जगजीत को 'मार डालने' वाला टीवी जर्नलिस्ट सस्पेंड, ब्यूरो चीफ को नोटिस

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हाल में ही लांच हुए न्यूज चैनल 'न्यूज एक्सप्रेस' की इन दिनों काफी किरकिरी हो रही है. मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह के निधन की इस न्यूज चैनल ने परसों झूठी खबर चला दी थी. यह गलत खबर देने वाले न्यूज एक्सप्रेस के मुंबई ब्यूरो के रिपोर्टर नसीम खान को सस्पेंड कर दिया गया है. चर्चा है कि नसीम को बर्खास्त भी किया जा सकता है. मुंबई के ब्यूरो चीफ विवेक अग्रवाल को न्यूज एक्सप्रेस प्रबंधन ने नोटिस जारी किया है.

साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई है कि ऐसी भयंकर गड़बड़ी अब फिर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कुछ लोग इस प्रकरण में न्यूज एंकर को घसीट रहे हैं पर सूत्रों का कहना है कि न्यूज एंकर किसी गलत खबर के लिए इसलिए जिम्मेदार नहीं होता क्योंकि वह तो टीपी पर दर्ज लाइनों को पढ़ता-बोलता है. इस घटनाक्रम की खबर के प्रसारण के वक्त न्यूज एंकर दिनेश कांडपाल थे.

न्यूज एक्सप्रेस से जुड़े लोगों का कहना है कि जगजीत के मरने की झूठी खबर प्रसारित करना इस नए चैनल की बन रही साख पर बड़ा झटका है. छोटी सी असावधानी के चलते एक नए नवेले ब्रांड को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि मुबंई के रिपोर्टर और ब्यूरो चीफ ने नोएडा मुख्यालय द्वारा बार-बार क्रासचेक किए जाने की अपील के बाद भी यही कहते-बताते रहे कि निधन की खबर पक्की है, इसे हर हाल में चला दिया जाए. खबर जब चलने लगी तो दस बीस मिनट बाद उन्हीं रिपोर्टर और ब्यूरो चीफ महोदय का फोन आने लगा कि कृपया खबर हटा दें, जगजीत के परिजन उनके निधन की सूचना की पुष्टि नहीं कर रहे हैं.

सवाल ये उठता है कि मुंबई ब्यूरो चीफ विवेक अग्रवाल जो वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं, कैसे बिना परिजनों और अस्पताल की पुष्टि के किसी की मौत की खबर चलाने की अनुमति दे सकते हैं. अगर यह सब विवेक अग्रवाल की सहमति से हुआ है तो रिपोर्टर को कम दंड मिलना चाहिए, ब्यूरो चीफ को ज्यादा. सस्पेंसन और टर्मिनेशन की कार्रवाई विवेक अग्रवाल के खिलाफ भी की जानी चाहिए.


