarita karanewalon ke liye to jagah usi ke yahan hai..waise jarurat se jyada bhaav dekar apane shrikant ka kad bahut badha diya,is level ka wo abhi hai nahi.maine ek khabar apke dotcom par shrikant ke bare me padhi achcha laga patna bole polkhole ne likha hai.wakai wo shrikant ko thoda bahut samajhata hoga.
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written by arvind, July 25, 2011
sala sab apne ulta sidha karta hai aur srikant sir ko bolta hai. media god hain shrikant sir. jalta hai sab unki tarraki ko dekhkar. agar himmat hai tho arunima darling tu samne aao na. arunima darling samne ayegi tho khud boli band hoga.
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written by arvind, July 25, 2011
भड़ास पे श्रीकांत के बारे में खबर पढ़ी... उसे आप मित्रो के सामने इस लिए रखा की शायद आपके विचार उस खबर पर मिल सके. हुआ भी वैसा ही जैसा मैंने सोचा था... कई मित्रो ने तो खुलकर कमेन्ट किया लेकिन सबसे ज्यादा फेहरिस्त उन मित्रो की रही जिन्होंने अपने सन्देश भेजे. मै व्यक्तिगत तौर पे श्रीकांत को उस वक़्त से जनता हु जब वह मिडिया में बाल कदम उठा रहा था. आज श्रीकांत को किसी परिचय की जरूरत नहीं... श्री ने खटारा अम्बेसडर से लेकर लग्जरिय्स स्कोर्पियो तक का सफ़र तय किया है. दो दशक पहले तक जिस पत्रकार के पास कुछ भी नहीं था, आज उसके पास सबकुछ है. वाकई सोचना होगा श्रीकान्त इतना बड़ा आदमी कैसे हो गया... इस सवाल को भी टटोलेंगे लेकिन पहले उन भाई लोगो को पटना की मिडिया जगत के बारे में थोड़ी सी जानकारी देदे जिनका पाटलिपुत्र की इस धरती से वास्ता नहीं है. ये वो धरती है.. जंहा मिडिया जगत के बड़े बड़े शूरमा बसते हैं. खासतौर पर ऐसे पत्रकार जो आमतौर पर भले ही अपने दफ्तर में कुर्सियां तोड़ते हैं लेकिन सत्ता के केंद्र में बैठे लोगो की जब धमक होती है तो इनके झूठी मुस्कान से सने चेहरे इर्द गिर्द नाचने लगते हैं... नाम गिनवाना पड़ा तो लगभग सभी नंगे हो जाये... वैसे ये चेहरे तमाम उन लोगो को पता हैं जो रोज खबरों का हिस्सा बनते हैं. श्रीकांत भी शायद उन्ही में से एक चेहरा हो सकते हैं.. लेकिन एक मायने में श्री इन चेहरों से जुड़ा है... वो आज भी वो एक पत्रकार है... या यूँ कह ले उसके अन्दर का पत्रकार अभी मरा नहीं है. वो जिन्दा हैं खबरों पर रिएक्ट करता है. मैंने श्री को नजदीक से देखा है.. वो एक मेहनती पत्रकार आज भी और उसकी सुख सुविधाओ में आई तरक्की ने उसमे बदलाव नहीं आने दिया है. आइये अब थोडा श्रीकांत के धंधे को भी समझ ले... श्री आज सिर्फ किसी एक चैनल के ब्यूरो हेड भर नहीं है. वह पटना की मिडिया में आज खुद एक ब्रांड बना है और किसी की दया पर नहीं अपनी मेहनत के दम पर. पीटीएन न्यूज़ जैसे लोकल चैनल से लेकर नव बिहार और सन्मार्ग जैसे दैनिक निकालने तक उस जीवंत पत्रकार की मेहनत ही काम करती रही है. और ऐसा भी नहीं है की जी न्यूज़ के मालिकान से लेकर हेड तक इसे जानते नहीं हैं. फिर उन्होंने कभी ऐतराज क्यू नही जताया... जरा सोचना चाहिए.... सही मायनों में श्रीकांत बिहार की जमीन पर अपने चैनल की जरुरत बन चूका है. या यु कह ले की जी न्यूज़ के प्रबंधन को यह भली भांति पता है की श्रीकांत की पहचान उसका काम है. पटना जैसी मिडिया की छोटी सी पैदावार से श्रीकांत ने कई पौध निकाले हैं... जो आज लहलहा रहे हैं.

