इस कापड़ी और इंडिया टीवी की इतनी ही औकात है!

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: पीएम की पीसी के बारे में कुछ और तथ्य : इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स में अंतरविरोधी गासिप पढ़कर माथा पीटिए : यशवंत जी, पता नहीं आपने इस तथ्य पर ध्यान दिया या नहीं कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हुई प्रेस कांफ्रेंस में इंडिया टीवी के किसी संपादक को नहीं बुलाया गया. पीएम ने सिर्फ टीवी संपादकों को ही बातचीत के लिए बुलाया था. लेकिन इस बैठक में इंडिया टीवी के संपादक या मालिक को न बुलाया जाना एक बहुत बड़ी कहानी है.

कहानी ये कि भले ही उलजुलूल दिखाकर, नान-न्यूज परोसकर कोई कापड़ी खुद को बड़ा संपादक मान बैठे लेकिन सच तो ये है कि वो पत्रकार नहीं, सिर्फ एक छिछोरा व भोंडा कलाकार है, जो भावनाओं को कैश करता है और भड़काता है. पत्रकार ये काम नहीं करता. पत्रकार जनता का हितैषी और जनता को सही चीज सही समय पर बताने वाला होता है. बीबीसी हिंदी की रेडियो सर्विस बंद होने पर क्यों बड़े बड़े बुद्धिजीवी इस सेवा को जारी रखने के पक्ष में हैं और इसके लिए सामूहिक चिट्ठियां लिख रहे हैं. वह इसलिए क्योंकि बीबीसी हिंदी रेडियो ने सच्ची पत्रकारिता की. बिना शासन सत्ता से डरे निष्पक्ष खबरें और सूचनाएं सबसे पहले जनता तक पहुंचाईं. इसी कारण बीबीसी से जुड़े पत्रकार ब्रांड बन गए और उन पत्रकारों की शासन-जनता में बड़ी इज्जत हुआ करती है.

पर ये विनोद कापड़ी जिस किस्म का अनाचार, कदाचार और व्यापार न्यूज के नाम पर इंडिया टीवी में फैला-दिखा रहा है, उससे उसे हम आप तो क्या, सरकारें भी पत्रकार नहीं मानतीं. गिरे हुए स्तर, निम्न स्तरीय पीत पत्रकारिता और घटिया सनसनी परोसने के कारण ही केंद्र सरकार ने इंडिया टीवी के किसी प्रतिनिधि को बुलाने लायक नहीं माना. ये ठीक है कि टीआरपी की दौड़ में इंडिया टीवी को आगे रखकर रजत शर्मा और विनोद कापड़ी अच्छे पैसे कमा रहे हैं लेकिन पैसे तो रंडियां भी कमा लेती हैं. अगर मीडिया हाउसों का काम सिर्फ पैसे कमाना है तो ऐसे मीडिया हाउसों में आग लगा देना चाहिए.

लेकिन सच्चाई यही है कि आजकल ज्यादा से ज्यादा कमाई करने के लिए और पावर को अपने कदमों में करने के लिए ही चैनल चलाए जा रहे हैं, जनहित के लिए नहीं. जनहित तो बस बाजारू दाल में देसी छौंक / तड़के के बराबर है इन चैनलों के लिए, और इस तड़के / छौंक के बल पर ये लोग खुद को जनपक्षधर बताते रहते हैं. हमारे देश में कई ऐसे स्वनामधन्य पत्रकार हैं, विनोद कापड़ी की तरह, जो अपनी लाखों की तनख्वाह हर महीने उठाने के लिए अपने टीवी चैनलों पर कुछ भी दिखा देने का दुस्साहस करते रहते हैं, और अपनी इस ओछी हरकत का डंका बेशर्मी से पीटते दिखते रहते हैं.

