खतरनाक हो गया है महुआ चैनल

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: ज्वाइन करने से पहले दस बार सोचें : मैनेजमेंट घटिया गेम खेल रहा : नए संपादक ने परेशान करने का खेल शुरू किया : प्रोड्यूसर श्रीनिवास ने सौंपा इस्तीफा : कुछ अन्य लोग भी जल्द दे सकते हैं इस्तीफा : कुछ ऐसे न्यूज चैनल हैं, जिनमें काम करने से पहले दस बार सोचना चाहिए. उन्हीं में से एक हो गया है महुआ चैनल. तीन महीने में यहां तीन संपादक बदल चुके हैं.

न्यूज रूम के वरिष्ठों के साथ मैनेजमेंट के लोग ट्रेनियों वाली पालिटिक्स खेल रहे हैं. किसी को टीआरपी के नाम पर तो किसी का दिमाग ठिकाने करने के नाम पर तो किसी को कुछ वजहों से हटाया, परेशान किया जा रहा है या फिर साइड लाइन किया जा रहा है. तीन महीने में तीन संपादक चेंज करने का रिकार्ड महुआ ने बना दिया है. पहले अंशुमान त्रिपाठी गए, उनकी जगह ओमप्रकाश आए तो उन्हें डिमोट कर दिया गया. ओमप्रकाश के उपर संतोष पांडेय को ईटीवी से लाया गया और 44 दिन इस पद पर रहने के बाद अब संतोष पांडेय को यह कहकर कि चैनल की टीआरपी ठीक नहीं है, साइड लाइन कर दिया गया है. संतोष से कहा गया है कि वे महुआ के यूपी चैनल में जाएं और वहां प्रोग्रामिंग देखें.

अंशुमान को फिर से संपादक की कुर्सी दे दी गई है और कुर्सी पाते ही अंशुमान ने खेल शुरू कर दिया है. उन्होंने कई प्रोड्यूसरों और अन्य को तरह-तरह से परेशान करना शुरू कर दिया है. जिनको उन्हें निपटाना है उनके लिए आदेश जारी कर दिया है कि सुबह 9 बजे आओ और रात में दो बजे जाओ. वे इंटर्न के सामने वरिष्ठों को डांटने-डपटने और काम न आने जैसी टिप्पणियां करने का दौर शुरू कर चुके हैं. जाहिर है, वे कोशिश में हैं कि उनके पतन के दिनों में जो-जो नए लोग आए हैं, उन्हें निपटाया जाए और अपने प्रिय पात्रों की भर्ती कर ली जाए.

ताजी सूचना है कि महुआ न्यूज चैनल के प्रोड्यूसर श्रीनिवास ने अंशुमान के उत्पीड़न से तंग आकर अपना इस्तीफा प्रबंधन को मेल कर दिया है. हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे में किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है लेकिन उनके करीबियों का कहना है कि श्रीनिवास ने सिर्फ और सिर्फ प्रबंधन की गंदी पालिटिक्स और अंशुमान के उत्पीड़न की वजह से इस्तीफा दिया है. बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कई अन्य लोग महुआ से इस्तीफा दे सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि महुआ चैनल की सफलता से इसके मालिक पीके तिवारी और उनके परिजन खुद को संयमित नहीं रख पा रहे हैं. इसी कारण ये लोग अपने यहां काम करने वाले मीडियाकर्मियों को कीड़े-मकोड़े की तरह ट्रीट कर रहे हैं और ऐसा माहौल बनाकर रखा है कि किसी का भी बोरिया बिस्तर किसी भी दिन बंध सकता है.


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Comments (13)Add Comment
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written by rajesh, February 14, 2011
bhaiya sanjay jee...pahle to aap achhi tarah se angrezi hindi kaa gyan le le...or jo bhi line likhen wo shudh shudh likhe...waise aapne shreenivash jee ke bare mein research to achha kiya hai per..poori jaankari nahi nikal payen hai....khair thodi or mehnat karein to shayad kooch or achhi jankari paa sakein...waise sahi raste per jaa rahe ho guru...anshuman kee achhi dalali kar rahe ho per koi fayda nahi anshuman bhi yeha 2 mahine ka he mehman hai...jitni jaldi kooch paasako to paa lo....or haan nakabilon kee list jo aapne banai hai usme sabse bade nakabil kaa jikra karna bhool gaye....jaise anshuman tripatrhi or rajesh singh jisne mahuaa ke pahle doosre kisi bhi channel mein sirf tikar likhne kaa he kaam kiya hai....
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written by sanjay, February 10, 2011
shrinivas ji aaj tak kabhi media mai raha hai hi nahi darshal wo ek production house mai freelance mai legal story ke papper lakar deta tha oo bhi islye kyunki wo cout mai kisi advocate ke under mai kaam karta tha ...aur waise inssan ko mahua mangemnet ne producer baana diya aur bihar election mai politicain se mobile laptop aur paise ki ugahi karne lage ..to bhai aap hi abtyen na to media mai kabhi raha na hi media me digree ya diploma .. sirf production house mai legal documnets or papper pahuchane se wo mediakarmi nahi ban jata ... bhojpuri janne se wo mediakarmi nahi hota bhale channel bhojpuri ka kyun na ho
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written by विद्रोही , February 09, 2011

