आरकेबी के पक्ष में आईं चार और चिट्ठियां

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राजीव कुंवर बजाज उर्फ आरकेबी, सीईओ, लेमन टीवी के खिलाफ उनके साथ काम कर चुके रवि पारीख ने एक पत्र क्या भड़ास4मीडिया के पास भेजा, पत्र के छपते ही आरकेबी समर्थकों ने आरकेबी को महान बताने के लिए मेल भेजो कंपेन शुरू कर दिया है, और साथ में फोन कर कर के यह कहना कि अभी तक उनका भेजा छपा नहीं. एक पत्र के जवाब में अभी तक दो पत्र छप चुके हैं, Lemon is working smoothly... और लेमन न्यूज़ में सब कुछ ठीक चल रहा है शीर्षकों से.

इन दोनों पत्रों को लिखने वाले दोनों लोग लेमन में ही काम करते हैं. आज हम उन चार पत्रों को एक साथ प्रकाशित कर रहे हैं, जो रवि पारीख द्वारा आरकेबी के उपर लगाए गए आरोपों के जवाब में लेमन कर्मियों द्वारा भेजे गए हैं. इनमें से एक पत्र विजय रावत का है जो जनसंदेश चैनल में काम करते हैं और कभी आरकेबी के साथ काम कर चुके हैं. भड़ास4मीडिया हमेशा सेकेंड ओपिनियन का प्रबल पक्षधर रहा है, इसलिए हम लोग जब कभी भी भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित किसी खबर को लेकर कोई प्रतिक्रिया आई है तो उसे प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है.

आज भी उसी परंपरा को कायम रखते हुए हम ये सारे पत्र प्रकाशित कर रहे हैं लेकिन यह भी सच है कि अगर भविष्य में भी आरकेबी को लेकर कोई पत्र अपने नाम व पहचान के साथ कोई साथी भेजता है तो उसे प्रकाशित किया जाएगा. नीचे दिए जा रहे चार पत्रों में से किसी भी पत्र में लिखे गए एक भी शब्द को संपादित नहीं किया गया है, यहां तक कि कामा फुलस्टाप व मात्राओं की गल्तियों को भी नहीं सुधारा गया है...

एडिटर

भड़ास4मीडिया

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WITH MALICE TOWARDS NONE...

I have been working with Lemon News for the past 22 months and it is purely my preference to work for this organization. I am neither under any contract nor am I under any kind of demand to work here and alike applies to all. It is solely our prerogative to be associated with this particular group for as long as we wish to. If I have another/better option, then unquestionably it is my call to prefer.

Here at Lemon news we usually don’t chatter news as RKB, although jokingly, but precisely says “The audience will prefer CNN to LEMON NEWS for actual and factual news”. But we thrash out issues mostly associated to the middle/lower middle class section of the society. If we initiate a campaign to compel the government to reduce the over charged power tariffs, or to help the people below poverty line to get an appropriate ration card where they can get their portion at subsidized rates, which otherwise is ahead of their capacity to obtain from the bazaar, or to join hands with the disadvantaged, falling under the governments “Slum Rehabilitation Scheme(SRA)” to help them acquire a suitable shelter without having to go through the ubiquitous process of greasing the palms of our dexterous ‘sarkari babus’, or even for that matter our drive to “SAVE THE GANGA”, the heritage river which is on the verge of annihilation, and in all these cases the community is at its discretion to join us or not join us in these combats. None is coerced to join as none is enforced to work for Lemon News.

People who have been writing not in favor of RKB might now not be pleased if people are made aware of this actuality that they were endowed with employment here when there was a severe financial crunch in the whole world and almost all bigger companies were downsizing on the workforce. Everything was admirable to them till the time they were in a position of dictating upon the more proficient and skillful staff. But when things started getting haywire just because of their incompetence and disorganization in handling the place of duty that they were not actually supposed to be at, they started behaving more sadistically with their subordinates and tried to vent their spleen over sundry issues. Was it to screen their ineptitude? No clear clues…

As far as the financial crisis is concerned, I intentionally pointed out the economic crunch around the world in the previous paragraph so that we might evoke that even one of the world’s biggest financial service providing firm ‘LEHMAN BROTHERS” was declared bankrupt following the drastic losses in its stock, leading to massive exodus of its clients.

