जीएनएन के स्ट्रिंगर्स की दशहरा सूनी, दीवाली काली

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चिटफंडियों के मीडिया मार्केट में उतर आने के बाद से पत्रकारों और पत्रकारिता का हाल बुरा हो गया है. शुरुआत में तो ये कंपनियां तमाम लुभावन वादा करके अच्‍छे संस्‍थानों, अच्‍छी जगहों पर काम करने वाले पत्रकारों को अपने साथ जोड़ लेती हैं, फिर कुछ महीने बाद जब उल्‍टे-सीधे कामों में मीडिया हाउस खोलने का कोई रिस्‍पांस नहीं मिलता है तो फिर शुरू हो जाता है सेलरी न देने का खेल. ऐसा ही हाल जीएनएन न्‍यूज का है. जीएनएन से जुड़े स्ट्रिंगगरों का दशहरा तो सूना बीता ही अब लग रहा है उनकी दीवाली भी काली हो जाएगी.

अपने लांचिंग के पहले से ही यह न्‍यूज चैनल दुनिया जहान की खबरों की बजाय अपने खबरों के लिए ही काफी चर्चित हो चुका है. भड़ास को भेजे गए मेल में इस न्‍यूज चैनल के छत्‍तीसगढ़ के स्ट्रिंगर ने सूचना दी है कि उन लोगों का तीन महीने का बकाया कंपनी नहीं दे रही है. जून में इस चैनल की लांचिंग हुई थी. तभी से स्ट्रिंगरों का बकाया नहीं दिया गया है. जब भड़ास की तरफ से छानबीन की गई तो इस चैनल से जुड़े ज्‍यादातर स्ट्रिंगरों ने यही बताया कि कंपनी पैसे नहीं बल्कि आश्‍वासन दे रही है, जिनके लिंक सीनियरों से ठीक हैं उनको तो कुछ मिल जाता है, पर जिनका कोई माई-बाप इस चैनल में नहीं है वो अपना मेहनताना पाने के लिए तरस रहे हैं.

जीएनएन न्‍यूज के हेड ऑफिस में भी अंदरूनी घमासान मचा हुआ है. यहां भी सेलरी लेट-लतीफ मिल रही है. अगस्‍त महीने की सेलरी 28 सितम्‍बर को मिली है, जबकि सितम्‍बर की सेलरी अब तक नहीं आई है. सीनियर लोग की आपसी पॉलिटिक्‍स में जूनियर पिस रहे हैं. कई जूनियर पहली नौकरी होने के बावजूद यहां काम से इस्‍तीफा देने में ही भलाई समझी, जिन जूनियरों ने इस्‍तीफा दिया है उनमें रोहित कुमार, सिद्धार्थ यादव, विपुल समेत कई अन्‍य शामिल हैं. न्‍यूज रूम का माहौल जूनियरों के काम करने लायक नहीं रह गया है. खबर है कि पिछले एक सप्‍ताह में एंकर शिखा सिंह एवं स्‍वयंका सिंह ने भी इस्‍तीफा दे दिया है. सूत्रों का कहना है कि माहौल से तंग कुछ और लोग जल्‍द ही इस्‍तीफा दे सकते हैं.

सेलरी के संबंध में जब हेड अमिताभ भट्टाचार्य से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि ऐसी बात नहीं है. यह सूचना गलत है. सभी स्ट्रिंगरों को उनकी सेलरी भेजी जा रही है. दीपावली का गिफ्ट भी भेजा जा रहा है. सब कुछ ठीकठाक चल रहा है. कहीं कोई दिक्‍कत नहीं है.


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