पांच स्टिंगरों की नौकरी खाने का दोषी है भड़ास4मीडिया!

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भड़ास4मीडिया में नाम आते ही आर्यन ने उन पांचों स्टिंगरो को बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिन्होंने चार माह से वेतन नहीं मिल पाने के कारण हड़ताल कर दिया था और इसकी खबर भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित हो गई थी, स्टिंगरों के नाम समेत. आर्यन के झारखण्ड के पांच हड़ताली स्टिंगरों की खबर जब नाम के साथ प्रमुखता से भड़ास4मीडिया में छपी तो प्रबंधन को यह नागवार गुजरा. वेतन देने की जगह प्रबंधन ने इन्हें काम से ही महरूम कर दिया.

बिना कोई कारण बताये इन्हें काम बंद करने का फरमान सुना दिया गया. बाद में सभी स्टिंगरो से सफाईनामा आवेदन मंगवाया गया कि भड़ास4मीडिया में नाम आने और हड़ताल के मामले में इनकी कोई सहभागिता नहीं है. इस सफाईनामे के बाद भी स्टिंगरों को आर्यन अपने यहां काम करने की इजाजत नहीं दे रहा है. हालांकि जब कोई बड़ी खबर होती है तो आर्यन इन्हीं स्टिंगरों का सहयोग लिए जा रहा है और साथ ही इन्हें अच्छे कल का लालीपाप भी दिया जा रहा है. पर अंदरूनी बात यह है कि गुंजन सिन्हा अपना नाम आने को लेकर काफी दुखी हैं. इसलिए वे दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है.

पटना ऑफिस में यह चर्चा जोरों पर है कि भड़ास ने पांच स्टिंगरों की नौकरी छीन ली. भड़ास को यह मालूम होना चाहिए था कि नाम देख कोई भी प्रबन्धन कार्रवाई के मामले में दरियादिली नहीं दिखायेगा फिर भी भड़ास ने उनके नामों को प्रमुखता से छाप दिया. अब ये स्टिंगर उम्मीद और अपनी कारगुजारी पर अफ़सोस कर रहे हैं कि बिन वेतन काम करना ठीक था, न कि किसी पर आंख बंद कर भरोसा करना. भड़ास ने सहयोग करने के बजाय इन्हें मुसीबत में डाल दिया. इनके परिवार का क्या होगा. आर्यन प्रबंधन ने भड़ास पर छपे नाम को देखकर ही स्टिंगरों के खिलाफ कार्रवाई कर दी..!!  -एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.))

भड़ास4मीडिया का पक्ष : जिस मेल में पांचों स्टिंगरों के नाम का उल्लेख था और उसे प्रकाशित किया गया, उसमें यह कहीं नहीं लिखा था कि कृपया स्टिंगरों का नाम न दें, या भेजने वाले का नाम न दें. इसलिए यह मान लिया गया कि पत्र भेजने वाले पूरा प्रकरण इसी रूप में प्रकाशित कराना चाहते हैं. हम लोग हमेशा भरोसे के रिश्ते की कद्र करते हैं और गोपनीयता का अनुरोध किए जाने पर कभी मेल भेजने वाले के नाम का प्रकाशन नहीं करते. पर जब अनुरोध नहीं किया जाता है तो हम लोग खबर की विश्वसनीयता के लिए भेजने वाले का नाम और खबर से जुड़े पात्रों, लोगों के नामों का उल्लेख कर देते हैं. रही बात नौकरी जाने की तो दोस्त, जब भी आप अपने हक के लिए संघर्ष करेंगे तो हमेशा तैयार रहना चाहिए कि मुश्किलें ज्यादा आएंगी, सफलता बहुत देर में मिलेगी.

जब स्टिंगरों ने हड़ताल किया वेतन के लिए तब नहीं सोचा कि प्रबंधन उनकी हड़ताल को किस रूप में लेगा. और, जब आप हड़ताल पर हैं तो यह खबर प्रकाशित करने में हम लोगों को क्यों दिक्कत हो. गुड़ खाएंगे और गुलगुले से परहेज करेंगे, ये कैसे संभव है. अगर परिवार पालने की इतनी ही चिंता थी तो डाक्टर ने नहीं कहा था हड़ताल करने के लिए. भगत सिंह को अंदाजा था कि उन्हें फांसी होगी, तभी उन्होंने संसद में बम फेंका था. अगर उन्हें जान से मोहब्बत होती, नतीजे से भय होता तो वे भी चुपचाप बैठे रहते. इसलिए, साथी, जो हो गया, उससे उबरो और नए रास्ते तलाशो. -एडिटर, भड़ास4मीडिया))


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