In all probability ‘LEMON NEWS’ must have been no exception, being a very very small organization in contrast to LEHMAN. Coincidently the pronunciation is almost similar, but here we go by the old Jewish proverb that “THIS TOO SHALL PASS”

GAUHAR PEERZADA

SENIOR PRODUCER, LEMON NEWS
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लेमन के बारे में मेरा अनुभव

यशवंत जी, मैं आनंद कमलेश त्रिपाठी, लेमन न्यूज़ में एक छोटा सा कर्मचारी  हूँ .पिछले कुछ दिनों से लगातार लेमन को लेकर आपकी साईट पर कुछ न कुछ छप रहा है ,जिसके  बारे मे मै कुछ चीज़े बताना चाहूँगा .इस चैनल में मै पिछले डेढ़ साल से काम कर रहा हूँ और इस चैनल और बजाज साहब ने मुझे कई अवसर दिए हैं जिसके लिए मै इनके एहसान कभी नहीं भुला सकता .यहाँ आने से पहेले मै बेरोजगार था मेरे पास नौकरी नहीं थी .कई जगह apply  कर रहा था ,लेकिन एक दिन मुझे RKB सर का फ़ोन आया उन्होंने कहा आनंद अभी मुझे आकर मिलो.

मै तुरंत लेमन न्यूज़ पहुच गया उन्होंने मुझे तुरंत join करने को कहा .उस दिन के बाद मै आज तक हर दिन लेमन में आता हूँ .मैंने कभी भी live anchor नहीं किया था लेकिन इस चैनल ने मुझे वो मौका दिया .आज मै हर दिन एंकर करता हूँ ,बजाज साहब ने आज तक कभी मुझे तू कह कर तक नहीं बुलाया.अब अगर लेमन की हालत की बात की जाए तो  मै मानता हूँ की मेरे चैनल के साथ कई आर्थिक तकलीफें हैं,लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हमलोगों को तनखाह नहीं मिलती. मुझे भरोसा है की बजाज साहब जल्द से जल्द सारी परेशानियाँ खत्म  करदेंगे.और अच्छे दिन भी हमने इस कंपनी में देखें है जब लोगों को month पूरा होने से पहेले ही salary मिल जाती थी.

मुझे और मेरी तरह हर कर्मचारी को इस चैनल और RKB ने बहुत कुछ सिखाया है.बजाज साहब के बारे में एक वाकया बताता हूँ .हमारे lemon में एक रिपोर्टर काम करता है ,मै नाम नहीं लेना चाहता,लेकिन एक रात अचानक उसकी माँ की तबियत बहुत ख़राब हो गयी. उस रिपोर्टर को तुरंत अपने गाँव यानी उत्तर प्रदेश जाना था. वो बजाज साहब के पास गया और रोने लगा.बजाज  साहब ने तुरंत उसके लिए plane ticket बुक करायी और आज तक उसकी salary से ये पैसे नहीं काटे गए. आब मै आप लोगों पर ये छोड़ता हूँ की आप लोग इस वाकये को क्या नाम देते हैं, मै तो इसे ऐसा एहसान कहेता हूँ जो कोई किसी पर नहीं करता. बाकी बातें आम जनता पर छोड़ देनी चाहिए जो THE RKB SHOW पिछले कई वर्षों से देख रही है. उस दर्शक को पता है की कौन सच बोलता है और कौन झूठा है. मै उम्मीद करता हूँ की आप मेरे इस पत्र को अपनी वेबसाइट पर छापेंगे, ताकी लोगों को ये पता चल सके की जिस राजीव कुंवर बजाज के बारे में इतना कुछ छाप रहा है उनके  बारे में मेरा अपना तजुर्बा क्या है,

आनंद कमलेश त्रिपाठी

लेमन न्यूज़
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रवि के आरोपों में सच्चाई नहीं

यशवंत जी मैं भड़ास का दैनिक पाठक हुं किन्ही व्यस्तताओं के चलते इन दिनों मैं आपकी साइट नही पड़ पाया और आज जब मैने साइट खोली तो उसमें लेमन टीवी और रवि पारिख के बारे में पड़ा.. और पड़ के एक धक्का सा लगा क्योकि जिस तरह के आरोप रवि पारिख ने लगाए है उन्मे मुझे दूर दूर तक कोई सच्चाई नजर नही आती.. क्योकि रवि पारिख ने कहीं भी कोई ऐसा सबूत पेश नही किया सिर्फ रवि पारिख ने आर के बी को नीचा दिखाने की कोशिश की है.. और मैं आर के बी और रवि पारिक को सहारा के समय से जानता हुं.. जब रवि पारिख नासिक में सहारा के स्टिंगर हुआ करते थे और आर के बी सहारा के वाइस प्रेजिडेंट...

