आर्यन टीवी पर पैसा वसूलने के लिए 'बड़ी बहस'

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: प्रबंधन के दबाव से परेशान हैं स्ट्रिंगर और रिपोर्टर : प्रबंधन के फरमान के बाद आर्यन टीवी के स्ट्रिंगर और रिपोर्टर परेशान हैं. उन्‍हें अपने जिलों में लोगों से पैसे उगाहने के लिए बड़ी बहस करनी पड़ रही है. उनकी परेशानी है कि कहां और कैसे वो दो लाख रुपये का बंदोबस्‍त करें. चैनल प्रबंधन उपर से लगातार पैसे जुटाने का दबाव बनाए हुए है. इसे आप चाहे पेड न्‍यूज माने चाहे पत्रकारिता का बिगड़ा स्‍वरूप, परंतु चैनल प्रबंधन को बड़ी बहस के लिए रूपया चाहिए तो चाहिए वो भी किसी कीमत पर.

आपको बता दें कि आर्यन टीवी प्रबंधन बिहार और झारखंड में लोगों की समस्‍याओं पर एक सीरीज चलाने जा रहा है. 'बड़ी बहस' नाम का यह कार्यक्रम दोनों राज्‍यों के सभी जिला मुख्‍यालयों से लाइव प्रसारित किया जाएगा. प्रत्‍येक जिले से चैनल द्वारा चयनित कुल सौ लोग भाग लेंगे. चैनल के माध्‍यम से अपनी बात कहेंगे, अपनी समस्‍या उठायेंगे. यह लाइव कार्यक्रम दो घंटे तक चलेगा. कार्यक्रम के बाद सभी सौ लोगों के खाने-पीने की भी उम्‍दा व्‍यवस्‍था चैनल द्वारा की जाएगी. निश्चित रूप से देखने-सुनने में इस कार्यक्रम में कहीं कोई बुराई नजर नहीं आ रही है. इसमें चैनल के पत्रकारीय सरोकार नजर आ रहे हैं.

परन्‍तु आइए अब आपको बताते हैं इसके पीछे की असली कहानी. चैनल ने 'बड़ी बहस' की पूरी जिम्‍मेदारी अपने स्ट्रिंगरों और रिपोर्टरों पर सौंप रखी है. इनसे कह दिया गया है कि इस कार्यक्रम के लिए प्रत्‍येक जिले से दो लाख रुपये की वसूली अनिवार्य है. इसके लिए कहा गया है कि जिले के सौ आदमियों से दो-दो हजार रूपये वसूलने हैं. इन्‍हीं सौ आदमियों की इंट्री इस कार्यक्रम में होगी. इनका खान पान व पूरा सेवा सत्‍कार भी किया जाएगा. इसके लिए बाकायदे 'बड़ी बहस' के नाम से कार्ड भी छपवा कर स्ट्रिंगरों को दे‍ दिया गया है. इसी कार्ड के सहारे स्ट्रिंगरों को अपना वसूली अभियान चलाना है.

कार्ड देते समय प्रबंधन से एक चालाकी जरूर दिखाई है. इस कार्ड पर ना तो वसूले जाने वाली रकम लिखी गई है और ना ही नंबरिंग की गई है. यानी किसी तरह की कोई टैक्‍स या काले-पीले धन का चक्‍कर नहीं. सीधे नकद वसूली. जो जितना वसूल सके वसूल ले. बताया जा रहा है कि कार्ड पर रकम इसलिए नहीं लिखी गई है ताकि किसी तरह के लफड़े से बचा जा सके. पिछले दिनों मीटिंग बुलाकर स्ट्रिंगरों को यह कार्ड सौंपे गए. जो स्ट्रिंगर या रिपोर्टर इस मीटिंग में नहीं पहुंचे, उन्‍हें बाकायदा कुरियर और डाक से ये कार्ड भेजा गया. सभी को चेतावनी के साथ की पैसे वसूलो या काम छोड़ो.

