एक बैग, कई माइक आईडी, एक कैमरामैन, एक कम्‍प्‍यूटर और चल रहे हैं कई न्‍यूज चैनल

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यशवंत जी, अजब हाल है सहारनपुर की इलेक्ट्रानिक मीडिया का। यहां कई न्यूज चैनल के पत्रकार मिलकर एक कैमरामैन रख लेते हैं और फ़िर मिलकर शुरू होता है खेल। क्योंकि फ़ील्ड में खबरों को कवर करने तो जाना नहीं पड़ता, उस काम के लिये तो एक कैमरामैन है। वह खबर कवर लायेगा। फ़िर उसको एक आफ़िस में बैठकर एडिट कर लिया जाता है। आफ़िस वाले पत्रकार उसे पहले अपने यहां भेज लेते हैं।

फ़िर बाकी के सारे पत्रकार उन्हीं फ़ाइलों को दूसरा नाम देकर अपने अपने यहां भेज लेते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि सारे चैनल में एक ही नाम से फ़ाइलें भेज दी जाती हैं। इसका सबूत है 25 सितम्बर को बिहारीगढ़ में हुई एक घटना। इसको कवर करने के लिये सभी चैनल की माइक आईडी एक बैग में भरकर एक कैमरामैन वहां पहुंचा। उसने सारी आईडी लगा कर समाचार कवर किया। फ़िर सहारनपुर में आकर वह खबर काटी गयी। उसके बाद उस खबर को सभी चैनल पर भेज दिया गया।

इसका सबूत है नीचे दिए गए फ़ोटोग्राफ़। इन फ़ोटोग्राफ़ में आप साफ़ देख सकते हैं कि सभी चैनल पर फ़ाइल का साइज एक ही है। सहारा समय को छोड़ कर, टीवी 100, न्यूज24 व जनसंदेश में तो फ़ाइलों का नाम भी नहीं बदला गया। बाकी और भी कई चैनलों में यह फ़ाइलें भेजी गयीं। जबकि एक चैनल का संवाददाता तो सहारनपुर में रहता भी नहीं है लेकिन उसकी माइक आईडी एक बडे़ चैनल के पत्रकार ने संभाल रखी है। लेकिन चैनल को यह सोचना चाहिये कि जब वह पत्रकार खबरें तो किसी और से ही लेकर भेजता है तो ऐसे में उस पत्रकार को चैनल में बने रहने का क्या औचित्य है।

वैसे यह समझ नहीं आता कि इन चैनल के हेड आफ़िस वालों को क्या एक जैसे विजुअल व एक ही खबर सारे चैनलों पर भेजने पर क्या कोई आपत्ति नहीं होती। अगर ऐसा नहीं तो जल्द ही वह समय आयेगा जब सभी चैनलों का एक ही पत्रकार होगा और वह सारी आईडी लेकर खबर कवर कर खुद ही सभी चैनलों को भेज देगा। सहारनपुर में पत्रकारिता की हालत बहुत बुरी है। संभव है इन पत्रकारों की वजह से एक दिन सहारनपुर में भी लोग का आह्वान जरुर करेंगे। बाजारू मंडी में रंडी मीडिया के दलालों के कारण ये दिन हम सभी को देखने होंगे.

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Comments (37)Add Comment
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written by Abhinav Sharma, November 26, 2011
bhaiya ek baat ye bataiye ki ek doosre ki taang kheechne wale patrakar ekta ke saath reh rahe hain to kya takleef hai.
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written by pradeep kumar, October 28, 2011
bhai sahab, abi tak aap kis duniya me ji rahe hain, lagta hai aap ka kisi stringer se lafda ho gaya hai, ye to channel wale khud hi kahte hai ki mujhe footage chahiye chahe jaise . ab ye to sambhav nahi hai ki kisi ghatana ki coverage har stringer kar hi le, aur jab nahi kar payega to kisi na kisi se footage udhar to lega hi, aap ko itana dard kyoho raha hai...........
