नक्सली हमारे लोग हैं : जनरल वीके सिंह

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: उनके कुछ मुद्दे हैं, उन पर गौर करने की जरूरत : सेना का नक्सली मसले के हल में कोई रोल नहीं : सेना में भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए हल्की-सी सर्जरी की जरूरत : नई दिल्ली : भारतीय सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने कहा कि देश में नक्सली हिंसा से निपटने के लिए सेना की मदद नहीं ली जानी चाहिए। न्यूज24 की एडीटर इन चीफ सुश्री अनुराधा प्रसाद से उनके कार्यक्रम ''आमने-सामने'' में जनरल सिंह ने कहा - “मुझे लगता है कि सेना का काम देश की सरहदों की रखवाली करना है और उन मामलों में ध्यान देना है जहां पर देश की अखंडता को खतरा हो।"

'क्या आप नक्सल प्रभावित इलाकों में सेना की तैनाती को उचित मानते हैं?' जनरल सिंह ने साफ किया - “कतई नहीं। नक्सली हमारे लोग हैं। वे देश को तोड़ना नहीं चाहते। वे पृथक राष्ट्र की मांग भी नहीं कर रहे। उनके कुछ मुद्दे हैं, उन पर गौर करने की जरूरत है। मुझे नहीं लगता कि सेना का नक्सली मसले के समाधान में कोई रोल है।'' 'क्या आपको नहीं लगता कि सेना में एक के बाद एक घोटालों के मामलों के सामने आने के कारण इसकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है?' जनरल सिंह ने माना कि हाल के दौर में सेना में भ्रष्टाचार के जिस तरह से मामले आ रहे हैं, उससे सेना की छवि प्रभावित हुई है, पर इस समस्या ने कैंसर का रूप नहीं लिया है। इस पर काबू पाने के लिए हल्की सी सर्जरी की दरकार है।

उन्होंने साफ किया कि सेना के उन अफसरों पर कार्रवाई होगी जिन पर आरोप साबित होंगे। कश्मीर के सूरते हाल से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में जनरल ने कहा कि कश्मीर बेहद जटिल मसला है। इसके बहुत से आयाम हैं। वहां पर सेना घुसपैठियों के मंसूबों को विफल करने और आतंकी घटनाओं को रोकने के काम को अंजाम दे रही है। उन्होंने कहा - ''कश्मीर से सेना की उपस्थिति को कम करने पर कोई भी फैसला यूनिफाइड कमांड हेडक्वार्टर की तरफ से आना चाहिए। राज्य का मुख्यमंत्री इसका प्रमुख है। उसे प्रदेश की जमीनी स्थिति की रोशनी में सेना के बारे में फैसला लेना चाहिए।” प्रेस विज्ञप्ति


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Comments (4)Add Comment
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written by shubham verma, February 17, 2011
Sab Apni Apni Bate Kaho Rajnitikdal ho ya sena Kisi Ko bhi Adiwasi Ya crpf aur police ke jawan jo bewajah mare jate hai usko kisi ki koi parwah nahi hai.
Yaha Chhattisgarh Akar Un Jangalo Mein Jakar Dekho Jaha Jawan Apne Jar par khel kar ji naukri kar rahe hai. un adiwasi bachho se milo jinke maa bap ke gale ki naxliyo ne kat diye. media walo se bade bade bat karna kisko nahi ata.
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written by मदन कुमार तिवरी , February 16, 2011
जनरल वी के सिंह का बयान स्वागत योग्य है । सेना का कार्य राजसत्ता के हितों की रक्षा नही बल्कि देश की ्सीमाओं की रक्षा करना है । नक्सलवाद देश के विरोध में नही है , वह सिर्फ़ सता परिवर्तन का एक सशस्त्र संघर्ष है। यह पुरी तरह देश के कानून व्यवस्था से जुडा मसला है । शोषण के खिलाफ़ कोई रास्ता न देखकर , लोग सशस्त्र क्रांति के रास्ते को अख्तियार कर रहे हैं । जरुरत है शोषण को समाप्त करने और सशस्त्र क्रांति कर रहे लोगों को अहिंसात्मक संघर्ष का रास्ता चुनने के लिये तैयार करने की ।
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written by डॉ महेश सिन्हा , February 15, 2011
जब देश की सर्वोच्च सत्ता कमजोर हो तो इसी तरह के बयान आते हैं । जनरल सिंह का इस तरह बयान देना कोई अच्छी परंपरा नहीं है । सेना को क्या करना है इसका फैसला मंत्रिमंडल करता है ।
रही बात नक्सल और कश्मीरियों में भेद करने का तो क्या जनरल कश्मीरियों को देश के बाहर का मानते हैं ।
हर भारतीय को देश की सेना पर नाज है लेकिन इस तरह के बन भी उसकी छवि खराब करते हैं । जनरल के रायपुर आने की घटना का यहाँ उदाहरण देना उचित नहीं होगा ।
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written by Roopak, February 15, 2011
sri singh ki baten bilkul sahi hain ki naxalites na to alag desh ki maang kar rahe hain aur na hi we desh ko torne ka kaam kar rahe hain. we to bas raajsatta ki manmaani se khafa hain aur virodh jatane ke liye bas hinsak rashte par chal pare hain...

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