चैनल प्रबंधन के इस फरमान के बाद सबसे ज्‍यादा परेशान छोटे जिलों के स्ट्रिंगर और रिपोर्टर हैं. बिहार के जिलों में सौ लोगों का जुगाड़ करना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. चैनल के स्ट्रिंगर बताते हैं कि आर्यन टीवी का डिस्‍ट्रीब्‍यूशन बिहार-झारखंड में सही नहीं है. गांवों के ज्‍यादातर लोग सेटेलाइट टीवी देखते नहीं है, ले-देकर मुख्‍यालयों में ही लोग केबल या अन्‍य माध्‍यमों से चैनल देखते हैं. इन लोगों से पैसा वसूलना मुश्किल है. इन लोगों से बात की जाती है तो ये लोग कहते हैं कि हम क्‍यों दें दो हजार रुपये. दो हजार लगा देने के बाद भी हमारी समस्‍या तो हल होगी नहीं तो हम क्‍यों दे टीवी पर आने के नाम पर दो हजार रुपये.

एक स्ट्रिंगर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर हमलोग अपने व्‍यक्तिगत संबंधों पर कुछ लोगों से दो-दो हजार वसूल भी लें तो यह आंकड़ा सौ तो कतई नहीं छू पाएगा. हम अपने संपर्कों पर बीस-तीस लोगों से पैसे ले सकते हैं, शेष लोगों का जुगाड़ हम कहां से करेंगे. दूसरे इस कार्ड पर कुछ नहीं लिखे होने से हमलोगों के ऊपर भी लोग शक कर रहे हैं. पैसे मांगने पर हमलोगों की छवि उनकी नजरों में खराब हो रही है. लोग समझ रहे हैं कि हम चैनल के नाम पर अपने लिए वसूली करने की कोशिश कर रहे हैं. सभी सीधे-सीधे इनकार कर दे रहे हैं. जिससे हमलोगों को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है.

 आर्यन

एक बड़े जिले के स्ट्रिंगर ने बताया कि दबाव तो सभी पर है, परंतु बड़ी बहस के कार्ड पर रकम न लिखकर प्रबंधन ने बढि़या किया है. हम बीस-तीस लोगों से चार से पांच हजार रुपये वसूल कर दो लाख की तय सीमा को पूरा कर देंगे. शेष सत्‍तर से अस्‍सी लोगों से चार -पांच सौ वसूल कर अपनी जेब में रख लेंगे. इससे हम भी खुश और प्रबंधन भी खुश रहेगा. हालां‍कि उसने ये भी कहा कि पैसा उपलब्‍ध कराने के बावजूद दो घंटें में सभी लोगों से चैट कर पाना किसी भी तरह संभव नहीं लग रहा है, फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं कि कम से कम यह कार्यक्रम हमारे जिले में आयोजित हो ही जाए.

स्ट्रिंगर बताते हैं कि इसके पहले भी प्रबंधन ने पांच-पांच हजार लेकर दस-दस मुखियों को लाइन अप करने का फरमान जारी किया था. उस दौरान भी कोई मुखिया टीवी पर आने के लिए तैयार नहीं हुआ था. कुछेक लोग ही यह थोड़ी-बहुत रकम जुटा पाए थे. कुछ स्ट्रिंगर तो दबाव से इतने परेशान हैं कि उन्‍होंने चैनल ही छोड़ने का मन बना लिया है. एक स्ट्रिंगर ने कहा कि अगर प्रबंधन ज्‍यादा दबाव डालेगा तो चैनल को बॉय करने के अलावा हमलोगों के पास कोई दूसरा रास्‍ता नहीं रहेगा. उसने आरोप लगाया कि प्रबंधन हमलोगों का पैसा भी समय से नहीं देता है.

इस संदर्भ में जब चैनल के वरिष्‍ठ पद पर कार्यरत अमरजीत से बात की गई तो उन्‍होंने स्ट्रिंगरों पर पैसे के लिए दबाव बनाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया. उन्‍होंने कहा कि यह कार्ड इसलिए छपवाया गया है ताकि कार्यक्रम में कार्डधारकों को ही इंट्री दी जा सके. इस कार्यक्रम में भाग लेने वालों के लिए किसी भी प्रकार का शुल्‍क नहीं लगाया गया है. हम कार्यक्रम के लिए ओवी वैन की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं. लोगों की समस्‍याओं को उठाने के लिए जिला मुख्‍यालयों पर बड़ी बहस आयोजित किया जा रहा है.


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