चिटफंडिये भागने लगे मीडिया से? जीएनएन में सेलरी संकट

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: सीवीबी में भी सेलरी का इंतजार : पैसा कमाने के लिए मीडिया में घुस आए चिटफंडिये अब भागने लगे हैं. मध्‍य प्रदेश समेत कई प्रदेशों में चिटफंडियों पर कार्रवाई के बाद उनका मीडिया में घुसने का भूत उतरने लगा है. चिटफंडियों के पैसों से चलने वाले चैनलों की हालत भी खराब हो गई है. कर्मचारियों को सेलरी संकट से जूझना पड़ रहा है. सीवीबी (सी वोटर ब्राडकास्‍ट) में चिटफंडिया पार्टनर के निकल जाने के बाद कर्मचारियों की सेलरी लटकी पड़ी है. चिटफंडियों के चैनल जीएनएन में भी सेलरी संकट शुरू हो गई है.

सीवीबी न्‍यूज में पिछले तीन महीने से हालात खराब हैं. तमाम लोगों को निकाल बाहर किए जाने के बाद भी सेलरी संकट खतम नहीं हुआ है. पिछले दो महीने से यहां के कर्मचारियों को सेलरी नहीं मिली है. तीसरा महीना भी पूरा होने वाला है. सीवीबी के चिटफंडिये पार्टनर ने अपना हिस्‍सा समेट लिया और यशवंत देशमुख को अकेला छोड़कर नौ-दो ग्‍यारह हो गया. यूएनआई टीवी से करार खतम होने के बाद सीवीबी न्‍यूज को लांच करने की योजना दूसरे पार्टनर पुरुषोत्‍तम अग्रवाल के हाथ खींच लेने के बाद मुश्किल में पड़ गई है. इंटर्नों के सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा है.

एक और चिटफंड कंपनी के चैनल जीएनएन न्‍यूज में भी सेलरी संकट शुरू हो गया है. पिछले महीने की सेलरी अब तक कर्मचारियों को नहीं दी गई है. चिटफंडियों पर कार्रवाई के बाद से चैनल के दुर्दिन शुरू हो गए हैं. कई हेड बदलने वाला यह चैनल काम से ज्‍यादा विवादों के चलते सुर्खियों में रहता आया है. पिछले दिनों दर्जनों कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया था. अब भी कई कर्मचारियों को निकालने की तैयारी की जा चुकी है. बावजूद इसके सेलरी संकट हल नहीं हुआ है. प्रबंधन कर्मचारियों के सामने कुछ भी स्‍पष्‍ट नहीं कर रहा है कि कब तक सेलरी आएगी या नहीं आएगी.

जीएनएन के भीतर के हालात से यहां काम करने वाले लोग काफी परेशान हैं. सीनियर पदों पर काम करने वाले कुछ दूसरे चैनलों में भी नौकरी तलाश रहे हैं. परेशानी में जूनियर स्‍तर के पत्रकार एवं कर्मचारी हैं. छोटी सेलरी उपर से मा‍नसिक दबाव के चलते वे यहां खुद को असहज पा रहे हैं. खबर है कि जूनियर स्‍तर पर काम करने वालों की साप्‍ताहिक छुट्टियां भी रोक ली जा रही हैं, जो छुट्टी लेने की बात कर रहे हैं उन्‍हें नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी जा रही है. पहले काम का दबाव दूसरे सेलरी का संकट जीएनएन के पत्रकारों को मुश्किल में डाल रखा है.


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Comments (4)Add Comment
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written by ravindra, December 09, 2011
SALARY SIRF IN CHANEL ME HI NAHI BANSAL NEWS ME BHI NAHI HUI HE, WAHA BHI KAI KARMCHARIYO KO SALARY NAHI MILE HE , BANSAL NEWS KE MARKETING HEAD KA MMS KAND UJAGAR HONE SE WAHA SLALRY NAHI DI GAYI HE, OR DO DIN TAK E-3 WALE OFFICE KA LAND LINE PHONE BHI BAND HOGAYE THE, BILL JAMA NAHI KARANE KE KARAN
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written by vivekniraj, November 08, 2011
gnn me vaise to kai gadbadia hai. lekin salary ke sath yaha bosses ke kram ko lekar bhi bhari matbhed hai. yaha sabhi ek dusare ko high mante hai. sabse buri halat output ki hai. output head jise dehle bhar ki jankari ur news sense nahi hai head bana hua hai. bhala karamchario ko vo kya guide karega. besharmi ki had tak jakar vo ladkio se bate karta hai. khair kismat bana kar aaya hai, to gadhe ko bhi bapp man kar kam karna padta hai.
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written by omnath, September 28, 2011
सबसे बड़ी बात फिर सीवीबी न्यूज में ये है कि यशवंत भाई लगातार विदेश यात्राएं कर रहे हैं...वैसे जहां का ब्यूरो चीफ पत्रकारिता का प न जाने, प्रधानसंपादक चुनाव भविष्यवाणी को भी पत्रकारिता ही मान बैठे और संपादक टीवी पत्रकारिता का ट ना जाने...वहां यही हाल होना था...तीन महीने से हम लोग भूखे मर रहे हैं लेकिन यशवंत भाई जी आश्वासन ही दे रहे हैं,,,वैसे सीवीबी को डुबाने वाले लोग हैं अदिति प्रसाद, अंशु शर्मा, प्रदीप सिंह, प्रसेनजित डे, अपूर्व श्रीवास्तव .....
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written by varun, September 27, 2011
jab in bhikmango k pad pase nahi hote to chhanel chalaane kyon aa jate hain. main journalist bhaio se appeel karunga ki aage se kisi bhi ere-gere channel ki taraf dekhna tak nahi, tabhi in bhikario ki akal thikane aayegi...
aur aap log kyon manisana wage commossion ki sifarise lagu karnae k liye hartal nahi karte ho, apna hak mangne main kasi sharem bhai. jagp nahi to soshan k shikar bante rahoge bakki tumhari marji.
un unions ka kya achhar daloge jinse judkar apna sina chaura karte ho.....salo ko bolo aavaj uthao nahi to ham tumhe nahi jante...

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