चेयरमैन अमनदीप सरान सीधे हैंडल कर रहे हैं सीएनईबी न्यूज चैनल

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सीएनईबी से अनुरंजन झा और उनकी टीम की विदाई के बाद कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं. सबसे बड़ा बदलाव तो यही है कि इस चैनल को अब किसी बड़े एडिटर की जरूरत बिलकुल नहीं है. खुद अमनदीप सरान चैनल को हैंडल कर रहे हैं. वह ग्रुप की मीडिया कंपनी के चेयरमैन हैं. अभी तक उनका न्यूज चैनल में दखल पालिसी मैटर तक ही हुआ करता था लेकिन अनुरंजन झा के जाने के बाद वह हर एक से सीधे मिल रहे हैं और सभी को यह कह चुके हैं कि किसी को कोई समस्या हो तो वो सीधे उनसे मिले.

इस बीच, पता चला है कि अनुरंजन झा ने जिस अंशुल शुक्ला को बाहर का रास्ता दिखा दिया था, उन्होंने वापसी कर ली है. उन्होंने आउटपुट हेड का काम संभाल लिया है. नए आए रजनीश सिर्फ कंटेंट का काम देख रहे हैं. रजनीश दिन भर न्यूज रूम में मिलते हैं. सबके स्क्रिप्ट चेक करने तक का काम रजनीश ने अपने हाथ में ले लिया है. बाइट कटवाने का काम भी वे संभाल लेते हैं. इस कारण आउटपुट और इनपुट हेड कई बार खुद को लाचार महसूस करते हैं. अनुरंजन झा, किशोर मालवीय, अबुल और मीनाक्षी से जुड़े सभी प्रोग्राम इन लोगों के जाते ही बंद कर दिए गए. एंकर बाइट्स पर आधारित एक घंटे का एक नया प्रोग्राम शुरू किया गया है. दूसरे चैनलों से कई लोग लाए जा रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि सरान पिता-पुत्र ने अब समझ लिया है कि उनका न्यूज चैनल जैसे चल रहा है, वैसे ही चलेगा, पर अब वे लोग किसी बड़े एडिटर को नहीं लाएंगे क्योंकि जो आता है वह अपने हिसाब से अपने हित में चैनल का यूज करके चला जाता है. यह भी बताया गया है कि अमनदीप सरान इन दिनों एक लिस्ट बनवा रहे हैं जिसमें उन लोगों का नाम लिखा जा रहा है जो अनुरंजन झा द्वारा लाए गए हैं. इनकी छंटनी की तैयारी की जा रही है. हालांकि इन बातों की अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन सूत्र कहते हैं कि चैनल जिस तरफ दिनोंदिन जा रहा है, उससे यही जाहिर होता है कि निकट भविष्य में इस चैनल का कोई नामलेवा नहीं रहेगा. यह चिटफंड का धंधा करने वाले पिता-पुत्र के हाथों का मनबहलाने वाला खिलौना बनकर रह जाएगा.

इस बीच, अनुरंजन झा के बारे में पता चला है कि सीएनईबी से विदाई के बाद वे एक नई पार्टी पर डोरे डालने में लगे हैं. हालांकि उन्होंने सीएनईबी छोड़ने के बाद ही फेसबुक समेत कई जगहों पर ऐलान कर दिया था कि बहुत जल्द वे नया न्यूज चैनल लाने जा रहे हैं पर अभी तक कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है और न अनुरंजन झा फेसबुक समेत अन्य जगहों पर कोई बयान दे रहे हैं. माना जा रहा है कि अनुरंजन झा की बात किसी नए या पुराने चैनल में बन नहीं पाई है और कुछ नए लोग जो चैनल लाना चाहते हैं, उनके साथ भी उनकी ट्यूनिंग जम नहीं पा रही है. पर कयास लगाया जा रहा है कि देर-सबेर अनुरंजन कोई नया शिगूफा लेकर आएंगे और उसे मूर्त रूप देने में जुट जाएंगे क्योंकि वह बहुत देर तक चुप रहने वाले शख्स नहीं है. किशोर मालवीय भी अभी चुप्पी साधे हैं. वे कहां, कब और किस रूप में नई पारी शुरू कर रहे हैं, इस बारे में कोई चर्चा नहीं है.