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written by avinash, October 14, 2011
jo log stringro ki burai kar rhe hai bo sirf ac rom me beth kar hi bakbas kar rahe hai .kamino.... 2-2 saal tak channel ke paise nhi aate camera khraab ho jai to need nhi aati log itne bevkoof hai ki stringro ko paise le kar baite hai agar aisa lagta hai to aap log kyon nhi stringer ban jaate .2-2 saal tak id nhi dete kabhi koi case kisi stringer par pad jai to channel apna reporter hone se m,na kar deta .koi bhi dil se stringer nhi ban na chahaita sirf ek platic ka kida hai jo har stringer ke ander hai patarkarita ka bas bo hi hume jine nhi deta .jis karan stringer gulami jhel rhe hai fir stringro ko beimaan .blackmailer .ftp coopier ya our bhi bahut kush kha jaata .lekin kabhi kisi stringer ka dard smjha hai stringer to to ye bhi nhi pta hota ki bo kis channel ke liye kaam kar rha hai ,,,channel ko matlab hai khabar se 50km ka area our ek stringer news to chahiye bo bhi har kimat par kaise hogi ye kise pta .,...ek stringer
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written by jeevan , October 09, 2011
ये कोइ बड़ी बात नहीं जब कोइ घटना खबर होती है तो चैनल जिन रिपोर्टर को अपने यहाँ रखते है वो कोइ इस तरीके से नहीं करते क्या वो भी कुछ इसी तरीके से करते है और अगर देखना है तो साहब विजय चौक चले आना सब कुछ सामने आ जायेगा फरक ये होता हे की वहा ट्रांसफर लेकर इंजेस्ट करने के बाद ऑफ मे जो विडियो एडिटर होता है वो काट लेता है ये काम ये नहीं कर पते ऊपर से ऑफ से बार बार फ़ोन अत है की काम नहीं करना है तो मत करो लडको की कमी नहीं है एक तो टाइम पर पैसा नहीं देते ऊपर से धमकी तो करे तो कीया कुछ लोगो मे खबरों के प्रति जूनून होता है और आज कल उस को कोए नहीं देखता देखता है तो बस इतना की खबर आ जाये पैसा न देना पडे साहब ये सच है जिस को आप माने या ना माने लकिन ये बात कुछ चैनल पर लागू होती है तो भाया ये तो यू ही चलेगा
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written by khabar ki khabar, October 09, 2011
are bhai ...ye khel sirf aapke saharnpur me nahi hota balki maharashtra ke sabhi jagha hota hai...aapka yahan to sirf footage file same hoti hai..yahn to script bhi same hoti hai...kahs kar pashchim maharashtra me ye sab dekhne ko milta hai...yahna par hindi news channel se lekar marathi channel ke aalag -alag stringer ho kar bhi ek hi feed aur ek hi script sabhi channel ko bheji jati hai ......kya kare q ki kisi ko likhna jo nahi aata...
hai na kamal ka khel...
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written by nawin, October 08, 2011
oyeeeeeeeeee 08 mahine milta hai manday wah bhi kaam ke adha or karte ho filosphar ki baat ye bata tu hain kahan aa ja jharkhand yahan dikhunga saranda ka jangal parasnath ki choti par chadhuwanga ugrwadiyo ki mand mein pahuchaunga police ke saath lrp karaunga phir puchunga ki tere bike ne kitna ka avg diya uske baad puchunga stringar banega ............
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written by Deepak Dehradun, October 03, 2011
कई चेनल वाले तो सोचते है की स्ट्रिन्गेर को आई डी दे दो वो अपने आप कमा लेगा लेकिन और कुछ अस्सिंग्मेंट पर ऐसे भी है जो स्ट्रिन्गेर से घीओ दाल चावल चीनी इत्यादि मंगवाते है तो फिर स्ट्रिन्गेर बेचारा क्या करे खबरे तो ऐसे ही जाएँगी...............चेनल अगर हःता है की ऐसा ना हो तो स्ट्रिन्गेर को उसका मेहनताना समय पर और उसकी मेहनत के अनुसार भुगतान करे जो वो कैमरा मेन रख सके ...............और ये सेल चिरकुट अपनी जिंदगी ऐसे ही दुसरो की बुरे करने व् शिकायत करने में गुज़र जाएगी ...........लेकिन इसको सम्ज्हाओ यारो मेरे गुरु देव को गुस्स्सा आया तो इसका पिछवाडा लाल पीला कर देंगे .................... में दून के जरुर हु पर मेरे गुरु महाराज सहारनपुर में सब पर भारी है वो सुब के प्रभारी है ..................माफ़ी मांग लियो उनसे कमी.......................ने ......नहीं तेरी तो लग जाएगी ...................दीपक शर्मा देहरादून
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written by prakash kumar , October 03, 2011
kaya karega stringer news channel wale salary dete hi nahi hai. petrol aur mobile ka karcha kahan se nikelaga. sabhi channel ke reprter agar ek cameraman se kam kara rahe hai to isme galat kya hai. agar galat hai to news channel wale samay par paisse de aur phir dekhe stringero ka kamaal
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written by rahul, October 02, 2011
मेरे प्यारे भाई,
आप ने तो वही बात कह दी , की जितने काले सब मेरे बाप के साले ,
अर्थ तो आप समझ ही गये होंगे..इतनी उम्मीद तो आप से है ही.अरे कुछ लोग ही इस तरह के काम करते है क्योकि कोई भी चैनल किसी को कितना पैसा देता है इस से तो आप भली भाति परिचित है,
उनको तो खबरों का खर्चा ही पूरा कर पाना भारी पड़ता है..तो फिर वो कहा से कैमरा मन रखेंगे ,,,,,आपकी यह धरना मीडिया वालो के प्रति गलत है,.मुझे तो लगता है की या तो आप मीडिया के लोगो की
मरना चाहते है.....या फिर उनसे मरवाना चाहते है?