इन रीढ़ विहीन कलाकारों के चलते ही न्यूज चैनलों की पत्रकारिता को कोई पसंद नहीं करता और न्यूज चैनल वाले भी अपनी औकात जानकर दिन भर खबर कम, इंटरटेनमेंट ज्यादा दिखाते रहते हैं ताकि किसी भी तरह उनकी दुकानों पर कुछ ग्राहक आते रहें. न्यूज24 वालों ने तो जोर-जुगाड़ करके पीएम की पीसी में इंट्री मार ली थी पर इंडिया टीवी वाले तो बेचारे जोर-जुगाड़ करके भी नहीं घुस पाए. इस परिघटना से सभी को मान लेना चाहिए कि विनोद कापड़ी टीवी न्यूज की दुनिया का पत्रकार नहीं, एक छिछोरा कलाकार भर है जो अपनी छिछोरी सोच के घटिया क्रिएशन से इंडिया टीवी को रजत शर्मा के लिए कमाई का और बाकियों के लिए जग हंसाई का चैनल बनाए हुए है.

एक बात यह भी बताना चाहूंगा, जो आपके यहां अभी तक प्रकाशित नहीं है, कि पीएम की पीसी को लेकर इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स ने दो अलग तरह की खबरें छापी. मुद्दा था सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी के पीसी में न बुलाए जाने का. इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि पीएम खुद नहीं चाहते थे कि पीसी में उनके अलावा कोई अन्य कैबिनेट मेंबर बैठे. इसी कारण सोनी और अन्य अफसरों को पीसी से दूर रखा गया. हिंदुस्तान टाइम्स कहता है कि सोनी को बाहर रखने का कारनामा मीडिया एडवाइजर हरीश खरे का है.

दोनों खबरों की कटिंग अटैच करके भेज रहा हूं. इन्हें भी छाप दें ताकि लोग जान सकें कि ये स्वनामधन्य अखबार किस स्तर की अंतरविरोधी गासिप छापते रहते हैं. मीडिया की खबरों को मीडिया वाले नहीं छापते, इसलिए इंडिया टीवी को क्यों नहीं पीएम की पीसी में बुलाया गया, इसके बारे में किसी दूसरे जगह खबर न छपी होगी लेकिन अंबिका सोनी को न बुलाया जाना मीडिया के लिए न्यूज है, सो दोनों बड़े अंग्रेजी अखबारों ने दो तरह का कयास लगा डाला. पर हम यहां आपको अंबिका सोनी और इंडिया टीवी, दोनों की हकीकत बताना चाह रहे हैं, और इसी उद्देश्य से ये पत्र भेज रहा हूं. उम्मीद करता हूं कि इसे आप प्रकाशित करेंगे.

एक पत्रकार द्वारा रोमन में भेजे गए पत्र का हिंदी में रूपांतरित और संपादित अंश. अगर कोई इस लिखे से असहमत हो या कोई अन्य बात कहना चाहता हो तो अपनी बात नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कह सकता है.