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Comments (14)Add Comment
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written by Dinesh Kumar, September 28, 2011
विवेक एक बदतमीज किस्म का इंसान है। वह पत्रकार नहीं दलाल है। उसको बात करने की भी तमीज नहीं है। उसके मुंह लगना, मतलब कि अपनी इज्जत खराब करना है। यहां नौएड़ा चैनल आफिस से कोई इससे बात नहीं करना चाहता। खबरों के बारे में भी लोग मुंबई के किसी न्मुंय स्टाफ से ही बार करते हैं। मुंबई आफिस के लोग भी इसकी इस बदतमीजी की आदत की वजह से उससे दूरी बनाकर ही बात करते हैं। हालत ऐसी हैा कि उससे ना तो कोई खबरों के बारे में पूछता है और ना ही मुंबई का कोई स्टाफ उससे मुंह लगता है। तथा मुंबई के ज्यादातर पत्रकार तो इसको जानते ही नहीं। पता नहीं, मुकेश कुमार इस कचरे को क्यों से पसंद कर लिए। जहां भी रहा, जिसने भी रखा उन्हीं संस्थान तथा वरिष्ठ लोगों को नीचा दिखाने का काम करता रहा है। अब मुकेश कुमार की बारी थी। जगजीत को जीते जी मारकर उनको भी विवेक ने नीचा दिखा दीया।
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written by Sikta Singh, September 27, 2011
विवेक अग्रवाल सबसे बड़ा फ्रॉड है। छोटी सी खबर पर भी वह बल्लियों उछलता है, जैसे कोई नया नया स्ट्रिंगर खुश होता है। अति उत्साह दिखाकर शेखी बघारने में महारथी है विवेक। सबसे पहले उसी को निकाल बाहर करना चाहिए। आप देख लेना, विवेक की वजह से आगे भी इस नए पैदा हुए चैनल को नीचे देखना पड़ेगा। विवेक की असलियत के किस्से बहुत सारे हैं, जानने हो तो यशवंतजी एक पूरा लेख लिखा जा सकता है।
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written by Manish Kumar, September 27, 2011
isi ko kahte hai dabav me bikhar jana...............tv journalist majboot bano.
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written by kamlesh, September 27, 2011
इसका नाम विवेक नहीं अविवेक अग्रवाल होना चाहिए.. क्योंकि ऐसा कारनामा कोई अविवेकी पत्रकार ही कर सकता है। आप कह रहे हैं विवेक अग्रवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं.. मैं तो कहता हूं सिर्फ बाल सफेद होने से कोई वरिष्ठ या अच्छा पत्रकार नहीं हो जाता। जगजीत सिंह जैसे शख्स की झूठी मौत की खबर चलानेवाले इस पत्रकार को किसी अखबार या चैनल में नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। तुझ पर थू है विवेक अग्रवाल..smilies/shocked.gifsmilies/shocked.gifsmilies/shocked.gifsmilies/shocked.gifsmilies/shocked.gif
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written by Robin, September 27, 2011
ख़ास कर ये बात इस चैनल के लिये बड़ी अहम् है की जिस तरह से चैनल के सीईओ तरह तरह की बाते करते है उसमे ये चैनल काफी पीछे छुट जाता है. मुकेश सर जैसे वरिष्ट पत्रकार के रहते ये बड़ी बात है की खबरों को सही तरह से जांचा नहीं जाता है कही ना कही इस चैनल में काम कर रहे भाई भतीजा पत्रकारों की एक लम्बी फेहरिश्त सी है.. कई जिला में एक ही पत्रकार कई चैनल को ख़बर भेजता है इसमे बिहार न 1 है यंहा किसी किसी जिला में एक ही रिपोर्टर साधना, मौर्य, रास्ट्रीय सहारा, इंडिया न्यूज़ और न्यूज़ एक्सप्रेस आदि चैनल को ख़बर भेजता है.. तो इसमे सबसे अलग न्यूज़ एक्सप्रेस कैसे दिखेगा ये बड़ा सवाल है. मुकेश सर अगर कोई बड़ी घटना होती है तो आपका चैनल उस ख़बर से पीछे रह जायेगा जो की आपके चैनल को मिलना चाहिए.. नाम बदल कर एक ही जगह पे पत्रकार कई चैनल में काम कर रहा जो आपके चैनल में भी करता है तो आप सबो से अलग कैसे हो सकते है कई बार देखा जाता है जो नेशनल ख़बर है भी आपके चैनल पे नहीं चाल पता है.... आपका ये चैनल भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा..

