मैं कुंवर भूपेंद्र नारायण सिंह उर्फ भुप्पी का प्रशंसक हूं

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कुंवर साहब उर्फ भुप्पी जी मेरे से उमर में छोटे होंगे या हमउम्र होंगे, बड़े तो कतई नहीं होंगे. मेरे जिले के भी हैं. मेरी जाति के भी हैं. मेरे पेशे के भी हैं. और, मेरे तेवर के भी. जिला और जाति एक होने को यहां मेरे द्वारा लिखे जाने पर खुद मुझको ही आपत्ति है, बावजूद इसके लिख रहा हूं क्योंकि अच्छी-अच्छी चीजें ही नहीं लिखी जानी चाहिए, वो बुरी चीजें भी लिखी जानी चाहिए, जो मेरे मन में है. और जातियों की बात तो नहीं जानता लेकिन मैंने ज्यादातर तेवरदार लोग क्षत्रियों में ही देखे हैं.

शायद इनका जीन, इनका डीएनए ऐसा होता है कि ये स्वभाव से सच और आक्रामक होते हैं. इसी कारण कम पढ़ा लिखा क्षत्रिय लंपट व अपराधी किस्म का बन जाता है और ज्यादा पढ़ा-लिखा सिस्टम की लंपटता और अपराधी प्रवृत्ति के खिलाफ तनकर खड़ा हो जाने वाला. ऐसा नहीं कहता कि यह सिर्फ क्षत्रियों में होता है, लेकिन संभवतः अनुपात ज्यादा होता होगा, ऐसा मेरा अनुमान है. मेरे ज्यादातर तेवरदार वरिष्ठ-कनिष्ठ मित्रों में इन दिनों क्षत्रिय ज्यादा है, यह नजर फिराने पर पाता हूं. और हां, उतनी ही विनम्रता से स्वीकार करता हूं कि तेवरदार होना जातीय गुण नहीं बल्कि संवेदना, संस्कार, परिवेश व पढ़ाई-लिखाई की खेती है. इस कारण ये सभी जातियों-धर्मों में समान भाव से पाई जाती है, पर कहना चाहूंगा कि तुलनात्मक अध्ययन हो तो क्षत्रियों में ज्यादा मिलेगा. यह सब लिखकर मैं बर्र के छत्ते में हाथ डाल रहा हूं लेकिन मुझे बर्र से कटवाने में अब कोई डर नहीं लगता, यह सच है, बल्कि कहूं कि अब जान-बूझकर बर्र के छत्ते में हाथ डालने लगा हूं तो कतई गलत नहीं होगा.

मुझे पता है क्षेत्र-जाति की बात के आधार पर कोई तार्किक बात नहीं की जा सकती, इसलिए जिला-जाति की बात छोड़ देता हूं. उसे मेरे मन की नकारात्मक भड़ास मान कर खारिज कर दीजिए. बात सिर्फ सरोकार की करते हैं, बात सिर्फ पेशे और तेवर की करते हैं. कुंवर साहब उर्फ भूपेंद्र नारायण सिंह उर्फ भुप्पी आजतक के हिमाचल, पंजाब और हरियाणा के ब्यूरो चीफ हुआ करते थे. थे, इसलिए कि जल्द ही वे संस्थान से इस्तीफा दे देंगे या अगर नहीं देंगे तो संस्थान में काम नहीं करेंगे क्योंकि संस्थान उनसे इस्तीफा मांग चुका है. आरोप है कि उन्होंने एक मुख्यमंत्री से गाली-गलौज की भाषा में बात की. ये आरोप वो संस्थान लगा रहा है जो पत्रकारीय नैतिकता के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन उन दावों की कलई तब खुल गई जब उनके यहां काम कर रहे लोग नीरा राडिया से बतियाते पाये जाते हैं और इस दलाली के अपराध पर सीधे कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसी संस्थान में एक सज्जन ने जो भुप्पी के मामले की जांच करने वाली कमेटी के सदस्य हैं, हिमाचल में जमीन खरीद रखी है. ये आरोप भुप्पी ने अरुण पुरी को भेजे अपने पत्र में लगाया है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. भुप्पी ने एक-एक कर कई सवाल अरुण पुरी और आजतक वालों से पूछे हैं, जिनका कोई जवाब आजतक के पास नहीं है. हम लोग चाहेंगे कि उनके जवाब आएं ताकि सब लोग जान सकें, पढ़ सकें कि उनका पक्ष क्या है.