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Comments (20)Add Comment
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written by sonia, July 09, 2011
जो आदमी लड़कियों को सिर्फ माल समझता हो...तरक्की दिलवाने के नाम पर उनके साथ अय्याशी करता हो वो पत्रकार कैसे हो सकता है
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written by Ravi kant sinha, June 19, 2011
INDIA TV, news kam bakbas jayada dekhati he mujhe to lagta he ki RAM BHAROSE HINDU HOTAL BALI BAAT HE.
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written by arvindgupta, June 07, 2011
kisi ne sahi hi kaha hai jab..................................................................... hathi aage nikalti hai to log bhokene lagte hai.................. lage raho india.... jai ho......
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written by Adarsh, March 02, 2011
vinod kapadi and rajat sharma are not journalists. they are black malers. They got a very big amount to insult Bapu Asaram & other hindu saints. It is well established fact that both {Kapdi & Rajat} are NOT Journalist.
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written by रुद्रप्रताप , March 01, 2011
ऐसा धारणा बन रही है कि भड़ास ऐसा मंच है जहां ज़िम्मेदाराना लेखन नहीं होता। बल्कि व्यक्तिगत दुश्मनी निकाली जाती है। यशवंत मेरी अपील है कि अब अपना दायरा विशाल करो। लेखन भी। क्योंकि नए मीडिया के ज़रिए जहां दुनिया में क्रांति हो रही है। और हम हैं कि व्यक्तिगत चरित्र छिद्रण में रमे हुए हैं। smilies/sad.gifsmilies/angry.gifsmilies/angry.gifsmilies/cry.gif अन्यथा ना लो और भारी व्यस्तता के बीच कुछ पल इस बिंदु पर चिंतन ज़रूर करना चाहिए।
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written by visheshwar nayyar, March 01, 2011
just to clear this to all of you. pm invitation has nothing to do with india tv. I work for cnn-ibn.and fact is only networks were invited for pm's press conference.single channels were not invited except news 24 bcoz that rajiv shukla managed, you all know. see cnn ibn was invited but ibn 7 was not there.headlines today was invited but aaj tak was not invited. zee ,star was invited bcoz of bigger network. single channels like ind tv, live india were not invited. you can cross check this with pmo.
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written by pankaj singh, March 01, 2011
इन्डिया टीवी को पीएम की पीसी में नहीं बुलाया गया तो हो सकता है की इसकी वजह सरकार की चैनल के साथ कोई नाराजगी हो. लेकिन भाई चैनल को कोसने से पहले ये भी ध्यान में रख लो कि ये वही चैनल है, जो लगातार नंबर वन और टू की गद्दी पर विराजमान है. अगर चैनल घटिया और उसके संचालक घटिया है तो लोग देखना बंद कर दे और उसकी टीआरपी गिरा दे. बस चैनल अपने आप बंद हो जायेगा. पर मेरे भाई आपके पेट में क्यों ऐठन हो रही है साथ में पहचान बताने में डर भी लग रहा है .
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written by Raghav, February 28, 2011
ye baat sahi hai ki INDIA TV ki news ka koi..............bharosa......nahi karta..........har news..............wo sansani felane wlan hota hai
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written by chup, February 27, 2011
Abe Frastu...Teri kyun Phati hai India Tv ko nahi bulaya to...
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written by rajesh , February 27, 2011
kitna achcha ho ki agar sabhi log apne sache naam se likhen.mean aaj tak me kam krte hoon.anaam patrakar ho yan alakarik ji ya swaraj ji ya ammet ji.jo bhi hon bhai sahab hume ji bhi likhna hai kyo nahi hum pehchan bata kar likhte?kapdi kachra hey ya kapdi kamal ka?likhna hey to nam bata k likho na bhaiya.hum kaise patrakar hein jo chip kar hijro ki tarah war ya pyar karte haen.mene kaha ki maen aaj tak me kam krta hun aur khuleaam kehta hun ki mera sapna vinod kapdi key sath kaam krne ka hey.is se adhik muje nahee kehna.
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written by rajesh kumar, February 27, 2011
i appreciate the writer or this article for boldly bringing the truth to the forefront - "vinod kapadi and rajat sharma are not journalists. they are not even artists.....they are merely cheap, sadakchhap, colourblind pranksters whose sole aim is to earn money by sensationalising trivial issues and exploiting the illiterate public emotionally." their champoos are glorifying them as trend-setters and media leaders but the fact is and will remain that they are pervert and anti-social elements who can go to any extent for the so called trp. i intentionally said "so called trp" because the figures presented in the name of trp are totally fraudulent and they in no way represent the real picture. i remember when the india tv was launched their hoarding near ito said - samaj badalna (ya shayad desh badalna) hai to channel badlo. now look what they have done - to run the channel they are trying to change the definition of journalism and their champoos are calling them "leaders". its a shit.

i take pity on these champoos. they may be working for india tv or may be aspiring to get a job there and to score few points they are calling this dustbin a golden pot. rajat sharma thinks that he has discovered some new idiom or new genre in journalism but in fact this is an age old path. the yellow books being sold at footpaths or hindi's most circulated magazine manohar kahaniyan have been using all these formulas since time immemorial. rajat sharma might have succeeded in earning some money but in fact he has only degraded himself and journalistic fraternity. it may be co-incidental but truth that both rajat sharma and vinod kapadi have abandoned their first wives and married for the second time. i have heard that vindo kapadi's wife is half of his age. they have not only disgraced journalism but their spouses too......it seems they can go to any extent for their lust for money and ...........
i request all the champoos of rajat sharma and vinod kapadi to wake up in their own best interest and in the interest of the society. glorifying these leeches will only prove that they are as pervert and greedy as rajat sharma and vindo kapadi are .

finally, i would like to congratulate pm's media advisor for not inviting rajat sharma and vindo kapadi to pm's interaction. who knows rajat sharma mingh have used this event to promote his cheap and never ending programme aapki adalat.

many congratulations and thanks to bhadas also for publishing such an article.