ये तो conform है की आप अकेले तो सब की मार नही सकते है..लेकिन सब लोग मिल के आप की जरूर मार लेंगे..
अगर इन लोगो से बचना है तो मीडिया वालो के खिलाफ गलत comment करना छोड़ दीजिये..और ये तो आप भली-भाति जानते है की सहारनपुर में मीडिया संगठन कैसा है?...और लोग कितने है...समझदार को इशारा ही काफी है..जय हिंद जय भारत ?>
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written by BIG-BOSS, October 02, 2011
मेरे प्यारे भाई,
आप ने तो वही बात कह दी , की जितने काले सब मेरे बाप के साले ,
अर्थ तो आप समझ ही गये होंगे..इतनी उम्मीद तो आप से है ही.अरे कुछ लोग ही इस तरह के काम करते है क्योकि कोई भी चैनल किसी को कितना पैसा देता है इस से तो आप भली भाति परिचित है,
उनको तो खबरों का खर्चा ही पूरा कर पाना भारी पड़ता है..तो फिर वो कहा से कैमरा मन रखेंगे ,,,,,आपकी यह धरना मीडिया वालो के प्रति गलत है,.मुझे तो लगता है की या तो आप मीडिया के लोगो की
मरना चाहते है.....या फिर उनसे मरवाना चाहते है?
ये तो conform है की आप अकेले तो सब की मार नही सकते है..लेकिन सब लोग मिल के आप की जरूर मार लेंगे..
अगर इन लोगो से बचना है तो मीडिया वालो के खिलाफ गलत comment करना छोड़ दीजिये..और ये तो आप भली-भाति जानते है की सहारनपुर में मीडिया संगठन कैसा है?...और लोग कितने है...समझदार को इशारा ही काफी है..जय हिंद जय भारत ?>
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written by BIG-BOSS, October 02, 2011
मेरे प्यारे भाई,
आप ने तो वही बात कह दी , की जितने काले सब मेरे बाप के साले ,
अर्थ तो आप समझ ही गये होंगे..इतनी उम्मीद तो आप से है ही.अरे कुछ लोग ही इस तरह के काम करते है क्योकि कोई भी चैनल किसी को कितना पैसा देता है इस से तो आप भली भाति परिचित है,
उनको तो खबरों का खर्चा ही पूरा कर पाना भारी पड़ता है..तो फिर वो कहा से कैमरा मन रखेंगे ,,,,,आपकी यह धरना मीडिया वालो के प्रति गलत है,.मुझे तो लगता है की या तो आप मीडिया के लोगो की
मरना चाहते है.....या फिर उनसे मरवाना चाहते है?
ये तो conform है की आप अकेले तो सब की मार नही सकते है..लेकिन सब लोग मिल के आप की जरूर मार लेंगे..
अगर इन लोगो से बचना है तो मीडिया वालो के खिलाफ गलत comment करना छोड़ दीजिये..और ये तो आप भली-भाति जानते है की सहारनपुर में मीडिया संगठन कैसा है?...और लोग कितने है...समझदार को इशारा ही काफी है..जय हिंद जय भारत ?>
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written by अजीत, October 01, 2011
भैया ये जोधपुर वाले ऑटोरिक्शा चालक अपने अरूण जी हर्ष तो नहीं हैं
जो शैम्पू के नाम से ज्यादा जाने जाते हैं। भैयाजी इनके तो जलवे हैं
जलवे। दिल्ली का कौनसा ऐसा चैनल होगा जिसमें महानुभाव ने घुसपैठ नहीं
की होगी। चाटुकारिता का कभी नोबल पुरसकार शुरु हुआ तो इनको ही मिलेगा।
किन्तु अभी तक कुछ खास हासिल नहीं कर पाये हैं। खोखले दम्भ के सिवा
कुछ ना मिला है। इनसे उधार का तकाजा करने वालों की लिस्ट बड़ी लम्बी
है। कुल मिला कर खुद को ही चूतिया बना रहे हैं।
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written by som , September 30, 2011
sir kuch news chhanel walo ko chodekar kuch dete to hai nahi.aise me news beji ja rahi kaya sahi nahi hai,sabhi bhaiyo ka sahyod ho raha hai acha hai
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written by vivek gargachary, September 30, 2011
sahi bat h..... yahi hal mathura mai h..................
