अन्ना के आंदोलन से इंडिया टीवी का बैंड बजा, रिपोर्टरों को नोटिस

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: चिटफंडियों, बिल्डरों, दलालों, सरकार समर्थकों, नान-न्यूज वालों के न्यूज चैनल धड़ाम हुए : खिसियाये इंडिया टीवी प्रबंधन ने अपने रिपोर्टरों पर निकाली भड़ास : अन्ना हजारे के समर्थन में जिस तरह पूरा देश उठ खड़ा हुआ है, उससे न्यूज चैनलों पर दबाव बहुत बढ़ गया है. कामेडी, भूत प्रेत, अंधविश्वास, अपराध, चिरकुटई आदि दिखाने का वक्त नहीं है. शुद्ध हार्ड न्यूज पर खेलने का दौर है.

आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष जैसे लोग अन्ना के आंदोलन में रामलीला ग्राउंड से लाइव कर रहे हैं. आजतक न्यूज चैनल अपने पुराने फार्म में दिख रहा है. सारे न्यूज चैनल खबरों पर खेल रहे हैं. और, अगर खबरों का मामला हो तो देश की जनता आजतक को प्राथमिकता देती है. उसके बाद उसे जो बेहतर कर दिखा रहा हो. टैम वाले टामियों ने भी जनता के रुख को भांपकर अपनी टीआरपी रेटिंग को लगता है ठीक कर लिया है. इसी कारण इस हफ्ते की टीआरपी में इंडिया टीवी धड़ाम से नंबर चार पर आ गया है. और, नंबर चार पर आ बैठा न्यूज24 सरककर सीधे आठवें, अपनी पुरानी जगह पहुंच गया है.

सबसे बड़ा झटका इंडिया टीवी को लगा है. नंबर वन की कुर्सी पर बैठ चुका इंडिया टीवी मीडिया के माहौल को पूरी तरह गंधा रहा था. नान-न्यूज की जय जय की बातें की जा रही थी. सबसे प्रयोगधर्मी मालिक के रूप में रजत शर्मा का नाम और सबसे महान टीआरपीबाज संपादक के रूप में विनोद कापड़ी का नाम बाजारू इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने के लिए व्यग्र था. लेकिन अचानक अन्ना ने इस देश को जैसे जगा दिया. और जब देश जग गया तो मंडी में रंडी की तरह व्यवहार कर रहे मीडिया को भी जगना ही था. जिसकी जितनी औकात, वो उसी जगह पहुंच गया. नान न्यूज पर खेलने की अपनी आदत के चलते इंडिया टीवी को दर्शकों का टोटा पड़ गया है.

खिसियाये इंडिया टीवी प्रबंधन ने अपने रिपोर्टरों को नोटिस जारी कर दिया है, कि ठीक से काम नहीं कर रहे हो तुम लोग, सुधर जाओ वरना नौकरी ले ली जाएगी. इस नोटिस से इंडिया टीवी के रिपोर्टर डरे हुए हैं. इन्हें लगता है कि जब वे न्यूज की बातें करते थे तब तो उन्हें विनोद कापड़ी जैसे संपादक चिरकुट चूतिया बताते थे और कुछ नया करने को, ले आने को कहते थे, लेकिन अब जब सच में न्यूज का दौर आ गया तो दर्शक उन चैनलों पर जा रहा है जहां न्यूज दिखाने का ट्रेंड रहा है, अतीत रहा है.

जी न्यूज को सबसे ज्यादा बढ़त मिली है. दर्शकों ने इस न्यूज चैनल को खबरों के मामले में खूब भरोसेमंद पाया है. इस न्यूज चैनल पर पुण्य प्रसून बाजपेयी जैसे चर्चित पत्रकार लगातार दर्शकों को ताजीस्थिति और खबरों के पीछे की खबर से अवगत करा रहे हैं. एनडीटीवी को दर्शक पसंद नहीं कर रहे क्योंकि यह चैनल अपने एप्रोच में कनफ्यूज है. इसी कारण इस ठंडे न्यूज चैनल को दर्शकों के ठंडे रुख का सामना करना पड़ रहा है. पी7न्यूज, सीएनईबी आदि टाइप के न्यूज चैनलों को तो टाप टेन में जगह ही नहीं मिली है क्योंकि इन चैनलों का अभी तक अपना कोई दर्शक वर्ग नहीं है और न ही इन चैनलों ने खुद को भरोसा करने लायक साबित किया है.

