ओवर कानफिडेंस के मारे राजीव शुक्ला बेचारे की गलतबयानी का वीडियो

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राजीव शुक्ला की ''जुबान फिसली या याददाश्त गई'' संबंधी खबर आप पढ़ चुके होंगे. अब उस वीडियो को देखिए जिसमें वे ओवर कानफिडेंस में कह बैठते हैं पत्रकारों से कि- ''पोलिटिकल सवाल पूछो यार''. पर पोलिटिकल सवाल होते ही वो क्लीन बोल्ड हो जाते हैं. पहले ही सवाल के जवाब में ज्ञान बघारने लगते हैं कि लालकृष्ण आडवाणी जब देश के छह साल तक पीएम रहे तब तो वे काले धन के बारे में एक शब्द नहीं बोले... आदि-इत्यादि.

आडवाणी को देश का पीएम बताने संबंधी उत्तर पर राजीव शुक्ला को पत्रकारों ने भले टोका नहीं, लेकिन बाद में मजे सबने लिए कि आखिर एक पत्रकार टर्न्ड पोलिटिशियन को ये क्या हो गया है. क्या वे किसी दिमागी बीमारी के शिकार हो रहे हैं, याददाश्त जाने वाली या उनकी जुबान फिसल गई. असल में, राजीव शुक्ला पहले एक सामान्य परिवार से निकले सामान्य किस्म के रिपोर्टर थे. पर तीन-तिकड़म की ताकधिनाधिन के जरिए शनैः शनैः वे सत्ता के गलियारों के पहचाने जाने वाले चेहरे बनते गए. और, अब वे खुद को बहुत बड़ा आदमी मानते हैं. और, खासकर जब किसी जिले में पत्रकारों को अपने मुंह के सामने माइक लगाए देखते हैं तो उन्हें संभवतः अपने पुराने दिन याद आ जाते होंगे और फिर आज के महान दिन के गुमान में वे ओवर कानफिडेंस से भर जाते होंगे. इसी चक्कर में वे यह भूल जाते हैं कि उन्हें क्या कहना है और क्या कह रहे हैं.

शुक्लाजी की गलतबयानी का वीडियो यहां है, क्लिक करें- ये क्या कह गए मिस्टर राजीव शुक्ला


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