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written by subodh, September 30, 2011
बिहार झारखण्ड के जितने भी चैनल है अमूमन सभी में इस तरह का इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का धंधा फल फुल रहा है इस पर मैनेजमेंट का कोई लगाम नहीं है . अब जरा आप ही बताए की आखिर क्या खास है आपके चैनल्स में जो दर्शक की नज़र में खरा उतरे सभी में तो एक ही तरह की खबर टेलीकास्ट की जा रही है कुछ भी तो अलग नहीं दिखाया जाता की दर्शक आपके चैनल्स को देखे . एक ही विजुअल सभी चैनल्स पर दिखाया जाता है यहाँ तक की एक ही तरह का स्क्रिप्ट भी एंकर के द्वारा पढ़ा जाता है और सभी चैनल्स इसे एक्स्सुलुसिव पट्टी लगा कर टेलीकास्ट भी करते है डेस्क पर बैठे लोगो को भी एक्स्सुलुसिव का मतलब पता नहीं होता है उन्हें सिर्फ किसी तरह एफ टी पी से खवर आने से मतलब है और स्ट्रिंगर को घर बैठे अपनी सेलरी आने से मतलब है हाला की स्ट्रिंगर के लिए एफ टी पि तो बरदान साबित हो रहा है मौके पर नहीं रहने के बावजूद उनकी स्टोरी डेस्क तक पहुच जाती है ...जरुरत है इस पर लगाम लगाने की तभी इसे सही पत्रकारिता कही जाएगी.
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written by nilav sanyal, September 29, 2011
PEOPLE WILL SOON LOOSE FAITH ON MEDIA AND SOMEDAY CITIZEN WILL REVOLT AGAINST US....
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written by Himanshu - Jan Sandesh News Chennal, September 29, 2011
साले तेरे पेट में ये कैसा दर्द है जो मीडिया की एकता हजम नही हो रही . अगर हम सब भाई चारे से खबर कवर करते है तो तुझे क्या दिक्कत है अगर है तो सबके सामने आकर बात कर तुम्हारा इलाज करने हम कोई कसर नही छोड़ेंगे ये हम सब वादा करते है . सबके साथ काम करने में जब हम्हारे चेंनलो को ओब्जेक्सन नही है तो तुम्हारी .... क्यों दर्द कर रही है . ये सब छोड़ और सबके साथ मिलकर चल मजा आएगा लेकिन तुम्हे तो गाली खाने का शोक है ......
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written by Robin, September 29, 2011
सहरसा (बिहार) में एक रिपोर्टर कई चैनल का काम करता है यंहा तक की सभी चैनल पर सेम स्टोरी भेजा जाता है अरे भाई साहब दुसरे बच्चे को भी मौका तो दे दो आर्यन, इंडिया न्यूज़, or साधना जैसे चैनल का सबका एक ही पत्रकार है को भाई के नाम पर तो कोई किसी के नाम पर ये सब पटना ब्यूरो चीफ के मिली भगत से तय होता है अगर किसी का सम्बन्धी होता है तो खोज कर उसे जॉब दे दिया जाता है और उसूली होता है मोती रकम.... जयादा चैनल का लोगो दिखा के शुरू हो जाता है उगाही का धंधा जो सहरसा जैसे छोटी शहरो में चाल रहा है... इसके साथ ही चैनल की बदनामी भी होती है. चैनल प्रबंधन को इस मामले मै कोई ठोश कदम उठाने की दरकार है.. लोगो को धमकाने में ये लोगो काम जरुर आते है मगर चैनल की बदनामी भी होती है
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written by rajkumar, September 29, 2011
यह सिलसिला बिहार और झारखण्ड के सभी जिले में अनवरत जारी है . सभी न्यूज़ चेनल्स के स्ट्रिंगर यू तो घर पैर सोये रहते है या कोई दुसरे काम में लगे रहते है लेकिन उनकी स्टोरी न्यूज़ रूम तक पहुच जाती है. सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है की बिना फिल्ड में गए उनकी स्टोरी एक्सक्लूसिव फोर्मेट में टीवी स्कीन पैर चल जाती है
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written by raj, September 28, 2011