अब सवाल यह पैदा होता है की श्रीकांत सत्ता के करीबी बनकर मलाई कैसे चट कर गया. तो भाई हमे ये कहने में कोई संकोच नहीं की मलाई तो बहुतो ने खाई लेकिन मुह केवल श्री का चेक हुआ और मलाई के निशान मिल गए. श्रीकांत ने जो जमीन पटना के पाटलिपुत्र में ली वो किसी जाली फर्म के नाम पर ली नहीं.... पता गलत दिया नहीं... बिना पैसे के जमीन मिली नहीं... जिस काम के उपयोग के लिए जमीन लिया सभी जानते हैं श्रीकांत उसी धंधे में है... तो इस खबर क मतलब की श्री भी घोटालेबाज है. और अगर श्रीकांत वाकई घोटालेबाज है तो फिर इसकी फेहरिस्त और लम्बी है... पटना के दो बड़े दैनिक जागरण और प्रभात खबर को भी जमीन मिली बियाडा से तो उनका क्या.. निशाना सिर्फ श्रीकांत पर हु क्यू..? जबकि इन दोनों दैनिको से अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद भी सरकार विरोधी कई खबरे नवबिहार और सन्मार्ग में ही पहले पन्ने पर दिखती है. इतना ही नहीं श्री कम से कम पटना के उन मिडिया धनपशुओ से तो बेहतर है जो महज एक इमारत में फ़्लैट के लिए सरकार के मंत्री की बलि तक ले लेते हैं... पटना के बिस्कोमान के मामले ने किस बेचारे मंत्री का विकेट गिरा दिया ये किसी से छिपा है क्या. और अगर फिर भी श्री घोटालेबाज है तो इसके लिए दोषपूर्ण हमारी पत्रकारिता को चला रही वो व्यवस्था है जो हमें हर पल सत्ता के केंद्र में बैठे लोगो के तलवे चाटने पर मजबूर कर रही है. श्री के कभी गांव जाइये... निचट देहात है... बक्सर के उस इलाके में उसे देहाती भाषा में हेठार कहते है.. भौतिक सुविधाए आज भी वंहा भले ही कम हो लेकिन गंवई संस्कृति वंहा जिन्दा है... श्री उसी मिट्टी का है... यकीन नहीं होता तो आइये कभी पटना और मिल लीजिये... लेकिन आना आपको खुद पड़ेगा फ्लाइल का टिकट वो देगा नही.

श्रीकांत के बारे में खबर पढ़कर पहले तय किया था की कुछ ना लिखू... लेकिन मै जितना उसे जनता हु अगर सच-सच ना लिखता तो अपने आप से मुह छिपता फिरता... जो ठीक लगा.. लिखा. इस प्रकरण पर अपना विचार खत्म करने से पहले एक भरोसा सबको यकीन के साथ दिला सकता हु... अगर बियाडा की जमीन का आवंटन रद्द कर सरकार ने जमीन वापस मांगी तो वापसी सूचि में पहला नाम श्रीकांत का होगा... कम से कम श्री जैसे जुझारू पत्रकार की तरफ उंगली तो नहीं उठेगी.

