होटल में आओगी तो चैनल में नौकरी पाओगी

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अमर आनंदउसके लिए वो दिन बेहद सदमे वाला था। प्रिंट और टेलीविजन मीडिया को 10 साल दे चुकी उस महिला पत्रकार को ऑफर किया गया- तुम्हारे लिए किसी भी चैनल में 45,000 की नौकरी दिला सकता हूं... बस एक रात तुमको फलाने होटल के कमरे में आना होगा। टेलीफोन पर ये घिनौना प्रस्ताव सुना रहा वो शख्स जो पत्रकारिता के नाम पर धब्बा था, कहता जा रहा था....

''...उस होटल में मैं होऊंगा और वो... जो तुम्हें नौकरी देगा...'' शर्म से गड़ी जा रही उस महिला के लिए ये अंदाज़ा लगाना बहुत कठिन नहीं था, उससे क्या ‘उम्मीद’ की जा रही है। वो बस इस बात से परेशान थी, उसे ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं, कि लोग उसके लिए ऐसे प्रस्ताव ला रहे हैं। एक अच्छे संस्थान में अच्छे वेतन पर काम कर रही महिला पत्रकार अब उन दिनों को भूल जाने की कोशिश कर रही है।  कोई भी शरीफ आदमी इस नीच हरकत की हिमायत नहीं कर सकता और किसी की मजबूरी से खेलने वाला शख्स तो इंसान की जमात में ही नहीं माना जा सकता, और वो शख्स तो सचमुच गलीज है... और पत्रकार के नाम पर कलंक है। अपनी करतूतों से खुद को कई बार मुश्किल में डालने वाला वो शख्स अब एक जगह सलाहकार की हैसियत में है। यह शख्स खुद मीडिया में तो पांच साल से भी कम समय से है, लेकिन वो 10 साल के अनुभव वाली एक महिला पत्रकार को अपने झांसे में लेने की कोशिश कर रहा था, हालांकि वो अपने इरादों में नाकाम रहा, लेकिन खतरा इस बात का है कि ऐसे नीच लोगों का शिकार कभी भी बन सकती है कोई मजबूर महिला या लड़की।

एक और ऐसा  ही वाकया है। मूल रूप से बिहार-झारखंड से ताल्लुक रखने वाली एक तेज़ तर्रार नई लड़की, जब नोएडा के एक चैनल में इंटर्नशिप करने गई, तो उससे टकरा गया एक शख्स.. जिसने उसे शाम को अचानक फोन किया... और नौकरी का प्रलोभन दिया... इधर-उधर की बात की, फिर साफ तौर पर बोला तुम नोएडा के फलाने बार में मिनी स्कर्ट पहन कर आ सकती हो। उसने कहा, मेरे साथ वो भी होंगे... जो फलाने चैनल में एचआर में सीनियर पद पर हैं। बस तुम आ जाओ... फिर नौकरी मिलना तुम्हारे लिए आसान हो जाएगा। उसका कहना था, वो शख्स दूसरे चैनलों में भी अच्छी खासी पकड़ रखता है इसलिए नौकरी की तो गारंटी समझो।

मीडिया में काम करने वालों की ये कड़वी हक़ीक़त उस लड़की के सामने थी, जिसने मीडिया को समाज की बुराइयों से लड़ने का ज़रिया बनाने का ख्वाब देखा था।  फिल्मों में कास्टिंग काउच के बारे में तो उसने खूब सुना था, लेकिन नई-नई मीडिया से रूबरू हो रही उस लड़की के लिए सचमुच ये हैरत में डालने वाली सच्चाई थी। उसने उस शख्स से साफ-साफ कहा, सुनिए अगर इससे आगे आपने कुछ कहा, तो मुझसे बुरा कोई और नहीं होगा। मुझे आप जैसे लोगों से नौकरी नहीं चाहिए और आइंदा हमें फोन मत करिएगा।

मैं उन दोनों लड़कियों के हौसले को सलाम करता हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटि-कोटि शुभकामनाएं देना चाहता हूं। मीडिया ही नहीं पूरे समाज में लड़कियों को ऐसे ही पेश आना चाहिए और भेड़ की खाल में छुपे ऐसे भेड़ियों के मंसूबे पर पानी फेर देना चाहिए। हालांकि ये ज्यादा ज़रूरी है कि ऐसे गंदी मानसिकता वाले लोगों का चेहरा सबके सामने लाया जाए.. लेकिन कई कारणों से ऐसा कर पाना भी आसान नहीं होता। लेकिन ऐसे लोग जो भी करते हैं उसका खामियाजा उन्हें कहीं न कहीं भुगतना पड़ता है। क्योंकि यही क़ुदरत का क़ानून है।

लेखक अमर आनंद टीवी जर्नलिस्ट हैं.