मजहर भाईजान, आपने जोधपुर का यह खूब कहा। पूरी हकीकत लिख दिए हैं। हम कई साल जोधपुर रहा हूं। ई कारण इनके द्वारा गन्दाए माहौल की जानकारी रखता हूं। यशवंत भैया, ई लोगन ने पूरे शहर का ही नहीं वरन् पूरे संभाग का माहौल खराब कर रखा है। आम जनता को निष्पक्ष मीडिया का जो फायदा मिलना चाहिये वो तो नहीं ना मिले रहा है, और भारी तादाद में निर्दोष नागरिक ई लोगन के चंगुल मा फंस कर ब्लैकमेल हो रहे हैं। अगर कोई जांच एजेंसी जांच करे ना तो तथाकथित ई रिपोर्टरों की हकीकत सामने आ जावेगी। वैसे देखन जाए तो ई लोगन खुद का ही नुकसान करे रहे हैं। ई लोगन ने लोगों के सामने खुद को नेशनल चैनल का रिपोर्टर बता कर झूठा भ्रम तो फैलाया, मगर खुदे भी उस भ्रम में फंस कर खुद को ही मूरख बना रहे हैं। अपनी अंतरआत्मा के साथ धोखा करे दे रहे हैं। अपनी जमीन भूल बैठे हैं। नेशनल चैनल का रिपोर्टर होने का झूठा अहम पाल कर वे ना तो काम सीख पाए हैं और ना ही सीखने की कोशिश कर रहे हैं। दो-तीन स्ट्रिंगर तो स्वयं को संसार का सबसे बड़ा लिखाड़, खोजी पत्रकार और न जाने क्या-क्या मानते हैं। ये अपने झूठे अहम के कारण अपने माता-पिता और घरवालों को भी धोखा दे रहे हैं जो समझते हैं कि उनका बेटा पत्रकार बन कर आईएएस से भी बड़ा अफसर बन गया है। अपने रिश्तेदारों के पुलिस के एक-दो चालान छुड़ा कर या पासपोर्ट बनवा कर ये समझते हैं कि जैसे एसपी उनके जूते साफ कर दिए हों। ई लोगन बरसों पहले स्ट्रिंगर बन कर पांच-सात हजार महीने के लिए संघर्ष करते थे और आज भी करते हैं, परन्तु किसी अखबार में जाकर काम सीख कर बंधी-बंधी तनख्वाह की नौकरी करने को तैयार नहीं है। क्योंकि वहां किसी के अंडर में काम करना पड़ेगा। वहां उनकी गलतियां निकाली जावेंगी, जो ई लोगन को गवारा नहीं। उनकी झूठी शान कांच की तरह चकनाचूर हो जावेगी। अधिकतर रिपोर्टर उधारिए हैं यानि उधार लेकर गुजारा करते हैं, उधार कभी चुकाते नहीं। आपने जिस ऑटोरिक्शा चालक से फोटोग्राफर और फिर स्ट्रिंगर बने आदमी का जिकर किया है, वह तो सबन से आगे है। ई को शहर के चार-पांच बड़े व्यापारी हर महीने पांच-सात हजार रुपए बंधी के रूप में देते हैं। 47-48 साल का यह मीडिया माफिया ठाठ से जिन्दगी गुजारता है। इसका चमचागिरी इतनी हाई क्वालिटी का है कि गत दिनों ई एक रीजनल चैनल का संभाग प्रमुख यानि सीओओ बने गया था, मगर इसके बाद चैनल एक माह में बन्द हो गया। ई का पुलिस की दलाली में पहला नम्बर लगता है। यद्यपि पुलिस के आला अपसरान ई की हकीकत जानत हैं, कई बार वे इसको गरियाये भी हैं, परन्तु ई ऑफिस में जाकर पांव पकड़ लेता है माफियां मांग लेता है, परन्तु छोटे अफसरान के सामने चवन्नी चला जो लेता है।
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written by gaurav mishra, September 28, 2011
yaswat dada ko parnam pata nahi kyo saharanpur me aaj kal kis ke pet me jane dard ho raha hai jo rozana kuch na kuch post karne par laga rahta hai ...GOD PLZ us praani ko sad budhi pardaan kare??? ek reporter ki jeb mai kabhi kabhi news par jane ke liye 100 rupaye bee nahi hote wo fhir bee Hath udhar lekar jase tese apna kaam karte hai aur news ko channel wallo ko deta hai janaab.. stingers ka dard kisi madar chod ko nahi dikhai deta bas jisko dekho unke picche pada hai in sahab ki Gaand ka dard to dekho pura ka pura feed page he photo kar paste kar diya IS HARAM Khane ko pata nahi press reporter aur camraman sabhi ke beech me payar hona koi buri baat nahi ek sath news par jaane se kam nahi hota payar baatne se bhadta hai kameen inssan tujhe to sharm aani chahye tu kon hai sale jaleel inssan tera BURA WAQT SHURU HO CHUKA HAI WAIT KAR BETA saale gaandu teri gaand mai dam hai to apne naam se COMMENT KAR..aur tu kya sabhi reporters ka thekedaar hai jo drum peet peet kar gana gaa raha hai madar chod SHARM SHARM SHARM KAR
