ये जो प्रदीप राय है, वो यही तो काम करता है...

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आउटलुक मैग्जीन ने इस बार (27 दिसम्बर) वाले अंक में आईएएस अधिकारी सुनील अरोड़ा और सुपर दलाल नीरा राडिया के बीच बातचीत के एक टेप का विवरण प्रकाशित किया है. इस बातचीत को आप भड़ास4मीडिया पर भी पढ़-सुन चुके हैं. लेकिन इसके एक महत्वपूर्ण अंश की तरफ आप सभी का ध्यान दिलाना रह ही गया था.  इस बातचीत के दौरान उपेंद्र राय और प्रदीप राय का भी जिक्र एक जगह आता है, नीरा राडिया के श्रीमुख से.

जब आईएएस सुनील अरोड़ा नीरा राडिया को बताते हैं कि कैसे एक बंदे ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज विजेंद्र जैन को 9 करोड़ रुपये घूस देकर फैसला अपने फेवर में करा लिया था तो राडिया कहती है कि ये उपेंद्र राय का ब्रदर इन ला या कजिन ब्रदर, जो भी है उसका, प्रदीप राय, यही तो काम करता है. हालांकि इस बातचीत से ये कहीं पुष्टि नहीं होती कि जज विजेंद्र जैन को 9 करोड़ रुपये की रिश्वत एडवोकेट प्रदीप राय ने दी थी लेकिन राडिया का यह बयान देना की एडवोकेट प्रदीप राय इसी तरह के काम करते हैं, कई सवालों को खड़ा करने वाला है.

मजेदार ये है कि इन सब खुलासों के बावजूद केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां सो रही हैं. न तो आईएएस सुनील अरोड़ा के घर छापा मारा गया है और न ही किसी जज या वकील या दिल्ली के पत्रकार के घर. इतने अहम खुलासे होने के बावजूद केंद्र सरकार की सरकारी एजेंसियां ऐसा व्यवहार कर रही हैं जैसे कि उन्हें कुछ पता ही न हों. लेकिन अगर किसी घुरहू या कतवारू का मामला होता तो जाने कबके पुलिस वाले टांग कर थाने ले आए होते और चढ़ावे चढ़ाने का दबाव बना रहे होते और चढ़ावा न मिलने पर न जाने किन किन आईपीसी की धाराओं में संगीन जुर्म बताकर गरीब बेचारों को जेल भेज चुके होते.

पर बड़े लोग तो बड़े लोग होते हैं. इनकी बड़ी बड़ी कोठियां होती हैं. बड़े बड़े मंतरी, संतरी, जज, वकील, अफसर, सिपाही इनके नजदीकी लोग होते हैं सो इन पर किसी तरह की कोई आंच आए, ये संभव ही नहीं है. चलिए, आप लोग भी एक बार सुनील अरोड़ा और नीरा राडिया के बीच बातचीत के टेप की ट्रांसक्रिप्ट को पढ़ लीजिए, जिसे आउटलुक ने प्रकाशित किया है और हिंदी अखबारों में प्रभात खबर ने प्रकाशित किया है. फिलहाल यहां बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट को अंग्रेजी में प्रकाशित किया जा रहा है.

Sunil Arora: Higher judiciary mein corruption bahut ho gayi na...

Neera Radia: Bahut zyaada, it’s like crazy situation...

SA: In the sealing cases, one chap had told me that he’ll get this judgement after one month.

NR: Haan.

SA: And he told me how much he had paid to whom.

NR: My god!

SA: I said, yaar, tum mazaak kar rahe ho. He said main aapko bata raha hoon ye judgement hai, and he broadly outlined the judgement...ki, this is to be pronounced after one month. To aap dekh lena, main khud hi copy le aaoonga uski...tab next time jab ho jayegi, woh le aaya copy.... He showed me, that order. He had paid 9 cr...as he claimed, at the residence.

NR: Kaun tha yeh?

SA: I mean this litigant had paid Rs 9 crore to that high court judge in Delhi.

NR: Good god!

SA: This is what he claimed...ki that I paid, at his home.

NR: Kaun sa judgement tha?

SA: Koi tha land deal, real estate ka.

NR: Pathetic ha? Yeh hai na, yeh Upendra Rai (a journalist) ka brother-in-law, jo bhi hai uska...cousin brother—Pradip Rai—yehi to kaam karta hai.

SA: And this gentleman ultimately became chief justice!

NR: My god!

SA: Jisne judgement diya tha...he became CJ (chief justice), abhi retire hua tha, Vijender Jain, naam bhi bataa deta hoon.

NR: Haan, I know.

SA: Jo Sabharwal (CJI Y.K. Sabharwal) ka khaas aadmi tha.

NR: Haan uske upar to problem hua tha na beech mein?

SA: Nahin par woh (Vijender Jain) to ban gaya CJ (of Punjab and Haryana High Court), ab to CJ ban ke retire bhi ho gaya hai. Kya farak pada...

पूरी बातचीत सुनने के लिए आगे दिए गए लिंक पर क्लिक करें जिसमें सुनील व नीरा की बातचीत से संबंधित खबर व आडियो टेप है- सुनील-नीरा वार्तालाप


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