एक बैग, कई माइक आईडी, एक कैमरामैन, एक कम्‍प्‍यूटर और चल रहे हैं कई न्‍यूज चैनल

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यशवंत जी, अजब हाल है सहारनपुर की इलेक्ट्रानिक मीडिया का। यहां कई न्यूज चैनल के पत्रकार मिलकर एक कैमरामैन रख लेते हैं और फ़िर मिलकर शुरू होता है खेल। क्योंकि फ़ील्ड में खबरों को कवर करने तो जाना नहीं पड़ता, उस काम के लिये तो एक कैमरामैन है। वह खबर कवर लायेगा। फ़िर उसको एक आफ़िस में बैठकर एडिट कर लिया जाता है। आफ़िस वाले पत्रकार उसे पहले अपने यहां भेज लेते हैं।

फ़िर बाकी के सारे पत्रकार उन्हीं फ़ाइलों को दूसरा नाम देकर अपने अपने यहां भेज लेते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि सारे चैनल में एक ही नाम से फ़ाइलें भेज दी जाती हैं। इसका सबूत है 25 सितम्बर को बिहारीगढ़ में हुई एक घटना। इसको कवर करने के लिये सभी चैनल की माइक आईडी एक बैग में भरकर एक कैमरामैन वहां पहुंचा। उसने सारी आईडी लगा कर समाचार कवर किया। फ़िर सहारनपुर में आकर वह खबर काटी गयी। उसके बाद उस खबर को सभी चैनल पर भेज दिया गया।

इसका सबूत है नीचे दिए गए फ़ोटोग्राफ़। इन फ़ोटोग्राफ़ में आप साफ़ देख सकते हैं कि सभी चैनल पर फ़ाइल का साइज एक ही है। सहारा समय को छोड़ कर, टीवी 100, न्यूज24 व जनसंदेश में तो फ़ाइलों का नाम भी नहीं बदला गया। बाकी और भी कई चैनलों में यह फ़ाइलें भेजी गयीं। जबकि एक चैनल का संवाददाता तो सहारनपुर में रहता भी नहीं है लेकिन उसकी माइक आईडी एक बडे़ चैनल के पत्रकार ने संभाल रखी है। लेकिन चैनल को यह सोचना चाहिये कि जब वह पत्रकार खबरें तो किसी और से ही लेकर भेजता है तो ऐसे में उस पत्रकार को चैनल में बने रहने का क्या औचित्य है।

वैसे यह समझ नहीं आता कि इन चैनल के हेड आफ़िस वालों को क्या एक जैसे विजुअल व एक ही खबर सारे चैनलों पर भेजने पर क्या कोई आपत्ति नहीं होती। अगर ऐसा नहीं तो जल्द ही वह समय आयेगा जब सभी चैनलों का एक ही पत्रकार होगा और वह सारी आईडी लेकर खबर कवर कर खुद ही सभी चैनलों को भेज देगा। सहारनपुर में पत्रकारिता की हालत बहुत बुरी है। संभव है इन पत्रकारों की वजह से एक दिन सहारनपुर में भी लोग का आह्वान जरुर करेंगे। बाजारू मंडी में रंडी मीडिया के दलालों के कारण ये दिन हम सभी को देखने होंगे.

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