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written by एक स्ट्रिंगर, पूर्वांचल से , September 28, 2011
भाई साहब,
जो लोग आज स्ट्रिंगरो को गरिया रहे हैं जरा उनसे पूछिये क‍ि किसी जिले में एक स्ट्रिंगर को मिलता क्‍या है. चंद चैनलों को छोड दीजिये तो क्‍या कोई चैनल इमानदारी से हर महीने अपने स्ट्रिंगर को उसके भेजे गये खबरों का पैसा देता है... हर चैनल के स्‍टाफ रिपोर्टरों के भरोसे चैनल नही चलता है, उनको भी इसी स्ट्रिंगर टाइप के जीव के सामने खबरों के लिये घुटने टेकने पडते हैं. अरे शुक्र मनाइये कि कई लोग मिलकर एक साथ काम कर रहे हैं तब जाकर सबसे आगे और सबसे तेज कहने वाले चैनलों पर फीड पहुंच पा रही है. चैनल चाहे छोटा या बडा, बात मेहनत के बदले मिलने वाले रूपये की है. जो चैनल इमानदारी से अपने लोगों को पैसे देता है वो रिपोर्टर भी अपने चैनल के लिये मन लगाकर काम करते हैं, अरे टीवी का पत्रकार मौके पर पहुंचता तो है. जो लोग सिर्फ सारे जहां के मारे बेचारे स्ट्रिंगरों की लेने में तुले हुये हैं और उनको दलाल आदि संबोधन दे रहे हैं वो सच्‍चाई से अपनी गिरेबां में झांक कर देखें क‍ि वो कितने दुध के धुले हैं. अगर प्रिंट मीडिया मे देखें तो उसमें इससे ज्‍यादे मठाधीशी देखने को मिल जायेगी. भाई लोग दूसरे को गरियाना बहुत अच्‍छा लगता है पर चैनल के लिये रात दिन एक करके खबरे बटोरने वाले उस स्ट्रिंगर के मन से पूछिये जो अपने भेजे गये खबरों के पेमेन्‍ट को पाने के लिये चैनलों में कितना रिरियाता है लेकिन हर बार उसे यही कहा जाता है कि बस आपका चेक बन गया है और निकलने वाला है. पहले चैनल अपने पेमेन्‍ट सिस्‍टम को ठीक करे फिर उसके बाद स्ट्रिंगरों को इमानदारी का पाठ पढाये. एक झोला और कई आई डी की यह कहानी देश के हर कोने में है बस अगर किसी ने लिख दिया तो सारे मिलकर उसकी मां बहन करने में लग जाते हैं.
यशवंत जी आपसे निवेदन है कि कृपया अपने पोर्टल पर मां बहन की गालियां ना पोस्‍ट करें क्‍योकि यह दोनो आपके और हमारे दोनो के घरों में पायी जाती हैं और गलती कोई और करता है सुनना इनको पडता है...
आपका एक शुभचिंतक.
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written by bhimmanohar, September 28, 2011
sale kyoun logon ke pet par lat mar raha hai . kya bura karte ye reporter kam kharche me adhik kam isme bura kya hai... kam se kam logon ki jeb to nahi kat rahe hai.... channel kya deta hai in garibon ko.....
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written by patrakar, September 28, 2011
bihar ke jamui jile me bhi kuchh aisa hi hai , patrakarita me bhi munna bhai mbbs hai jinke pas adha darjan id hai , halat hai ki akele kam karne wale munna bhai san se kahte hai mere pas itna channel hai
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written by rahul, September 28, 2011
stringers ko miltaa hi kya hai , kewal paresaani na ki company ki taraf se paisa. jisne bhi yeh bhejaa hai woh kaminaa type kaa hi goga ?