ये मेरी राय है आप अपनी राय को रख सकते हैं लेकिन श्रीकांत को उन दलालों से कम्पेयर जरुर कर लीजियेगा
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written by shrawan kumar, July 25, 2011
jiski jo marzi likhy. par likhne se pahle zara apne giravan men jhank lain. jahan tak patrkarita ke nam per dalali ki bat he to zara un akhabaron par bhe nazar dal liziye j0 cag ki report aur rastrapati ke khabaron ko bhe page 6 par chapte hain. kam se kam srikant ji ka akhbar khabaron ki aise dalali nahi karta. hal ke barson men agar vidhan sabha men agar koi akhabar lahray ha to yo srikant ji ka hi akhbar hi hy. nam badal kar kisi ki alochana karna choro.
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written by aman soni, July 25, 2011
प्रभाष जी आज होते तो रो पड़ते। अपना चेहरा कहीं छूपाकर। लेकिन हमे यह नहीं समझ में आ रहा है.........कि इमानदार तो वे है ही....पुण्य प्रसुन वाजपेयी जी.....कैसे करते होंगे .......इसके साथ लाइव चैट..........बड़ा गंदा है...........यह पूरा पवित्र पेशे का सम्राज्य। प्रकाश मनु की किताब.........यह जो दिल्ली है.........इन पात्रों के सामने कुछ भी नहीं..........जहां ऐसे ऐसे घाघ बैठे हैं
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written by नरेन्द्र, July 25, 2011
ये दुनिया भी अजीब है। जब इसे कभी पत्रकार ही नही माना तो इतने सालों से लगातार कैसे माल डकार रहा है और अपने को महान कहने वाले साथी पत्रकार चुप रहे। एक साहब तो लिख रहे कि प्रत्यूष ने उनकी गोद में सूसू भी की है। तो जनाब, आपने जिस बच्चे को गोद खिलाया वह बिगड़ता रहा और आप देखते रहे। उम्मीद की जा रही है जी-न्यूज जैसे चैनल से ईमानदारी की। मालिक से लेकर ऐसा कौन सा संपादक है जिसने जिले से लेकर प्रदेश तक में बैठकर मोटा माल नही डकारा। कुछ तो लुटिया और धोती के साथ आये थे और आज बड़े राजमहल के मालिक है। बोलना-लिखना नही आता, लेकिन संपादक है। अपनी बेटियों की उम्र की लड़कियों से बुढ़ापे में इश्क फरमा रहे है। खैर छोड़िये. ज्यादा निंदापुराण से अपना ही मूड खराब होना है इन बेशर्मो का क्या जायेगा। लेकिन इतना तय है। हर पेशे की ईमानदारी उसकी प्रकृति के हिसाब से तय होती है। गरीबों की आवाज बुलंद करने के लिए ईश्वर ने पत्रकारिता का ताज पहनाया था, लेकिन गरीबों की आवाज दबाई। ईश्वर की न्याय भी सामने है। इन जैसे दलाल तो महज चिरकुट है। मनमोहन सिंह, कलमाड़ी और मायावती जैसों ने ताकत की आड़ में खूब अन्याय किया। अब ऐसी की तैसी हो रही है। ईश्वर की स्वर्ग औऱ नरक यही है। यही बुलंदियों को पकड़ना है और यही धूल में मिल जाना है। मुलायम सिंह जैसों के हश्र से लोगो को सीख लेनी चाहिए। अपने पेशे से न्याय नही करोगे, तो ईश्वर मिट्टी में मिला देगा।
बाकी सारे दलाल अपने गिरेबां में झांक सकते है, बस सही वक्त पर झांके ताकि पछतावे की नौबत ना आये।
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written by shivam parash, July 25, 2011



श्रीकान्त इतना बड़ा आदमी कैसे हो गया....