पर अभी तक भुप्पी ने जो पत्र भेजकर आरोप लगाए हैं उससे तो निजी तौर पर मैं भुप्पी का प्रशंसक हो उठा हूं. इसलिए भी हो गया हूं कि किसी जर्नलिस्ट में इतनी हिम्मत तो है कि जो किसी मुख्यमंत्री को गरिया सकता है. दलाल किस्म के लोग जी सर जी सर यस सर यस सर के अलावा और क्या कह सकते हैं, लेकिन जो मर्द जर्नलिस्ट होता है, जो स्वाभिमानी जर्नलिस्ट होता है, जो पत्रकारिता के पैशन को जीने वाला जर्नलिस्ट होता है वो किसी सर सर नहीं कहता बल्कि बराबरी पर रखकर बात करता है, आंखों में आंखें डालकर बात करता है और वही लिखता बोलता है जो सच होता है, भले उस सच से सामने वाले कितने भी बड़े आदमी की फट जाए. अब पता चल रहा है कि भुप्पी को एक मुख्यमंत्री के इशारे पर बलि का बकरा बनाया गया है. और संदेह पैदा होता है कि इसके एवज में आजतक और अरुण पुरी ने उस मुख्यमंत्री से लंबी-चौड़ी डील की होगी. वरना अरुण पुरी जैसे आदमी को क्या पड़ी थी अपने एक होनहार और बेहद ईमानदार पत्रकार को संस्थान से बाहर करने की.

भुप्पी के पत्र में कहा गया है कि उन पर कोई आरोप साबित नहीं हो सका है, बावजूद इसके उनसे इस्तीफा देने को कहा जा रहा है. ऐसा क्यों? भुप्पी ने अपने पत्र में विस्तार से बताया है कि उनके पास मुख्यमंत्री द्वारा किए गए आर्थिक भ्रष्टाचार को लेकर जिस तरह के कागजात हैं, उससे सरकार गिर सकती थी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे मुख्यमंत्री की पार्टी में भूचाल आ सकता था, इसी कारण मुख्यमंत्री अपनी खबर रुकवाने के लिए किसी भी हद तक चला गया, फर्जी स्टिंग का सहारा लिया और आजतक प्रबंधन पर दबाव बनाया. तो उस मुख्यमंत्री ने आजतक प्रबंधन को बहुत बड़ा प्रलोभन भी दिया होगा. लगता है अरुण पुरी और आजतक वाले इस प्रलोभन में फंस गए. इसी कारण भुप्पी को शहीद कर दिया गया है. लेकिन भुप्पी ने हार न मानने की ठान ली है. वे ट्रेनिंग पाये हुए पायलट हैं. उन्होंने ठान लिया है कि पत्रकारिता न सही, जहाज उड़ाकर पैसे कमा लेंगे लेकिन बेईमानों के आगे झुकेंगे नहीं, वे बेईमान चाहें आजतक के अंदर हों या हिमाचल प्रदेश की राजधानी में हों.

भुप्पी के इस रुख ने कम से कम मुझे तो उनका प्रशंसक बना दिया है. राडिया प्रकरण के जरिए मीडिया के बेईमानों की कलई खुलने के बाद अब भुप्पी प्रकरण उन संस्थानों की हिप्पोक्रेटिक नैतिकता को उजागर कर रहा है जो अपने को इस देश की मीडिया नैतिकता के सबसे तेज पैरोकार माने जाते हैं. अरुण पुरी, कमर वहीद नकवी, शैलेश... सभी लोगों को जवाब देना होगा कि आखिर सच क्या है. ये लोग जवाब अगर नहीं देते हैं तो मान लेना चाहिए कि ये दौर पत्रकारिता के कथित नायकों के चरम पतन का दौर है और अब नए किस्म के नायक पैदा हो रहे हैं जो अपनी ईमानदारी के कारण मीडिया के सिस्टम का पार्ट बनने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं और इसी कारण बागी हो रहे हैं. आलोक तोमर, जरनैल सिंह, भूपेंद्र नारायण सिंह... ये तो चंद नाम हैं और राष्ट्रीय नाम हैं. ऐसे नाम हर प्रदेश व जिले में बिखरे पड़े हैं जो परम बाजारू हो चुकी पत्रकारिता में ईमानदारी से काम करने के कारण अपमानित करके हाशिए पर डाल दिए गए हैं. मैं ऐसे सभी लोगों की तरफ से कुंवर भूपेंद्र नारायण सिंह उर्फ भुप्पी का इस्तकबाल करता हूं और गर्व से कहता हूं कि ऐसे मीडिया नायक ही मीडिया की लाज बचाने में सक्षम होंगे, न कि करोड़ों अरबों में खेलने वाले मीडिया के मालिक और संपादक.

