सीएनईबी में रात में काम करने वाले कर्मियों की जिंदगी भगवान भरोसे

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: तो इसलिए सीएनईबी ने खबर नहीं चलाई? : सीएनईबी तोड़ रहा है दिल्ली और यूपी पुलिस के नियम कायदे को. दिल्ली और यूपी पुलिस ने रात में काम करने वाले कर्मचारियों के नियोक्ता कंपनियों को निर्देश दे रखा है कि वो रात के 9 बजे के बाद ऑफिस आने और जाने वाले महिला कर्मचारियों को पिक और ड्राप उपलब्ध करवाएं. इसके बावजूद सीएनईबी अपने कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील बना हुआ है.

खर्चे कम करने के नाम पर कर्मचारियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है. अभी हाल ही में सीएनईबी की महिला रिपोर्टर उषा लाल और डेस्क पर काम करने वाली महिला पत्रकार तुहिना चौबे पर हमला हुआ. वे रात के 10 बजे ऑफिस नोएडा सेक्टर 62 से सहारा कम्प्यूटर के पास ऑटो लेने के लिए जा रही थीं. इस बीच कुछ लफंगे किस्म के आवारा लड़कों ने इन दोनों लड़कियों पर फब्तिया कसना शुरू कर दिया. हिम्मत दिखाते हुए रिपोर्टर उषा ने एक लड़के को पकड़ लिया और तीन चार तमाचा जड़ दिया. लफंगों के साथी अपने पिटते मित्र को बचाने के लिए आगे आ गए और उन लोगों की उषा लाल से हाथापाई भी हुई. मौके पर पहुंचे टेक महेन्द्र के कुछ कर्मचारियों का मदद से एक लड़के को पकड़ा गया.

हद तो ये हो गई कि पत्रकारों से मारपीट करने वाले लफंगों के खिलाफ चैनल ने कोई रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई. मौके पर पहुंचे सेक्टर 57 के एसएचओ ने चैनल से आग्रह किया कि वो इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज करा दें, जिससे कार्रवाई का पुख्ता आधार मिले पर चैनल ने पहले पकड़े गए लड़के को थाने ले जाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया. कंप्लेन ना होने के कारण थाने को उस लड़के को छोड़ना पड़ा. चैनल को डर था कि कंप्लेन लिखाने के बाद उससे भी पूछताछ हो सकती है कि वह अपनी महिला कर्मचारियों को रात के 9 बजे के बाद पिक और ड्राप क्यों नहीं उपलब्ध कराया. यही कारण था कि सीइनईबी चैनल पर इस खबर को भी नही चलाया गया. सीएनईबी में रात के पिकअप को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.

सीएनईबी के मेन गेट पर इस संबंध में एक नोटिस पेस्ट कर दी गई है जिसमें साफ लिख दिया गया है कि अब नाईट पिक अप बंद किया जा रहा है. अब आप सभी लोगों को पिक अप नोएडा सिटी सेन्टर से ही मिलेगा. यदि आप गाजियाबाद, बैशाली, बसुन्धरा, लक्ष्मीनगर से आते हैं तो आप को पिकअप की यह सुविधा भी नहीं मिलेगी. नए एडिटर रजनीश कुमार ने रिपोर्टरों को भी बता दिया है कि 110 किलोमीटर से ज्यादा गाड़ी किसी भी हालत में नहीं चलनी चाहिए. इस सब के बीच रात में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ समस्या आ रही है. उन्हें नहीं सूझ रहा कि वो इन परिस्थिति में करें तो क्या करें. नौकरी करें या छोड़ दें. पर ज्यादातर लोगों की स्थिति यही है कि पापी पेट को पालने के लिए किसी भी हालत में नौकरी तो करनी ही है, जब तक कोई नया बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता.

दुर्भाग्य यह है कि यह सब कुछ तब हो रहा है जब चैनल के चेयरमैन अमनदीप सरान खुद चैनल के कामकाज को सीधे तौर पर देखने लगे हैं. सीएनईबी में नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारी अपील करते हैं कि चेयरमैन अपने कर्मियों की जिंदगी के प्रति चिंतित होते हुए नाइट पिक-ड्राप की सुविधा को फौरन बहाल करने का आदेश दें अन्यथा नाइट शिफ्ट में काम करने वाले किसी कर्मी की जिंदगी के साथ कभी कोई हादसा हो गया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सीएनईबी न्यूज चैनल की होगी और तब एक नहीं, दर्जनों लोग पुलिस को बताएंगे कि इस चैनल में किस तरह नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जाती हैं.

सीएनईबी के एक कर्मी द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित. पत्र भेजने वाले ने नाम-पहचान का खुलासा ना करने का अनुरोध किया है.


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