अशुंमान त्रिपाठी की वो पत्थर नुमा आखें, और उनके पीछे ज़ेहन में छुपा लिजलिजापन बरबस याद आ गया । कुछ निजी सूत्रो के माध्यम से पता चला की हजरात डीयू का उत्पाद हैं और वैचारिक रुप से लाल सलाम के कायल हैं बोले तो कम्यूनिस्ट है । लेकिन कुछ हो न हो सामन्जस्य बनाने की अद्भुत प्रकृति-प्रद्दत क्षमता है बंदे में, तभी तो पीके बाबा के सामने ये दिवाना गायत्री परिवार का मुरीद बन जाता है, और मौका मिलतें ही कथित लेडिज एंकरस् के अन्तवस्त्रो को कपड़े के उपर से स्पर्श कर के बासी कढी मे उबाल लाने का असफल प्रयास करता है । खैर इस नाचीज को भी इस स्साले ने खूब नचाया है । एक दफे मै मार्निग शिफ्ट करके जा रहा था तो अचानक ये मनहूस अंशुमान कहता है कि तुम्हे रात के शिफ्ट में फिर आना है, और मेरे ना नुकुर करने पर कहता है कि हम लोगों ने भी तीन-तीन दिन ऑफिस में बितायें । हमने मन ही मन सोचा की स्साले जितनी सैलेरी तुझे मिलती है उतनी मुझे मिले तो मैं तीन दिन क्या तीन-तीन महिने ऑफिस में ही बिताउं । बेचारा अंशुमान परेशान है अपनी पारिवारिक समस्याओं से कजरी और सुनीता के बीच के दरार से । बच्चे के बुखार से । अचानक पड़े ऐतवार से । महुआ के एचआर से ।
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written by Ram Babu, February 06, 2011
eSaus Hkh dke fd;k Fkk egqvk esa ] ij ,slk r¨ ugha Fks frokjhth- yxrk gS iSls dk ?keaM vc flj p
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written by Ram Babu, February 06, 2011
Anshuman ji to pakka bimaar aadmi hai. Sabse badi baat hai ki Mahua management ko kya ho gaya hai. Tiwari baba apni shaakh khote ja rahe hai. Mahua ka patan bhi ab shuru hone wala hai. Bahut jyada din nahi hai. Gayatri parivaar ke hokar Tiwari baba ko politics shobha nahi deta hai. Hamari salah hai ki apne employees ko confidence me lekar chale wo, nahi to acchae aadmi Mahua me jana nahi chahenge. Pranam.smilies/grin.gif
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written by rohit, February 04, 2011
AB BHI ETV SE KOI JA RAHA HAI KYA BHI G ?
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written by SANJAY, February 04, 2011
MAHUA KE NAKAMIL NO 1 VINOD PANDEY
MAHUA KE NAKAMIL NO 2 MRITUNJAY PANDEY
MAHUA KE NAKAMIL NO 3 OMPRAKASH SINGH
TEEN KI TIKRI SE BACH KE RAHANA.
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written by Deepak, February 04, 2011
all news channels except old ones(like TV today,NDTV etc) are working based on old traditional approach of hiring employees like some old friend or person who is close to senior peoples.There is no fixed defined rules(based on educational skills) like in IT sector which promotes system driven management than person driven management and thats the problem which creates problems in media channels which have come in last 4-5 years as they started for profit booking without any planning and management startegies and hence all are working as frustrated and loss making media houses resulting insecure manpower and enviromental conditions.
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written by PANKAJ , February 04, 2011
ES TRH KE KARYO SE MEDIA AB RAJNITI KA MAIDAN BAN GYA HAI JHA PR UCHHI KURSIYO PR BAITHE HUYE LOGO KI AB DAL NHI GALEGI SIR JI
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written by ashish Mahuaa news unnao, February 03, 2011
anshuman sir aap ki aane se loog dar gai hi mahuaa phir se bulandiyon ko chhuyega ....
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written by MITESH, February 03, 2011
it does happen
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written by सुरेश, February 03, 2011
श्री निवास जी आप सही कह रहे हैं। मुझे पता है वह कान का कच्चे इंसान है। वैसे अंशुमान जी का काम से ज्यादा ध्यान कौन किससे बात कर रहा है। किसके घऱ जाता है इस पर ज्यादा रहता है। सबसे बड़ी बात है इसके उनके चमचे ही उसको धोखा देकर उनकी छवि धूमिल करते हैं। उनमें कंफीडेंस का भी अभाव है। वैसे बीमार इंसान के लिए आप भगवान से दुआ करें कि अब उनको फिर से उनके चमचे पतन की राह पर न ले जाएं।
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written by mediabandhu, February 03, 2011
mediakarmion me badti ja rahi asuraksha ki bhavana..naukari ko lekar..is tarah ki uthapatak ki sabse bari vajah hai..ishi ka istemaal management bhi khub karta rahata hai..Mahua me ishki parakastha dekhne ko milti hai..!!

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