by PatnaBole PolKhole on Monday, 25 July 2011 at 00:07
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भड़ास पे श्रीकांत के बारे में खबर पढ़ी... उसे आप मित्रो के सामने इस लिए रखा की शायद आपके विचार उस खबर पर मिल सके. हुआ भी वैसा ही जैसा मैंने सोचा था... कई मित्रो ने तो खुलकर कमेन्ट किया लेकिन सबसे ज्यादा फेहरिस्त उन मित्रो की रही जिन्होंने अपने सन्देश भेजे. मै व्यक्तिगत तौर पे श्रीकांत को उस वक़्त से जनता हु जब वह मिडिया में बाल कदम उठा रहा था. आज श्रीकांत को किसी परिचय की जरूरत नहीं... श्री ने खटारा अम्बेसडर से लेकर लग्जरिय्स स्कोर्पियो तक का सफ़र तय किया है. दो दशक पहले तक जिस पत्रकार के पास कुछ भी नहीं था, आज उसके पास सबकुछ है. वाकई सोचना होगा श्रीकान्त इतना बड़ा आदमी कैसे हो गया... इस सवाल को भी टटोलेंगे लेकिन पहले उन भाई लोगो को पटना की मिडिया जगत के बारे में थोड़ी सी जानकारी देदे जिनका पाटलिपुत्र की इस धरती से वास्ता नहीं है. ये वो धरती है.. जंहा मिडिया जगत के बड़े बड़े शूरमा बसते हैं. खासतौर पर ऐसे पत्रकार जो आमतौर पर भले ही अपने दफ्तर में कुर्सियां तोड़ते हैं लेकिन सत्ता के केंद्र में बैठे लोगो की जब धमक होती है तो इनके झूठी मुस्कान से सने चेहरे इर्द गिर्द नाचने लगते हैं... नाम गिनवाना पड़ा तो लगभग सभी नंगे हो जाये... वैसे ये चेहरे तमाम उन लोगो को पता हैं जो रोज खबरों का हिस्सा बनते हैं. श्रीकांत भी शायद उन्ही में से एक चेहरा हो सकते हैं.. लेकिन एक मायने में श्री इन चेहरों से जुड़ा है... वो आज भी वो एक पत्रकार है... या यूँ कह ले उसके अन्दर का पत्रकार अभी मरा नहीं है. वो जिन्दा हैं खबरों पर रिएक्ट करता है. मैंने श्री को नजदीक से देखा है.. वो एक मेहनती पत्रकार आज भी और उसकी सुख सुविधाओ में आई तरक्की ने उसमे बदलाव नहीं आने दिया है. आइये अब थोडा श्रीकांत के धंधे को भी समझ ले... श्री आज सिर्फ किसी एक चैनल के ब्यूरो हेड भर नहीं है. वह पटना की मिडिया में आज खुद एक ब्रांड बना है और किसी की दया पर नहीं अपनी मेहनत के दम पर. पीटीएन न्यूज़ जैसे लोकल चैनल से लेकर नव बिहार और सन्मार्ग जैसे दैनिक निकालने तक उस जीवंत पत्रकार की मेहनत ही काम करती रही है. और ऐसा भी नहीं है की जी न्यूज़ के मालिकान से लेकर हेड तक इसे जानते नहीं हैं. फिर उन्होंने कभी ऐतराज क्यू नही जताया... जरा सोचना चाहिए.... सही मायनों में श्रीकांत बिहार की जमीन पर अपने चैनल की जरुरत बन चूका है. या यु कह ले की जी न्यूज़ के प्रबंधन को यह भली भांति पता है की श्रीकांत की पहचान उसका काम है. पटना जैसी मिडिया की छोटी सी पैदावार से श्रीकांत ने कई पौध निकाले हैं... जो आज लहलहा रहे हैं.