रोबिन सिंह
सहरसा बिहार
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written by Amrapali , September 26, 2011
आमतौर पर जब नियुक्तियां मैरिट की बजाय सिफारिश या रैकेटिंग करने की महारत के आधार पर होंगी तो एसी महान गलतियां तो होंगी ही मेरी नजर में प्रबंधन ज्यादा दोषी होता है जो गलत शख्स को बड़ी जिम्मेदारी के लिये चुने .
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written by surendra , September 26, 2011
किसी सामान्य आदमी की मौत की खबर चलाने से पहले भी इसकी पुष्टि की जाती है और की भी जानी चाहिए. किसी के जीवन और मृत्यु के बारे में की जानी वाली ऐसी गड़बड़ियो को तो कतई माफ़ नहीं किया जाना चाहिए.और जो जगजीत सिंह जैसे बड़े कलाकार की मौत की खबर बिना पुष्टि किये चला दे उसे न तो रिपोर्टर और न ही ब्यूरो बनने का अधिकार है. दोनों को ही सजा मिलनी चाहिए
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written by V.P.Ahuja, September 26, 2011
very said very said....सपने में नहीं सोच सकता हूं कि क्या कोई पत्रकार ऐसा कर सकता है....? अपसोस बीसों चैनल की खाख छाने लोग मुखिया बन बैठे हों तब ऐसा हो रहा है। यह तो नए नए शुरू हाई डेफिनेशन चैनल के लो टीआरपी की शुरुआत हो गई है। क्या कहा जाए। बुढ़ापा आ गया है लेकिन अकल नहीं आई। जितने हैं सब उसी तरह हैं जैसे शोले का गब्बर बोला करता था एक एक को मारूंगा चुन चुन कर मारूंगा। मुझे तो लगता है कि न्यूज एक्सप्रेस में गब्बर आ गया है जो कि अपनी भड़ास निकालने के लिए एक एक को मारकर खुद भी मारा जाएगा। अच्छा होता कि प्रबंधन थोड़ा अब भी सचेत हो जाए और छत्तीस घाट का पानी पिए छत्तीसगढ़ के करीबी को ही पहले निपटाए वरना वह दिन दूर नहीं जब वीओआई या सीएनईबी जैका हाल हो जाएगा।................अब भला सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली न्यूज एक्सप्रेस के जरिए हज करने जा रही है क्या.....???
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written by kamlesh, September 26, 2011
राकेश अग्रवालजी , आपने सोलह आने सच लिखा है। आपने तो इस फर्जी पत्रकार की एक एक कलाई खोलकर इनसाइड स्टोरी सामने ला दी । सही कहा आपने विवेक अग्रवाल को सजा मिलनी चाहिए और ऐसी सजा मिले कि इसे किसी चैनल किसी अखबार में नौकरी ना दी जाए। smilies/grin.gifsmilies/grin.gifsmilies/grin.gifsmilies/grin.gifsmilies/grin.gifsmilies/grin.gif
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written by narendra, September 26, 2011
ye koi nai bat nahi h.abhi kuch din pahle ki hi bat h .jis din criketer ajharuhdiin k bete ka road axident huva tha or wah icu me admit tha tab news xpress ne unke bete ki mout ki pusthi isi channal ne kar di thi .fir bad me pata chala ki wo to abhi ghayal h or uski mout do ya teen din bad hui thi .yakin na ho to us din ka 9 baje ka buletin ka rfecord check karwa lijiye
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written by Deepak Kumar, September 26, 2011
Bilkul, सस्पेंसन और टर्मिनेशन की कार्रवाई विवेक अग्रवाल के खिलाफ भी की जानी चाहिए. Isne Pratiksha Nagar mein apni building walon ko bhi pareshan kar rakha hai.
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written by ravi kumar, September 26, 2011
विवेक अग्रवाल तो दोषी है ही,इससे ज़्यादा दोष उस शख्स का जो इस चैनल का सीईओ है।जब उसने इस चैनल में हर पद पर नमूने अप्वाइंट किए हैं तो बताइए इस चैनला का क्या होगा।ऊपर से दावा करता है हम अंदर की खबर दिखाते हैं।भाई हम तो नहीं समझ सके हैं कि अंदर की क्या खबर दिखाई आज तक..अंदर की खबर दिखाने के नाम पर शहंशाह ए गज़ल जगजीत साहब को जीते जी मार डाला।ये तो होना ही था।रीजनल चैनल चलाने और नेशनल चैनल चलाने में फर्क है जनाब
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written by Robin Singh, September 26, 2011
चैनल प्रबंधन के लिये
ख़ास कर ये बात इस चैनल के लिये बड़ी अहम् है की जिस तरह से चैनल के सीईओ तरह तरह की बाते करते है उसमे ये चैनल काफी पीछे छुट जाता है. मुकेश सर जैसे वरिष्ट पत्रकार के रहते ये बड़ी बात है की खबरों को सही तरह से जांचा नहीं जाता है कही ना कही इस चैनल में काम कर रहे भाई भतीजा पत्रकारों की एक लम्बी फेहरिश्त सी है.. कई जिला में एक ही पत्रकार कई चैनल को ख़बर भेजता है इसमे बिहार न 1 है यंहा किसी किसी जिला में एक ही रिपोर्टर साधना, मौर्य, रास्ट्रीय सहारा, इंडिया न्यूज़ और न्यूज़ एक्सप्रेस आदि चैनल को ख़बर भेजता है.. तो इसमे सबसे अलग न्यूज़ एक्सप्रेस कैसे दिखेगा ये बड़ा सवाल है. मुकेश सर अगर कोई बड़ी घटना होती है तो आपका चैनल उस ख़बर से पीछे रह जायेगा जो की आपके चैनल को मिलना चाहिए.. नाम बदल कर एक ही जगह पे पत्रकार कई चैनल में काम कर रहा जो आपके चैनल में भी करता है तो आप सबो से अलग कैसे हो सकते है कई बार देखा जाता है जो नेशनल ख़बर है भी आपके चैनल पे नहीं चाल पता है.... आपका ये चैनल भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा..