मैं चाहूंगा कि कोई पत्रकार भुप्पी के लिए फेसबुक पर एक अलग से पेज क्रिएट करे और उनका फैन क्लब बनाए. उसका सबसे पहला सदस्य मैं बनूंगा. इसलिए नहीं कि वे मेरे जिला और जाति के हैं, इसलिए कि उन्होंने जो साहस दिखाया है, वो इस बाजारू दौर में बिरले लोग दिखाते हैं. उनको जिस सिस्टम ने बलि का बकरा बनाया है, उसके सामने जो सवाल खड़े किए हैं, वो सवाल यह खतरा मोल लेकर उठाया है कि इसके चलते उनका आगे का करियर इस बाजारू मीडिया संस्थानों में ब्लाक हो सकता है, वो सिस्टम उन्हें सवाल उठाने के एवज में परेशान-प्रताड़ित कर सकता है, ये तेवर अद्वितीय है.

मीडिया के फील्ड में आने वाले नए संवेदनशील और आदर्शवादी पत्रकारों के लिए भुप्पी प्रकरण एक सबक है. इससे उन्हें कई तरह के सबक मिलते हैं. सबसे बड़ा ये कि अब बाजारू मीडिया में केवल मीडिया संस्थान के हितों को फायदा पहुंचाने वाली पत्रकारिता की जा सकती है, जनपक्षधर पत्रकारिता नहीं. और, जब यह नतीजा निकलता है तो सवाल खड़ा होता है कि फिर रास्ता क्या है. ऐसे में न्यू मीडिया, वेब, ब्लाग, मोबाइल आदि हमारे सामने चमत्कार की तरह नजर आते हैं जिनके माध्यम से हम बिना किसी लंबे-चौड़े डिस्ट्रीव्यूशन कास्ट के ग्लोबल जर्नलिज्म कर सकते हैं और सच बात को लिख कह सकते हैं. हां, लेकिन यह करने के लिए भी हमें थोड़े बहुत पैसे कमाने पड़ेंगे और पैसे कमाने के लिए कोई और पेशा चुन सकते हैं, ठेला लगा सकते हैं, दुकान खोल सकते हैं, लेकिन पत्रकारिता को शौक के बतौर, पैशन के बतौर न्यू मीडिया के जरिए जी सकते हैं.

अंत में मैं भुप्पी के साहस और तेवर को सलाम करता हूं. और उनसे अनुरोध करता हूं कि वे अपनी लड़ाई अकेले मानकर न लड़ें. उनके साथ इस समय सारे देश के संवेदनशील और ईमानदार पत्रकार खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर हम आनलाइन और आफलाइन दोनों तरह के आंदोलन खड़ा कर सकते हैं. बस, वे खुद को अकेले न समझें.

अपडेट- फेसबुक पर भुप्पी के लिए एक पेज बन चुका है. भुप्पी को सपोर्ट करने के लिए इस पेज पर जाएं भुप्पी को Like करें.. क्लिक करें- सपोर्ट फीयरलेस जर्नलिस्ट भूपेंद्र नारायण सिंह

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

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भुप्पी प्रकरण की अब तक प्रकाशित सभी खबरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें...

आजतक के ब्यूरो चीफ का हुआ स्टिंग?

साजिश करके फंसाया जा रहा है भुप्पी को?

आजतक प्रबंधन ने अपने ब्यूरो चीफ को बर्खास्त किया?