अब सवाल यह पैदा होता है की श्रीकांत सत्ता के करीबी बनकर मलाई कैसे चट कर गया. तो भाई हमे ये कहने में कोई संकोच नहीं की मलाई तो बहुतो ने खाई लेकिन मुह केवल श्री का चेक हुआ और मलाई के निशान मिल गए. श्रीकांत ने जो जमीन पटना के पाटलिपुत्र में ली वो किसी जाली फर्म के नाम पर ली नहीं.... पता गलत दिया नहीं... बिना पैसे के जमीन मिली नहीं... जिस काम के उपयोग के लिए जमीन लिया सभी जानते हैं श्रीकांत उसी धंधे में है... तो इस खबर क मतलब की श्री भी घोटालेबाज है. और अगर श्रीकांत वाकई घोटालेबाज है तो फिर इसकी फेहरिस्त और लम्बी है... पटना के दो बड़े दैनिक जागरण और प्रभात खबर को भी जमीन मिली बियाडा से तो उनका क्या.. निशाना सिर्फ श्रीकांत पर हु क्यू..? जबकि इन दोनों दैनिको से अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद भी सरकार विरोधी कई खबरे नवबिहार और सन्मार्ग में ही पहले पन्ने पर दिखती है. इतना ही नहीं श्री कम से कम पटना के उन मिडिया धनपशुओ से तो बेहतर है जो महज एक इमारत में फ़्लैट के लिए सरकार के मंत्री की बलि तक ले लेते हैं... पटना के बिस्कोमान के मामले ने किस बेचारे मंत्री का विकेट गिरा दिया ये किसी से छिपा है क्या. और अगर फिर भी श्री घोटालेबाज है तो इसके लिए दोषपूर्ण हमारी पत्रकारिता को चला रही वो व्यवस्था है जो हमें हर पल सत्ता के केंद्र में बैठे लोगो के तलवे चाटने पर मजबूर कर रही है. श्री के कभी गांव जाइये... निचट देहात है... बक्सर के उस इलाके में उसे देहाती भाषा में हेठार कहते है.. भौतिक सुविधाए आज भी वंहा भले ही कम हो लेकिन गंवई संस्कृति वंहा जिन्दा है... श्री उसी मिट्टी का है... यकीन नहीं होता तो आइये कभी पटना और मिल लीजिये... लेकिन आना आपको खुद पड़ेगा फ्लाइल का टिकट वो देगा नही.

श्रीकांत के बारे में खबर पढ़कर पहले तय किया था की कुछ ना लिखू... लेकिन मै जितना उसे जनता हु अगर सच-सच ना लिखता तो अपने आप से मुह छिपता फिरता... जो ठीक लगा.. लिखा. इस प्रकरण पर अपना विचार खत्म करने से पहले एक भरोसा सबको यकीन के साथ दिला सकता हु... अगर बियाडा की जमीन का आवंटन रद्द कर सरकार ने जमीन वापस मांगी तो वापसी सूचि में पहला नाम श्रीकांत का होगा... कम से कम श्री जैसे जुझारू पत्रकार की तरफ उंगली तो नहीं उठेगी.

ये मेरी राय है आप अपनी राय को रख सकते हैं लेकिन श्रीकांत को उन दलालों से कम्पेयर जरुर कर लीजियेगा
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written by CT, July 24, 2011
salle sab dalaal hai, patrakar nabi. Aur ye to shakal se hi criminal lagta hai
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written by saroj jha, July 24, 2011
nam bade aur darsha chhote. aj kal ke kam to bus yhi hai. aj kal patrkaron v bhashtrachar ke dusra rup hai.
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written by rahaman, July 24, 2011
स्टार न्यूज़ के प्रकाश भी सता के करीब है
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written by rajnish, July 24, 2011
abb patrakarita bachi kahan hain, abb to dalalikarita ho rahi hai.abb bhi patrakarita ko lekar koi bhram hai to bhul jayen tabhi acha hai...
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written by rakesh singh, July 24, 2011

PRABHAT KHABAR KO BHI JAMIN MILI HAI. PATNA, MUZ, BHGlPUR AUR GAYA ME NEUTRAL PUBLISHING HOSE KE NAM PAR.

ISE BHI TO BAHAR AANE DIJIE. MATLAB YAH KI DALALON KA RENG BADA VYAPAK K hO GAYA HAI.
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written by rahaman, July 24, 2011
स्टार टी वी के प्रक्ष जी भी है फायदा लेनेवालों मे
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written by Arun pandey, July 24, 2011
Arun Kumar

Srikant Pratush ke bare mein Madan Tiwari ke story ka intazer hai. Srikant patkar nahi Dalala hai.

Jis tarah Barka Dutt, Virsanghvi Aur dusre partkr ne 2g Spectrum karaya thik ushi tarah Srikant ne Bihar mein syndicate bana rakha hai.

Srikant par turant sarkar ko action lena chaahiya aur Zee news ko usko hatana chahiye.