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written by qamaruddin farooqui, February 27, 2011
भाई a k alankarik और sawraj singh के साथ ही में इण्डिया टी वी के सभी शुभचिंतकों से सिर्फ एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि आखिर वो कौन सी वजह थी जिसकी वजह से इण्डिया टीवी के किसी बन्दे को प्रधान मंत्री कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं बुलाया गया ??????
अगर जवाब दे दें तो आप को मेरी तरफ से अग्रिम धन्यवाद, साथ ही जिस तरहा आपने कापड़ी साहब कि पेरवी कि हे उसके लिए आपको शुभकामनाये, और खासकर sawraj singh साहब को, जो कापड़ी साहब के कारनामो कि तुलना महाभारत और रामायण के मंचन तक से कर गए,,,, मेरे भाई कापड़ी साहब कौन सा ज्ञान देने के लिए इंडिया टीवी पर नौटंकी कर रहे हें, ज़रा उस के बारे में भी विस्तार से बताएं,,, लगता हे कि हमने इंडिया टीवी ना देखकर ज्ञान का अवसर खो दिया, लेकिन आपके जवाब ने अगर हमे संतुष्ट कर दिया तो कसम टी आर पी कि रोजाना सिर्फ इंडिया टीवी देखा करूँगा,,, लेकिन सबसे ज़रूरी सवाल PM कि PC में इण्डिया टीवी को कियूं नहीं बुलाया.... प्लीज़ जवाब ज़रूर दें!
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written by kayam raza, February 27, 2011
INDIA TV BEST HAI AUR BEST HI RAHEGA
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written by waseem, February 27, 2011
aap ki ye khabar padh kar yaswantji aisa lag raha hai jaisa k aapki INDIA TV ya vinod kapdi se aapki prasnal dosmani hai....agar aap apne aapko acha patrkar samajhte ho to is tarha ki nichle darje ki harkat karnaband kar dijye..aapko india tv ki borai karne k bajaye sawal ye uthana tha k akhir PM ne india tv ko q nhi bolya tab aap sache patrkar lagte..jis tarha aap india tv k khilaf likh rahe hai..agar india tv aap k khilaf kuch bhi bina sir pair ki baate batane lage to aap samajh sakte hai ki kya hoga q k india tv ki style hi yahi hai...aur 1 baat mera india tv se ya vinod kapdi se koi lena dena nhi hai...fir bhi mere is comment se aapko lage ga k ye india tv ka koi chamcha bol raha hai....aapko lagta hai to lage...
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written by a k alankarik, February 27, 2011
bahut tabiyat se lekh kikhne walay mhaan patrakaar ne india tv aur rajat sharma ki buraaae ki hai...hakikat hai koi purani bhadas ....is bhadas per nikalne ki koshish ki gayee hai...rahi baat patrakarita ke usoolo ki...to aajtak se lekar starnews tak her koi india tv ko copy kerte hai......tub ye lekh likhne walay swanamdhanya patrakaar bhai ....shayad channel nhi dekhte.....suniye....kapdi aaj electronik media ke sabse bade changer hain.......aur isi ke dum per aaj vo leader bne hue hai.....agar lagta hai ki kapdi ke accha kar sakte hain....to aaiye rajat sharma se miliye....1 mahine me aukaat pta chal jaegi....fir bataiyega ki kapdi kya chees hai....oochi patrakarita karna band kijiyee......
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written by swaraj singh, February 26, 2011
jisne bhi ye lekh likha hai TV ki sachai sei bilkul wakif nahi hai.. India tv jaisi patrakarita karta hai uske liye Vinod Kapri ko dosh dene ka aakhir maksad kya hai . Tv Channel jo dikhate hai uske liye koi editor kya zimedari lega ....maliko sei puchiye news channel ussne kyo khola tha aur ha aajtak ka editor nahi malik uss press conference mei kyo baitha tha..ye sawal PM sei kyo nahi puchiye.