मैने  ही आर के बी के साथ तीन साल काम किया है.. और तीन साल में कभी भी कुछ भी ऐसा नही लगा जैसा कि रवि पारिख ने कहा है.. लेमन में मेरे कई दोस्त अभी भी काम कर रहे है मैने आपकी इस खबर के बारे में उनसे बात की जिनमें से एक है सचिन पडाले जो लेमन के शुरूआत से आर के बी के साथ जुड़े हुए है और पूरा टेक्निकल सेटअप देखते है. उन्होने मुझे रवि की पूरी कारगुजारी के बारे में बताया और मुझे ये जानकार ताज्जुब हुआ कि आपने भी इस खबर को छापने से पहले आर के बी से एक बार भी उनका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की क्योकि जहां तक वहां मेरी लोगो से बात हुई है तो वहां रवि पारिख की छवि काफी खराब है यहां तक कि एक बार ऑफिस की कुछ स्टाफ ने अंबुनी पुलिस स्टेशन पर उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करवानी चाही थी लेकिन आर के बी ने तब ये पूरा मामला शांत कराया..

और जहां तक सैलरी देर से आने की बात है तो बहुत से चैनलों में सैलरी देर से आती है जिसके बारे में आपसे बेहतर कोई नही जानता और शायद लेमन में कोई किसी से बंधुआ मजदूरी तो नही कराई जा रही है सभी के सामने रास्ते खुले है मैं भी लेमन लांच हुआ तो वहां नौकरी के लिए गया था तो आरकेबी ने साफ कर दिया था कि आप मुझ से जुड़ना चाहते है तो बहुत बढ़िया लेकिन मेरे चैनल की आर्थिक स्थिति का कोई पता नही जिसके बाद मैं दिल्ली आ गया और यही बात लेमन टीवी में सभी को बोली गई थी और सैलरी आ रही है जिस की तस्दीक लेमन में काम करने वाले मेरे दोस्तों ने खुद की है देर से ही सही... देर से सैलरी आने के बावजूद भी अगर लोग लेमन में काम कर रहे है तो इसमें उनका खुद का दोष है... क्योकि हर किसी के साथ अच्छा और बुरा वक्त लगा रहता है.. और जिस प्रकार के आरोप रवि ने आरकेबी पर लगाए है वे बहुत बेबुनियाद है क्योकि रवि पारिख जिन्हें सहारा से निकाल दिया था ने खुद आरकेबी से नौकरी मांगी थी जिसके बाद आरकेबी ने एक स्टिंगर को न्यूज एडिटर का इतना बड़ा पद दे दिया शायद यही आरकेबी की सबसे बड़ी गलती थी.

उम्मीद करता हुं कि आप इस जरूर छापेंगे.

विजय पाल सिंह

जनसंदेश चैनल
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Its with great pain and anguish that...

Its with great pain and anguish that i pen these lines. The pain and anguish is over the manner and way adopted to tarnish image of a person and channel. The sole aim of writing such shameful mails is ofcourse trying to make people realise that how bad or good i have been treated at lemon. If people had problems why didnt they leave for better options? you dont like a place u move ahead and if you like a place u stick on.How many have been with a channel in bad times and how many have left. the left ones are on bhadas4media.com.

Yes their was a lean period where salaries were not in that flow... but they were on i repeat they were on...and if you dont get want u want u leave... RKB pampers his employees and is always there wen needed.... He has the power to judge and help out of the way.Whether he buys a new car ,or sells his old car should not be subject of discussion.These are things very personal,and who so ever discusses it is not a professional.... he is someone who is in the habbit abt knowing more abt a person....

All news channels in india in sumtime or the other have faced financial crisis... and we get to hear that often... it happens in every industry.... at the moment things are smooth, other staff member will also voice their opinions... regarding the telephone numbers... i promise to restore them asap... but it seems u people dont have the new numbers as yet... Allah is most gracious and most merciful ..... never write bad things ur soul gets dirty....

regards

reba ayaz

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