आजतक से हटाए गए भुप्पी ने पत्र लिखकर खड़ी की अरुण पुरी की खाट


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Comments (20)Add Comment
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written by आलोक कुमार, March 04, 2011
यशवंत जी,
जाति की ओछी परिधि में भूपी के व्यक्तित्व को उकेरकर आपने बहुत छोटी बात कर दी। बचकाने अंदाज में आप अपने मयार की हद तय कर रहे हैं। इंसान की जात और वीरों की बात को तेरा मेरा करने का ये अंदाज गलत है। शुभकामना है. भगवान आपको इस दायरे से निकाले।
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written by Rohit Mathur, February 15, 2011
Meri aur Bhupi ki dosti 10 saal se jyada purani hai. jis waqt usne AAJTAK join kiya us samay uske paas naukri nahi thi. India TV me apne ek boss ko khush na rakh pane ke jurm me use naukri gawani padi thi. Mere saath bhi AAJTAK me kam se kam do baar aisa mauka aya ki dhardar script likhne ki wajah se meri naukri jane ki kagar par aa gayi thi. Is mamle me ye zaroor kehna chahunga ki jab tak Udai Shankar channel ke editor the to wo apne reporter ko kafi protect karte the. unke jane ke baad silsila badal gaya.Bhupi ke saath jo hua wo sarasar galat aur bemani hai. Main janta hun ki Bhupi jaisa damdar insaan is chunauti ka datkar saamna karega. Hum sab uske saath hain
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written by RAMESH SHARMA, February 14, 2011
भूपी जी को सलाम , एक पत्रकार एसा तो निकला जिसने अपने आप को पाक दामन कहलाने वाले हिमाचल के मुख्यमंत्री धूमल की खाट खड़ी कर दी है! हिमाचल में अपने आप को इमानदार कहलाने वाले इस मुख्यमंत्री के काले कारनामो को सभी के बीच लाना बेहद जरुरी है ! कई सौ करोड़ की सम्पति बनाने वाले इस मुख्यमत्री ने पैसों के बल पर आज तक वालों को भी खरीद लिया होगा इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है ! आज तक वालों को तो गर्व होना चाहिए था कि भूपी कि बदौलत और उनके चेनल के माध्यम से हिमाचल के मुख्यमंत्री के काले कारनामो की पोल खुलती ! मगर आज साबित हो ही गया पत्रकारिता राजनीती के दवाब में आ कर चंद पैसों के आगे बिक ही गई ! भूपी भाई आपने जो किया सही किया हम सब आपके साथ हैं !
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written by Shailendra singh, February 14, 2011
Aap ki tarah mai bhi ghazipur ka rahne wala hoon.maine aur bhupi ji ne lagbhag ek sath hi "aaj ki baat" se ptrakarita ki shuruwat ki thi.hum dono ne karib thin saal tak ek sath kaam kiya.jaha tak mai unko janta hun un thin saalo me unhone aisa kuch v kaam nhi kiya jishse unka ya channel ka naam kharab ho.mehnat se kaam karne walo ke aage aise raste aate hi rahte hai.muje vishwash hai ki wo jald ish ghor apmaan ka jabab aur ache tarike se denge,
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written by govind goyal, February 14, 2011
good.
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written by parveen, February 13, 2011
bhuppi hum tumarey sath hain
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written by upendra ' upen ', February 13, 2011
भूपेंद्र जी को सलाम, ऐसे ही कुछ लोग पत्रकारिता के स्वरुप के सही रक्षक है....... वरना आज पत्रकारिता माने चुगली, चापलूसी ,गुलामी, चाटुकारिता और भी बहुत कुछ है
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written by upendra ' upen ', February 13, 2011
भूपेंद्र जी को सलाम, ऐसे ही कुछ लोग पत्रकारिता के स्वरुप के सही रक्षक है....... वरना आज पत्रकारिता माने चुगली, चापलूसी ,गुलामी, चाटुकारिता और भी बहुत कुछ है.
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written by jai kumar jha, February 13, 2011
ऐसे पत्रकार और पत्रकारिता को सलाम......ऐसे लोगों के समर्थन में तन,मन और धन सब अर्पण है......आज इसी बात की जरूरत है की भ्रष्ट लोग चाहे मुख्यमंत्री ,प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की कुर्सी पर क्यों ना बैठा हो....उसे गाली ही नहीं बल्कि ऐसे पत्रकारों द्वारा तथा आम जनता द्वारा निडरता से जूते भी मारे जाने चाहिए जिससे कोई भ्रष्ट और कुकर्मी इन पवित्र पदों पर बैठकर उसे अपमानित और अपवित्र ना कर सके......आज उच्च संवेधानिक पदों पर शर्मनाक स्तर के भ्रष्टाचारियों के बैठे होने की वजह से पूरी इंसानियत और नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है.....
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written by संजय कुमार सिंह, February 12, 2011
सबसे तेज चैनल अपने रिपोर्टर को दरवाजा दिखाने में भी तेज निकला। वैसे, जिसके लिए "बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया" - होता है उसे शर्म नहीं आती। शेष नारायण जी ने ठीक याद दिलाया है, मुलायम सिंह ने पुरी अंकल की पोल बड़ी सफाई से खोली थी। कोई ताज्जुब नहीं होगा जब धूमल जी बताएंगे कि भूपेन्द्र सिंह को हटवाने के लिए उन्होंने अरूण पुरी को क्या दिया था।
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written by shravan shukla, February 12, 2011
