राज्यसभा टीवी को नहीं मिल रहे योग्य पत्रकार!

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ये खबर हैरान करने वाली है लेकिन सच यही है कि राज्यसभा टीवी के आला अधिकारियों को परीक्षा और मैराथन इंटरव्यू कराने के बावजूद टीवी मीडिया से योग्य पत्रकार नहीं मिल रहे हैं. शायद यही कारण है कि 7 जून को आयोजित की गयी परीक्षा के बाद कुल स्वीकृत पदों से भी कम लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलावा भेजा गया. तो वहीं चयन सूची पर भी अब तक कोई सहमति नहीं बन पाना ये इशारा कर रहा है कि राज्यसभा टीवी चैनल के शुरू होने के पहले ही मतभेदों का सिलसिला शुरू हो गया है.

सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक़ चैनल में अभी से गुटबाजी शुरू हो गयी है. अभी चैनल लांच भी नहीं हुआ है कि नियुक्तियों को लेकर मतभेद उजागर हो रहे हैं. अपने पसंदीदा लोगों की इंट्री ना हो पाने के चलते एक खेमा नाराज़ चल रहा है. अंदरूनी हालात कितने खराब हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चैनल में 80 फीसदी पदों के लिए इंटरव्यू हो चुके हैं,  बावजूद इसके चयन सूची जारी नहीं हो पाई है. कहा तो ये भी जा रहा है कि चयन सूची पर अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है. चैनल के लिए कुल कितने पद स्वीकृत हुए हैं ये नहीं बताया जा रहा है. चैनल के अंदरूनी सूत्रों की माने तो चैनल में उभर कर सामने आये दोनों गुटों में आपसी सहमति ना बन पाने के कारण ज़्यादातर पदों पर नियुक्तियां टाली जा रही हैं. हालाकि बाहर से "आल इज वेल" दिखाने की पूरी कोशिश चल रही है.

मीडिया के जानकार इस बात को लेकर भी हैरान हैं कि 22 जुलाई को हुए एसोसिएट प्रोड्यूसर के इंटरव्यू में महज़ 15 उम्मीदवारों को ही बुलावा भेजा गया. जिन में से दो उम्मीदवार अनुपस्थित रहे थे. यानी सिर्फ 13 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया, किसी भी उम्मीदवार को 5 मिनट से ज़्यादा वक्त नहीं दिया गया! जबकि असोसिएट प्रोड्यूसर के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 25 से ज़्यादा बताई जा रही है. ऐसे में नियमों को ताक़ पर रख कर महज़ 13 उम्मीदवारों का ही इंटरव्यू लेना ये इशारा कर रहा है कि दाल में कुछ काला है. गौरतलब है कि उम्मीदवारों के पूछे जाने के बावजूद भी चैनल के आला अधिकारियों ने अभी तक इस बात को उजागर नहीं किया है कि चैनल के विभिन्न विभागों में कुल स्वीकृत पदों की संख्या कितनी है?

दिलचस्प बात ये है कि मैराथन इंटरव्यू के बावजूद जिन चुने हुए लोगों को नियुक्ति पत्र दिए गए,  उनमें से अधिकाँश पहले से ही इसकी घोषणा कर चुके थे. तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अपनी ऊंची पहुँच का हवाला देकर जल्द ही नियुक्ति पत्र पाने का दावा कर रहे हैं. ऐसे में चयन सूची की गोपनीयता पर सवालिया निशान लग गया है. हैरानी वाली बात ये भी है कि राज्य सभा टीवी में विभिन्न पदों पर देश भर के हज़ारों अनुभवी टीवी पत्रकारों ने आवेदन किया था. यहाँ तक कि आयोजित परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में प्रमुख खबरिया चैनलों के पत्रकार जुटे थे. बावजूद इसके राज्यसभा टीवी के अधिकारियों को अपने चैनल के लिए योग्य पत्रकार नहीं मिल पाए. इसलिये चैनल में कम से कम पदों पर ही नियुक्ति की जा रही है. और बाकी पदों को भविष्य में योग्य उम्मीदवारों के आने का इंतज़ार है.


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