यही है सहारा वालों की पत्रकारिता!

E-mail Print PDF

15 अगस्त के मौके पर अपने पत्रकारों को कूपन देकर नेताओं-अफसरों-व्यापारियों से उगाही कराने वाला सहारा समूह मीडिया के नाम पर किस तरह पैसे बनाने में जुटा हुआ है और अपने पत्रकारों को उगाही एजेंट बनाने को तत्पर है, इसकी नई बानगी देखिए.

नीचे दो लिंक दिए गए हैं, उन पर क्लिक करेंगे तो आपके सामने कूपन प्रकट होंगे. ये कूपन नए साल के नाम पर पत्रकारों को बांट दिए गए हैं और कह दिया गया है कि ज्यादा से ज्यादा कूपन काटें और ज्यादा से ज्यादा पैसा लाएं. भड़ास4मीडिया को एक मेल के जरिए बताया गया कि सहारा समय बिहार-झारखण्ड के स्ट्रिंगरों के साथ 24 नवम्बर को चैनल हेड ने बैठक की. इस बैठक में कहा गया कि सभी स्ट्रिगंरों को एक लाख रुपये का विज्ञापन दे देना है. जो ऐसा नहीं कर सकेगा, उसे कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा.

सोचिए भला, अगर कोई पत्रकार उगाही नहीं करा पाएगा तो उसे निकाल दिया जाएगा. मतलब, पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं. आपके हाथ में कलम की ताकत नहीं, उगाही की ताकत होनी चाहिए. लगता है सहारा वाले अपने मीडिया हाउस में उपर से नीचे तक सिर्फ और सिर्फ लाइजनरों को ही टिके रहने देंगे या भर्ती करेंगे, लिखने-पढ़ने वालों की अब खैर नहीं है वहां.

कूपन देखने के लिए क्लिक करें- हैप्पी न्यू इयर के लिए कूपन

कूपन में लिखे डिटेल पढ़ने के लिए क्लिक करें- कूपन डिटेल

(कूपन पर जो कोड अंकित किया गया था, उसे एडिट करके मिटा दिया गया है ताकि यह कूपन भेजने वाले साथी की पहचान उजागर न हो सके)


AddThis