खतम होगी केबल ऑपरेटरों की मनमानी, सरकार ने डिजिटल अध्‍यायदेश को मंजूरी दी

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भारत में सैटेलाइट टीवी दर्शकों और प्रसारकों को फ़ायदा पहुंचाने तथा टेलीविजन उद्योग को मजबूत बनाने वाले एक फ़ैसले के तहत केंद्र सरकार ने टीवी पर आने वाले कार्यक्रमों को डिजिटल स्वरुप में प्रसारित करने की अनुमति दे दी है. एक अध्‍यादेश के तहत देश में 20,000 करोड़ रुपये के इस उद्योग को 2014 तक डिजिटल स्‍वरूप प्रदान करने की मंजूरी दी गई है.

सरकार के इस कदम से प्रसारकों के सदस्यता राजस्व में सुधार आने और की संभावना है. केबल टीवी की धारा 4ए में संशोधन से जुड़े इस अध्यादेश के अनुसार इस डिजिटलीकरण को पांच चरणों में पूरा किया जाएगा. केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने गुरूवार को दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि सरकार ने इस बाबत एक अध्यादेश राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए भेजा है. वर्तमान में एनालॉग प्रसारण के चलते उपभोक्ता के पास अभी यह स्वतंत्रता नहीं रह जाती कि वो अपने मन से चैनलों का चुनाव कर सकें. ज़्यादातर मामलों में केबल ऑपरेटर 80-90 चैनल दिखाते हैं और उपभोक्ता से एक तय राशि लेते हैं. डिजिटल हो जाने के बाद ना केवल प्रसारण की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि डिजिटल नेटवर्क पर 1000 तक चैनल उपलब्ध कराए जा सकेंगे.

गौरतलब है कि अगस्त, 2010 में ट्राई ने सुझाव दिया था कि मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में टेलीविजन ट्रांसमिशन 31 मार्च 2012 तक डिजिटल स्वरूप में होना चाहिए. देश के अन्य हिस्सों में इसे चरणबद्घ तरीके से दिसंबर 2014 तक अमल में लाया जाएगा. 10 लाख की आबादी वाले शहरों को 31 मार्च, 2013 तक इसके दायरे में लाया जाएगा. सभी शहरी इलाकों को 30 सितंबर 2014 तक जबकि पूरे देश में 31 दिसंबर, 2014 तक इस डिजिटल स्‍वरूप को प्रभावी बना दिया जाएगा. चैनल प्रसारण को डिजिटल स्वरुप में किए जाने से प्रसारकों को भी लाभ होगा. प्रसारकों को केबल ऑपरेटर को अपना चैनल दिखाने के लिए पैसे नहीं देने होंगे. प्रसारकों का 20 फ़ीसदी ख़र्चा केवल अपने प्रसारण को आगे के चैनल नंबरों पर रखने और उन्हें सही स्वरुप में दर्शकों तक पहुंचाने में ख़र्च होता है.


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