aur jo pandrah crore janta India TV dekhti hai usse puchiye wo kyo dekhte hai. Bhaisahab ..Mahabharat yaad hai na ...Gita mahaz uska ek chapter hai ...kahne ka matlab ye ki iss desh ki janta ko Gita kya gyan dene kei li Krishna ko Mahabharat ki planning karni padi. Bhul gaye Gaon mei Ram katha sunane kei liye Ramlila ki nautanki karni padti hai. issliye Computer per baith kar gyan dena assan hai....bahar nikal kar kaam karna mushkil hai.Waise dil per bhai hath rakh kar batao ..agar aaj tumhe India TV mei Editor banaya jaye to kya tum aapni dumm hilte hue Rajat Sharma kei samne dant niporte hue agle din kya nahi pahuchoge! dehko sach bolna .tum jaiso ki kya aukat patrakarita mei hai kya kisi sei chupi hai.....kya zindgi bhar Television mei aane kei liye nahi taraste rahe ho ....

Waise bhi lekh ko padh kar jalne ki boo aati hai. lagta hai kapri sei purani ranzish hai. Kabhi zaroor usse samna hua hoga .maine suna hai wo janha bhi raha hai sher ki tarah hi raha hai ...dekhne walo ki nabz samajh kar usne kam kiya hai issiliye safalta mili hai... jisko aap jaise swanaam dhanya patrakar jinhone kabhi kaam hi nahi kiya pacha nahi paaate hai.. Pata nahi kiske liye patrakarita karte hai aap...India TV ka phir bhi ek viewership hai.... Bhaisahab nautanki kei liye bhi badi originality chahiye....


Ek baat aur hai zin channalo sei aap tulna karte hai zara ghaur sei unke content ko tauliyega pata chal jayega kaun kis agenda ke tahat kaam kar raha hai. waise ussi press conference ka ek sawal mujhe yaad aa raha hai .....wahi cricket wala....?

aur ha zara Aajtak ...star news...sabko ek sath chala kar dekhiyega ....likhne ko bahut masala milega...Gudda ho to likhiye. ..sabhi India TV kei original idea jo shayad aapko wahiyat lagte hai ussi ko ek do din baad ghuma phira kar dikhate hai...Tab shayad samjhoge ki Vinod Kapri kyon choure hokar ghumta hai.
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written by ameet, February 26, 2011
बेहतरीन मुद्दा उठाया है आपने दोस्त...कचरे को पीसी में ना बुलाए जाने से दिल को बहुत सुकून पहुंचा । धन्यवाद।
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written by रूद्रप्रताप , February 26, 2011
इंडिया टीवी जब-जब कुछ नया करता है। उसे घटिया, अ-पत्रकारीय, छिछोरा जैसे विशेषण दिए जाते हैं। समय बीतते सभी चैनल उसे कॉपी करने लग जाते हैं और वे भी उसी ‘घटियापन’ को अपनाने लगते हैं। निंदा का जो गोबर अभी इंडिया टीवी के चेहरे पर मला जा रहा है.. उसी गोबर को अन्य चैनल कुछ दिनों में अपने माथे पर लगाएंगे। तब क्या भड़ास उसे तिलकवंदन लिखेगा? smilies/grin.gif smilies/tongue.gif
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written by govind goyal, February 26, 2011
kis kis ko nahin bulaya gya? sarkar,administration kee najar me kisi ko bulane ke map dand bilkul alag hote hai. unka journalism se koi matlab nahi hota.
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written by sandeep, February 26, 2011
jis kisi ne bhi likha hai theek likha hai sachmuch india tv ne patrkarita ko taak par rakhkar jis tarah ki kahberain dikhai jati hai usse kabhi kabhi lagta hai ki patrkaron main or fantesy writter main koi anter to ho hoga ab bhi bakt hai india tv jise chenal ke liye

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