'महुआ' में बड़े-बड़े खेल-तमाशे... दुर्दिन शुरू

E-mail Print PDF

: क्रिएटिव हेड सनातन नेहरू का इस्तीफा : इंप्लाइज को पीएफ न देने की जांच शुरू : एक कन्या ले लेती है बड़े-बड़ों की नौकरी : करोड़ों खर्च कर लांच हुआ महुआ बांग्ला पिटा : बिहार में मुहआ टीआरपी की जंग में पिछड़ने लगा : महुआ के कुछ लोग फटाफट नौकरी लेने-देने के खेल में लगे : महुआ से खबर आ रही है कि इसके क्रिएटिव हेड सनातन नेहरू ने चैनल को गुडबाय बोल दिया है. वे मुंबई से दिल्ली आए थे और वापस मुंबई लौट गए हैं. सनातन के कुछ करीबी लोगों का कहना है कि महुआ में इन दिनों रखने और निकालने का जो दौर शुरू हुआ है, उसके दर्जनों लोग शिकार बने हैं.

सनातन नेहरु को अच्छे पद व पैकेज पर लाया गया था लेकिन उन्हें अब यहां से जाना पड़ा है. सनातन के पहले सीईओ व क्रिएटिव हेड के पद पर राघवेश अस्थाना हुआ करते थे. राघवेश को भी अचानक महुआ चैनल को छोड़ना पड़ा था.  सूत्रों के मुताबिक महुआ में इन दिनों बड़े पैमाने पर खेल-तमाशे चल रहे हैं. पीएफ न काटे जाने को लेकर कुछ लोगों ने पीएफ आफिस में कंप्लेन की है, जिसकी जांच शुरू हो गई है.

महुआ के मालिकों के बैंकों या बीमा कंपनियों से पैसे के लेनदेन की कुछ कहानियां बाहर आ रही हैं जिसमें इनके फंसने की संभावना है. वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि एचआर में कुछ ऐसे लोग हैं जिनके रिलेटिव प्लेसमेंट एजेंसी चलाते हैं, और ये लोग चाहते हैं कि लोग जल्दी से जल्दी चैनल से निकाले जाएं ताकि खाली जगह भरने के लिए प्लेसमेंट एजेंसी से बंदे लाए जाएं. इस तरह एचआर में कार्यरत लोग अपना और अपने रिश्तेदारों के जेब भरने में लगे हुए हैं. हालांकि इन तथ्यों की पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन इतना तो जरूर है कि महुआ के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. निष्ठावान और मेहनती लोगों की कोई पूछ नहीं है. ऐसे लोगों चैनल छोड़कर जाना पड़ रहा है.

प्रबंधन को चैनल की कोई खास चिंता नहीं है क्योंकि उनके अपने ग़म इतने हैं कि उसी से निजात नहीं पा रहे. इस तरह चैनल पर कुछ ऐसे चापलूसों ने कब्जा कर रखा है जो सिर्फ अपने चहेतों को बढ़ा रहे हैं और बाकी लोगों को साइडलाइन कर रहे हैं या फिर चैनल छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक महुआ चैनल के कर्मी इन दिनों एक रहस्यमयी कन्या की छवि से खासे आतंकित हैं. इस कन्या की इतनी चलती है कि बड़े बड़े लोगों की नौकरियां सेकेंड्स में ले लेती है. बताया जाता है कि इसी कन्या की छवि तले आकर पूर्व एडमिन मैनेजर अभिषेक, राघवेश अस्थाना, सनातन आदि को खाक हो जाना पड़ा.

उधर, सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करके लांच किए गए महुआ बांग्ला की हालत भी ठीक नहीं है. वहां प्रसेनजीत समेत कई लोगों को चैनल छोड़ना पड़ा. बड़े पद पर नियुक्त की गईं एनडीटीवी की एक पत्रकार को भी हटा दिया गया है. यह चैनल टीआरपी और जीआरपी की रेस में फिसड्डी साबित हुआ. कुछ लोगों का कहना है कि बांग्ला में पहले से ही कई जमे-जमाए चैनल थे, इसलिए महुआ वाले नाच-गाना के दम पर पश्चिम बंगाल के लोगों को रिझा न सके. सो, उन्हें मार्केट में पिटना पड़ा. पर भोजपुरी में कोई चैनल न होने और महुआ के सबसे पहले लांच होने का फायदा चैनल को मिला और चैनल हिट हो गया. लेकिन फिर से चैनल के पतन का दौर शुरू हो चुका है. बिहार में महुआ चैनल की टीआरपी में भयानक गिरावट आई है और गिरावट का दौर जारी है. देखना है कि महुआ का यह पतन कहां जाकर रुकता है.

महुआ से जुड़े और जुड़े रहे कई लोगों से बातचीत पर आधारित है यह स्टोरी. अगर किसी को इसमें उल्लखित किसी तथ्य में कोई कमी-बेसी नजर आए या कोई अलग-सा विचार हो तो अपनी बात रखने के लिए नीचे दिए गए कमेंट बाक्स का सहारा ले सकते हैं.


AddThis