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Comments (23)Add Comment
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written by Arvind sagar, February 01, 2014
अगर मीडिया में सब ऐसी ही लड़कियां होंगी तो शयद मीडिया की दशा ही कुछ होगी. नाइस गर्ल
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written by rajnish kumar, February 26, 2011
sale aise patrakar ko fansi de do , aur har media me aise chehre ko samne lao . sarm karo ki loktantra ke chauthe stambh ho , chih , chih , bah re bhdas,
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written by gurvinder, February 25, 2011
This is a bitter truth of today.we say we r modern n well cultured but the thing is we r becmimng more n more hippocratic.these r two examples but the society frm high to low all girls r facing same problm some how.but then also i must congrates u amarji that u show dare to write this.one thing more those person who asked u to write n expose the names of that person first think for a while that u take step to write abut it but r those girls r bold enough to expose their names n those persons name......i think we all knw its answer..........but Amar ji ,must say...gud effort frm ur side........
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written by amar anand, February 21, 2011
kaisa samrajya. chhadm naam wale vickyanand ji. kisi pareshan insan ki madad ka jazba usi ke man me aata hai jo apni pareshani se ladkar khada hota hai apni zindagi. kisi ki majboori ko aap jaise log apni swarth siddhi ka zariya bante hain aur rahi baat chutiya banane ki to wo to aap apni baaton se lag rahe hain aapko banane ki zarurat nahi hai.
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written by vickyanand, February 20, 2011
काहे को चूतिया बनाते हो यार , साले कितनो को नौकरी दिला चुके हो तुम. फरीदाबाद तक साम्राज्य बना चुके, हो ...मुह मत खुलवाओ....
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written by Rahul Dev Burman, February 18, 2011
अमर आनंद सर आपने जो बात कही है ये वो दो मामले है जो सामने आ गये तो बता चल गये... लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में ये आम बात हो गई हैं.... और पत्रकारिता ही नही कई क्षेत्रों में यहीं हाल हैं.....
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written by rajshekhar, February 18, 2011
yha bat sun kar tajub nahi hua jab naya vavstha mi bhi soosuthan ho raha hi,sare fild mi yahi hal hi samaj ko sudhrna chiyi sayed is tarh ki bath mi hamare bhi gar si log hungi .samaj sudharo rona math ruo.bhai log


raj

patrkar
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written by manish, February 07, 2011
ladkiyon ye janun hona hr chahiye. apne kabilit pe kam karne me achcha hai.
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written by rajesh sthapak, February 06, 2011
yashvant ji is tarh ke krty karne walo k stingopreshan karna chahiye or fir inhe samaj ke samne nanga krdena chahiye media me kam karne walo me itni to dering honi chahiye nhi to jo chal rha h chalne do fir kahe ka dindhora -9981300822
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written by Rajendra Kumar Rana, February 05, 2011
मैं उन दोनों लड़कियों के हौसले को सलाम करता हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटि-कोटि शुभकामनाएं देना चाहता हूं। मीडिया ही नहीं पूरे समाज में लड़कियों को ऐसे ही पेश आना चाहिए और भेड़ की खाल में छुपे ऐसे भेड़ियों के मंसूबे पर पानी फेर देना चाहिए। हालांकि ये ज्यादा ज़रूरी है कि ऐसे गंदी मानसिकता वाले लोगों का चेहरा सबके सामने लाया जाए.. लेकिन कई कारणों से ऐसा कर पाना भी आसान नहीं होता। लेकिन ऐसे लोग जो भी करते हैं उसका खामियाजा उन्हें कहीं न कहीं भुगतना पड़ता है। क्योंकि यही क़ुदरत का क़ानून है।
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written by Sanjeet Choudhary, Panipat, February 04, 2011
अमर जी कहाँ है महिला सुरक्षित. कुछ लड़कियां तो मजबूर हो ही जाती होंगी. जब एक महिला को इस तरह से बेइजत किया जाता है तो इन सफ़ेद पाशों से आपको क्या लालच या डर है. क्यों नहीं खोल देते इसकी पोल. जब इस 10 वर्ष का पत्रकारिता में अनुभव रखने वाली महिला ने अपना दिल खोल कर अपनी दुर्दशा बता दी है तो आपको क्या डर है. अगर ऐसे भेडियों की पोल नहीं खोलोगे तो ये न जाने ऐसी कितनी ही महिलाओं को मजबूर करेंगे. खोलो इसकी पोल. खोलो इसका असली चेहरा. क्या करेगा यह. मान-हानि का डालेगा न तो क्यों डरते हो खोलो न इसकी पोल.
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written by devender singh, February 03, 2011
amar aanad ji maine aapka likha hua pada par shayad yeh media m ab ek faishon ki tarah ho gaya hai.. kuch log yeh faishon karte hai aur kuch log nahi. lakin ek baat saaf hai ki badnaam puri media hoti hai kuch chuninda logo ki wajah se. mujhe pata hai ki unn logo ka naam aap nahi bata sakte lakin apna naam gupt rakher tow bata sakte the. ijsse ladkiya aage bach kar reahti unn logo se.
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written by Intern , February 03, 2011
yehi halat hai India News Mumbai Bureau main, pehle ladkiyo ko intern main kaam karwao aur uske baad unko bolo tum kaam nahi kar paogi baad main unko office main entry bhi nahi karne deta woh sala Bureau Chief- Sharma aur kitne ka carrier kharab karega, jo uske saath ghum ne k liye tayar hoti hai uska naukri pakka woh bhi 6 month baad.......kya hoga aise bewakuf burief chief ka...kabhi tak rahega woh india news main aur India News ka Director kab tak jelega ussko.
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written by धनंजय कुमार, दिल्ली, February 02, 2011
हुश्न बाजार हुआ क्या कि हुनर खत्म हुआ...