रोबिन सिंह
सहरसा बिहार
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written by Rakesh Agarwal, September 26, 2011
सबसे पहले तो आपका यह लिखना ही सरासर गलत है कि - विवेक अग्रवाल वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं - विवेक अग्रवाल एक नौसिखिया टाइप का आदमी है, जो काफी सालों तक जनसत्ता में स्ट्रींगर रहकर भी कुछ भी सीख नहीं पाया। वहां अपराध की खबरें लिखता था। लेकिन अपनी फर्जी खबरें गढ़ने के लिए उसने जो कभी पैदा ही नहीं हुआ, एक फर्जी डॉन भी गढ़ डाला था। उसके नाम पर वह खबरें बनाता था, छापता था। जब खबर का मुख्य पात्र ही कभी जन्मा ही नहीं, तो उसका विरोध कौन करेगा। लेकिन यह खेल ज्यादा दिन चला नहीं। वहां से विदाई हो गई। राहुल देव, अनुराग चतुर्वेदी, प्रदीप सिंह और सतीश पेडणेकर सहित मुंबई तथा जनसत्ता के वरिष्ठों से इसकी पुष्टी की जा सकती है। अपनी पत्रकार होने की धाक जमाकर में ये महाशय लोगों से विज्ञापन ऐंठकर अपने भाई की दुकान भी चलाते रहे हैं।
जगजीत सिंह जैसे महान कलाकार को तो इन्होंने अभी मारा है। जनसत्ता में अपने वरिष्ठ अनिल सिन्हा को बरगलाकर दाउद को भारत सरकार द्वारा गिरफ्तार करने की खबर मेन हैडलाइन बनवाकर सिन्हा जी जैसे सीघधे सादे आदमी को भी ये महाशय संकट में उतार चुके हैं। आपने सही लिखा है कि यह सब विवेक अग्रवाल की सहमति से हुआ है तो रिपोर्टर को कम दंड मिलना चाहिए, ब्यूरो चीफ को ज्यादा। सस्पेंसन और टर्मिनेशन की कार्रवाई विवेक अग्रवाल के खिलाफ भी की जानी चाहिए।

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