राजीव शुक्ला के केंद्र में मंत्री बनने के बाद और अजीत अंजुम को वापस न्यूज24 की कमान मिलने के बाद न्यूज24 के मानों दिन बहुर गए थे. यह आखिरी पायदान का चैनल अचानक नंबर चार पर आ गया और यहां काम करने वाले लोग खुद को सबसे बड़ा पंडित मानने लगे. पर यह खुशी कुछ हफ्तों तक टिकने के बाद अब पूरी तरह काफूर हो चुकी है. कांग्रेसी मंत्री का यह न्यूज चैनल दर्शकों के भरोसे को जीत पाने में नाकाम रहा है और यह सोचने को मजबूर किया है कि क्या वाकई केंद्रीय मंत्री बनते ही राजीव शुक्ला ने टैम के टामियों को हड़का कर पुचकार लिया था और टामी लोग कांय कांय करते हुए उनके चरणों में लोट गए. फिर अगली सुबह शुक्लाजी के न्यूज चैनल को टीआरपी चार्ट में नंबर चार पर चढ़ा दिया.

जो भी हो, पर यह सच है कि अन्ना के आंदोलन ने मीडिया के अंदर भी सफाई शुरू कर दी है. नान-न्यूज वालों, चिटफंडियों, दलालों के न्यूज चैनलों को इस आंदोलन ने किनारे कर दिया है. दर्शक उन्हीं चैनलों को पसंद कर रहे हैं जिनमें थोड़ा बहुत तेवर, तेज और सच कहने का दमखम बाकी है.

टामियों ने जो ताजी टीआरपी रेटिंग जारी की है, वो इस प्रकार है-

आजतक- 18.1 (2.9 उपर चढ़ा), स्टार न्यूज- 14.9 (1.1 बढ़त), जी न्यूज- 13.5 (3.9 बढ़त), इंडिया टीवी- 12.0 (3.0 गिरावट), आईबीएन7- 9.8 (1.3 बढ़त), एनडीटीवी इंडिया- 8.2 (0.1 गिरावट), लाइव इंडिया- 7.4 (1.1 गिरावट), न्यूज24- 6.4 (3.7 गिरावट), समय- 4.5 (0.7 बढ़त), तेज- 3.0 (1.5 बढ़त), डीडी- 1.5 (0.7 गिरावट), इंडिया न्यूज- 0.6 (0.2 बढ़त)

सप्ताह- 34वां, वर्ष-2011, टीजी- सीएस 15+

नोट- भड़ास4मीडिया का हमेशा मानना रहा है कि न्यूज चैनलों की लोकप्रियता को मापने वाली संस्था टैम का कामधाम पूरी तरह संदिग्ध है. यह बाजारू संस्था कई तरह के दबावों, दलालों, लाइजनरों के बीच और के द्वारा काम करती है और इनके टीआरपी मीटर उस अदृश्य भूत की तरह होते हैं जो कभी भी कहीं भी नहीं दिख पाते लेकिन उनके आतंक से हर टीवी पत्रकार व संपादक थर्राया रहता है. पर दुर्भाग्य से यही संस्था टैम इन दिनों न्यूज चैनलों के भविष्य को तय करती है और इसके बेहद भ्रामक आंकड़ों को बाजारू लोगों के बीच बेहद प्रामाणिक माना जाता है. भड़ास4मीडिया हमेशा से टैम के घृणित कारनामों का खुलासा करता रहा है और इस संस्था द्वारा जारी किए जाने वाले आंकड़ों, टीआरपी आदि के प्रकाशन से बचता रहा है. लेकिन, कभी कभार भड़ास4मीडिया पर इस भूत के वर्तमान-भविष्य के बारे में और इसके दावे-प्रतिदावों के बारे में चर्चा कर ली जाती है ताकि इस सार्वभौमिक बुराई की तरफ सभी का ध्यान बनाए रखा जाए. करप्शन के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के इस दौर में मीडिया के करप्शन के खिलाफ भी गोलबंदी होने लगी है, लोग आवाज उठाने लगे हैं.. कृपया आप भी मीडिया के भ्रष्टाचार के खिलाफ, टैम के दुराचार के खिलाफ आवाज उठाएं और न्यूज चैनलों को पटरी पर लाने में मदद करें और इनके भूखे-नंगे मालिकों को आइना दिखाकर इनकी औकात दिखाएं.


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