खबर देखने के लिए एनडीटीवी या दूरदर्शन देखें

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यदि आप यह सोच कर किसी खबरिया चैनल को ट्यून करने जा रहे हों कि आपको यहाँ खबर मिल जाएगी, तो जनाब आजकल आप ग़लतफ़हमी में हैं. देश के सारे खबरिया चैनल आजकल क्रिकेट चैनल बन गए हैं. विश्व कप के पहले ही दिन मैच शुरू होने से पहले खबरिया चैनल्स ने अपने चैनल से ख़बरें गायब कर दी हैं. हर चैनल हाथ धोकर क्रिकेट के पीछे पड़ा है और बेचारा आम दर्शक खबर देखने के लिए दूरदर्शन की तरफ रुख कर रहा है.

आज सुबह से एनडीटीवी को छोड़ कर किसी चैनल में कोई खबर नहीं है. क्रिकेट को ऐसे दिखाया जा रहा है मानो देश में कोई और खबर ही न हो. कोई घटना हुयी ही न हो. राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय, मनोरंजन, मौसम, व्यापार सब क्रिकेट हो गया है. टीआरपी की दौड़ में यह खबरिया चैनल अपने उन दर्शकों के साथ धोखा कर रहे हैं, जो इन्हें सिर्फ खबर देखने के लिए ट्यून करता है. स्टार न्यूज, आजतक, आईबीएन7, जी न्यूज, पी7, इंडिया टीवी सारे चैनल ऐसे हाथ धोकर क्रिकेट के पीछे पड़े हैं, जैसे मानो क्रिकेट ही सब कुछ हो गया हो. कोई मैच को लेकर ज्योतिष की भविष्‍यवाणी दिखा रहा है तो किसी ने जादूगर बुला रखे हैं. कोई धोनी मार्का लड्डू की दूकान दिखा रहा है तो कोई टीम की जीत के लिए पूजा कर रहे पंडित का साक्षात्कार दिखा रहा है. एक चैनल पर ऐसे पांच पंडित दिखाए जा रहे थे, जिन्होंने टीम के लिए अनुष्ठान किया है. सारे पंडित ऐसे साक्षात्कार दे रहे थे, मानो देश की सबसे बड़ी समस्या के निदान के लिए पूजा की हो.

क्रिकेट का दूसरा पहलू यह है कि भारत के विश्व विजेता बनने पर तो पूरा देश खुश होगा लेकिन सरकार के मंत्री और प्रधानमंत्री विश्व कप के आयोजन से ही खासे खुश हो रहे होंगे, क्योंकि क्रिकेट के कारण सारे घोटालों की ख़बरें अब दबकर रह गयी हैं और हर जगह क्रिकेट ही क्रिकेट हो रहा है. प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी ने तो इससे खासी रहत की सांस ली होगी. बहरहाल देश में खबरिया चैनल को लाइसेंस देते वक़्त सूचना और प्रसारण मंत्रालय को एक शर्त रखनी चाहिए कि खबरिया चैनल पर हर घंटे में एक निश्चित अवधि के लिए ख़बरें जरूर चलायी जाएँ ताकि क्रिकेट जैसे विश्व कप के दौरान आम जनता को बाकी ख़बरों से महरूम न होना पड़े.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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