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written by santosh mahraj, September 28, 2011
यह सिर्फ यहीं की बात नहीं है देखना है तो मुजफ्फरपुर के फ्फेड्स को देखें यहाँ भी यही खेल चल रहा है इंडिया न्यूज़ के ॐ प्रकाश का आदमी महुआ न्यूज़ का काम तो जरूर कर रहा है साथ ही कई चैनल में सेम फाइल भेजता है साथ ही गाँव में जा कर न्यूज़ का ठीक लेता है सभी रीजनल चैनल का इस से मोती रकम की वशूली भी होती है यही नहीं खबर रोकने का भी ठीक मिल जाता है.
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written by Ankit, September 28, 2011
@ Srikant, I dont even believe that the channels pay any fixed amount to stingers? I know a few people who get paid on the basis of their story being aired. I dont see that there is any thing wrong in a collaborative effort being put forward to share news with their respective channels.
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written by rajesh sthapak, September 28, 2011
yasvant ji sadar namskar - yh alam pure desh ka h news chenal wale apne gireban me jhank kr to dekhe ki ve kam karne walo ko vetan ke nam pr de kya rhe h yh to majboori un logo ki ki we abhi bhi kam kr to rhe h or ye news chenal chal rhe he
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written by fazal imam mallick, September 27, 2011
Yashwant bhai Ek sher yaad aa raha hai

Kis Kis ko Yaad Kijiye, Kis Kis Ko Roiye

Aaraam Badi Cheez hai, Munh Dhuk ke Soiye.
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written by raja, September 27, 2011
भाई साहब सब ने अपनी अपनी लिख दी जरा एक बार मेरे आगरा की ही तस्वीर देख लो बही मेरे आगरा में एक ही स्ट्रिंगर आजतक गूडु शर्मा पड़ा लिखा है जबकि बाकी के सारे के सारे उसके गुलाम है। या फिर यह कहा जाए की गुड्डू उन सबका सरदार है। आजतक के स्ट्रिंगर को आगरा के कई छोटे a2z टाइप के पत्रकार कहते हैं की सब की सब बड़ी आईडी एक साथ है। और बाकी की जटूरी आईडी एक तरफ है। और हाँ आप को एक मजे की बात और बताता हूँ की सी न ई बी की दो आईडी हैं जोकि एक सहर में और एक देहात में चलती हैं। यह पर कोई देखने वाला नहीं है कई पत्रकार के पास्स तो बड़े चैनल की ही दो आईडी है यहा के चैनल पर यह चर्चा रहती हैं की भाई यह आईडी कौन लेकर आया हैं।
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written by mazahar, September 27, 2011
यशवंतजी यही कहानी तो राजस्थान के दूसरे बड़े शहर जोधपुर की है। यहां तो लोग मीडिया माफिया बने बैठे है। एक-एक आदमी के पास चार-चार, पांच-पांच चैनल हैं। जोधपुर में कुछ रीजनल चैनलों में ही परमानेन्ट स्टाफ है। इसके अलावा सहारा रीजनल और सभी नेशनल चैनलों में स्ट्रिंगर लग रखे हैं। दो-चार को छोड़ कर बाकी स्ट्रिंगर शादी ब्याह में काम करने वाले वीडियो कैमरामैन हैं। इनमें भी गुट बने हुए हैं। हर गुट में एक पढ़ालिखा स्ट्रिंगर है और बाकी लोग तो दसवीं पास भी नहीं हैं। कभी जरूरत होती है तो यानि घटना के ही दिन खबर भेजनी पड़े तो पढ़ालिखा स्ट्रिंगर खबर लिख देता है और सब उसे सेम टू सेम भेज देते हैं। विज्युअल और बाइट तो लगभग सभी के कॉमन ही होते हैं। नहीं तो अगले दिन अखबार में छपी खबर टीप कर भेज देते हैं। जोधपुर में स्ट्रिंगर संस्कृति का उदय सलमान खान के हिरण शिकार कांड के समय हुआ। उस कांड के दौरान जयपुर से नेशनल चैनलों के रिपोर्टरों को कवरेज के लिए जोधपुर आना पड़ता था। उस समय दो-तीन होशियार कैमरामैनों (शादीब्याह वाले) ने उनकी चमचागिरी शुरु कर दी। इनमें सबसे आगे था एक ऑटोरिक्शा चालक जो नयानया फोटोग्राफर बना ही था। वह शादी ब्याह की शूटिंग का काम भी करता था और चमचागिरी व चापलूसी में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की