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written by gaurav, February 02, 2011
आप नही करोगे तो कोई लड़की तैयार है ये सब करने के लिए तभी तो ये लोग करवा रहे है
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written by arvind mishra, February 02, 2011
yashwant ji aise logo ke nam n chapne ka matlab hai aap bhi unka sath de rahe hai, aise bherion ka nam jab tak nai aaiega ye log nai sudharenge.
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written by sangeeta tripathi, February 02, 2011
ek ladki hone ke nate main yeh kahana chahati hoon ki hume aisi ghatanao se humesha rubaru hona padta hain par kya casting couch ke liye chillane wali is media ko apane girebaan mein jhak kar dekhane ki jaroorat nahi hai. abhi meri ek mahila jyotishi se do din pahale baat ho rahi thi wo ek tv mein jyotish show karti thi. usane bataya ki wahan ka guest coordinator anil sharma naam ka shaks use bahar ghumane jaane ka roz offer marta tha...wo ignor karati rahi lekin ek din aziz aa kar wo channel ke CEO ke paas shikayat le kar pahuchi.......to CEO ka jabab suniye......Ghumane jaane mein kya harz hain. yeh to bahut common baat hai. isake alawa usane channel ke head jo ki us mahila ko CEO ke paas lekar gaya tha use bhi patkar lagayi.......maine is tarah ki ghatanao ke bare mein kai baar Facebook mein likha lekin mujhe ladiyon ki hi pratikiya nahi milti.....to main auron ki kya baat karoon.....shayad ye ladkiya khud is daldal mein girna chahati ain ya phir dusari ladkiyon ke saath kya ho raha hai usase unko koi matlab hi nahi.....
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written by rajat chauhan, February 02, 2011
media me bethe in darindo ko benakab karne ka kaam bhi media ko hi karna hoga.na ki kudrat ke bharose chod kar aise logo ko apni kartute klarne diya jaye.
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written by Akhilesh tripathy,kolkata, February 01, 2011
Dalalon ka nam ujagar krne m aanand ji aapti thi,to is story ka koi matlab nhi najar aata.
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written by पंकज, February 01, 2011
बहुत बढ़िया लिखा है आपने.. लेकिन आजकल कुछ लड़कियां तो खुद ही ये करती हैं, और सोचती हैं की एक बार हमबिस्तर होजाने से क्या घिस जायेगा.. दर-ब-दर भटकने से बढ़िया है की एक बार हमबिस्तर हो जाओ और तुरंत नौकरी पाओ..
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written by अभिषेक आनंद, February 01, 2011
इस मीडिया छात्र को एक बात बताईयेगा? यशवंत जी, या अमर जी कि अगर आप कहीं किसी का खून होते देखते हैं, अच्छी तरह समझते हैं और मानते हैं कि वो गलत हैं. फिर भी जब गवाही देने का समय आता हैं तो आप गवाही नहीं दे सकते. इसका अर्थ ये हुआ कि आप सच नहीं बोल सकते और ये भी कि आप झूठे हो गए. तो क्या समाज में इन घटनाओं के लिए ऐसे लोग भी बहुत जिम्मेदार नहीं हैं?
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written by Purushottam Chauhan, February 01, 2011
Amar Ji, aapne thik likha hai. Lekin mujhe lagata hai ki girls are somehow responsible for that type of behaviour.
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written by Sunil Singh, Chhattisgarh, February 01, 2011
Anand Jee, Aapki Hotal wali story maine padhi. Kuchh v naya nahi tha. Behtar hota ki patrakarita ke aad me dalali kar rahe aise DALALO ke nam ujagar kar unke chehro ko benakab karte. Kyonki aise logo par raham karna bhi ek KHUN karne ke saman hai.

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