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Comments (8)Add Comment
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written by nakul, August 29, 2011
khabren nahi lete haryana ke stringers se kam se kam unka purana bakaya to luta dijiye..itne lambe samay tak kaam kiya.lakin mila kya 2 cheque jisme amount thi 500-500rs..uske baad to kabhi kuch nahi mila hazaro ke bill pending h unka to kuch karo janab
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written by sadhu singh, August 26, 2011
bhadas likh raha hai ki cneb ka koi naamleva nahi rahegaa. to mera yeh kehna hai ki jis channel ko khud HBN ke chairmen handle kar rahe ho aur achche achche patrakaron ko apne channel se jod rahe ho to phir koi sandeh hi nahi reh jaata hai.mera anumaan hai ki jald hi cneb bahut bade channel ke rup me saamne aayega.
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written by navin verma, August 26, 2011
ansul shukla,dinesh anand aur ab mayur jani.cneb ke chairmen ko wakai heere ki parakh hai.ek baat aur,chairmen saheb ne un mehnat karne wale apne purane logon par vishwaas kiya hai jo anuranjan ke sataye the.zaahir hai aise log channel ko aage badhane ki hi sochenge kyuki channel dwara inhe bharpoor samaann jo mila hai.
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written by pramod singh, August 26, 2011
cneb achcha kar raha hai.distribution bhi sahi tarike se ho raha hai aur achche kaam karne wale logon ko vaapas laaya gaya hai aur wo bhi pure samaan ke saath.good luck
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written by rajni kumari das, August 26, 2011
is channel ki niyat saaf hai aur iski taraki nischit hai..yeh baat to main usi din samajh gayi thi jab anuranjan jha ki is channel se vidai hui thi.
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written by ramesh singh, August 26, 2011
jahan tak meri samajh hai ki news channel ko chalane ke liye kisi bade naam ki jarurat to hai, lekin yeh bhi kaha gaya hai ki "jo hai naam waala wahi to badnaam hai" sran saheb ek nekdil aur bharosa karne wale insaan hai aur unhone kai logon par bharosa kiya bhi hai lekin logon ne to unke bharose ka khoon hi kar diya to vo ab kya kare? waise bhi jis tarah se unhone shuruaat ki hai usse saaf zaahir hai ki channel future me raise karega. unki samajh isliye achchi hai ki unhone kai purane aur achchaa kaam karne waale logo ko phir maukaa diya hai.zaahir hai jin logo ko channel ne vaapas rakh kar izzat di hai wo channel ke liye hi sochenge.
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written by deen dayal, August 26, 2011
यह अच्छी बात है कि अमननीपजी खुद अब सारी चीजें देख रहे हैं . अगर वे अपने चैनल का भला चाहते हैं तो उनको अपने यहाँ मैरिट को आगे बढ़ाना चाहिए और लप्पू झप्पू टाईप के आयाराम गयाराम लोगों की भर्ती की बजाय सुलझे हुए लोगों को मौक़ा देना चाहिए. जैसे वहाँ कई ऐसे/ऐसी पत्रकार हैं जो नवभारत टाईम्स जैसे अखबारों में काम कर चुके हैं और आज भी अच्छी सोच रखते हैं, मौक़ा दिया जाए, काम में दखल ना हो, तो चैनल को आगे ला सकते हैं मगर काम की बजाय राजनीति का माहौल मिलने पर काम करने वाले भी बस दस से पांच की नौकरी में सिमट कर रह जाते हैं .
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written by jyoti kumari, August 26, 2011
purani stringero ko sath na sahi kam se kam unke kiye gaye karyo ka paise ka to kam se kam payment karwa dijiye.gaya

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