salaam hai aapko bhuppi ji
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written by Ravi Kishan Gokhale, February 11, 2011
a page has been created on facebook in support of this fearless journalist- i call upo all honest Journalists to lg in and register their support-
http://www.facebook.com/pages/Support-Fearless-Journalist-Bhupendra-Narayan-Singh/181502178551703?ref=ts
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written by Ajay Shukla, February 11, 2011
भुप्पी! ईमानदारी कि गलती क्यों की? अरुण पूरी हो या कोई और जो मीडिया के शीर्ष पदों पर बैठा ही उसका जमीर तो बड़ों के तलवे मे होता है. कोई सीएम किसको कैसे खरीदता है ये किसी से छिपा नहीं है. अब पुलिस के नहीं चोरो के हाथ लम्बे होते है. मैं साहस और तेवर को सलाम करता हूं. वे अपनी लड़ाई अकेले मानकर न लड़ें. उनके साथ संवेदनशील और ईमानदार पत्रकार खड़े हैं. हम बहराल हम आप के साथ हैं...
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written by Ravi Kishan Gokhale, February 11, 2011
we have created a page on facebook in support of Bhupendra Narayan Singh- all honest journalists are reqested to log in and register their support.
http://www.facebook.com/pages/Support-Fearless-Journalist-Bhupendra-Narayan-Singh/181502178551703?ref=ts
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written by sanjay bali, February 11, 2011
i would say shame on the CHANNEL.....apne apko sabse badiya channel kahlane wale ki pol aaj khul gayi....why did this not happen earlier with bhupi...?Why only mr dhumal has got problem with him...?agar thodi shram is channel ko ho to sabse pehle bhupi se mafi mange aur fir janta se...kyunki bhupi ka talent channel ki jagir nahin hai,,,..koi aur agar dhamaka bol dega tab thu thu hi milegi......rest we r with u....bhupijiiiiiii....
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written by gagan .ashwani, February 11, 2011
sach keh gaye ram chandr g aisa kalyug aawey gaa hans chuge gey tunka dana aur kavan moti khaavey gaa... bhupi key sath jo hua woh hee is dohey kaa matlab hai
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written by SANJEEV MAN RAI, February 11, 2011
I HAVE BEEN REPRESENTATIVE OF PUNJAB AND HARYANA HIGH COURT BAR ASSOCIATION . CHANDIGARH AS SECRETARY. I SALUTE KUNWAR BHUPINDER NARAIN SINGH FOR DISPLAY OF HIGH STANDARD OF JOURNALISM WHILE FIGHTING AGAINST ISSUE OF CORRUPTION
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written by sanjeev man rai, February 11, 2011
i have represented august body of advocate fraternity as secretary punjab and haryana high court at chandigarh . i hail the effort and salute the high standard of jornalism displayed by kunwar bhupinder narain singh while fighting against corruption and exposing political and media nexus in superrising and gagging voice of an honest media reporter. aroon poorie has to answer the issues raised by bhupinderb narain singh
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written by Ravi Krishan Gokhale, February 11, 2011
I have watched stories filed by Bhupi on major issues affecting north India and i have tracked this unfolding story and it really seems that Bhuppi is being made the bali ka bakra to save a powerful politician. he really is a hero journalist and not only is Yashwant Ji his fan, but all the honest journalists who want to uphold the shining ideals of journlaism. I also salute Yashwant ji for taking up the cause so vigrously. i call all journalists who want to practise honest journalism to support this worthy cause of a honest journlaist who is being harrassed, humilitaed and handed out to dry- lets all support Bhupendra ji and Yashwant ji in their mission to uncover the truth.
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written by शेष नारायण सिंह, February 11, 2011
भूपेन्द्र सिंह ने जो मुद्दे उठाये हैं ,वे केवल उनके मुद्दे नहीं हैं. वे मीडिया पर आज के युग में पड़ रहे गैरवाजिब दबाव का दस्तावेज़ हैं . मीडिया बिरादरी को उन मुद्दों पर टूट पड़ना चाहिए ,अपनी लड़ाई की तरह लड़ना चाहिए . जिस ग्रुप में वे नौकरी करते थे उसी ग्रुप के एक आला हाकिम को मालिकों ने साथ साथ रखा जब कि वह ऐलानियाँ महिलाओं के साथ बदजुबानी कर चुका था ,सोनिया गाँधी के लिए गाली के शब्दों का प्रयोग कर चुका था . उसी ग्रुप ने नोयडा में अपने प्लाट का लैंड यूज़ बदलवाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल किया था. और मुलायम सिंह यादव ने ऑन एयर इस बात को सार्वजनिक कर दिया था . जिस नेता की वजह से भूपेन्द्र सिंह के साथ बदतमीजी हुई है , उस नेता पर भी सब की नज़र रखनी चाहिए और उसकी वही हालत करनी चाहिए जो अरुण शोरी ने ए आर अंतुले का किया था .

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