जितने पतित होंगे, उतनी ''सीधी बात'', फिर ''सच्ची बात'' और आखिर में ''तीखी बात'' करेंगे!

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प्रभु चावला रोल माडल हैं. बाजार के. बाजारू मीडिया के. उन पत्रकारों के भी जिन्हें ढेर सारा पैसा और खूब सम्मान-वम्मान व नक्शेबाजी चाहिए. प्रभु चावला परंपरागत मीडिया के आदर्श पुरुष हैं. नीरा राडिया से फोन पर चोंच लड़ाते-बतियाते पकड़े गए, कुछ नहीं हुआ. अमर सिंह से बतियाते-रिरियाते पकड़े गए, कुछ नहीं हुआ. अरे, इसे आप होना कहते हैं कि वे आजतक से हटा दिए गए, इंडिया टीवी से हटा दिए गए.

बिलकुल नहीं. वे आज ज्यादा अच्छी पोजीशन में हैं. वे द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के शीर्षस्थ संपादक हैं. वे ईटीवी के सभी चैनलों पर सच्ची बात करते हुए दिखते हैं. वे अब आईबीएन7 पर तीखी बात करते हुए दिखेंगे. जी हां, यह सूचना खुद प्रभु चावला पिछले दिनों दीपक चौरसिया की बेटी के अन्नाप्रासन समारोह में घूम-घूम कर दूसरे पत्रकारों को दे रहे थे. जब तक लोग उनके सामने होते, उनकी हांक सुनते रहते, और उनसे अलग होते ही कहते- थेथरई और ढिठाई की हद है, अब तो तय हो गया है कि जो जितना पतित होगा वह उतना सच्चा और तीखा होगा. ज्ञात हो कि प्रभु चावला 15 जनवरी, 2011 से ईटीवी पर नए टॉक शो ‘सच्ची बात’ के साथ नजर आए. यह शो ‘ईटीवी’ हिन्दी के अलावा ‘ईटीवी’ गुजराती और ‘ईटीवी’ उर्दू पर भी प्रसारित होता है. प्रभु चावला का इस चैनल ईटीवी के साथ 2 वर्षों का समझौता हुआ है.

सच्ची बात से पहले चावला आजतक न्यूज चैनल पर सीधी बात की मेजबानी करते थे. वहां से चावला की विदाई होने के बाद वे न्यू इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ गए. सीधी और सच्ची बात के बाद प्रभु चावला अब तीखी बात करेंगे. आईबीएन-7 पर एक नया कार्यक्रम शुरू होने जा रहा जिसे प्रभु चावला होस्ट करेंगे. इस कार्यक्रम का नाम होगा – तीखी बात, प्रभु के साथ. यह सीधी बात की तरह ही एक टॉक शो होगा. 20 अगस्त से इसका प्रसारण शुरू होने जा रहा है. प्रत्येक शनिवार, रात 9.30 बजे इसका प्रसारण होगा. गौरतलब है कि आजतक में सीधी बात का प्रसारण समय भी यही है जिसे प्रभु चावला के बाद एमजे अकबर होस्ट करते हैं.

ईटीवी वालों और फिर आईबीएन7 वालों ने प्रभु चावला को अपने यहां जोड़कर देश भर के पत्रकारों को मैसेज दे दिया है. धंधई जिंदाबाद. लायजनिंग जिंदाबाद. दलाली जिंदाबादा. नेताओं की चमचागिरी जिंदाबाद. लाबिस्टों की चेलहाई जिंदाबाद.... जो पत्रकारिता, सरोकार, नैतिकता, इमानदारी, स्वाभिमान, चौथा खंभा... आदि इत्यादि की बात करता है, वह संभल जाए, इस राह में कांटे और कंटाप ही हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित


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