औकात रखता है। उसने ज्यादातर चैनलों के लिए फीड भेजना शुरू कर दिया। वह सबके आईडी साथ लेकर इतराता घूमता था। यह आदमी चेले बनाने में भी माहिर है। शीघ्र ही उसने कई चेले बना लिए और उनसे बेगारी कराने लगा। यह उनको कहता कि मेरी ढंग से सेवा करोगे तो एक चैनल दे दूंगा। चेलों से वह कैमरामैन का काम कराता था और अफसरों के सामने अपना रौब झाड़ता था। चेले सब लोगों के सामने उसके पैरों के हाथ लगाते। कुछ दिन बाद दूसरे लोग भी चेते। शादीब्याह की शूटिंग करने वाले दो भाई भी मैदान में आ गए। उन्होंने अपनी अलग सत्ता बनाने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने भी अपने चेले बना लिए। उनके घर से आज भी दर्जन भरचैनलों की फीड भेजी जाती है। अब तो वे हर खबर पर खुद जाते ही नहीं हैं। उनके चेले ही विज्युअल बना कर ले आते हैं। पुलिसप्रशासन के लोग इन लोगों के आगे परेशान हैं। कई अधिकारी तो उनको चैनल का रिपोर्टर ही समझते हैं। इन स्ट्रिंगरों ने अलग-अलग थाने-चौकियों व अधिकारियों के पास अपनी बैठक सेट कर रखी है। खबर भले ही महीने में एक या दो ही भेजे, परन्तु दिन में दस अधिकारियों को फोन करना और दो-चार के यहां चाय पीना, किसी के यहां घंटे भर बैठना इनकी दिनचर्या है। ये लोग अधिकारियों को बिन मांगे सलाह देते हैं, छोटे अधिकारियों की बड़े अधिकारियों को सिफारिश या शिकायत करते हैं और लोगों के काम भी कराते हैं। लोगों को धमकाते भी हैं और मकान खाली कराने व कब्जे कराने के काम भी करते हैं।
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written by Rahul, September 27, 2011
Yashwant ji ye haal Saharanpur ka hi nahi Sabhi jagha ka hay, Chaie Agra ho ya Mathura dheek ise tra Agra me bhi D,company Ka yahe haal hay 1 bag me sabhi channel ki ID aap ko mileage or maje ki baat ye hay ki ye sabhi haramkhoor Stringer kabhi field me nahi rathay jaha len-den ka mamla ho waha ye jaror milenge. par ye galti in ki nahi hay jis channel me ye stringer hay uni ne iene Haramkhoor banaya hay. iTS VERY SERIOUS MATTER ALL CHANNEL HEAD SHOULD LOOK IT & TRY 2 CHANGE.
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written by yogesh , September 27, 2011
kya kare sir channel itna paisa nahi deti ki sab alag alag kaam kar sake
vichare patrkaro par yahi ek jariya hai kam daam me jyda kaam karne ka.,,
tarash aata hai inpar yah haal saharanpur ka hi nahi balki agra ka bhi hai ..

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written by sunil kumar gupta, September 27, 2011
ye saharn pur me hi nhi bihar jahrkhnd ke hr jila me chl rha hai.aap aakr kisi bhi press confrence me aakr dekh le hakikt pta chl jayega.kuchh logo ko chhorkr sbhi aisa hi karkar apni dukan chla rha hai.
aryan news ke liye munger se sunil kumar gupta.
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written by sanjay pandey, September 27, 2011
patrakar nahi dalal hai,dukan kole hai
Download: eType1.com/f.php?FSBY8K
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written by CHANDAN, September 27, 2011
ACHHI BAT HAI

SAHARSA BIHAR ME BHI YAHI BAT HAOTA HAI EK REPORTER KAI CHANNEL KO KHABAR BHEJTA HAI OR DUSRA KAM KARNE KE LIYE LALAIT RAHATA HAI......... ARE KOI HAI DEKHNE WALA TO KUCHH KARO BHAI...
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written by श्रीकांत सौरभ, September 27, 2011
इसमें आश्चर्य की बात क्या हो गई भाई . 2-3 हजार की सैलरी देने वाले चैनल स्टिंगरों को बाप की जागीर समझ रखे हैं . समय पर खबर पहुंच जाए यही बहुत है .

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