Arun Kumar

Sanmarg Patna
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written by saraswati, July 24, 2011
janab...zee news ki tag line hai ZARA SOUCHIY ! Ab dekna hai yaha souchta kaun hai......
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written by श्रीकांत सौरभ, July 24, 2011
बिहार के बक्सर जिले से आनेवाले श्रीकांत प्रत्यूष नम्बर 1 के मीडिया माफिया है . 1992 में जी न्यज से अपना करियर शुरू करने वाले श्रीकांत ने इन दो दशक में अपनी काली कमाई से अकूत संपति अर्जित की है . सन्मार्ग,नवबिहार (दोनों अखबार) व पीटीएन न्यूज चैनल जैसे संस्थानों के मालिक होने के साथ ही ये आज भी जी न्यूज के बिहार प्रभारी हैं . पाटलीपुत्रा में बियाडा की जमीन हथियाना तो महज एक नमूना भर है . सूबे में इन्हें पत्रकारिता की आड़ में राजनीतिक गलियारे से फायदा उठाने वाले उम्दा सेटर(कथित दल्ला) के तौर पर जाना जाता है . पटना यूनिवर्सिटी से ली गई पत्रकारिका की डिग्री ही इनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है . 90 के दशक में बिहार के मीडिया व सता में इनकी पहचान तेजी से बनने की एक वजह इनके बड़े भाई आइपीएस गुप्तेश्वर पांडे भी थे . अपनी उंची रसूख की बदौलत श्रीकांत ने शुरुआती दौर में ही तत्कालीन जंगल राज में सता का कथित दोहन कर भरपूर कमाई की . आज भी बिहार के सीएम नीतिश कुमार के साथ ही विजय गोयल(जी न्यूज),आलोक मेहता,रजत शर्मा,प्रणव राय,राजीव शुक्ला इत्यादी मीडिया आलाकमानों से भी इनका रिश्ता बेहद करीबी है . यह बात और है कि शुद्ध-शुद्ध हिन्दी लिखना तो दूर की चीज है इन्हें बोलने भी नहीं आता . हां इतना जरूर है कि भोजपूरी मिश्रित बिहारी हिन्दी बोलकर अफसरों व नेताओं की चाटुकारिता करने में श्रीकांत प्रत्यूष को महारथ हासिल है .
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written by मदन कुमार तिवारी, July 24, 2011
यह जब पैदा हुआ था ,पत्रकारिता जगत में , उस समय से इसको जानता ूं , इसे कभी पत्रकार माना हीं नही गया। ससर्वप्रथम बिहार के नागमणी, जो मंत्री बने थें, अटल जी के शaासन में, उनके यहां इसे दलाल की भूमिका में देखा था ैैeे। वैसे और भी बहुत कुछ सीडी वगैरह के बबaारे में सुनने में आया है .प्रत्युष को कोई चमचा या दलाल हीं पत्रकार कह सकता है ।पaकारिता जगत के कंलंकित चेहरे में एक है प्रत्युष .
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written by ek patrkar, July 23, 2011
srikant jaise dalal patrkaron ke bare me jo nahi jante unhe patrkar kahane ka hak nahi, agar unka bhai ips nahi hota to wo kisi akhbar ka stringer banane ke layak bhi nahi tha, main gawah hu usne kase niji gandhariyon ke munh par kapda bandhkar booth looteron ki story ki thi,kai bar kaise usne police ki banduken dikhakar naxliyon ki story ki, srikant bihar ka bada thag hai patrkar to wo is janm me ho hi nahi sakta
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written by arunima, July 23, 2011
aise patarkar ko bich bazar mein jute se naga kar ke marna chahiye, sale aise hi patarkar media ke anya patrakaro ko jalil karte hai..........kuta hai sala pratiyush....netao ka talawa chatta hai..
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written by Vikas Singh, July 23, 2011
Yashwant ji

Ptabhat Khabar got plots in Patliputra Colony, Gaya, Muzaffarpur, Bhagalpur. Dainik Jagran in Paliputa Colony. Please do some more stories how Media benefitted in Nitish regim.

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