लाइसेंस किराये पर देने वाले धंधेबाजों का भाव बढ़ा

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: लाइसेंस लेकर धंधा करने वाले चैनलों व संचालकों का भड़ास4मीडिया पर जल्द होगा खुलासा : और नया न्यूज चैनल या टीवी चैनल लांच करना आसान नहीं रहा. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में गैर-जिम्मेदार कंपनियों के प्रवेश को रोकने के लिए सरकार ने कई नए कदमों का ऐलान किया है. इसके तहत निजी टीवी चैनलों के अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग नीति में बदलाव से संबंधित सूचना-प्रसारण मंत्रालय के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.

यह फैसला केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया. सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने इस नीति में संशोधन का प्रस्ताव दूरसंचार नियामक ट्राई के साथ सलाह कर तैयार किया है. ‘नॉन-न्यूज एंड करंट अफेयर्स’ श्रेणी के तहत विदेशी चैनलों के अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग के लिए नेटवर्थ 1.5 करोड़ से बढ़ाकर अब 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है. यह आवेदक कंपनी के पहले चैनल पर लागू होगी. अतिरिक्त चैनलों में हर चैनल के लिए 2.5 करोड़ रुपए की नेटवर्थ होना जरूरी होगा.

‘न्यूज एंड करंट अफेयर्स’ श्रेणी के तहत पहले चैनल की अपलिंकिंग के लिए नेटवर्थ 3 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए की जा रही है. अतिरिक्त चैनलों के लिए नेटवर्थ 5 करोड़ रुपए प्रति चैनल होना जरूरी होगा. टेलीपोर्ट के लिए नेटवर्थ की शर्त को एक समान कर दिया गया है. अब चैनल की क्षमता पर कोई भेदभाव नहीं होगा. इसी के साथ टीवी चैनलों को अनुमति लेने के एक वर्ष के अंदर काम शुरू करना होगा.

वर्तमान में टीवी चैनलों के लिए दो गाइडलाइन हैं. इनमें से एक विदेशी चैनलों के लिए हैं जो देश के बाहर से अपलिंक कर भारत में कार्यक्रम दिखाते हैं. दूसरा, उन देसी चैनलों के लिए है जो देश से ही अपलिंक कर देश में ही कार्यक्रम दिखाते हैं. पहली गाइडलाइन 11 नवंबर 2005 को जबकि दूसरी गाइडलाइन 2 दिसंबर 2005 को अधिसूचित हुई थी. इसी के बाद देश में चैनलों का व्यापक विस्तार हुआ. 31 अगस्त 2011 तक सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने कुल 745 टीवी चैनलों को अनुमति दी. इसमें से 366 टीवी चैनलों को ‘न्यूज एंड करंट अफेयर्स’ श्रेणी में जबकि 379 चैनलों को ‘नॉन न्यूज एंड करंट अफेयर्स’ श्रेणी में अनुमति मिली है.

ताजा बने नियम के बाद उन धंधेबाजों की चांदी हो गई है जिन्होंने चैनलों के लिए लाइसेंस पहले ही ले लिया पर वे चैनल चलाने के प्रति गंभीर नहीं हैं. उनकी कोशिश चैनल के लाइसेंस के नाम पर धंधा करने की होती है. इसी कारण वीओआई जैसे चैनलों के लाइसेंस पर कई दूसरे चैनल विभिन्न राज्यों में चलाए जा रहे हैं. यही हाल कई अन्य चैनलों का है. भड़ास4मीडिया पर जल्द ही उन न्यूज चैनलों के लाइसेंसों का खुलासा किया जाएगा जो खुद तो चैनल नहीं चला रहे बल्कि लाइसेंस किराये पर बांटकर धंधा कर रहे हैं. ऐसे चैनलों के लाइसेंस को कैंसिल कराने के लिए भड़ास4मीडिया पर मुहिम शुरू की जाएगी.


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Comments (2)Add Comment
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written by Maheshwar Pd, October 10, 2011
Kyo bhaiya Bhadasi logo ki roji roti me laat marne me lage ho, license rent par hai to kya hua kuch ko to rojgar mila...... smilies/cool.gif
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written by s.k.satyen, October 08, 2011
bhadas media ka prayash sarahney hai print media ko es mamle me mukhar hona chahiye. take bhrastachar par lagam lage aur media ka lebal lekar gundagardi kar rahe history seater aur prasasan ke dalalo ke virudh karyawahi ho sake jaise azamgarh ka dalal no. 1 aajtak ka stringer.

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