'इंडिया न्यूज़' के ईमानदार पत्रकार क्या करें?

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: साल होने को आया, पगार का अता पता नहीं : खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना, ये कहावत इंडिया न्यूज़ पर सटीक लागू होती है. कहने के नाम पर तीन तीन चैनल. पत्रकारों का भारी अमला. उन पर सारा दिन काम का डंडा. सारे दिन एसाइनमेंट की गालियां-- अमुक खबर क्यों छूटी, जहां से मर्जी लाओ. लेकिन महीने दर महीने भागे जा रहे हैं, तनख्वाह के फंड व फंडे का कुछ अता-पता नहीं. दूर-दूर तक इसके मिलने के कोई आसार नहीं.

जो बंधु उपरी कमाई में विश्वास रखते हैं, उनकी दुकान का शटर हमेशा खुला रहता है. उनकी ना नौकरी पर आंच आती है और ना ही उन्हें तनख्वाह की परवाह है क्योंकि सेटिंग है. लेकिन ईमानदारी से काम करने वाले स्कूटर में पेट्रोल डलवाने से लेकर बच्चों की फीस और घर के राशन पानी के लिए परेशान हैं. अब आज से यानि 19 जनवरी से जारी नया फरमान सुनिए. हर हफ्ते रिव्यू बैठक होगी और बीके सर करीन सर के आदेशनुसार (दोनों छदम लकिन सबके समझ मे आने वाले नाम) अपने कामकाजी बच्चों की क्लास लेंगे.

पहली बार चेतावनी फिर अगली बार जुत परेड होगी यानि बिना पैसे के बंधुआ मजदूरों को बाहर का रास्ता यानि नौकरी से हाथ धोना होगा. अरे मुर्ख लोगों, मतलब इंडिया न्यूज़ के मालिकान, अभी भी समय है, होश मे आओ. अगर तुम्हारे काम करने वाले पत्रकार भाग गए तो खबरों के लाले पड़ जायेंगे. मतलब घोड़े भाग गए तो गधों से काम चलाना पड़ेगा. मेरा नाम नहीं दीजियेगा, नौकरी का सवाल है.

आपका...
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