टीवी चैनल चाहते हैं एडल्‍ट सामग्री दिखाना

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: केंद्र सरकार ने नहीं दी नग्‍नता दिखाने की अनुमति : केन्द्र सरकार ने एडल्ट सामग्री परोसने की चैनलों की मांग और दलील को साफ तौर से ठुकरा दिया है। चैनलों ने प्रस्ताव दिया था कि चूंकि ‘वाटरशेड’ के दौरान दर्शकों को एडल्ट सामग्री उपलब्ध कराने का दुनिया भर में रिवाज है, लिहाजा उन्हें भी यह अनुमति मिले। टीवी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली ‘वाटरशेड’ वह समयावधि है जिसके दौरान एडल्ट सामग्री का प्रसारण किया जा सकता है। भारत में ‘वाटरशेड’ अवधि रात्रि11 बजे से लेकर 5 बजे सुबह के बीच में है।

सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने उनके इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि सबसे पहले चैनलों से यह उम्मीद की जाती है कि वे भारत में दिखने वाले चैनलों पर मौजूदा सामग्री के प्रसारण में परिपक्वता और आत्मनियंत्रण का परिचय दें। करीब तीन महीने पहले, चैनलों की प्रतिनिधि संस्था आईबीएफ (इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन) ने सरकार को भेजे एक प्रस्ताव में कहा था कि सरकार चैनलों को अनुमति दे कि वे रात्रि 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे के बीच एडल्ट सामग्री प्रसारित कर सकें और बदले में चैनलों से उम्मीद होगी कि वे कार्यक्रम को एडल्ट (ए) कहकर प्रचारित करें और कार्यक्रमों के शुरू होने से पहले लिखें कि सामग्री में नग्नता है, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल है और अत्यधिक हिंसा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि आत्मनियंत्रण के फार्मूले के तहत हर चैनल को अब कंटेंट ऑडिटर्स (जो प्रसारित होने वाली सामग्री पर नजर रखें) की नियुक्ति करनी है और इनकी प्रतिनिधि संस्था आईबीएफ को इस महीने के आखिर तक ब्रॉडकास्ट कंटेंट कमप्लेन काउंसिल (प्रसारण सामग्री शिकायत सामग्री) का गठन करना है।

उक्त अधिकारी ने कहा कि जिस तरह से सभी लोकप्रिय हिंदी मनोरंजन चैनल दर्शकों को रोमांस, शादी और हनीमून तक से जुड़े रीयलिटी शो परोस रहे हैं, उनमें सेक्स और अश्लीलता का इतना ओवरडोज होता है कि कल्पना के लिए कुछ भी नहीं बचता। उक्त अधिकारी ने इस संबंध में बिग बॉस, जोर का झटका, और लव लॉक अप जैसे रीयलिटी शो का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर चैनलों पर नियंत्रण न किया जाए तो वे लोकप्रियता की आड़ में किसी भी हद तक जा सकते हैं।

दैनिक भास्‍कर में अमिताभ पराशर की रिपोर्ट.


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